NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीरः जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई के लिए मीडिया अधिकार समूहों ने एलजी को लिखी चिट्ठी 
मीडिया निकायों ने फहद की पत्रकारिता कार्य के विरुद्ध शुरू की गई सभी पुलिसिया जांच को वापस लेने का भी आह्वान किया। 
अनीस ज़रगर
16 Feb 2022
JK
जम्मू-कश्मीर की फाइल फोटो 

श्रीनगर:  लगभग छह दर्जन से अधिक प्रेस स्वतंत्रता संगठनों, मानवाधिकार संगठनों और विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित अन्य प्रकाशनों ने फहद शाह समेत गिरफ्तार सभी कश्मीरी पत्रकारों की तत्काल रिहाई का आह्वान किया है, जिन्हें अधिकारियों ने इस क्षेत्र में गिरफ्तार किया है। 

इन संगठनों ने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा को एक पत्र भेजा है, जिसमें पत्रकारों की सुरक्षित रिहाई के लिए उनसे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। इनमें एक वेबसाइट कश्मीरवाला के संपादक फहद शाह भी शामिल हैं, जिन्हें 4 फरवरी 2022 को गिरफ्तार किया गया था।

मीडिया निकायों ने फहद की पत्रकारिता से संबंधित कामों को लेकर शुरू की गई सभी पुलिसिया जांच को वापस लेने का भी आह्वान किया है। शाह को पुलवामा पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया गया था, जहां उन्हें उस दिन सबेरे पूछताछ के लिए बुलाया गया था। 33 वर्षीय शाह के खिलाफ प्राथमिकी में देशद्रोह करने, सार्वजनिक उपद्रव को उकसाने वाले बयान देने तथा आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गैरकानूनी गतिविधियों के गंभीर प्रावधान वाले आरोप लगाए गए हैं। 

लेफ्टिनेंट गवर्नर को भेजे पत्र में कहा गया है,"शाह को पूरा दक्षिण एशिया और दुनिया भर में बहुत से लोग सत्यनिष्ठ पत्रकार के रूप में जानते हैं। द नेशन पत्रिका के लिए 2021 के उनके लेख पर मानवाधिकार प्रेस पुरस्कार से नवाजा गया था। जम्मू-कश्मीर की घटनाओं पर उनकी रिपोर्टिंग एक लोक सेवा है, यह कोई जुर्म नहीं है, और इसे भारतीय कानून के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए।" 

एलजी मनोज सिन्हा को चिट्ठी भजने वालों ने फहद शाह के अलावा सज्जाद गुल, आसिफ सुल्तान, और मनन गुलज़ार डार सहित हिरासत में लिए गए अन्य सभी कश्मीरी पत्रकारों की "तत्काल रिहाई" की व्यवस्था करने का भी आग्रह किया है, जो शाह की तरह, आतंकवाद विरोधी या निवारक निरोध कानूनों के तहत जेल गए हैं जो “स्पष्टतया उनके काम के लिए उनसे लिया प्रतिशोध है।" 

फहद शाह के साथ काम करने वाले सज्जाद गुल को जनवरी में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन पर विवादास्पद सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत आरोप लगाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। यूएपीए के तहत गिरफ्तार और निरुद्ध किए गए आसिफ सुल्तान तो 2018 से ही श्रीनगर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। 

लेफ्टिनेंट को भेजी गई चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों ने लिखा है,"प्रेस की स्वतंत्रता और अधिकार समूहों ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्वायत्तता के निरसन के बाद से क्षेत्र में पत्रकारों को हिरासत में लेने और उन्हें धमकी देने की कई घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है। इसे देखते हुए, फहद शाह को एवं मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए अन्य पत्रकारों की रिहाई जम्मू-कश्मीर में पत्रकारिता के पेशे के अपराधीकरण को रोकने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा।“ 

