NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
समाज
भारत
राजनीति
लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला संगठनों ने देश में बिगड़ते सम्प्रदायिक सौहार्द पर चिंता जताई हैं।
असद रिज़वी
20 Apr 2022
Hate
यूपी की राजधानी लखनऊ में हुआ प्रदर्शन

भगवा विचारधारा से प्रभावित हिन्दू बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज को लगातार निशाना बनाये जाने से नागरिक समाज में आक्रोश देखा जा रहा है। नागरिक समाज का कहना है कि देश में लगातार एक साजिश के तहत संविधान और एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला संगठनों ने देश में बिगड़ते सम्प्रदायिक सौहार्द पर चिंता जताई हैं। लखनऊ के शहीद स्मारक पर एक सभा में इन संगठनों की ओर से कहा गया कि नवरात्र, रामनवमी और हनुमान जयंती के अवसर पर मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाया गया और फिर उनकी दुकानों और मकानों को आग के हवाले कर दिया गया।

राजधानी में मंगलवार को हुई सभा में कहा गया कि भगवा विचारधारा से प्रभावित हिन्दुओं ने विभिन्न प्रदेशों में मस्जिदों में भगवा झंडे लगाये। इसके अलावा हथियारबंद भीड़ ने मुस्लिम इलाकों में भड़काऊ नारे लगाये और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

सभा में कहा गया कि देश में लगातार सांप्रदायिक सौहार्द ख़राब हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश बैठे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दंगा पीड़ितों के घर पर बुलडोज़र चलवा रहे हैं। इसके अलावा देश के नागरिकों के लोकतान्त्रिक और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। सभा में शामिल होने आये कुछ लोगो से न्यूज़क्लिक ने बात की…

अराजकता का डर

रंगकर्मी दीपक कबीर कहते हैं कि देश में नफरत की बुनियाद पर एक ऐसी भीड़ तैयार की जा रही है, जो अपने से कमजोरों के घरों पर हमला कर रही है। कबीर मानते हैं कि ये दुर्भाग्य है कि इस भीड़ में शामिल लोगो को सत्ता में बैठे लोग माला पहना कर सम्मानित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो देश में अराजकता का माहौल पैदा होने का डर है।

संस्थाएं सरकारी दफ्तरों में तब्दील

प्रो. रूपरेखा वर्मा, सचिव साझी दुनिया ने कहा- देश के हालत बहुत ख़राब हो चुके हैं, देश ने 1947 से लेकर 2014 तक जितनी उन्नति की थी, उससे ज्यादा पिछले 7 सालों में देश का नुकसान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हमारी सभी संस्थाएं लग-भग ख़त्म हो गई हैं। संस्थाएँ सरकारी दफ्तरों की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने कहा अब अदालतों को मुस्कुरा कर किये गए अपराध, ग़लत नहीं लगते हैं। जिसका अर्थ यह है कि हम मुस्कुरा कर हत्या करने के लिए आजाद हैं। प्रो. रूपरेखा वर्मा ने कहा कि समुदाय को निशाना बनाना न धर्म है और न राष्ट्रवाद, यह केवल भगवा गुंडागर्दी है।

आज़ादी में मुसलमानों की कुर्बानिया

संगीतकार कुलदीप सिंह कहते हैं कि देश में विभिन्न धर्म के मानने वालों का एक साथ रहना उनका आपसी भाईचारा ही भारत की पहचान है। लेकिन अब नफरतों को जन्म देकर इस भाईचारे को ख़त्म करने की कोशिश हो रही है। कुलदीप ने कहा कि “भजन” हिन्दू धर्म का हिस्सा है। लेकिन भारत में शकील बदायुनी इसको लिखते हैं, नौशाद इसका संगीत बनाते हैं, रफ़ी इसको गाते हैं और युसूफ खान (दलीप कुमार) पर फिल्माया जाता है। उन्होंने कहा इतना ही देश की आज़ादी में मुसलमानों ने भी कुर्बानिया दी है, इस लिए यह देश जितना एक हिन्दू का है उतना एक मुस्लिम का भी है।

बुलडोज़र और अदालत

अधिवक्ता अस्मा इज्ज़त मानती हैं कि 1947 से अब तक सब एकजुट होकर देश को प्रगति के पथ पर लेकर आये थे। लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुल्क को पीछे की तरफ धकेल रही है, जिससे देश 1947 से भी कई दशक पीछे जाता दिख रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश में मुस्लिमों के घरों को बुलडोज़र द्वारा तोड़े जाने पर कहा कि अदालतें सब देख रहीं हैं, मगर खामोश हैं, जबकि अदालत को इस पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए था।

