NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र: पुरातत्व विभाग पर कोरोना की मार, वित्तीय संकट गहराने से 375 विरासत स्थलों का संरक्षण बंद
2020-21 में महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा पुरातत्व विभाग को 40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन, इस साल का आधे से अधिक समय गुजरने के बावजूद अब तक महज 7 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।
शिरीष खरे
29 Oct 2020
महाराष्ट्र
1. विरासत स्थलों पर स्टॉफ और वित्तीय कमी के चलते ऐतहासिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तस्वीर: रायगढ़ किले की

पुणे: महाराष्ट्र में साढ़े तीन सौ से अधिक ऐतहासिक किले, गुफा, संग्रहालय और अन्य विरासत स्थलों के संरक्षण व संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने वाले पुरातत्व विभाग पर कोरोना की जबर्दस्त मार पड़ी है। यही वजह है कि इन दिनों पूरा महकमा वित्तीय संकट से गुजर रहा है।

फिलहाल आधे से अधिक स्टॉफ खाली है और कई महीनों से ऑउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती भी रुकी हुई है। वहीं, इस वर्ष के लिए स्वीकृत की गई राशि भी सरकार की ओर से नहीं मिली है। इससे पूरे राज्य में पुरातत्व संरक्षण का काम बंद हो गया है।

बता दें कि राज्य के पुरातत्व और वस्तु संग्रहालय संचालनालय में कई पद वर्षों से खाली हैं। ये पद ऑउटसोर्सिंग से भरे जाने हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि इस साल मई में इन पदों की भर्ती के लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन, इस दौरान महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के तेजी से प्रसार हुआ और सरकार की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस तरह, ऑउटसोर्सिंग के जरिए अभी तक न 80 कर्मचारियों की विभागीय भर्ती हो सकी है और न ही पुरातत्व संरक्षण के लिए दी जाने वाली राशि ही प्राप्त हुई है।

IMG_20191018_203319_618.jpg

(पुणे का शनिवारवाडा पिछले आठ महीनों से बंद है)

पुरातत्व व वस्तु संग्रहालय संचालनालय के पास वर्तमान में राज्य भर की कुल 375 विरासत स्थलों की जिम्मेदारी है। वहीं, कुल 300 कर्मचारियों में से 145 पद खाली हैं। एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि 145 रिक्त पदों की संख्या भी कुल रिक्त पदों में 30 प्रतिशत तक की कमी करने के बाद निर्धारित की गई थी।

वहीं, इन्हें भी ऑउटसोर्सिंग से भरा जाना है। इसके तहत छोटे कर्मचारी को अपेक्षाकृत कम वेतन पर बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। लेकिन, कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन के कारण सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है और यही दलील देकर कई महीनों से कर्मचारियों की भर्ती रोक दी गई है। लिहाजा, कर्मचारियों की कमी से कई ऐतिहासिक भवन और अन्य धरोहरों की हालत खराब होने की आशंका है।

दूसरी तरफ, कुछ वर्षों के दौरान राज्य में विरासत स्थलों की सूची तो बढ़ती जा रही है, लेकिन उसके मुताबिक कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि नहीं की जा रही है। इससे राज्य भर के विरासत स्थलों के संरक्षण व संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने वाले पुरातत्व विभाग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होता जा रहा है।

इसी तरह, राज्य सरकार पुरातत्व विभाग को विरासत स्थलों के संरक्षण व संवर्धन कार्यों के लिए एकमुश्त और समय-समय पर फुटकर राशि आवंटित करती है। पुरातत्व विभाग द्वारा राज्य सरकार को प्रतिवर्ष विरासत स्थलों के संरक्षण व संवर्धन के लिए सौ से डेढ़ सौ करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे जाते हैं। लेकिन, राज्य सरकार प्रतिवर्ष पुरातत्व विभाग को 22 से 25 करोड़ रुपये की ही राशि स्वीकृत करती है।

बता दें कि इस वर्ष 2020-21 में राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा पुरातत्व विभाग को पहली बार सबसे अधिक 40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन, इस वर्ष का आधे से अधिक समय गुजरने के बावजूद अब तक 40 करोड़ रुपये में से महज 7 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। वहीं, यह बात भी अहम है कि पुरातत्व विभाग के संरक्षण कार्य आमतौर पर गांवों में होते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर अस्थायी रोजगार पैदा होते हैं और ग्रामीण मजदूर व कारीगरों को काम मिलता है। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से इस प्रकार का काम बंद हो गया है। इससे आजीविका के लिए मुहैया कराए जाने वाले आंशिक अवसर भी समाप्त हो गए हैं।

दूसरी तरफ, पुरातत्व से जुड़े कई जानकार यह मानते हैं कि यह विभाग अनुत्पादक श्रेणी में रखा जाता है, जिसमें सरकार को कोई आमदनी नहीं होती और उलटा आमदनी का एक हिस्सा खर्च करना पड़ता है, यही वजह है कि सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा इस क्षेत्र की लगातार उपेक्षा की जाती रही है।

IMG_20191002_111853_989.jpg

 (महाराष्ट्र में कोविड-19 के सबसे ज्यादा प्रकोप के कारण विश्वविख्यात एलोरा को पर्यटकों के लिए नहीं खोला जा रहा है।)

