NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
मज़दूर-किसान
भारत
इस बार हापुस आम पर भी कोरोना की मार! उत्पादक किसानों को भारी नुक़सान
पहले मौसम की मार और अब कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण रखने की कोशिशों के चलते निर्यात प्रभावित होने से हापुस उत्पादक किसानों को इस साल काफी नुक़सान उठाना पड़ रहा है।
शिरीष खरे
13 Apr 2021
हापुस आम
कोंकण के हापुस आमों की सबसे पहले बाजारों में आवक होती है और यहां के इन आमों की सबसे अधिक मांग सिंगापुर, मलेशिया और खाड़ी के देशों में होती है। फोटो साभार: सोशल मीडिया

रत्नागिरी: महाराष्ट्र के कोकण अंचल में प्रसिद्ध हापुस आमों का कारोबार कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गया है। इसके पहले बरसात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण इस वर्ष हापुस आमों की पैदावार में भी गिरावट आई है। फिलहाल कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण रखने की कोशिशों के चलते विदेशी विमान सेवाएं प्रभावित हुईं हैं जिससे हर वर्ष बड़ी मात्रा में होने वाले हापुस आमों का विदेशी निर्यात में भी कमी आ रही है।

इसके पीछे वजह यह है कि विदेशी यात्रा विमानों से माल अन्य देशों में पहुंचाना इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए सस्ता पड़ता है। लेकिन, इसके उलट यदि हापुस कारोबारी अपना माल, मालवाहक विमानों से विदेश पहुंचाएंगे तो यह सेवा उनके लिए महंगी पड़ेगी। ऐसे में इस बार हापुस आमों का विदेशी निर्यात अपेक्षा से काफी कम हो गया है। इसका प्रभाव कारोबारियों के साथ-साथ हापुस उत्पादक किसान और बागवानों पर भी पड़ रहा है।

हापुस की पैदावार में किस हद तक गिरावट

महाराष्ट्र में रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले हापुस आम की पैदावार के प्रमुख क्षेत्र हैं। इस वर्ष अधिक बरसात और तपिश के कारण हापुस आमों की पैदावार प्रभावित हुई है। इस बारे में सिंधुदुर्ग जिले के देवगड गांव के एक हापुस आम उत्पादक किसान राकेश वडगेकर बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल हापुस आमों की संख्या 40 प्रतिशत से भी ज्यादा घट गई है। वजह यह है कि इस साल मार्च से ही कई स्थानों पर तापमान 34 से 42 डिग्री तक रहा है। हापुस ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पाता है और पकने से पहले ही पेड़ से टूटकर नीचे गिर जाता है।

राकेश के मुताबिक, "पिछले साल मेरे सात सौ पेड़ों में चार से पांच हजार तक आम हुए थे। इस साल दो से ढाई हजार तक ही आम होंगे। पिछले साल से आमदनी भी करीब आधी घट सकती है। हालांकि, इस समय 200 रुपए किलो के हिसाब से आम बिक रहा है, लेकिन पैदावार काफी कम होने से नुकसान तो उठाना ही पड़ेगा। फिर मई महीने में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से बाजार में आने वाले आमों की आवक काफी बढ़ जाती है, इसलिए अपने आम का दाम नीचे आ जाएगा।"

बता दें कि हापुस कीमत की दृष्टि से देश के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। कोल्हापुर में हापुस आम के निर्यातक कारोबार नंदकुमार वलांजु इस बारे में बताते हैं, "कोंकण के आम की विशेषता यह है कि यह फरवरी-मार्च में ही आ जाता है। इसलिए देश-विदेश में आम के शौकीन इसकी ज्यादा से ज्यादा कीमत देकर इसे खरीदते हैं। फिर यह पकने के हफ्ते भर तक भी खराब नहीं होता है और इसलिए निर्यात के लिहाज से भी अच्छा होता है। सौ से तीन सौ ग्राम तक का एक हापुस आम केसरी रंग का होता है और स्वाद में भी अत्यंत मीठा होता है।

विदेशों में निर्यात न होने से सबसे ज़्यादा घाटा

दकुमार हापुस आमों के निर्यात का गणित समझाते हुए बताते हैं कि आमतौर पर हर वर्ष कोंकण के हापुस आमों से होने वाली कुल आमदनी का 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी, एशियाई, यूरोपीय और अमेरिका महाद्वीपों के कई देशों के निर्यात से प्राप्त होता है। जाहिर है कि हापुस आमों का जितना ज्यादा विदेशी निर्यात होता है उतना ज्यादा मुनाफा इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारी, किसान और बागवानों को मिलता है और उनके हाथों में अधिक से अधिक पैसा आता है।

हालांकि, कोंकण के प्रसिद्ध हापुस आमों की आवक बाजार में इस समय चालू है। इस वर्ष फरवरी के दूसरे सप्ताह से बाजार में हापुस आम काफी कम मात्रा में आए, लेकिन 15 मार्च के बाद बड़ी संख्या में इनकी बिक्री चल रही है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हापुस आमों का वितरण करने के लिए किसानों का माल कोंकण से पहले राज्य की राजधानी मुंबई स्थित एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समिति) थोक मंडियों के माध्यम से खरीदी करके संग्रहित किया जाता है। इसके बाद यहां से देश के विभिन्न भागों में हापुस आम पहुंचाया जाता है। मुंबई से विदेशों में सबसे ज्यादा हापुस आमों की बिक्री समुद्री मार्गों से जहाजों के जरिए सऊदी अरब, आबू धाबी और दुबई में किया जाता है। लेकिन, इस वर्ष फरवरी से इन देशों के लिए होने वाले हापुस आमों का निर्यात काफी सीमित हो चुका है। इसके बाद हापुस आमों का सबसे अधिक निर्यात सिंगापुर और मलेशिया जैसे एशियाई देशों में होता है। खाड़ी और एशियाई देशों के बाद यूरोपीय और अमेरिका के कई देशों में कोंकण के आमों की बड़ी मांग होती है।