नई प्रवृत्ति का जन्म

रिहाई मंच के राजीव यादव ने कहा कि एक नई प्रवृत्ति ने जन्म लिया है जिसमें भीड़ मुसलमानों की दुकानों और मकानों को आग के हवाले कर दे और उनकी मस्जिदों को निशना बनाये और बाद में मुसलमानों को ही दंगे का ज़िम्मेदार बता दिया जाये। उन्होंने कहा दिल्ली में  नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में  2019-20 हुई हिंसा में भी यही हुआ था। पहले मुसलमानों को निशाना बनाया गया और फिर दंगे का आरोप भी उन्हीं पर लगा कर, प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया गया।

हिन्दू पर्वों पर मुस्लिम निशाना

लेखिका तस्वीर नकवी कहती हैं कि हालात बहुत मायूस कर रहे हैं। वह कहती हैं- जिस तरह से हिन्दू पर्वों पर मुस्लिम समाज को निशाना बनाया जा रहा है, उससे लगता है कि सब कुछ सुनियोजित साजिश के तहत हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम ही नहीं दलित और ईसाई समाज को भी निशाना बनाया जा रहा है ताकि उनको दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया जा सके। तस्वीर नकवी कहती हैं कि उनको स्वयं से ज्यादा देश के बच्चों के भविष्य के बारे में चिंता है।

तानाशाही चल रही है

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की मधु गर्ग मानती हैं कि देश में लोकतंत्र नहीं तानाशाही चल रही है। देश को नफरत ने जकड़ लिया है। भारत में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और प्रेम की बात करना अपराध हो गया है। वह कहती हैं कि मुसलमानों के बहाने लोकतंत्र और संविधान को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को मिलकर इस नफरत के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। मधु गर्ग मानती हैं कि नफरत फ़ैलाने वालों को सत्तापक्ष का समर्थन हासिल है। यही कारण है कि लिंचिंग करने वाले जब जेल से आते हैं तो सरकार के मंत्री उनका स्वागत करते हैं और उनको फूलों की माला पहनते हैं।

प्रतिरोध की आवाज़

समाज सेवी परवीन सिंह ने कहा कि अब प्रतीकात्मक प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा। प्रतिरोध की आवाज़ को बढ़ना होगा, प्रगतिशील संगठनों, नवजवानों को खुलकर सामने आना होगा, ताकि सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज़ को मज़बूती से उठाया जा सके। सिंह कहते हैं कि लखनऊ को सम्प्रदियकता के खिलाफ लड़ाई का केंद्र बनाया जाये क्योंकि लखनऊ दुनिया भर में गंगा-जमनी तहज़ीब की मिसाल है। उन्होंने कहा यूनिवर्सिटियों से सरकारी दफ्तरों तक जा कर साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की आवाज़ उठानी होगी।

सभा की अध्यक्षता कर रहीं महिला फेडरेशन की अध्यक्ष आशा मिश्र ने न्यूज़क्लिक से कहा कि आज धर्म के नाम पर जो राजनीति हो रही है वह समाज को तोड़ने वाली है। उन्होंने कहा कि जब से फासीवादी ताक़ते सत्ता में आ गई हैं और तब से ही धर्म की आड़ में संविधान और लोकतंत्र पर भी हमला हो रहा है। असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए फासीवादी ताक़तों ने पूरी मीडिया को अपने कब्जे में ले लिया है। धरने-प्रदर्शन पर भी पाबंदी है ताकि असहमति का स्वर न उठ सके। इसीलिए अमन पसंद नागरिक इसका विरोध कर रहे हैं।

लोकतंत्र विरोधी अभियान

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर कहते हैं कि लखनऊ हमेशा से कौमी एकता की एक मिसाल रहा है। इस शहर ने सम्प्रदियकता के खिलाफ लड़ाई की शुरुवात कर दी है। लाल बहादुर मानते हैं कि जिस तरह की हिंसा देश भर में हो रही है वह सत्ता के सर्वोच्च स्तर से प्रायोजित लोकतंत्र-संविधान विरोधी एक अभियान है, और निशाने पर मुसलमान हैं।

