NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
रंगमंच
भारत
राजनीति
कोरोना-संकट: राजा-रानी की भूमिकाएं निभाने वाले तमाशा कलाकार रास्ते पर
मुंबई में बॉलीवुड ग्लैमर से कोसों दूर महाराष्ट्र के ग्रामीणों का मनोरंजन करने वाले तमाशा कलाकारों की स्थिति कोरोना महामारी और पाबंदियों के कारण बदतर हो चुकी है। ऐसे में उन्होंने इस मुसीबत से उबरने के लिए सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
शिरीष खरे
16 May 2021
कोरोना-संकट: राजा-रानी की भूमिकाएं निभाने वाले तमाशा कलाकार रास्ते पर
तमाशा कलाकारों ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आने से पहले राज्य सरकार से सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन इन दिनों हालात फिर मुश्किलों से भरे हैं। फाइल फोटो, साभार: राज्य ढोलक मंच तमाशा महोत्सव, मुंबई

पुणे/सांगली (महाराष्ट्र): कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण महाराष्ट्र की लोककला तमाशा की मंडलियों और उनमें कार्य करने वाले पारंपरिक कलाकारों की माली हालत बिगड़ती जा रही है। महाराष्ट्र में हर साल गुड़ी पर्वा (अप्रैल मध्य) से बौद्ध पूर्णिमा (26 मई) तक गांव-गांव यात्राएं और जात्रा यानी मेलों का आयोजन होता है। इस दौरान जगह-जगह तमाशा आयोजित किए जाते हैं। लेकिन, कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी लगाई गई रोक के कारण यह लगातार दूसरा साल है जब पूरे राज्य में तमाशा के आयोजन पूरी तरह से बंद हैं। बता दें कि पूरे राज्य में लगभग 85 छोटे-बड़े तमाशा मंडल हैं जिनमें हजारों की संख्या में लोक कलाकार काम करते हैं।

इस बारे में अखिल भारतीय लोक कलाकार मराठी तमाशा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष संभाजी राजे जाधव बातचीत में इस लोककला शैली की दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताते हैं। उनके मुताबिक पिछले साल भी ऐन मौके पर तमाशा के सभी शो रद्द कर दिए गए थे, जिसके कारण कई तमाशा मंडल प्रबंधकों की कमाई रुक गई थी और उन्होंने साहूकारों से कर्ज ले लिया था। लेकिन, इस वर्ष फिर सीजन के दौरान ही महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण में तेजी से प्रसार होने के कारण तमाशा की प्रस्तुतियों पर रोक लगी हुई है।

कई तमाशा कलाकार बताते हैं कि इस लोककला के अलावा उन्हें आजीविका से जुड़े दूसरे कार्य नहीं आते हैं। फाइल फोटो साभार: राज्य ढोलक मंच तमाशा महोत्सव, मुंबई

संभाजी राजे जाधव बताते हैं, "हम पर कर्ज का ब्याज लगातार बढ़ रहा है। हमें लगा था कि जब स्थितियां सामान्य होंगी तो तमाशा फिर से आयोजित होंगे और हम साहूकारों का कर्ज उतार देंगे। वहीं, तमाशा कलाकारों की हालत तो कहीं अधिक खराब हो चुकी है। कई कलाकार गांव-गांव में मजदूरी कर रहे हैं तो कई साग-सब्जियां बेच रहे हैं, पर अभी सरकार की सख्ती से आम जन के लिए कोई भी कामकाज करना आसान नहीं रह गया है।"

एक समय था जब गांव-गांव में पूरी रात तमाशा की प्रस्तुतियां चलती थीं, लेकिन फिर शासन स्तर पर रात में समय-सीमा और अन्य शर्तों के कारण तमाशा का आकर्षण भी कम होता चला गया। इसके अलावा मनोरंजन के आधुनिक माध्यमों के प्रति आकर्षण बढ़ने के कारण भी इसकी लोकप्रियता में गिरावट आती गई। इन सबके बावजूद तमाशा मंडल और उसमें कार्य करने वाले कलाकारों के प्रयासों से यह लोककला शैली ग्रामीण अंचल में अस्तित्व बनाए हुए थीं। लेकिन, पिछले साल कोरोना संक्रमण की पहली लहर आई तो कई तमाशा मंडलों ने साहूकारों से इसलिए कर्ज लिया कि वे अपने कलाकारों को कुछ पैसा दे सकें जिससे कलाकारों की टीम न टूटे। लेकिन, अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कहीं अधिक खतरनाक है और इसकी वजह से सामान्य स्थितियां बनने को लेकर जताई जा रही अनिश्चितता ने कई तमाशा कलाकारों की चिंता बढ़ा दी है।

