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भारत
राजनीति
विकास दुबे उज्जैन में गिरफ्तार, जानें अब तक क्या-क्या हुआ इस मामले में?
बीते छह दिनों से फरार कानपुर में आठ पुलिकर्मियों की हत्या का मुख्य अभियुक्त विकास दुबे आखिरकार गुरुवार, 9 जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले गुरुवार सुबह ही विकास के दो और साथी प्रभात मिश्रा और बऊआ दुबे को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Jul 2020
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‘विकास की गिरफ्तारी हो गई है। मंदिर को बीच में मत लाइए, लेकिन उज्जैन में गिरफ्तारी हो गई है। कानपुर में वारदात होने के बाद से ही हमने मध्य प्रदेश पुलिस को अलर्ट में रखा था। हमारी पुलिस किसी को भी छोड़ती नहीं है। विकास हमारी कस्टडी में है। यूपी पुलिस को जानकारी दे दी गई है।’

ये बयान मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का है। नरोत्तम मिश्रा ने सबसे पहले मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कानपुर के हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के गिरफ्तारी की पुष्टि की।

बता दें कि बीते छह दिनों से फरार, कानपुर में आठ पुलिकर्मियों की हत्या का मुख्य अभियुक्त विकास दुबे आखिरकार गुरुवार, 9 जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ़्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने पकड़कर मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपा।

शिवराज सिंह चौहान ने एमपी पुलिस को दी बधाई

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस जल्द ही विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप देगी। इस बारे में उनकी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात हो चुकी है।

शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर लिखा, "जिनको लगता है कि महाकाल की शरण में जाने से उनके पाप धुल जाएंगे उन्होंने महाकाल को जाना ही नहीं। हमारी सरकार किसी भी अपराधी को बख़्शने वाली नहीं है।"

हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि विकास दुबे ने महाकाल मंदिर में पहुंचने की सूचना किन्हीं स्रोतों से ख़ुद ही पुलिस तक पहुंचाई थी। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी विकास ने स्थानीय मीडिया के सामने सबसे पहले यही चिल्लाया कि, “..मैं विकास दुबे हूं...कानपुर वाला।”

कैसे गिरफ्तार हुआ विकास दुबे?

उज्जैन के कलेक्टर आशीष सिंह ने मीडिया को बताया कि ‘विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर के अंदर जा रहा था, तभी वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उसे पहचान लिया। पुलिस को जानकारी दी गई। जब उस पर दबाव बनाया गया, तब उसने अपनी पहचान स्वीकार की। फिर पुलिस ने उसे पकड़ लिया और अभी उससे पूछताछ कर रही है।’

विकास के दो और साथियों का एनकाउंटर

मालूम हो कि इससे पहले आज गुरुवार, 9 जुलाई की सुबह ही विकास के दो और साथी प्रभात मिश्रा और बऊआ दुबे को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।  

आईजी रेंज कानपुर ने बताया कि फरीदाबाद में विकास को छिपने में तीन लोगों ने मदद की थी, जिन्हें कल गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रभात भी उनमें से एक था। प्रभात मिश्रा और बऊआ दुबे दोनों पर 50 हजार का इनाम था।

कैसे हुई पूरे मामले की शुरुआत?

कानपुर के चौबेपुर थाने में गुरुवार, 2 जुलाई को राहुल तिवारी नाम के एक व्यक्ति ने विकास दुबे के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

इसे भी पढ़ें: कानपुर: हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला, डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद

यूपी पुलिस ने इस संबंध में कहा कि राहुल तिवारी नाम के एक शख़्स ने विकास दुबे के ख़िलाफ़ धारा-307 के तहत मुक़दमा दर्ज कराया था जिसके बाद पुलिस दुबे के घर दबिश डालने गई थी। बिकरू गांव स्थित विकास के घर के पास जैसे ही पुलिस टीम पहुंची। बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस मुठभेड़ में एक डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

इस घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया था। जगह-जगह विकास दुबे की तलाश में पुलिस की दर्जनों टीमें लगाई गईं थी, सैकड़ों फ़ोन नंबर्स को सर्विलांस पर लगाया गया था और कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।

अब तक इस मामले में क्या–क्या हुआ?

