NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
महिलाएं
समाज
भारत
लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश
एडवा से जुड़ी महिलाएं घर-घर जाकर सांप्रदायिकता और नफ़रत से दूर रहने की लोगों से अपील कर रही हैं।
असद रिज़वी
17 May 2022
Lucknow

जहां देश में दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित संगठन देश में नफ़रत का माहौल पैदा कर रहे हैं, कभी हिजाब, अज़ान और लाउडस्पीकर तो कभी लव-जिहाद, मंदिर-मस्जिद के नाम पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ़ अखिल भारतीय महिला समिति (एडवा) द्वारा “सद्भावना-फेरी” अभियान चलाया जा रहा है जिसका मक़सद दक्षिणपंथीयों द्वारा फ़ैलाई जा रही नफ़रत और सांप्रदायिकता का विरोध करना है।

संगठन से जुड़ी महिलाएंं राजधानी लखनऊ के अलग-अलग इलाक़ों में जाकर जनता का ध्यान महंगाई, बिजली-संकट, कृषि-संकट, बेरोज़गारी, पेट्रोल-डीज़ल जैसे ज़मीनी मुद्दों की तरफ़ लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

सद्भावना-फेरी के दौरान सोमवार को राजधानी के उदयगंज में महिलाओं ने “आवाज़ दो हम एक हैं” और “नहीं लड़े हैं - नहीं लड़ेंगे” जैसे नारे लगाएं। इलाक़े के लोगों के साथ संवाद स्थापित करते हुए महिला संगठन ने कहा कि, "प्रदेश की जनता सांप्रदायिक मुद्दों में उलझी हुई है और कानून-व्यवस्था की तरफ़ उसका ध्यान नहीं जा रहा है। जबकि यह इतनी ख़राब है कि महिलाएं थानों में भी सुरक्षित नहीं है।"

महिलाओं द्वारा सामाजिक एकता के स्टिकर भी दुकानों पर लगाये, जिनपर प्रसिद्ध कवि कैफ़ी आज़मी का शेर लिखा था।

“बस्ती में अपनी हिंदू-मुसलमां जो बस गए;

इंसां की शक्ल देखने को हम तरस गए!!”

दिलचस्प बात यह थी कि मिठाई की दुकान पर बैठे एक हिंदू व्यापारी और मस्जिद से निकल रहे नमाज़ियों दोनों ने महिलाओं की बातों से सहमति जताई और हाथ उठाकर उनका समर्थन किया।कई जगहों पर जनता ने महिलाओं पर फूलों की वर्षा भी की।

अभियान में शामिल एडवा की ज़िला अध्यक्ष सुमन सिंह ने कहा कि जब सांप्रदायिक गैंग ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है तो हमख्याल प्रगतिशील लोगों को बार-बार जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित करना होगा।

सुमन सिंह ने आगे कहा कि “हम साथ निकले हैं क्योंकि लखनऊ बहुत बड़ा है, कुछ गलियों में घूमने से बदलाव नहीं होगा। हमें चप्पे-चप्पे पर छा जाना होगा।"

महिला अधिकारों के लिए सक्रिय रहने वाली एडवा की नेता मधु गर्ग ने कहा कि “हमें बेहद अफसोस है कि हमारी इस गंगा-जमुनी तहजीब के खूबसूरत ताने-बाने को कुछ लोग नफ़रत की आग में जला देना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि नागरिक अपने जीवन के बुनियादी मुद्दों रोजी-रोटी, स्वास्थ्य, शिक्षा आवास व सुरक्षा के लिए, मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे। उदयगंज के नागरिकों से मधु गर्ग ने कहा आज कुछ स्वार्थी तत्व जानबूझकर नफरत की राजनीति कर देश को बांटना चाहते हैं।

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जनता को दंगे फसाद में उलझाकर देश की संपत्ति बेची जा रही है। बढ़ती महंगाई पर बोलते हुए उन्होंने कहां कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 1050 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 1253 रुपये तक बढ़ गया है और जनता मंदिर-मस्जिद की लड़ाई में ही उलझी है।