संभाजी राजे जाधव के मुताबिक राज्य सरकार को चाहिए कि वह महामारी की इस विकट स्थिति को ध्यान में रखते हुए तमाशा लोक कलाकारों के लिए राहत मुआवजा की घोषणा करें। ऐसा इसलिए कि कई तमाशा कलाकार कोरोना संक्रमण के कारण मर चुके हैं तो उनके परिजनों को कुछ वित्तीय मदद मिल जाएगी, जबकि कई कलाकारों ने हताशा की हालत में आत्महत्याएं की हैं। इसी तरह, कई कलाकार छोटे-मौटे काम करके किसी तरह से गुजारा कर तो रहे हैं, लेकिन उनके लिए रोज कमाना और रोज खा पाना मुश्किल हो रहा है।

संभाजी राजे जाधव कहते हैं, "मराठी सिनेमा और नाटक के लिए यदि सरकार अनुदान दे सकती हैं तो तमाशा मंडलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी अनुदान दे सकती है, मगर तमाशा लोक कलाकारों की हालत इतनी बुरी होने के बाद भी वे उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं, जबकि लगातार दूसरे साल भी तमाशा न होने से तमाशा कलाकारों को सरकार से वित्तीय मदद मिलनी ही चाहिए, तभी वे फिर से खड़े हो सकेंगे।"

सांगली जिले के मिरज शहर में रहने वाले 66 साल के एक बड़े तमाशा कलाकार दमोदर कांबले बातचीत में बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान उनसे अनुभव बहुत कड़वे रहे। इस बारे में दमोदर कांबले बताते हैं कि आखिरी बार साल 2019 में उन्होंने सांगली और इस क्षेत्र के आसपास कवलपुर, सवलाज, बस्तवडे, सावर्डे, चिंचणी, कवडेमहाकाल, बोरगाव, नागज, घाटनांद्रे, इरली, तिसंगी और पाचगाव में आयोजित कई तमाशा आयोजनों में भाग लिया था। वे अपना डर साझा करते हुए कहते हैं कि इस साल का सीजन भी ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे गुजर गया और तमाशा के कार्यक्रम नहीं हुए तो उनके लिए भी घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, उनकी उम्र को देखते हुए उनके कई साथी कलाकार उन्हें कोरोना से बचने की नसीहत देते हुए भी नहीं थक रहे हैं। इस तरह, उन्हें रोजीरोटी की चिंता भी है और साथ ही उन पर कोरोना से बीमार नहीं होने का दबाव भी है।

तमाशा की नर्तकियों को भी उम्मीद है कि जल्दी स्थितियां सामान्य होंगी तो वे अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी। फाइल फोटो, साभार: संजोग भोसले

देखा जाए तो पश्चिम महाराष्ट्र के सांगली जिले में हर वर्ष लोक नाट्य तमाशा मंडल का कार्यालय गुड़ी पर्वा (मार्च-अप्रैल) त्योहार में खुलता है। इसके साथ ही सांगली, सतारा, कोल्हापुर और सोलापुर से लेकर पड़ोसी राज्य कर्नाटक के बेलगाम, वीजापुर और बागलकोट जिलों में जात्रा यानी मेले और यात्राएं शुरू हो जाती हैं। इस दौरान सभी तमाशा कार्यक्रमों की रुपरेखा सांगली जिले के वीटा शहर में तय की जाती है। इसके लिए सभी तमाशा मंडलों के प्रतिनिधि वीटा आते हैं। वीटा स्थित तमाशा मंडल के प्रबंधक के परामर्श से इस दौरान सुपारी ली जाती है। यानी तमाशा आयोजन के लिए आयोजकों से एक निश्चित राशि ठहराई जाती है। इसके तहत जात्रा में रात को होने वाले मुख्य आयोजन के अलावा अगले दिन कुश्ती का आयोजन भी शामिल होता है।

इसके बाद नर्तकियों के मुकाबले से लेकर अन्य गतिविधियों के लिए आयोजक और तमाशा मंडलियों के बीच समझौते किए जाते हैं। समझौता तय होने पर तमाशा मंडल आयोजक से निश्चित राशि लेना स्वीकार करता है। इस तरह, वह आयोजक से 25 हजार से लेकर 60 हजार रुपये तक की सुपारी उठाता है। लेकिन, अफसोस कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए बरती जा रही सख्ती को देखते हुए फिर से इस तरह के समझौते हुए ही नहीं।

