NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाषा में भ्रष्टाचार से दुखी होकर चला गया हिंदी का कवि
आज जब मंगलेश जी हमारे बीच नहीं हैं तो अंतिम समय में उनकी क्या मूल चिंताएं रहीं, इसे जानना एक बार फिर ज़रूरी है। आइए सुनते हैं न्यूज़क्लिक को दिया गया उनका अंतिम इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी।  
न्यूज़क्लिक टीम
10 Dec 2020

देश के विख्यात कवि मंगलेश डबराल अपने अंतिम समय में तमाम विवादों में भी घिरे। पहले 2015 में देश में बढ़ते फ़ासीवादी प्रभाव और कन्नड़ साहित्यकार एमएम कलबुर्गी और अख़लाक़ हत्याकांड से दुखी होकर उनका साहित्य अकादमी का पुरस्कार वापस करना दक्षिणपंथी ज़मात को बहुत अखरा और उनके ऊपर तीखे हमले किए गए और पिछले ही साल 2019 में हिंदी भाषा को लेकर उनके द्वारा किए गए एक फेसबुक पोस्ट पर बहुत हंगामा बरपा। लेकिन दरअसल इस हिंदी के कवि की चिंता कुछ और थी। वह भाषा से नहीं भाषा के प्रदूषण, भाषा में भ्रष्टाचार से दुखी था। वह दुखी था कि उसकी प्रिय भाषा जिसे उसने अपना पूरा जीवन दे दिया, इस फ़ासीवाद, इस अतिवाद, इस गुंडई का ठीक से प्रतिकार नहीं कर पा रही। इन्हीं सब सवालों पर हमने उनसे जुलाई, 2019 में एक विस्तृत इंटरव्यू किया। आज जब मंगलेश जी हमारे बीच नहीं हैं तो अंतिम समय में उनकी क्या चिंताएं रहीं इसे जानना एक बार फिर ज़रूरी है। आइए सुनते हैं न्यूज़क्लिक को दिया गया उनका अंतिम इंटरव्यू। 

manglesh dabral
Manglesh Dabral dies
poet
writer

Related Stories

मंगलेश को याद करते हुए

‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित

मन्नू भंडारी; सादगी का गहरा आकर्षण: वो जो खो गया

'मन्नू दी' आप अकेले सफ़र पर निकल गईं: मन्नू भंडारी के नाम सुधा अरोड़ा का पत्र

मैंने बम नहीं बाँटा था : वरवरा राव

नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा

वाजिद अली शाह : रुख़्सत ऐ अहले वतन हम तो सफ़र करते हैं

लेखक को क्या करना चाहिए

यादें; मंगलेश डबरालः घरों-रिश्तों और विचारों में जगमगाती ‘पहाड़ पर लालटेन’

जन्मशतवार्षिकी: हिंदी के विलक्षण और विरल रचनाकार थे फणीश्वरनाथ रेणु 


बाकी खबरें

  • Shatha Odeh
    शिरीन ओदेह
    शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है
    09 Feb 2022
    हेल्थ वर्क कमिटीज़ की निदेशक शता ओदेह जुलाई 2021 से ही जेल में हैं और जेल में रहने के दौरान उन्हें कोविड-19 से भी गुज़रना पड़ा। उनका यह मामला इज़राइल के भेदभावपूर्ण नीतियों की आलोचना करने वाली सभी…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटो में 71,365 नए मामले, 1,217 मरीज़ों की मौत
    09 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 24 लाख 10 हज़ार 976 हो गयी है।
  • journalist
    विजय विनीत
    उत्तराखंड: एआरटीओ और पुलिस पर चुनाव के लिए गाड़ी न देने पर पत्रकारों से बदसलूकी और प्रताड़ना का आरोप
    08 Feb 2022
    "हमारा मोबाइल फोन ही नहीं, रिपोर्टिंग के सभी जरूरी उपकरणों को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने हमारे परिजनों को भी सूचित करने का मौका नहीं दिया। पुलिसिया कार्रवाई के बारे में, हिरासत में…
  • aligarh
    न्यूज़क्लिक टीम
    अलीगढ़ में कमल की ज़मीन तगड़ी, साइकिल की हवा
    08 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने जायज़ा लिया अलीगढ़ के राजनीतिक माहौल का। यह रामजन्मभूमि आंदोलन वाले कल्याण सिंह और RSS के ध्रुवीकरण की कहानी कहता है, साथ ही अलीगढ़ मुस्लिम…
  • Modi
    अजय कुमार
    प्रधानमंत्री का भाषण कच्ची भावनाओं के समंदर पर सवार झूठ के बवंडर जैसा था!
    08 Feb 2022
    हिंदुस्तान को इस बात पर शर्मसार होना चाहिए कि आज़ाद भारत एक ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जिसमें हमारे प्रधानमंत्री खुलेआम झूठ बोलते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License