NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र: कोरोना के कारण दूसरे साल भी बंद हैं बैल बाज़ार, ख़रीफ़ की बुवाई प्रभावित
यह समय होता है जब कई किसानों को अपने खेतों में बुवाई के लिए ताकतवर बैल चाहिए होते हैं, जबकि बहुत सारे पशुपालक मोटी रकम पर अपने बैल वगैरह बेचकर साहूकारों से लिया कर्ज भी चुकाते हैं। इसी तरह, कई किसान जानवरों को बेचकर खेती के लिए बीज और खाद खरीदते हैं।
शिरीष खरे
27 Apr 2021
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में गंगाखेर का बैल बाजार।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में गंगाखेर का बैल बाजार। फाइल फोटो, साभार: अजीत सिंह मिर्धे

औरंगाबाद/यवतमाल: "कोरोना के चलते खरीफ की बुवाई से ठीक पहले हर रविवार पैठण (औरंगाबाद) में लगने वाला बैलों का बाजार बंद हो गया है। यह समय होता है जब कई सारे किसानों को अपने खेतों में बुवाई के लिए ताकतवर बैल चाहिए होते हैं, जबकि बहुत सारे पशुपालक किसान मोटी रकम पर अपने बैल वगैरह बाजार में बेचकर साहूकारों से लिया कर्ज भी चुकाते हैं। इसी तरह, कई किसान जानवरों को बेचकर खेती के लिए बीज और खाद खरीदते हैं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह दूसरा साल है जब बैल बाजार बंद होने से किसान परेशान हैं।" ऐसा कहना है पाचोड गांव के एक पशुपालक किसान अफसर पटेल का।

अफसर पटेल के साथ ही दूसरे किसानों की भी यही परेशानी है। ऐसे में कई व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए पशुओं की खरीद शुरू हुई है, लेकिन उसकी अलग परेशानी है। किसानों के अनुसार पशु खरीदी-बिक्री से जुड़े दलालों ने मोबाइल पर व्हाट्सएप ऐप के जरिए पशुपालकों और किसानों का एक समूह बनाया है, जिसमें आठ-दस गांवों के कई लोग जुड़े हुए हैं और ये व्हाट्सएप समूह में तस्वीरों और बातचीत करके जानवरों के लिए सौदे कर रहे हैं। हालांकि, ऑनलाइन सौदेबाजी के मामले में पशुपालक और किसान अभ्यस्त नहीं हैं और उन्हें व्हाट्सएप पर यह समझना मुश्किल हो रहा है कि किस जानवर को कितने में खरीदा या बेचा जाए।

बैल बाज़ार ख़ास तौर से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ अंचल में पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। फोटो साभार: मार्केट गली (फेसबुक)

 

दूसरी बात यह है कि व्हाट्सएप पर दूध देने वाली गायों को खरीदने से जुड़े ही ज्यादा प्रस्ताव आ रहे हैं। इस मामले में पाचोड गांव के ही किसान बालासाहेब नेहाले का अनुभव ठीक नहीं रहा है। बालासाहेब बताते हैं, "हमें बारिश से पहले हर हाल में बुवाई करनी ही है और इसके लिए स्वस्थ बैलों की जोड़ी चाहिए, मगर व्हाट्सएप पर रेट ज्यादा समझ आ रहे हैं। बाजार में आमने-सामने बैलों सहित उनके मालिक भी होते हैं, इसलिए देख-समझकर और आपस में खूब बात करके सीधे बिना दलाल के सौदा करना सही रहता है। व्हाट्सएप पर तो पचास हजार रुपए की एक जोड़ी (बैल) के लिए दलाल छप्पन हजार में सौदा कराना चाहता है। लेकिन, मालूम नहीं चल रहा है कि बैलों की जोड़ी पचास हजार लायक भी है या नहीं। फोटो देखकर तो विश्वास नहीं किया जा सकता है।"

यवतमाल जिले के बैल बाज़ारों में बैलों की एक जोड़ी क़रीब पचास से अस्सी हजार रुपए तक में बिकती है। फाइल फोटो, साभार: अप्पासाहेब शिलारे

औरंगाबाद के पैठण में लगने वाला बैल बाजार मराठवाड़ा की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह बाजार न सिर्फ पशुपालक और किसान बल्कि मजदूर और व्यापारियों के लिए भी अहम होता है। इस दौरान बाजार में बैलों के अलावा गाय, भैंस और बकरियां भी खरीदी और बेची जाती हैं। बैल बाजार में खेती से जुड़े हल आदि अन्य सामान और टोकरी जैसे उत्पाद भी रखे जाते हैं और इससे लघु उद्योगों को भी लाभ मिलता है। लेकिन, कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगाई गईं पाबंदियों में साप्ताहिक बैल बाजारों पर भी रोक है। बता दें कि पैठण के बैल बाजार में औरंगाबाद के अलावा अहमदनगर, बीड़ और जालना के पशु व्यापारी पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए आते हैं। इससे ग्रामपंचायत को भी खासा कर मिलता है।