इसी तरह, एक तमाशा मंडल में काम करने वाली महिला कलाकार छाया नगजकर (35 वर्ष) बताती हैं कि पारंपरिक तमाशा में गण, गवलण, बतावणी और वागनाट्य प्रमुख होते हैं और आयोजक इस तरह के तमाशों की मांग तमाशा मंडलों से करता है। बीते कुछ वर्षों से यह देखने को भी मिला है कि दर्शक तमाशा में नए फिल्मी गानों की मांग भी करता है। इस दौरान कलाकार शरीर पर नऊवारी (मराठी शैली की विशेष साड़ी) और पैरों में पांच-पांच किलो के घुंघुरु पहनकर मंच पर अपनी हुनर का जादू बिखेरता है।

छाया नगजकर अपनी प्रतिक्रिया देती हुई कहती हैं, "तमाशा में लोगों की मांग के हिसाब से हमें लगातार अभ्यास करना पड़ता है। घर पर पड़े वाद्य-यंत्रों में जंग न लग जाए, इसलिए कलाकार उन्हें खाली समय में बजाते भी हैं और भूखे रहकर कई बार तमाशे का अभ्यास करते रहते हैं, मगर कोरोना का समय कुछ लंबा ही खिंच गया है, इसलिए कलाकारों का धैर्य जवाब देने लगा है।"

तमाशा लोककला शैली के जानकार भास्कर सदाकले मानते हैं कि कोरोना-काल में हालत यह हो चुकी है कि तमाशा के मंच पर सुंदर कपड़े पहनने वाला राजा हकीकत में भिखारी बन चुका है। उनके मुताबिक, "यही हालत नर्तकियों की भी हो चुकी है। जबकि, जरूरत है कि एक लोक कलाकार को सम्मानजनक तरीके से जीने के अवसर तलाशने की। वास्तव में तमाशा मराठी की एक अद्भुत लोक नाट्य विधा है जिसे कोरोना के समय भी जिंदा रहना चाहिए, फिर भी दुखद कि ऐसी कला को जीवित रखने वाले जमीनी कलाकारों को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए कहीं कोई कुछ खास कोशिश नहीं हो रही है।"

(पुणे स्थित शिरीष खरे स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Maharashtra
artist
Pageant artists
unemployment

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Inflation
    सौम्या शिवकुमार
    महंगाई "वास्तविक" है और इसका समाधान भी वास्तविक होना चाहिए
    01 Mar 2022
    केंद्रीय बैंकों द्वारा महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दर को प्रबंधित किया जाता है, लेकिन यह तरीक़ा अप्रभावी साबित हुआ है। इतना ही नहीं, इस उपकरण का जब इस्तेमाल किया जाता है, तब यह भी ध्यान नहीं रखा…
  • russia ukrain
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस घटनाक्रम: रूस को अलग-थलग करने की रणनीति, युद्ध अपराधों पर जांच करेगा आईसीसी
    01 Mar 2022
    अमेरिका ने जासूसी के आरोप में 12 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की है। रूस की कई समाचार वेबसाइट हैक हो गईं हैं जिनमें से कुछ पर रूस ने खुद रोक लगाई है। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र के दुलर्भ…
  •  Atal Progress Way
    बादल सरोज
    अटल प्रोग्रेस वे से कई किसान होंगे विस्थापित, चम्बल घाटी का भी बदल जाएगा भूगोल : किसान सभा
    01 Mar 2022
    "सरकार अपनी इस योजना और उसके असर को छुपाने की कोशिश में है। ना तो प्रभावित होने वाले किसानों को, ना ही उजड़ने और विस्थापित होने वाले परिवारों को विधिवत व्यक्तिगत नोटिस दिए गए हैं। पुनर्वास की कोई…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर एक लाख से कम हुई 
    01 Mar 2022
    पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना के क़रीब 7 हज़ार नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 92 हज़ार 472 हो गयी है।
  • Imperialism
    प्रभात पटनायक
    साम्राज्यवाद अब भी ज़िंदा है
    01 Mar 2022
    साम्राज्यवादी संबंध व्यवस्था का सार विश्व संसाधनों पर महानगरीय या विकसित ताकतों द्वारा नियंत्रण में निहित है और इसमें भूमि उपयोग पर नियंत्रण भी शामिल है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License