NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र: समुद्री तट के 'गोल्डन बेल्ट' में बंदरगाह बनाने को लेकर मछुआरे और किसानों का विरोध
बंदरगाह के निर्माण से लगभग एक लाख परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और इसका प्रभाव 13 गांवों पर पड़ेगा और यहां की करीब चालीस प्रतिशत आबादी के सामने रोज़ीरोटी का संकट खड़ा होगा।
शिरीष खरे
07 Jan 2021
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू हो चुका है। तस्वीर: सोशल मीडिया से
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू हो चुका है। तस्वीर: सोशल मीडिया से

पालघर: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लगे पालघर जिले के समुद्री तट पर स्थित तथा पर्यावरण के लिए अति संवेदनशील क्षेत्र वाढवण में बंदरगाह निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में भारी असंतोष है। लोगों का आरोप है कि इस परियोजना के अंतर्गत पर्यावरण को होने वाले नुकसान का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया है। इस परियोजना के विरोध का दूसरा कारण यह है कि जैव विविधता और मछुआरों तथा किसानों की आजीविका की दृष्टि से यह पूरी पट्टी 'गोल्डन बेल्ट' के नाम से जानी जाती है। इसलिए बंदरगाह का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इसके निर्माण से लगभग एक लाख परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। इस परियोजना का प्रभाव 13 गांवों पर पड़ेगा और यहां की करीब चालीस प्रतिशत आबादी के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा होगा। 

बता दें कि वाढवण स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट की यह बंदरगाह परियोजना पांच हजार एकड़ समुद्री क्षेत्र में स्थापित की जा रही है। इसके तहत समुद्र तट से चार किलोमीटर लंबा और 20 मीटर गहरा एक ढांचा तैयार किया जाएगा। वर्ष 2028 तक कुल 38 माल गोदाम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां से कोयला, सीमेंट, रसायन और तेल आदि चीजों का सालाना 132 मिलियन टन माल का परिवहन किया जा सकता है। इस बंदरगाह के लिए 350 किलोमीटर लंबी सड़क और 12 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण किया जाएगा।

वर्ष 1995 में एक निजी कंपनी ने पहले भी इस परियोजना का निर्माण शुरू किया था। लेकिन, तब भी भारी जनविरोध के कारण तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा इस परियोजना का काम रोक दिया गया था। इसके अलावा डहाणू तालुका पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण ने परियोजना के खिलाफ दायर एक याचिका पर निर्णय लेते हुए वर्ष 1998 में इस बंदरगाह के निर्माण को स्थगित कर दिया था।

ग्राम पंचायत स्तर पर इस योजना को अनुमति नहीं दी गई है। तस्वीर: सोशल मीडिया से

उसके बाद वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बताया। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (74%) और महाराष्ट्र सागर मंडल (26%) की भागीदारी से 65 हजार करोड़ रुपए की लागत से पुन: निर्माण कार्य शुरू करने की मंशा जाहिर की गई थी। वहीं, परियोजना समर्थकों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि प्रस्तावित बंदरगाह 24 घंटे चालू रहेगा, इस से पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास होगा।

दूसरी तरफ, बंदरगाह परियोजना का स्थानीय स्तर पर भारी विरोध हो रहा है। इस बारे में वाढवण की सरपंच हेमलता बालाशी बताती हैं, "यह परियोजना पारंपरिक कृषि, बागवानी और मछलीपालन से जुड़े एक लाख परिवारों के लिए नुकसानदायक साबित होगी। स्थानीय लोगों ने कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एक संघर्ष समिति बनाई है। इस समिति के बैनर के तले हम सभी इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।" इसके साथ ही पूरी परियोजना के विरोध का प्रमुख आधार जैव विविधता के लिए का खतरा बताया जा रहा है। खासकर अनेक तरह की मछलियों को ध्यान में रखते हुए यह समुद्री क्षेत्र जलीय जीव-जंतुओं का घर माना जाता है। ऐसे में यदि यहां बंदरगाह बनाया जाता है तो सबसे बुरा असर एक दर्जन से अधिक गांवों के मछुआरों की आजीविका पर और जैव विविधता के लिए खतरा साबित होगा।