इसलिए विदेशी निर्यात से जुड़े कारोबारी किसानों से उच्च कोटि का माल लेकर उसे ऊंची कीमतों पर विदेशों में बेचते हैं। नवी मुंबई में हापुस आमों के निर्यात से जुड़े कारोबारी युनूस बागवान के मुताबिक, "यात्री विमान से विदेशों में हापुस आम पहुंचाने पर निर्यातक कारोबारी को प्रति एक दर्जन माल पर 60 से 65 रुपए किराया देना पड़ता है। लेकिन, यही माल यदि वह मालवाहक विमान से भेजे तो उसके किराए की लागत प्रति एक दर्जन हापुस आमों पर दोगुनी या उससे भी ज्यादा यानी 120 से 140 रुपए तक हो जाती है। इसलिए कोरोना-काल में  विदेशी यात्रा विमान सेवा प्रभावित होने से निर्यात से जुड़े कई कारोबारी मालवाहक विमानों से हापुस आमों का माल पहुंचाने को लेकर उत्साहित नहीं हैं।"

देखा जाए तो पिछले वर्ष भी कोरोना लॉकडाउन के कारण कोंकण के हापुस आम उत्पादक किसान और बागवानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। तब उन्हें राज्य और राज्य के बाहर हापुस आमों की मार्केटिंग खुद करनी पड़ी थी। उस समय हापुस आम उत्पादक और बागवानों को महाराष्ट्र राज्य विपणन निगम ने सहायता प्रदान की थी।

इस बारे में सिंधुदुर्ग के हापुस उत्पादक किसान राकेश वडगेकर कहते हैं, "पिछली बार फरवरी-मार्च तक इस किस्म के आम की एक बड़ी संख्या का निर्यात किया जा चुका था। देखें तो इस वर्ष भी कई संगठनों ने हापुस आमों की मार्केटिंग को लेकर कुछ योजनाएं बनाई हैं, लेकिन देश में विमान सेवा प्रभावित होने से हापुस आम से सीधे जुड़े उत्पादक और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।" राकेश साथ ही यह भी मानते हैं कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन उत्पादक और कारोबारियों को हो रहा है जो हापुस आमों की ही खरीदी-बिक्री पर निर्भर हैं और जिनकी ज्यादा कमाई हापुस आमों के विदेशी निर्यात से जुड़ी है।

अंत में यूनुस बागवान बताते हैं, "कोरोना के कारण बड़े पैमाने पर होने वाला निर्यात अब बहुत सीमित हो गया है। हापुस आमों का निर्यात इस बार बहुत ज्यादा घट गया है। खाड़ी देशों में निर्यात करने से हमें सबसे ज्यादा मुनाफा होता था, लेकिन इस साल वहां से भी मांग कम हो गई है। फिर विमान परिवहन की लागत कुछ दिनों में फिर बढ़ सकती है। कारण यह है कि किराया बढ़ाया जा सकता है। खाड़ी के अलावा अन्य देशों की भी बात करें तो सभी देशों से इस साल हापुस आमों की मांग घटी है। इसलिए यह साल हमारे लिए ठीक नहीं चल रहा है।"

Coronavirus
Maharashtra
Ratnagiri
Alphonso
Ratnagiri Alphonso Mango
Hapus Aam
हापुस आम
कोरोना

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : "हम सामईं पे क़हर न ढाएँ जहां-पनाह..."
    17 Oct 2021
    इतवार की कविता में आज पढ़िये शायर अहया भोजपुरी की 2 ग़ज़लें।
  •  Atikur Rahman
    ज़ाकिर अली त्यागी
    पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन के साथ, UAPA में जेल में बंद अतीकुर्रहमान के परिवार की कहानी
    17 Oct 2021
    हाथरस में दलित युवती के बलात्कार और उसकी हत्या के मामले की कवरेज पर निकले पत्रकार सिद्दीक कप्पन के साथ-साथ मथुरा पुलिस ने कप्पन के 3 अन्य साथी अतीकुर्रहमान, टैक्सी चालक मोहम्मद आलम और मसूद अहमद को भी…
  • Rajnath Singh
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: झूठ बोलो और वजीरों से भी झूठ बुलवाओ
    17 Oct 2021
    एक और 'सत्य' है, जो अभी सामने आना बाकी है। गांधी जी ने सावरकर को अंग्रेजों से माफ़ी मांगने की सलाह नेहरू के कहने पर दी थी। आखिर हर दोष अंततः नेहरू पर ही तो आना चाहिए न।
  • Aparajita Sharma
    सोनिया यादव
    मुसीबतों से कभी नहीं हारने वाली अपराजिता, 'अलबेली' बनकर हमेशा के लिए अमर हो गईं
    17 Oct 2021
    अपने किरदारों के जरिए लोगों के दिल में जगह बनाने वाली अपराजिता, बिना किसी हो-हल्ला के प्रतिरोध की एक बुलंद आवाज़ बन गईं थीं। उनका व्यक्तित्व जितना चुलबुला था उनकी कलम उतनी ही गंभीर।
  • Cuba Vaccine
    पीपल्स डिस्पैच
    क्यूबा: 60 फ़ीसदी आबादी का पूर्ण टीकाकरण, बनाया रिकॉर्ड
    17 Oct 2021
    क्यूबा के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, 12 अक्टूबर तक 65,00,743 क्यूबाई लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। यह टीकाकरण क्यूबा ने अपनी वैक्सीन से ही किया है। कुल मिलाकर क्यूबा की आबादी के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License