NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश: आदिवासियों ने भरी हुंकार, लेकर रहेंगे अपना अधिकार
विभिन्न जन संगठनों के बैनर तले संगठित मध्यप्रदेश के हजारों आदिवासी 17 नवंबर को भोपाल में इकट्ठा हुए। जंगल से बेदखली के खिलाफ आदिवासियों के इस हुंकार रैली में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए।
राजु कुमार
19 Nov 2019
Movement for aadiwasi right

वन अधिकार कानून पर सर्वोच्च न्यायालय के 28 फरवरी के आदेश के बाद जंगलों में रहने वाले आदिवासी समुदाय पर बेदखली का संकट गहरा गया। इसके बाद आदिवासियों ने विभिन्न जन संगठनों के बैनर तले एकजुटता शुरू की और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का निर्णय लिया।

पिछले 2 अक्टूबर से मध्यप्रदेश के विभिन्न आदिवासी बहुल जिलों में रैली और सभा आयोजित करने के बाद 17 नवंबर को पूरे प्रदेश के जन संगठनों ने जल-जंगल-जमीन व जीवन बचाओ साझा मंच के बैनर तले आदिवासी अधिकार हुंकार यात्रा का समापन किया। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 10 हजार से ज्यादा आदिवासी शामिल हुए।

आदिवासी हुंकार यात्रा को संबोधित करते हुए आदिवासी नेता फागूराम ने कहा कि आजादी की दूसरी लडाई का आगाज़ अदिवासियों की हुंकार रैली से हो चुका है। हर आदिवासी को अपने अधिकार के लिए आज स्वयं लड़ना होगा और अपनी बात खुद रखनी होगी।

आदिवासी मुक्ति संगठन सेंधवा के राजेश कन्नौज ने कहा कि हम सरकार को याद दिलाने आए हैं जो अपने घोषणा-पत्र में जो किए हैं, उन्हें पूरा करें। उन्होंने कहा कि हम आदिवासी है जंगलों को खत्म कर हर आदिवासी को जंगल छोड़ने पर मज़बूर किया जा रहा है।
IMG-20191119-WA0008.jpg
जयस की सीमा मास्कोले ने कहा कि आदिवासी महिलाओं पर वन अधिकारियों द्वारा हिंसा की जाती है। रास्ते में आते-जाते, लकड़ी लाते समय जबरन परेशान किया जाता है। आदिवासी महिला अपने बच्चों व परिवार का पोषण जंगल से करती है और इसलिए उसे खत्म करना, हमें खत्म करना है। हिंसा रोकने के लिए हमें आगे आना होगा।

सहरिया आदिवासी समाज के फूलसिंह ने कहा कि जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है। जिस सरकार को हम बना सकते हैं उसे हटा भी सकते हैं। आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखली बर्दाश्त नहीं करेंगे।

डिंडौरी की श्याम कुमारी धुर्वे ने अपनी भाषा में संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी का जीवन, आजीविका, संस्कृति, पहचान और परम्पराएं, जंगल-नदी-पहाड़ और प्रकृति पर निर्भर है। आदिवासी सदियों से जंगली जानवरों, पेड पौधें सहित असंख्य विविधताओं के साथ सामंजस्य बनाकर रहता आया है, तो वन्य जीव सरंक्षण के नाम पर जंगल से उनकी बेदखली क्यों? कैम्पा के नाम पर उनके संसाधनों को निजी कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को सौपने की तैयारी क्यों?

जयस संगठन के लोकेष मुजाल्दा ने कहा कि आज के दौर में पूंजीपति भूमि सुधारों की कोई जगह नहीं है। भूमि सुधार का सही मायने में अर्थ संसाधनों पर पूंजीवादी वर्चस्व के खिलाफ वर्ग संघर्ष है।

मंडला से चुटका परमाणु परियोजना संघर्ष समिति के दादूलाल कुडापे ने कहा कि सरकार जंगल में बिजली बनाने का कहकर आदिवासी के बसे बसाये घरों को उजाड़ रही है। सवाल करो तो हर जवाब विकास रहता है।

मंडला जिले से कमल सिंह मरावी ने कहा कि आदिवासी समाज खतरे में है। भारत में भू-सुधार का सबसे बड़ा कानून व आदिवासी अधिकारों को प्रदान करने वाला यह कानून स्वयं भी भारतीय राजनीति व तथाकथित पर्यावरणविदों का शिकार हो गया।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटेकर ने महिलाओं का हौंसला बढ़ाया और कहा कि ऐसा विकास सही नहीं होता जिससे विनाश हो। उन्होंने पांचवी अनुसूची पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें अपनी आवाज को दिल्ली तक ले जाना होगा वरना पूंजीपतियों द्वारा जंगल और प्राकृतिक संसाधन पर कब्जा किया जाना दूर नहीं।

इस अवसर पर मौजूद विभिन्न सामाजिक संगठनों के अगुवाई करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आदिवासियों के लिए जमीन एक आर्थिक स्रोत नही है, बल्कि उसकी गरिमा, पहचान और जीवन पद्धति का मुद्दा है। आदिवासी का जमीन पर मालिकाना हक न्याय संगत दुनिया, विश्व शांति, सरलीकृत विकास के विरुद्ध सांस्कृतिक विविधता और लैंगिक न्याय का प्रतीक है।