दरअसल, समुद्र की इस पट्टी पर चट्टानें हैं इसलिए मछली की कई प्रजातियां प्रजनन के लिए यहां आती हैं। यही वजह है कि बंदरगाह बनने के बाद आने वाले समय में ऐसी मछलियों की प्रजनन प्रक्रिया और उनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी आशंका यह है कि मालवाहक नावों से निकलने वाला ज्वार का पानी खाड़ी क्षेत्र में घुसपैठ करेगा और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाएगा। परियोजना विरोधियों का मानना है कि कई किलोमीटर लंबा तटबंध बनाने से समुद्र का जल स्तर बढ़ जाएगा और इसका असर समुद्र के किनारों पर पड़ेगा। अर्नाला मच्छीमार संस्था के उपाध्य्क्ष हिराजी तारे बताते हैं, "इससे मछली पालन का पूरा व्यवसाय ध्वस्त हो जाएगा, मछुआरे भाग जाएंगे और पूरे इलाके की समृद्ध खेती खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, बंदरगाह के लिए बड़ी संख्या में कंटेनर यार्ड बनाए जाएंगे, विदेशियों को बंदरगाह में काम करने के लिए भुगतान किया जाएगा, इससे इस इलाके की संस्कृति बिगड़ेगी।" वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस परियोजना को लेकर उनसे कोई राय नहीं ली गई है। इनका यह भी कहना है कि पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन संतोषजनक ढंग से नहीं किया गया है।

बंदरगाह के विरोध में पूरे जगह-जगह बंद आयोजित किए जा रहे हैं। तस्वीर: सोशल मीडिया से

एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वर्ष 1991 से इस पूरे क्षेत्र को पर्यावरण की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। इसकी वजह से यहां विकास से जुड़ी कई परियोजना पहले से ही लंबित हैं। हालांकि, बंदरगाह परियोजना को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इसे 'उद्योग' के रूप में नहीं गिनने का फैसला लिया है। इसके अलावा, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) प्रक्रिया में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन को अनुमति देने के लिए भी उसे मौलिक रूप से बदल दिया गया है। वहीं, प्रस्तावित बंदरगाह के लिए नियमों के लिए दी जा रही ढील का शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायकों ने विरोध किया है।

इस बंदरगाह के विरोध के लिए स्थानीय स्तर पर आंदोलन शुरू हो चुका है। एक स्थानीय निवासी नरेन्द्र पाटिल बताते हैं, "यहां के लोगों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर एंटी पोर्ट जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यहां के किसानों और मछुआरों को स्थानीय व्यापारियों का भी साथ मिल रहा है।" वहीं, इस परियोजना का विरोध करने वाले कई कार्यकर्त्ताओं का कहना है कि जब राज्य सरकार ने केंद्र की प्रस्तावित मेट्रो कार शेड परियोजना को पर्यावरण की दृष्टि से प्रतिकूल मानते हुए इसे रोकने का मन बना लिया है तो यही पक्ष उसे इस परियोजना के तहत भी लेना चाहिए। अब देखना यह है कि पर्यावरण के मुद्दे पर स्थानीय लोगों का साथ देने का दावा करने वाली राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है?

(शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Maharastra
Golden Belt
Port construction
farmers protest
Fishermen and farmers protest
Jawaharlal Nehru Port Trust

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

जीत कर घर लौट रहा है किसान !

किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत , 11 को छोड़ेंगे मोर्चा


बाकी खबरें

  • Iran
    प्रबीर पुरकायस्थ
    ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा
    21 Feb 2022
    वाशिंगटन की मूर्खता सबसे कठोर परमाणु समझौते से बाहर निकलना था, जिस पर कोई देश भी सहमत हो सकता था। ईरान अभी भी उन पुरानी शर्तों में से अधिकांश को स्वीकार कर सकता है, लेकिन जो कुछ उन्नत क्षमताएं इसने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    इस साल रेड बुक्स डे (21 फ़रवरी) पर आप कौन-सी रेड बुक पढ़ेंगे?
    21 Feb 2022
    गोविंद पानसरे की हत्या के कुछ साल बाद, नयी दिल्ली स्थित लेफ़्टवर्ड बुक्स (एक प्रकाशन संस्थान) ने रेड बुक्स डे पर विचार करना शुरू किया। एक ऐसा दिन जब परिवर्तनवादी किताबों और उन्हें तैयार करने वाले…
  • vp
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों थे वी.पी सिंह गठबंधन की सरकार के मज़बूत स्तंभ
    20 Feb 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में नीलांजन बात करते हैं वरिष्ठ पत्रकार देबाशीष मुखर्जी से। देबाशीष ने हाल ही में ही वी पी सिंह पर एक किताब लिखी है. उन्होंने सिंह, गठबंधन सरकार और उसके महत्व…
  • punjab
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022: पंजाब चुनाव में दिखे कई रंग, अगली सरकार ईवीएम में बंद
    20 Feb 2022
    पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए शाम पांच बजे तक 63 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022:  तीसरे चरण की 59 सीटों के साथ यूपी की 172 सीटों का भविष्य ईवीएम में लॉक
    20 Feb 2022
    निर्वाचन आयोग की ओर से अभी शाम 5 बजे तक के आंकड़े जारी किए हैं। जिसके अनुसार शाम 5 बजे तक कुल औसतन मतदान 57.58% रहा। इनमें ललितपुर में सबसे ज़्यादा 67.38 प्रतिशत वोट पड़े जबकि सबसे कम कानपुर नगर में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License