समूहों ने एलजी सिन्हा से आग्रह किया कि वे कश्मीरी प्रेस के सदस्यों को हिरासत में लेने, उनका उत्पीड़न करने और सरकारी प्रतिशोध का शिकार बनाए बिना ही स्वतंत्र रूप से काम करने दें।

एलजी को भेजे पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में आम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, कमेटी अगेंस्ट असॉल्ट ऑन जर्नलिस्ट्स (सीएएजे), कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे), डार्ट सेंटर फॉर जर्नलिज्म एंड ट्रॉमा डिजीपब, इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट, जैकोबिन, जस्टिस फॉर ऑल, यूएसए, पेन शामिल हैं। अमेरिका, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, पुलित्जर सेंटर, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) और साउथ एशियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (SAJA) शामिल हैं। 

टीकेडब्ल्यू वेबसाइट ने बताया कि पुलिस ने सोमवार को फहद शाह की रिमांड सात दिन के लिए बढ़ा दी। शाह की कानूनी टीम अब उनकी जमानत के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) अधिनियम के तहत नामित एक विशेष अदालत में जाएगी।

फहद शाह के वकील उमैर रोंगा ने कहा कि "अदालत के आदेशों की जानबूझकर पूरी तरह से अवज्ञा की गई है। उसके निर्देश के बावजूद सात दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। हम कानून की गरिमा को बनाए रखने के लिए एनआइए अधिनियम के तहत नामित विशेष अदालत में जा रहे हैं। पुलिस की ऐसी मनमानी कार्रवाई निर्दोष लोगों के प्रति न्याय में बाधक है।"

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Media Rights Groups Write to LG Manoj Sinha for Release of Jailed Journalists

Jammu & Kashmir
manoj sinha
Lt Governor
Press freedom
UAPA
South Asian Journalists Association
Srinagar Central Jail
Committee to Protect Journalists
Committee Against Assault on Journalists
Public Safety Actm

Related Stories

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

धनकुबेरों के हाथों में अख़बार और टीवी चैनल, वैकल्पिक मीडिया का गला घोंटती सरकार! 

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा

दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा

नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह


बाकी खबरें

  • भाषा
    श्रीलंका में हिंसा में अब तक आठ लोगों की मौत, महिंदा राजपक्षे की गिरफ़्तारी की मांग तेज़
    10 May 2022
    विपक्ष ने महिंदा राजपक्षे पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला करने के लिए सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उकसाने का आरोप लगाया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''
    10 May 2022
    अपनी बेहतरीन फोटो पत्रकारिता के लिए पहचान रखने वाले दिवंगत पत्रकार दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगियों को ''द पुल्तिज़र प्राइज़'' से सम्मानित किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
    10 May 2022
    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे इस घटना से पहले भड़काऊ भाषण न देते तो यह घटना नहीं होती और यह जघन्य हत्याकांड टल सकता था।
  • विजय विनीत
    पानी को तरसता बुंदेलखंडः कपसा गांव में प्यास की गवाही दे रहे ढाई हजार चेहरे, सूख रहे इकलौते कुएं से कैसे बुझेगी प्यास?
    10 May 2022
    ग्राउंड रिपोर्टः ''पानी की सही कीमत जानना हो तो हमीरपुर के कपसा गांव के लोगों से कोई भी मिल सकता है। हर सरकार ने यहां पानी की तरह पैसा बहाया, फिर भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पाई।''
  • लाल बहादुर सिंह
    साझी विरासत-साझी लड़ाई: 1857 को आज सही सन्दर्भ में याद रखना बेहद ज़रूरी
    10 May 2022
    आज़ादी की यह पहली लड़ाई जिन मूल्यों और आदर्शों की बुनियाद पर लड़ी गयी थी, वे अभूतपूर्व संकट की मौजूदा घड़ी में हमारे लिए प्रकाश-स्तम्भ की तरह हैं। आज जो कारपोरेट-साम्प्रदायिक फासीवादी निज़ाम हमारे देश में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License