वैचारिक विपक्ष नहीं है

आल इंडिया पीपुल फ्रंट के दिनकर कपूर ने कहा कि इस  सभा का उद्देश्य बीजेपी और आरएसएस द्वारा पैदा किये गए सांप्रदायिकता और मुस्लिम विरोधी दंगों के माहौल के खिलाफ आवाज़ उठाना है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस को ताक़त इसलिए मिली है क्योंकि उनके खिलाफ लड़ने वाला वैचारिक विपक्ष कही नज़र नहीं आ रहा है।

हिजाब से जेएनयू तक

नेता आयुष कहते हैं कि उन्होंने किताबों में फासीवाद के बारे में पढ़ा था आज अपने देश में देख रहे हैं। जो “हिजाब” का मुद्दा बीजेपी और आरएसएस द्वारा कर्नाटक से उठाया गया था अब वह नए-नए रंग लेता जा रहा है। रामनवमी को भी साम्प्रदायिक रंग दे दिया गया है। मुस्लिम समाज पर लगातार अत्याचार बढ़ रहे हैं।

आयुष कहते हैं कि शिक्षक संस्थान भी सांप्रदायिकता की भेट चढ़ रहे हैं। जिसका उद्धरण जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का वेज-नॉन वेज खाने का विवाद है। ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के आयुष कहते हैं बढ़ती सांप्रदायिकता देश के लिए बड़ी चुनौती है, और हर संभव कोशिश करनी होगी इसका विरोध करने के लिए।

ये भी पढ़ें: मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?

Hate Crime
Anti Muslim
anti-muslim propaganda
Politics of Hate
Lucknow

Related Stories

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें

बंधुआ हालत में मिड डे मील योजना में कार्य करने वाली महिलाएं, अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में भरी हुंकार

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा का लखनऊ में प्रदर्शन, निजीकरण का भी विरोध 

यूपी : कम वेतन के ख़िलाफ़, नियमतिकरण की मांग के साथ 45000 मनरेगा मज़दूर पहुंचे लखनऊ

किसानों का मिशन यूपी व छात्र-युवाओं का रोज़गार-आंदोलन योगी सरकार के लिए साबित होगा वाटरलू 

मिशन यूपी 2022ः योगी के ख़िलाफ़ बिगुल फूंका किसानों ने

यूपी: उन्नाव सब्ज़ी विक्रेता के परिवार ने इकलौता कमाने वाला गंवाया; दो पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी

दिल्ली दंगे: “असली दोषियों” को सज़ा के लिए न्यायिक जांच आयोग के गठन की मांग


बाकी खबरें

  • water body
    नीलाबंरन ए
    रामेश्वरम द्वीप पर जल-मृदा प्रदूषण की वजह झींगा के फार्म
    24 Nov 2021
    तमिलनाडु में भूजल, मिट्टी की उर्वरता और द्वीप का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बढ़ रहे झींगें के फार्मों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • ctu
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली में 25 नवंबर को श्रमिकों की हड़ताल, ट्रेड यूनियनों ने कहा - 6 लाख से अधिक श्रमिक होंगे हड़ताल में शामिल
    24 Nov 2021
    ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन के रूप में 26,000 रुपये के साथ-साथ असंगठित मज़दूरों को 7,500 रुपये की मासिक नगद सहायता शामिल है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 9,283 नए मामले, 437 मरीज़ों की मौत
    24 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.32 फ़ीसदी यानी 1 लाख 11 हज़ार 481 हो गयी है।
  • military
    एन.डी.जयप्रकाश
    सैन्य-औद्योगिक जुगलबंदी ने किस तरह शांति और निरस्त्रीकरण को दरकिनार कर दिया: IV
    24 Nov 2021
    साल 1961 निशस्त्रीकरण की दिशा में ठोस प्रगति की चमकती उम्मीदों के साथ ख़त्म हुआ था, लेकिन साठ साल बाद भी इस उम्मीद को मौजूदा समय में भी बुरी तरह झटके लग रहे हैं।
  • रिचर्ड हिल
    स्पैम व्यापार का मुद्दा क्यों है? क्योंकि यह विकसित देशों के अनुकूल काम करता है
    24 Nov 2021
    2012 में, विकसित देशों ने वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशंस (डब्ल्यूसीआईटी) के इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशंस यूनियन (आईटीयू) के विश्व सम्मेलन में संधि के रूप में अपने अंतर्राष्
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License