NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी को फिर मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की मज़बूती दर्शाता है या मजबूरी?
योगी आदित्यनाथ जब दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तो भाजपा हाईकमान के चेहरे पर बिखरी खुशी कितनी असली थी कितनी नकली? शायद सबसे बड़ा सवाल यही है।
रवि शंकर दुबे
25 Mar 2022
yogi
Image courtesy : The Indian Express

जिस प्रदेश में महंगाई, बेरोज़गारी चरम पर है, शिक्षा और स्वास्थ्य अपनी आखिरी सांसे गिन रहे हैं, अनगिनत गावों में पीने के लिए ढंग का पानी नहीं है। क्या-खाना है, क्या पहनना है इसकी इजाज़त सरकार से लेनी पड़ रही है। उस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जीत का भव्य उत्सव वाकई जनता के विश्वास के साथ बड़ा घात है। इसमें भी सवालों को जन्म देने वाली सबसे बड़ी बात ये है कि ये भव्य उत्सव योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह के लिए मनाया गया।

चुनावी नतीजों को 10 से ज्यादा दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश वासियों को अगर कुछ देखने को मिला तो सड़कों पर पटे भगवा पोस्टर, और एक राजनीतिक दल के लाखों झंडे... बस और कुछ नहीं। जिसमें वोट देने वाली भोली-भाली जनता का फिलहाल कोई रोल नहीं था।

इकाना से पहले ज़बरदस्ती अटल बिहारी बाजपेई का नाम जोड़कर जिस स्टेडियम पर भाजपा ने अपना दावा ठोक दिया था, वहीं से योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कार्यकाल की अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की।

योगी आदित्यनाथ ने भले ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली हो, लेकिन एक सवाल जो पूछना बहुत ज़रूरी है वह यह है कि क्या भाजपा हाईकमान सच में चाहता था कि योगी दोबारा मुख्यमंत्री बनें? अगर यूं कहें कि योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर खड़े होकर भाजपा हाईकमान के लिए मुस्कुराना बेहद आसान था तो शायद ये बेईमानी होगी। दरअसल सच बात तो यह है कि योगी आदित्यनाथ का बढ़ता कद भाजपा के बहुत से बड़े नेताओं के लिए गले की फांस बना हुआ है। लेकिन भाजपा तो सिर्फ एक बोगी है जो दौड़ती ज़रूर है, लेकिन इंजन के पीछे-पीछे। और किसी से छिपा तो है नहीं कि भाजपा का इंजन नागपुर में बैठा संघ है।

संघ को बेहद अच्छी तरह से मालूम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही जनता को आकर्षित करने के मामले में महारथी हों, लेकिन संघ के हिंदू राष्ट्र का सपना वो पूरा नहीं कर सकते। इसके लिए उसे योगी आदित्यनाथ जैसा एक फायर ब्रांड नेता चाहिए जो अपनी हिन्दूवादी छवि के लिए जाना जाता हो।

आपको बताते चलें कि 2025 में संघ के 100 बरस पूरे हो जाएंगे। उससे पहले 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संघ की ओर से भाजपा को एक बार फिर जिताने और योगी आदित्यनाथ को सबसे बड़ा चेहरा बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है। कोई बड़ी बात नहीं है कि संघ के दबाव में भाजपा योगी आदित्यनाथ को आने वाले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री के तौर पर पेश कर दे। क्योंकि जैसे हमने पहले ही बताया है कि योगी आदित्यनाथ फिलहाल वो चेहरा है जो मशहूर नेता भी हैं और कट्टर हिंदू छवि वाले भी।

हिन्दू राष्ट्र की चर्चा हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि बीते कुछ दिनों में ताबड़ताड़ धर्म संसदें हुईं है, जिसमें नफरती भाषणों, स्वतंत्रता सेनानियों, मुसलमानों, विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को खूब अपशब्द बोले गए, यहां तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक को नहीं बख्शा गया। फिर उत्तर प्रदेश के चुनावों में जिस तरह योगी आदित्यनाथ की ओर से साफ-साफ ‘’80-20’’ का इस्तेमाल किया गया, ये भी 2025 के लिए एक संकेत की तरह है।

