NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मिलिए नर्मदा बचाओ आंदोलन के अज्ञात योद्धाओं से
मालाकार ने अपनी ज़िंदगी के 20 साल इस विरोध को दिये हैं। दूसरे साथियों के साथ मिलकर वे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक दिन में लगभग 1,000-1,500 लोगों के लिए खाना बनाते हैं।
काशिफ़ काकवी
22 Nov 2019
NBA

जनता के आंदोलनों और संघर्षों ने भारत को अनगिनत नेता दिए हैं जिन्होंने उनके हितों के लिए अथक संघर्ष किया है। लेकिन, हमें कई नेताओं के उनके व्यक्तिगत योगदान के बारे में कभी पता नहीं चलता है और वे पर्दे के पीछे से अपना समर्थन जारी रखते हैं।

इसी तरह हम मेधा पाटकर के अलावा नर्मदा बचाओ आंदोलन या एनबीए के कुछ ही चेहरों को पहचानते हैं। लेकिन इस 34 साल की लंबी लड़ाई में पाटकर अकेले नहीं रहीं।

एनबीए के एक समर्पित कार्यकर्ता 47 वर्षीय हिम्मत मालाकार ने अपने जीवन के 20 साल इस आंदोलन को दिए हैं और वे साथी प्रदर्शनकारियों के लिए खाना बनाते रहे हैं। जब भी विरोध शुरू होता है चाहे वह दिल्ली, भोपाल, इंदौर, बड़वानी, धार या किसी अन्य स्थान पर हों, वह अपने साथियों के साथ खाना पकाने के बर्तन और अनाज पैक करते हैं और प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हो जाते हैं।

image 1_0.JPG

मालाकार धार ज़िले के निवासी हैं और खरगोन ज़िले में सेंचुरी यार्न (बिड़ला के स्वामित्व वाली कंपनी) में करते रहे हैं। उनका इस गांव में एक छोटा फ़ार्म है और इसमें वो फसल उगाते हैं। दो बच्चों सहित उनका परिवार अपनी ज़रूरतों को इसी पूरा करता है। लेकिन उद्देश्य ने हमेशा विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्हें प्रेरित किया है।

मालाकर कहते हैं, “हज़ारों लोगों की तरह मैं भी पुनर्वास के लिए लड़ रहा हूं। लेकिन मैं अपनी इच्छा से नहीं बल्कि क़िस्मत ने मुझे रसोइया बना दिया है। किसी ने भी मुझे यहां खाना पकाने के लिए मजबूर नहीं किया। जब भी ताई (एनबीए की संयोजक मेधा पाटकर) ने मुझे बुलाया, मैं यहां आ गया।”

मालाकार के साथियों में सुदाम सावंत, महेश वर्मा, संजीव खोडे, राजकुमार सिंह आदि हैं। वे भी दशकों से एनबीए से जुड़े रहे हैं।

nba cook.jpg

एनबीए के सैकड़ों सदस्य राज्य की राजधानी में नर्मदा घाटी विकास निगम (एनवीडीए) के कार्यालय के बाहर पांच दिनों से धरने पर थे। वे अपनी 40 सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे थे। राज्य सरकार द्वारा उनकी अधिकांश मांगें मान लेने के बाद 21 नवंबर यानी गुरुवार को विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।

मध्य प्रदेश और गुजरात की राज्य सरकारों द्वारा गुजरात में सरदार सरोवर बांध का निर्माण करने का फ़ैसला करने के बाद मध्य प्रदेश के धार, बड़वानी और अलीराजपुर ज़िलों में नर्मदा नदी के तट पर रहने वाले हज़ारों परिवारों से भूखंड, मुआवजा और कृषि भूमि देने का वादा किया गया। इस बांध का निर्माण शहरी आबादी और उद्योगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए किया गया था। कई सर्वेक्षणों के बाद भी हज़ारों परिवारों को बेपनाही की हालत में छोड़ दिया गया है।