एडवा की वंदना राय ने कहा कि हमें झूठा इतिहास बता कर नफ़रत की आग को तेज़ किया जा रहा है। किंतु हमें अपनी साझी विरासत को याद रखना होगा।

आजादी की लड़ाई के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए वंदना राय ने कहा यदि रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की कमान संभाली थी तो बेगम हज़रत महल ने भी बहादुरी के साथ उनका सामना किया था। भगत सिंह लाहौर की जेल में देश के लिए फांसी के फंदे पर लटके थे तो अश्फाकुल्ला फैजाबाद की जेल में फांसी पर झूल गये थे।"

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा" अल्लामा इकबाल ने लिखा तो "बंदे मातरम" की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की।

आज उदयगंज से लेकर जयहिंद चबूतरे तक अभियान चलाया गया। जयहिंद चबूतरे पहुंचने पर महिलाओं ने कहा कि लखनऊ (अवध) साझी विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। लखनऊ के होली के रंगों में मुसलमान सारोबार होते हैं तो हिंदुओं द्वारा मोहर्रम में ताजियों पर मन्नत मांगते हैं।

आख़िर में महिलाओं ने कहा कि सभी बातों का सार यह है कि हमारा देश हिंदुस्तान विभिन्न रंगों, संस्कृतियों भाषाओं और धर्म का खूबसूरत देश है। जिसे एक रंग में रंगने की साजिश दरअसल इसकी आत्मा पर चोट है।

न्यूज़क्लिक ने उदयगंज के स्थानीय लोगों से बात की और एडवा के इस अभियान के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की। उदयगंज में 20 साल से “धागे-बटन” की दुकान चलाने वाले इरशाद हुसैन ने कहा कि वह महिलाओं के मुद्दे का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार सांप्रदायिकता नेताओं का बनाया हुआ मुद्दा है, जबकि “महंगाई और बेरोज़गारी” असल मुद्दा है, जो जनता के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

इरशाद की दुकान के सामने “मिठाई” की दुकान पर बैठे गोपाल, कहते हैं कि महंगाई ने व्यापारीयों की कमर-तोड़ दी है। गोपाल के अनुसार सबसे ज़्यादा व्यापार “तेल और कमर्शियल सिलेंडर” के महंगे होने से प्रभावित हुआ है। वह बताते है कि महंगाई के कारण ग्राहक भी कम हुए हैं, घर चलाना एक चुनौती हो गया है।

सड़क के किनारे “स्नैक्स” की एक दुकान के मालिक अजेंद्र कुमार साहू “जीतू” कहते हैं मौजूदा हालात में महिलाओं ने सही मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार “युवाओं की बेरोज़गारी” से बड़ा मुद्दा कोई नहीं है। जीतू के अनुसार ऐसे मुद्दों को उठाया जा रहा जिस से देश का युवा गुमराह हो रहा है और सही रास्ते से भटक कर हिंसा और नफ़रत की तरफ़ बढ़ रहा है।

वहीं सड़क पर खड़े चंद्र प्रकाश साहू कहते हैं कि महिलाओं ने ठोस मुद्दा उठाया है। न्यूज़क्लिक से उन्होंने बताया कि वह एक जनरल स्टोर पर काम करते हैं। जहां कारोबार लगभग ख़त्म होने की कगार पर है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा सांप्रदायिकता की आग को वोटों के लिए नेता हवा देते हैं। चंद्र प्रकाश साहू के अनुसार मंदिर कोई मुद्दा नहीं है, “पहले जब इंसान का पेट भरेगा, तभी वह ज़िंदा रहेगा और जब ज़िंदा रहेगा तभी तो मंदिर जाएगा।”

एडवा की मधु गर्ग ने “सद्भावना-फेरी” के उपदेश के बारे में न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा हमारे समाज की आपसी सद्भावना को बिगाड़ने की लगातार साज़िश की जा रही है।‌ कुत्सित प्रचार ने लोगों के दिमागों को हैक कर लिया है।‌ उन्हें झूठे इतिहास और अफवाहों के जाल में इस तरह फंसाया गया है कि वे सच की रोशनी देख ही नहीं पा रहे हैं। झूठ सर चढ़कर बोल रहा है।

