NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र : स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों से लड़ने के लिए दी 'सेल्फ लॉकडॉउन' की सलाह 
महाराष्ट्र में कोविड-19 से संक्रमित होने वाले मरीजों की तादाद में क्यों तेजी से देखी जा रही है। न्यूजक्लिक ने इसकी वजहों को जानने के लिए बहुत सारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत की और आगे के उपायों का आकलन किया। 
अमेय तिरोदकर
06 Apr 2021
महाराष्ट्र : स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों से लड़ने के लिए दी 'सेल्फ लॉकडॉउन' की सलाह 
फोटो सौजन्य: एनडीटीवी 

महाराष्ट्र कोविड-19 के मरीजों की तादाद रविवार 4 अप्रैल को 30 लाख के पार हो गई है, राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पहला मामला 10 मार्च 2020 को सामने आया था। इसके 6 महीने बाद ही कोरोना-पीड़ितों की संख्या 10 लाख से भी अधिक हो गई थी, जबकि इसके अगले 4 महीनों में और 10 लाख लोग संक्रमित हो गए थे। इस साल 2021 की जनवरी से लेकर 4 अप्रैल तक कोरोना-पीड़ितों की संख्या एक बार फिर 10 लाख के ऊपर पहुंच गई है और यह लगातार बढ़ ही रही है।
 
महाराष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में तेजी से हो रही यह बढ़ोतरी सभी के लिए चिंताजनक है।  सरकार ने  इसके मुकाबले के लिए रविवार को नए नियम-कायदों की घोषणा की,  जिसके  परिणाम को हम ‘मिनी लॉकडाउन’ कह सकते हैं। गर्मी के इस दूसरे सीजन को भी कोरोना वायरस के नए संक्रमण की चपेट में आने का डर अब वास्तविक  लग रहा है।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का विश्वास है कि  कोरोना वायरस से संक्रमण की  तादाद अनेक वजहों से बढ़ी हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण भी हैं।  न्यूज़क्लिक ने इस बारे में कुछ डॉक्टर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत की जो इस वायरस से मुकाबले के लिए गठित टास्क फोर्स के हिस्सा हैं और जो इस समस्या को दूसरी तरफ से भी देख पा रहे हैं। 

डॉ गौतम भंसाली मुंबई हॉस्पिटल में प्रैक्टिस करते हैं और वे राज्य सरकार की टास्क फोर्स का भी हिस्सा हैं।  वह मुंबई में सभी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज के लिए बेड सुविधाओं की  देखरेख के प्रभारी हैं।  डॉक्टर भंसाली ने इस मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए एक नया मुहावरा गढ़ा है।  

उन्होंने कहा " स्व-लॉकडाउन एकमात्र उपाय है।  हम लोगों के समुद्र के किनारे या और कहीं भी आने-जाने का दोष केवल सरकार पर ही नहीं मढ सकते।  सरकार उनसे  नहीं कहती कि आप यह करो।  इस कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए लोगों को अपनी गतिविधियों को स्वयं ही नियंत्रित करना है। स्व-लॉकडाउन आवश्यक है।" 

जब डॉक्टर भंसाली से पूछा गया कि कोरोना संक्रमण की बढ़ती तादाद की असल वजह क्या है तो उन्होंने इसे वायरस की दूसरी लहर बताया।  उन्होंने कहा," सभी यूरोपीय देशों ने कोरोना के दूसरी लहर की मार झेली है। चाहे ब्रिटेन हो, इटली, स्पेन या जर्मनी हो।  इस लिहाज से हम उनसे दो से तीन महीने पीछे हैं, कोरोना की पहली और दूसरी लहर, दोनों ही हिसाब से।" 

डॉक्टर भंसाली ने कहा कि महाराष्ट्र और केरल में यह ट्रेंड हम इसलिए पहले देख रहे हैं, क्योंकि ये दोनों राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरे जुड़े हुए हैं। "चाहे महाराष्ट्र हो या केरल, आप यहां ज्यादा मरीज पाएंगे, इसलिए कि इन दोनों राज्यों के पास बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय परिवहन से जुड़ने के अनेकानेक संसाधन हैं।  यही वजह है कि हम यहां ज्यादा मरीज देखते हैं।  हालांकि,  यह ट्रेंड जल्द ही पूरे देश में देखा जाएगा।  दिल्ली में पहले कुछ सैकड़ों की तादाद में मामले सामने आए थे लेकिन पिछले दो दिनों में संक्रमित लोगों की संख्या हजार पहुंच गई है। वायरस फिर से फैल रहा है"।

डॉक्टर भंसाली ने मुंबई के  आंतरिक हालात के बारे में भी बताया।  उन्होंने कहा, " मुंबई में पिछले साल पहली बार  लॉकडाउन लगा था, जिसके अच्छे नतीजे सामने आए थे।  लेकिन आप एक महानगर को  सदा के लिए बंद तो नहीं रख सकते। 

जीने के लिए लोगों को काम करने की जरूरत होती है,  हमने देखा इस दौरान बाजारों में लोगों की बेतहाशा भीड़ थी। इसने  अनेक स्तरों पर कोविड-19 का संक्रमण फैलाया। हम लोग पहले रोजाना 10 हजार से लेकर 14 हजार लोगों के सेम्पल की जांच भी कर रहे थे।  अब इसकी संख्या बढ़कर 50,000 हो गई है।  यह भी एक कारण है,  जिसमें लोगों के अधिक संक्रमित होने की संख्या का हमें पता चल रहा है।" 