अमूल्य निधि ने बताया कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के बाद देश भर के जन संगठनों ने तय किया कि लोगों को नए सिरे से संगठित करते हुए उन्हें वनों पर व्यक्तिगत के साथ-साथ सामुदायिक वन अधिकार दिलाने की प्रक्रिया में मदद भी की जाए। इस बीच इस मसले को लेकर सभी दलों के आदिवासी नेताओं के साथ संवाद किया गया।
IMG-20191119-WA0006.jpg
अदिवासी हुंकार रैली के आयोजक गुलजार सिंह मरकाम ने बताया कि आदिवासी हुंकार रैली के माध्यम से अपने जल जंगल जमीन पर अधिकार और पहचान के लिए एकजुट हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से 1 करोड़ से अधिक आदिवासियों को जंगल से बेदखली का आदेश पारित किया गया था। इसकी अगली सुनवाई 26 नवंबर को होनी है। इस अन्याय के खिलाफ आज हमने एकत्रित होकर संघर्ष का रास्ता अपानाया है। यह हुंकार रैली एक करोड़ अदिवासियों की ओर से सरकार को चेतावनी है।

केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, वनाधिकार कानून और संविधान में आदिवासियों को अधिकार दिये हैं। कानून को पूर्णतः जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की अनुषंसा हम हर स्तर पर करेंगे।

आदिमजाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने कहा प्रदेश सरकार ने आदिवासी दिवस पर अवकाश की घोषणा की है। आदिवासी लोक संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रदेष में जिला स्तर पर व्यवस्था की गई है।

झाबुआ से विधायक कांतिलाल भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला हक आदिवासियों का है, इसे कोई छीन नहीं सकता। संविधान में आदिवासी क्षेत्रों व इन क्षेत्रों में निवास करने वाले समुदाय को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पांचवीं अनुसूची बनाई गई है। अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी इस बात को दोहराया कि वे अपनी सरकारों से आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए आदिवासी संगठनों का साथ देंगे।

सभा में एकत्रित होने से पहले आदिवासियों ने भोपाल में रैली निकाली। ‘लडेंगे जीतेंगे’, ‘कार्पोरेट की लूट बंद करो, बंद करो’ का नारा व जोशीले गीत गाते वे सभा स्थल पर आए। रैली में लोग अपने भगवान बिरसा मुंडा और आदिवासी नेताओं की तस्वीर लिए चल रहे थे।

हुंकार यात्रा के समापन पर ग्वालियर, चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल, मालवा-निमाड़ एवं मध्यांचल के 38 जिलां एवं 135 विकासखंडों के 80 से अधिक सामाजिक संगठनो से जुड़े लगभग दस हजार अदिवासियों ने अपने क्षेत्र की समस्याओं व मांगों को संकलित कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से वन अधिकार कानून व पेसा कानून को यथावत रखने की मांग की गई है। मध्यप्रदेष के गृहमंत्री बाला बच्चन ने उक्त सभी मांगों को लेकर आश्वासन दिया कि सरकार उनकी सभी मांगों को पूरा करेगी।

Madhya Pradesh
aadiwasi
Aadiwasi's Right
aadiwasi culture
Forest rights law
Supreme Court
आदिवासी मुक्ति संगठन
Narmada Bachao Andolan
Medha Patekar

Related Stories

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार

बाल विवाह विधेयक: ग़ैर-बराबरी जब एक आदर्श बन जाती है, क़ानून तब निरर्थक हो जाते हैं!

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

सामूहिक वन अधिकार देने पर MP सरकार ने की वादाख़िलाफ़ी, तो आदिवासियों ने ख़ुद तय की गांव की सीमा

कोरबा : रोज़गार की मांग को लेकर एक माह से भू-विस्थापितों का धरना जारी


बाकी खबरें

  • Forest
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: सोती रही योगी सरकार, वन माफिया चर गए चंदौली, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जंगल
    19 Jan 2022
    चंदौली, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जंगलों में अब शेर, बाघ, मोर और काले हिरणों का शोर नहीं सुनाई देता। अब यहां कुछ सुनाई देता है तो धूल उड़ाते भारी वाहनों का भोपू और नदियों का सीना चीरकर बालू निकालती…
  • Cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर्यटन की हालत पर क्यों मुस्कुराई अर्थव्यवस्था!
    19 Jan 2022
    ऐसा क्या हुआ कि पर्यटन की हालत देख अर्थव्यवस्था की हंसी छूट गई!
  • Taliban
    एम के भद्रकुमार
    पाकिस्तान-तालिबान संबंधों में खटास
    19 Jan 2022
    अमेरिका इस्लामाबाद के साथ तालिबान के संबंध में उत्पन्न तनाव का फायदा उठाने की तैयारी कर रहा है।
  • JNU protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़, छात्र संगठनों ने निकाला विरोध मार्च
    19 Jan 2022
    जेएनयू परिसर में पीएचडी कर रही एक छात्रा के साथ सोमवार रात कथित तौर पर छेड़खानी की गई। मामला सामने आने के बाद मंगलवार को छात्रों और शिक्षकों ने परिसर में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का आरोप…
  • census
    अनिल जैन
    जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को क्यों टाल रही है सरकार?
    19 Jan 2022
    सवाल है कि कोरोना महामारी के चलते सरकार का कोई काम नहीं रूका है, तो फिर जनगणना जैसे बेहद महत्वपूर्ण कार्य को हल्के में लेते हुए क्यों टाला जा रहा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License