-4 जुलाई को प्रशासन ने जेसीबी की मदद से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का किलानुमा घर पूरी तरह से गिरा दिया। पुलिस के मुताबिक विकास ने अवैध तरीके से जो भी प्रॉपर्टी बनाई है, अब वो सब जांच का विषय है।

इसे भी पढ़ें: विकास दुबे के ऊपर 5 लाख का इनाम, लेकिन अब भी पुलिस के हाथ खाली क्यों हैं?

-विकास दुबे के ऊपर रखे 50 हजार रुपये के इनाम को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया। घोषणा की गई कि पुलिस को उसके बारे में बताने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

-इस मामले में चौबेपुर के एसओ विनय तिवारी समेत चार पुलिसकर्मियों को अब तक निलंबित किया जा चुका है और रडार पर सिर्फ़ चौबेपुर थाने के पुलिसकर्मी ही नहीं बल्कि बड़े अफ़सर भी आ गए हैं।

-चौबेपुर के अलावा बिल्हौर, ककवन और शिवराजपुर थाने समेत करीब 200 पुलिसवाले शक के दायरे में हैं। इन सभी पुलिसवालों के मोबाइल CDR (कॉल डीटेल रिकॉर्ड) खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने सैकड़ों मोबाइल फोन नंबर को भी सर्विलांस पर लगाए हैं।

-6 जुलाई को विकास के फरीदाबाद के एक होटल में छिपे होने के खबर सामने आई लेकिन इससे पहले की पुलिस वहां छापेमारी करने पहुंचती, विकास दुबे फरार हो चुका था। हालांकि पुलिस इस मामले में कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहने से बच रही है।

-कानपुर पुलिस ने विकास की बहू, पड़ोसी और डोमेस्टिक हेल्पर को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों के ऊपर एनकाउंटर वाली रात को विकास का साथ देने का आरोप है।

-लखनऊ एसटीएफ जो इस पूरे मामले की जांच कर रही है, उसके डीआईजी अनंत देव का ट्रांसफर कर दिया गया है। सुधीर कुमार लखनऊ एसटीएफ के एसएसपी बनाए गए हैं।

-बताया जा रहा है कि इस तबादले के पीछे अनंत देव का कानपुर कनेक्शन है। बता दें कि अनंत देव पहले कानपुर के एसएसपी थे। उस दौरान 3 जुलाई की घटना में शहीद हुए डीएसपी देवेंद्र मिश्र ने चौबेपुर के स्टेशन अफसर विनय तिवारी और विकास दुबे के बीच रिश्ते को लेकर शिकायत की थी। लेकिन तब अनंत देव ने कोई कार्रवाई नहीं की थी

-8 जुलाई की सुबह हुए एक एनकाउंटर में विकास दुबे का राइट हैंड कहलाने वाला अमर दुबे मारा गया। पुलिस को उसके पास से ऑटोमैटिक हथियार भी मिला है।

विकास का राजनीतिक गठजोड़ और पुलिस की तैयारी

गौरतलब है कि पिछले करीब तीन दशक से अपराध की दुनिया से विकास दुबे का नाम जुड़ा हुआ है। उसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। इस दौरान कई बार उसकी गिरफ्तारी भी हुई लेकिन किसी भी मामले में सजा नहीं हुई और हर बार वो जमानत पर छूटकर बाहर आता रहा। इसका सबसे बड़ा कारण राजनीतिक दलों में विकास की अच्छी-खासी पहुंच बताई जा रही है।

इस मामले में पुलिसवालों की संलिप्तता और तैयारी पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जैसे इस दबिश से पहले पुलिस ने क्या ज़रूरी तैयारी की गई थी? जब विकास दुबे का तीन दशकों से अपराध की दुनिया में बोलबाला रहा है तो आखिर पुलिसबल बिना बुलेटप्रूफ जैकेट, प्रोटेक्टर और हेलमेट के वहां दबिश डालने क्यों गए? खबरों के मुताबिक ज़्यादातर लोगों के सिर में और सीने में गोलियां लगी हैं, जिससे शायद बचा जा सकता था।

3 जुलाई की घटना के बाद भले ही विकास दुबे राज्य के टॉप अपराधियों की लिस्ट में शामिल हो गया हो लेकिन इससे पहले सिर्फ एक थाने में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद उसका नाम कानपुर ज़िले के टॉप टेन क्रिमिनल्स या मोस्ट वांटेड की लिस्ट में नहीं था।

इसे भी पढ़ें: कानपुर: घेरे में क़ानून व्यवस्था, अपराध और राजनीति का गठजोड़

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