इस पूरे प्रकरण में राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री अमित देशमुख ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमित देशमुख के अनुसार, "जैसे-जैसे लॉकडाउन में ढील दी जा रही है वैसे-वैसे उद्योग-धंधे शुरू हो रहे हैं और राज्य की आर्थिक परेशानियां दूर हो रही हैं। जैसे ही आर्थिक चक्र सामान्य तरीके से चलने लगेगा वैसे ही काम शुरू होगा और पुरातत्व के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह सही है कि कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया और संरक्षण कार्यों में विलंब हुआ है, लेकिन सभी बुनियादी आवश्यकताओं को तत्काल प्राथमिकता दी जाएगी।"

वहीं, अमित देशमुख के मुताबिक मौजूदा हालत में पुरातत्व संरक्षण परियोजना के लिए धन जुटाना आसान नहीं हैं। इसके लिए वे कुछ हद तक केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को भी जिम्मेदार मानते हुए कहते हैं कि केंद्र से राज्य को अब तक जीएसटी निधि प्राप्त नहीं हो हुई है।

बता दें कि महाराष्ट्र में सबसे अधिक रिक्त पद पांच वस्तु संग्रहालयों में हैं। इन संग्रहालयों में संरक्षक, इंजीनियर और विरासत स्थलों के लिए गार्ड शामिल हैं। वहीं, संग्रहालयों में संरक्षकों की कमी पुरावशेषों के रखरखाव को प्रभावित कर रही है। दूसरी तरफ, विरासत स्थलों पर पर्याप्त स्टॉफ की कमी ने महत्त्वपूर्ण धरोहरों की सुरक्षा और रख-रखाव पर सवाल उठा दिए हैं।

ताजमहल की तर्ज पर अजंता-एलोरा खोलने पर सवाल

कुछ जानकर पूछ रहे हैं कि जिस तरह पर्यटकों के लिए आगरा का ताजमहल खोल दिया गया ठीक उसी तरह महाराष्ट्र में औरंगाबाद जिले के विश्व-विख्यात अजंता-एलोरा को क्यों नहीं खोला जा सकता है। लेकिन, महाराष्ट्र में पर्यटन-स्थलों को खोलने के संबंध में फिलहाल कोई संकेत नहीं है।

IMG_20191002_063241_232.jpg

(ताजमहल खुल गया है, लेकिन अजंता बंद है। दृश्य सुप्रसिद्ध अजंता का।)
वहीं, औरंगाबाद सहित महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे, नासिक और नागपुर सभी प्रमुख शहरों में होटल नहीं खोलने दिए जा रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहर कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं और कोरोना का प्रकोप सबसे अधिक इसी राज्य पर टूटा है। इसी तरह, यातायात सुविधाएं भी पहले की तुलना में सुचारु तरीके से संचालित नहीं होने के कारण राज्य में पर्यटन के लिए कोई संभावना नहीं है।

(शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।) सभी फोटो शिरीष खरे

Maharashtra
Corona
Archaeological
heritage
financial crisis

Related Stories

महाराष्ट्र की लावणी कलाकार महामारी की वजह से जीवनयापन के लिए कर रहीं संघर्ष

अविनाश पाटिल के साथ धर्म, अंधविश्वास और सनातन संस्था पर बातचीत

आनंद तेलतुंबड़े के साथ आए लेखक और अन्य संगठन, संभावित गिरफ्तारी के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

महाराष्ट्र में प्रगतिशील आंदोलनों का एक लम्बा इतिहास रहा है: मेघा पान्सारे


बाकी खबरें

  • OBC got reservation under All India Medical Education Quota, student organizations said victory of struggle!
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अखिल भारतीय चिकित्सा शिक्षा कोटा के तहत ओबीसी को मिला आरक्षण, छात्र संगठनों ने कहा संघर्ष की हुई जीत!
    29 Jul 2021
    चिकित्सा अभ्यर्थियों की ओर से चिकित्सा शिक्षा के अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी आरक्षण देने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। कुछ दिनों पहले तक केंद्र सरकार इससे अपना पल्ला झाड़ रही तो और इसे न्यायलय में…
  • क्या भाजपा का एकरंगी नज़रिया असम और मिज़ोरम के तनाव को कम कर पाएगा?
    अजय कुमार
    क्या भाजपा का एकरंगी नज़रिया असम और मिज़ोरम के तनाव को कम कर पाएगा?
    29 Jul 2021
    केंद्र, असम और मिजोरम तीनों जगह भाजपा और भाजपा की सहयोगी सरकार है। भाजपा जैसे पार्टी “वन इंडिया” के विचार में पूरे भारत को रंगना चाहती है, इसलिए वह पूर्वोत्तर को कभी नहीं संभाल पाएगी।
  • सोनिया यादव
    गोवा: सीएम सावंत का रेप को लेकर दिया बयान सिर्फ विवादित ही नहीं, असंवेदनशील भी है!
    29 Jul 2021
    विपक्ष सरकार पर खराब कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है तो वहीं सरकार कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय मां-बाप को ही नसीहत दे रही है।
  • कोविड-19 के बढ़ते मामले, धनबाद में जज की हत्या और अन्य ख़बरें
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोविड-19 के बढ़ते मामले, धनबाद में जज की हत्या और अन्य ख़बरें
    29 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे कोरोना वायरस के बढ़ते मामले, धनबाद जज की हत्या और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • s
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद: सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी, दोनों सदन दिनभर के लिये स्थगित
    29 Jul 2021
    देश की संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध खत्म नहीं हो रहा है।  विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के कारण दोनों सदन की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License