डॉक्टर मंदार कुबल  ने पिछले एक साल में कोविड-19 से संक्रमित हजारों लोगों का इलाज किया है।  वह पूरे मुंबई में  अनेकानेक डॉक्टरों से इस बारे में नियमित स्तर पर विचार विमर्श करते रहे हैं।  उन्होंने बताया, "कोविड-19 के  संक्रमण  में मौजूदा वृद्धि दर  चौतरफा शिथिलता बरतने का नतीजा है।  बाजार में जैसे ही इसकी वैक्सीन आई  और मरीजों की तादाद घटनी शुरू हुई  तो लोगों ने सोच लिया कि अब तो खतरा टल गया है।  लिहाजा,  व्यापक स्तर पर लोगों ने मॉस्क लगाना छोड़ दिया, बाजारों में भीड़ बेतहाशा बढ़ गई और जीवन पटरी पर लौट आया।  लेकिन वायरस अभी भी मौजूद है।  यही सब वजह है, जिनसे कि हम संक्रमित मरीजों की तादाद में तेजी देख रहे हैं।"

डॉक्टर मंदार मानते हैं कि सरकार का घोषित नया नियम-कायदा फिलहाल आवश्यक है। आगे उन्होने कहा " मैं सोचता हूं कि लोगों की गतिविधियों के संदर्भ में नए नियमन या प्रतिबंध राज्य की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में संतुलन बैठाने का एक प्रयास है। राज्य सरकार की टास्क कमेटी को रोजाना स्थिति का मूल्यांकन कर उसके मुताबिक नियमन और कड़ा करने या उसमें कुछ छूट देने पर विचार करती है। किंतु मैं सोचता हूं कि  वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लोगों को इन नियमों का पालन करना चाहिए।  इस स्थिति से निपटने का कोई एकमात्र उपाय नहीं है।" 
 
समस्या केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं है,  यह राज्य के अन्य हिस्सों, जैसे पुणे, नागपुर और नांदेड़ में भी मरीजों की तादाद में तेजी से वृद्धि होती देखी गई है।  राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की तादाद की 35 फीसदी अकेले मुंबई में है,  जबकि पुणे में 24 फ़ीसदी,  नागपुर में 18 फीसदी और नांदेड़ में 12 फीसदी है। राज्य के औरंगाबाद, नासिक, अमरावती, कोल्हापुर और  अन्य शहरों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। 

" ये सभी महाराष्ट्र के औद्योगिक शहर हैं। इनमें परिवहनों की आवाजाही, लोगों के जुटान जैसी गतिविधियां बहुत होती हैं। राज्य के अनेक हिस्सों के लोगों की यहां लगातार आवाजाही होती रहती है। इसीलिए हम इन शहरों में भी कोरोना पीड़ितों की संख्या में इजाफा होते देख रहे हैं।" यह बात राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कही। उन्होंने आगे कहा,"लेकिन पिछले साल और इस वर्ष की स्थिति में एक अंतर है।  हम पहले की तुलना में आज अधिक संसाधन से लैस हैँ। डॉक्टर प्रशिक्षित हैं, दवाओं जैसे सहायक कारक हैं और ऑक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में सुलभ है। इस लिहाजन, पिछले वर्ष की तुलना में इस साल कोरोना से होने वाली मृत्यु दर में गिरावट है।  हमारा फोकस इस दर में और गिरावट लाने का है।" 

न्यूज़क्लिक  ने महाराष्ट्र में निगरानी अधिकारी डॉक्टर प्रदीप आवटे से भी बातचीत की जो संक्रमण-पीड़ित रोगों की देखभाल के प्रभारी हैं। उन्होंने बताया,"जनवरी और फरवरी महीने के दौरान पूरे राज्य में वैवाहिक समारोहों की धूम रही थी। साथ ही, राज्य के 15,000 गांवों में ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे।  इन अवसरों पर जमा होने वाली भीड़ का वायरस के प्रसार पर बड़ा असर पड़ा था। फिर नागपुर और पुणे  के तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट भी हो गई।  इस समय के दौरान लोगों के जुटान  में  ढील भी दे दी गई थी।  इन्हीं सब कारणों से हम वायरस को तेजी से बढ़ता हुआ देख रहे हैं।" डॉक्टर आवटे ने  बताया कि वायरस के विभिन्न संस्करणों के अन्य कारण हैं। "इनको लैब में जांच करने की जरूरत है।  परंतु मेरा विश्वास है कि यह कई कारणों में से एक कारण हो सकता है।"

डॉक्टर आवटे के मुताबिक,  वायरस से मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार को अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाने की आवश्यकता है। "हमारा दृष्टिकोण फिलहाल अस्पताल-केंद्रित है।  किंतु इसको बदलकर सर्वेक्षण-केंद्रित करने की आवश्यकता है।  वायरस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा सर्वेक्षण करने की जरूरत है। अगर हमने ऐसा किया तो हमारे अस्पताल पर कोरोना मरीजों के लेकर दबाव नहीं रहेगा।" 

अब तो यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है।  सामाजिक जुटान के विरुद्ध कड़े नियमों के क्रियान्वयन और मरीजों से संबंधित त्वरित जानकारी तथा आम लोगों का ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण, वायरस  के प्रसार की  रफ्तार को कम करने में मददगार होगा। सरकार को इस  लक्ष्य को हासिल करने के लिए संकल्पित होना ही होगा।  

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Maharashtra: Health Experts Call for 'Self Lockdown' to Stem COVID-19 Rise

COVID-19
Maharashtra Corona
COVID Maharashtra
Covid Vaccine
Mumbai
Pune
nagpur

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License