इस साल की शुरुआत में स्थिति और ख़राब हो गई थी जब 15 अक्टूबर 2019 (पीएम मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले) से एक महीने पहले यानी 16 सितंबर 2019 को सरदार सरोवर बांध का पानी 138.8 मीटर तक भर गया था।

इसके बाद 178 से अधिक गांव, सैकड़ों एकड़ खेत पानी में डूब गई और हज़ारों परिवार विस्थापित हो गए। पुनर्वास और मुआवज़े की मांग करते हुए एनबीए ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।

एनबीए के सहयोगी रसोइया सुदम सावंत कहते हैं, "मैं पहले से ही मध्यप्रदेश के खरगोन ज़िले में सेंचुरी यार्न के प्रदर्शनकारियों के लिए खाना बना रहा था (पिछले दो साल से यह इकाई बंद है) जो कारखाने को फिर से खोलने की मांग कर रहे थे। जब मैंने एनबीए के विरोध के बारे में सुना तो मैं सेंचुरी यार्न के कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हो गया।”

सेंचुरी यार्न के कर्मचारी और एनबीए के एक सदस्य महेश वर्मा अपने सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में कहते हैं, "हम प्रदर्शनकारियों के लिए खाना बनाते हैं लेकिन कभी-कभी हमें भी पुलिस की कार्रवाई और पानी के बौछारों का सामना करना पड़ता है पर हम अपने हितों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

विरोध के दौरान एक सामान्य दिन में वे एक बार में कम से कम 1,000 - 1,500 लोगों के लिए खाना बनाते हैं। मेनू अनाज और फ़ंड की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

वे आगे कहते हैं, "ज़्यादातर, हम खिचड़ी, दलिया (मक्का, घी और पानी से बनी) और दाल बाटी, पोहा और पूरी सब्ज़ी को एक समय में 1,000 से अधिक लोगों को परोसते हैं क्योंकि बाहरी लोग, भिखारी भी यहां खाते हैं और वे हमसे अलग नहीं हैं।"

वे सुबह 10 बजे से पहले सुबह के नाश्ते के साथ दिन में तीन बार खाना बनाते हैं।

एनबीए के एक अन्य सदस्य और रसोईया संजीव खोड़े कहते हैं, "कभी-कभी, जब लंबे विरोध के दौरान अनाज और भोजन कम पड़ जाते हैं तो रसोईया के सदस्य आसपास के गांवों में जाते हैं या इसके लिए धन इकट्ठा करते हैं।"

वे कहते हैं, “हमने अनगिनत विरोध प्रदर्शन किए जो हमारी मांगों को पूरा किए बिना ही समाप्त हो जाते हैं। लेकिन फिर भी यह देखना अच्छा लगता है कि राज्य सरकार हमसे बातचीत कर रही है जो बीजेपी के 15 वर्षों के शासनकाल में अकल्पनीय था।"

वे एक स्वर में कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि ये विरोध कितने दिनों तक चलेगा और इसका परिणाम क्या होगा लेकिन हम अपनी आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे।"

मालाकर कहते हैं, “मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि उन्हें हमारे मसले को हल करना चाहिए ताकि हम अपना बाक़ी जीवन शांति से परिवार के साथ बिता सकें।"

एनबीए की संयोजक मेधा पाटकर कहती हैं, “हिम्मत मालाकर और उनकी टीम जैसे एनबीए के कई अज्ञात योद्धा हैं। उनमें से अधिकांश ने अपना जीवन इसके लिए समर्पित कर दिया है। मैं उन्हें सलाम करती हूं। ऐसे समर्पित योद्धाओं की वजह से ही आंदोलन अभी भी चल रहा है। हम तब तक लड़ेंगे जब तक सरकार हमारी मांगों पर सहमत नहीं होती।”

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Meet Unsung Heroes of Narmada Bachao Andolan

Narmada Bachao Andolan
Medha patkar
Madhya Pradesh
Gujarat
Sardar sarovar Dam
Narendra modi
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License