बैल बाजारों से प्राप्त कर ग्राम पंचायतों के खजाने में जाता है। फाइल फोटो साभार: विशाल गोरपडे

बैलों की खरीद-बिक्री के लिए हर साल अप्रैल और मई के महीने बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। अफसर पटेल के मुताबिक ऐसा इसलिए है कि हर साल जनवरी से मार्च महीनों के बीच गन्ना काटने वाले खेत मजदूर वापस अपने-अपने गांव लौटते हैं और अपने पशुओं को बेचते हैं। अफसर बताते हैं, "मार्च से लेकर मई तक बैल बाजारों में खास रौनक और भीड़भाड़ देखी जा सकती है। इसका कारण यह है कि इसी समय गन्ना मजदूर भी अपने गांवों में होते हैं और अपने जानवरों को बेचकर कुछ पैसा कमाना चाहते हैं, जबकि किसानों को भी मानसून से पहले खेत जोतने पड़ते हैं तो उन्हें भी बढ़िया बैलों की तलाश होती हैं। ऐसे में बैल बाजार में बैलों के दाम ऊंचे रहते हैं और इन्हीं महीनों में बड़ी संख्या तक बैल बेचे और खरीदे जाते हैं, मगर अफसोस कि कोरोना महामारी के चलते लगातार दूसरे साल बैल बाजार फिर सूने हो गए हैं।"

दरअसल, देश में महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे कई अंचलों में अधिकतर छोटे किसान खेती के लिए आज भी बैलों पर ही निर्भर होते हैं। मशीनीकरण के दौर में भी छोटी जोतों के खेत मालिक किसानों की एक बड़ी संख्या है जो आज भी खेती के अधिकतर कार्य बैलों की शक्ति से ही पूरे करती है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के विदर्भ अंचल का यवतमाल जिला भी है, जो बैल बाजारों के लिए प्रसिद्ध है। यवतमाल जिले में पुसद, उमरखेड और आर्नी में बैलों के बड़े-बड़े बाजार लगते हैं। लेकिन, यहां लगातार दूसरे साल भी खरीफ मौसम के दौरान ही बैल बाजार न खुलने से इस अंचल में खेती के कार्यों से जुड़े छोटे किसानों की माली हालत और अधिक तंग हो सकती है। इस बारे में कृषि आधारित बाजार समिति, पुसद के बैल व्यापारी शेख अख्तर अपने अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र में अकेले पुसद स्थित बैल बाजार चार एकड़ में लगता है।

शेख अख्तर के मुताबिक, "साल 2019 में अकेले पुसद के बैल बाजार में सीजन के समय एक दिन में पच्चीस से तीस लाख रुपए का कारोबार होता था। इन बाजारों में पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान-व्यापारी भी आते हैं और अच्छी कीमत देकर बैल खरीदते हैं। इन बाजारों में बैलों की एक जोड़ी कोई 50 से 80 हजार रुपए तक में बिक जाती है। इस कारोबार में लगे परिवार गाय के बछड़े को अच्छी तरह से पाल-पोसकर शारीरिक रूप से उसे इस तरह से तैयार करते हैं कि बैल बाजारों में खूब पैसा कमा सकें।"

यवतमाल जिले में पुसद गांव के ही एक छोटे किसान अरुण राऊत मानते हैं कि कोरोना महामारी के कारण बाजारों से बैलों की खरीद और बिक्री न होने से कई किसानों की जुताई का पहिया रुक जाएगा। इसकी वजह यह है कि विदर्भ में ज्यादातर छोटे किसान हैं और कई छोटे किसानों के पास ट्रैक्टर नहीं हैं। इसलिए उन्हें खेतीबाड़ी के लिए बैलों की जरूरत पड़ती है। लेकिन, बैल न होने से उन्हें खेती में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अरुण राउत इस बात को समझाते हुए कहते हैं, "मई महीने में भी यदि कोरोना महामारी के कारण बैल बाजार न खुले तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी, क्योंकि मानसून सिर पर होगा और तब उन्हें बुवाई की बहुत जल्दी होगी, मगर किसानों के पास बैलों की खरीदी के लिए बहुत कम समय रह जाएगा।"

शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Maharashtra
COVID-19
Bull market
Coronavirus
Cattle market
Cattle Trade

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License