आपको याद ही होंगे साल 2017 में यूपी विधानसभा के चुनाव... जब अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश के अध्यक्ष थे। उससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की लहर थोड़ी तेज थी। इन तीनों नेताओं ने उत्तर प्रदेश में धुंआधार प्रचार किया और समाजवादी पार्टी को बहुमत के आंकड़े से 47 सीटों पर लाकर पटक दिया। कहा जा रहा था कि इन चुनावों में सबसे ज्यादा मेहनत केशव प्रसाद मौर्य ने की और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की बात चलने लगी। साथ ही साथ मनोज सिन्हा का नाम भी खूब दौड़ा। लेकिन संघ उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में खुद को शून्य नहीं देखना चाह रहा था और राजनीतिक जानकारों के हवाले से बात चली की संघ अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर अपनी एक योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की कमान गोरखपुर में मौजूद गोरखनाथ मंदिर के महंत को सौंपने वाला है। फिर संघ नेतृत्व ने आखिरी वक्त में अपने वीटो का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को सलाह दी कि योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित किया जाए। जिससे मौर्य और सिन्हा दोनों पीछे छूट गए थे और योगी आदित्यनाथ की लखनऊ में आपात लैंडिग हो गई थी। यहां से आप ये भी कह सकते हैं कि संघ योगी को उसी तरह मोदी युग के बाद की भाजपा के शीर्ष नेता के रूप में तैयार कर रहा है जैसे कि वाजपेयी आडवाणी युग की भाजपा के बाद नरेंद्र मोदी को संघ ने आगे किया।

अमर उजाला की एक ख़बर के अनुसार नाम न छापने के अनुरोध के साथ संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि संघ योगी को मोदी का विकल्प नहीं बल्कि उनके बाद की भाजपा के लिए तैयार कर रहा है।

भाजपा का रिमोट अपने हाथ में रखने वाली संघ को कुछ यूं समझ लीजिए कि- 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब सरदार बल्लभ भाई पटेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि 18 महीने के बाद कुछ शर्तें रखी गईं और 11 जुलाई 1949 को प्रतिबंध हटा लिया गया। इस वक्त माधवराव सदाशिव गोलवलकर संघ के प्रमुख थे। उन्होंने पटेल की वो सारी बातें मानी जिसमें कहा गया था कि-

  • संघ अपना लिखित संविधान तैयार करेगा जिसमें लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव होंगे।
  • संघ राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह से दूर रहेगा।

पटेल की मौत के बाद संघ ने उन सारी शर्तों को आग लगा दी जो उसने मानी थी, और लाल कृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी बाजपेई, नितिन गडकरी जैसे तमाम नेताओं को सत्ता की धुरी में लाकर खड़ा कर दिया। इन्ही छलावों का खामियाज़ा देश आजतक भुगत रहा है।

ये कहना भी ग़लत नहीं होगा कि मनमोहन सरकार को रिमोट कंट्रोल सरकार बोलने वाली भाजपा दरअसल पूरी तरह से संघ के कंट्रोल में है। हालांकि भाजपा के अंदरखाने भी कई बड़े नेता हैं जो खुद को आगे करने कोशिश करते हैं लेकिन आखिरकारी संघ का हस्तक्षेप ही आखिरी फैसले के तौर पर होता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश चुनावों के आखिरी वक्त में योगी आदित्यनाथ के पोस्टर उतरवाने के बावजूद उन्हें ही आगे रखा गया। और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की कमान सौंप दी गई।

UttarPradesh
Yogi Adityanath
Chief Minister oath
BJP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    09 Mar 2022
    जो चैनल भाजपा गठबंधन को बहुमत से 20-25 सीट अधिक दे रहे हैं, उनके निष्कर्ष को भी स्वयं उनके द्वारा दिये गए 3 से 5 % error margin के साथ एडजस्ट करके देखा जाए तो मामला बेहद नज़दीकी हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License