मधु गर्ग ने आगे कहा कि हमारे बच्चों और आने वाली नस्लों को अपनी साझी विरासत व साझी संस्कृति से दूर किया जा रहा है।‌ नफ़रत की इस भयंकर आंधी में जनता के बुनियादी मुद्दे हवा हो गये हैं।

हमारी छोटी-छोटी कोशिशें इस नफ़रत को कुछ हद तक रोक सकती हैं और समाज में मोहब्बत और सद्भावना का संदेश दे सकती हैं।‌

इसलिए एडवा ने इसी दिशा में काम करते हुए तय किया है कि हम बस्तियों, मोहल्लों और बाजारों में अभियान चलाएंगे। हम पर्चे बांटेंगे, सद्भावना के स्टिकर चिपकाएंगे, गाने गाएंगे।

उन्होंने बताया, इस अभियान की शुरुआत 11 मई से चिनहट के मटियारी बाजार से गांव से हुई थी। दूसरे चरण में 13 मई को पक्का तालाब, बुद्ध विहार चिनहट में कार्यक्रम चलाया गया। अभियान अगला पड़ाव 18 मई को बस्तौली भी ब्लॉक इंदिरा नगर में है।

Uttar pradesh
Lucknow
United Against Hate
AIDWA
Women
Communalism
communal politics

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

माहवारी अवकाश : वरदान या अभिशाप?

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिछले 5 साल में भारत में 2 करोड़ महिलाएं नौकरियों से हुईं अलग- रिपोर्ट

लड़कियां कोई बीमारी नहीं होतीं, जिनसे निजात के लिए दवाएं बनायी और खायी जाएं

सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

रूस और यूक्रेन: हर मोर्चे पर डटीं महिलाएं युद्ध के विरोध में


बाकी खबरें

  • kashmiri student
    नासीर ख़ुएहामी
    घोर ग़रीबी के चलते ज़मानत नहीं करा पाने के कारण कश्मीरी छात्र आगरा जेल में रहने के लिए मजबूर
    09 Apr 2022
    विश्वास की कमी और वित्तीय दबाव उन परिवारों के रास्ते में आड़े आ रहे हैं, जिनके बच्चों को क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की शिकस्त के बाद जेल में डाल दिया गया था, हालांकि उन्हें ज़मानत…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फरीदाबाद : आवास के मामले में सैकड़ों मजदूर परिवारों को हाईकोर्ट से मिली राहत
    09 Apr 2022
    पिछले कुछ सालों में दिल्ली एनसीआर और उसके पास के क्षेत्रों में सरकारों ने बड़ी तेज़ी से मज़दूर बस्तियों को उजाड़ना शुरू किया। ख़ासकर कोरोना काल में सरकार ने बड़े ही चुपचाप तरीके से अपने इस अभियान को चलाया…
  • गुरसिमरन बख्शी
    मांस खाने का राजनीतिकरण करना क्या संवैधानिक रूप से सही है?
    09 Apr 2022
    मांस पर प्रतिबंध लगाना, किसी भी किस्म के व्यापार करने के मामले में मौलिक अधिकार का उल्लंघन कहलाता है और किसी वैधानिक क़ानून के समर्थन के अभाव में, यह संवैधानिक जनादेश के मामले में कम प्रभावी हो जाता…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,150 नए मामले, 83 मरीज़ों की मौत
    09 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 1 हजार 196 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • सबरंग इंडिया
    जेके पुलिस ने जारी की 'अनटोल्ड कश्मीर फाइल्स', हर धर्म के लोग कश्मीरी उग्रवाद का शिकार हुए
    09 Apr 2022
    कहावत है कि सच को बहुत देर तक नहीं झुठलाया जा सकता है। जी हां, ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर मचे हो-हल्ले और विवाद के बीच जम्मू कश्मीर पुलिस ने अनटोल्ड कश्मीर फाइल्स (Untold Kashmir Files) जारी की है।…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License