NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कोविड-19
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
राजनीति
प्रवासी श्रमिक बगैर सामाजिक सुरक्षा अथवा स्वास्थ्य सेवा के: एनएचआरसी का अध्ययन
‘अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों का अनुभव एक सहायक नीतिगत ढाँचे की ज़रूरत पर ध्यान दिला रहा है। प्रवासी श्रमिकों की इन जटिल समस्याओं का निराकरण करने के लिए केंद्र, राज्य एवं समुदाय आधारित संगठनों द्वारा समर्थित स्थानीय सरकारों की भागीदारी के साथ एक बहु-स्तरीय रणनीति की तत्काल जरूरत है।’
दित्सा भट्टाचार्य
20 Apr 2021
Migrants

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा का क्रम बना हुआ है। उनमें से बड़ी संख्या में लोग अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं, और उन्हें विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य-संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

अध्ययन में कहा गया है कि “भारतीय समाज और इसकी राष्ट्रीय सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों को असुरक्षित अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के बारे में समझ बनाने और हल करने की दिशा में बढ़ने की जरूरत है, जिन्हें भारत में ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों देखा जा सकता है। इन प्रवासी श्रमिकों का प्रमुख हिस्सा अकुशल श्रमिक के तौर पर है, और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।” 

इसमें इस ओर इशारा किया है कि भारत में भारी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को सरकारी योजनाओं के अधिकारों के गैर-प्रावधान, उपलब्ध योजनाओं और सेवाओं तक गरीबों की पहुँच की कमी, कार्य-स्थलों पर अपर्याप्त एवं अनुचित सुरक्षा उपाय, ख़राब गुणवत्ता वाले आवास, लंबे समय तक काम के घंटे, स्थानीय श्रमिकों की तुलना में कम मजदूरी का भुगतान, स्वास्थ्य सेवाओं सीमित पहुँच, सामाजिक बहिष्करण, खराब सामाजिक संपर्क के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव की कमी जैसी व्यापक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

एनएचआरसी द्वारा जारी और केरल डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा संचालित अध्ययन के हिस्से के तौर पर शोधकर्ताओं ने चार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों - दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा के करीब 4,400 प्रवासी मजदूरों, स्थानीय श्रमिकों, नियोक्ताओं/ठेकेदारों, राज्य सरकार के अधिकारियों, चुने हुए प्रतिनिधियों, विद्वानों, विशेषज्ञों, एनजीओ के प्रतिनिधियों और ट्रेड यूनियन सदस्यों का साक्षात्कार लिया। इन चार राज्यों में पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के श्रमिक भारी संख्या में मौजूद हैं। 

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि “प्रवासी श्रमिकों के विशिष्ट जीवन चक्र में उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधानों की जरूरत पड़ती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे समुचित तरीके से अपने जोखिमों का कर सकने में समर्थ हो सकें। काम के सिलसिले में उन्हें राज्यों के बीच में गुजरना पड़ता है, और इसलिए उन्हें विभिन्न श्रम बाजारों और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के बीच में रहना पड़ता है, जो विशिष्ट कमजोर स्थितियों को उत्पन्न करता है। नए-नए पहुंचे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति काफी कमजोर होती है, क्योंकि प्रवासन के दौरान वे अपने गृह समुदाय से दूर हैं और यहाँ पर उनके पास सामाजिक नेटवर्क और सुरक्षा घेरे तक पहुँच नहीं है।”

अध्ययन में पाया गया है कि “नए मेजबान राज्य में अक्सर ही सामाजिक और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच अक्सर कई कारणों से उनके लिए प्रतिबंधित बने रहते हैं। अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की बुनियादी सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा की वहनीयता तक पहुँच के अभाव के कारण उनकी कमजोर स्थितियों को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। अपने अधिकारों और पात्रता तक पहुँच के अभाव ने प्रवासी श्रमिकों के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी कर दी हैं।”

अध्ययन के मुताबिक दिल्ली में करीब 84% उत्तरदाताओं के पास समुचित आवास नहीं थे या उन्हें खराब गुणवत्ता वाले आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। दिल्ली को छोड़कर, जहाँ पर मोहल्ला क्लिनिक मदद के लिए है, बाकी जगहों पर अंतर-राज्यीय प्रवासियों के पास अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल तकरीबन 94.5% प्रवासी श्रमिकों ने दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में मुफ्त में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया था।  

अध्ययन ने अपनी रिपोर्ट में इंगित किया है कि महिला प्रवासी श्रमिकों में पोषण संबंधी कमियों की मात्रा उच्च स्तर पर बनी हुई थी, और वहां के स्थानीय श्रमिकों की बनिस्बत उनके पास प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बना पाना कठिन बना हुआ है। जहरीली हवा के तीव्र एवं दैनिक जोखिम के परिणामस्वरूप, अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के एक वर्ग, विशेषकर महिलायें अस्थमा, कैंसर एवं प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं से पीड़ित हैं।

सर्वेक्षण में शामिल करीब 68% महिलाओं के पास शौचालय की सुविधा नहीं है, क्योंकि वे झुग्गियों या अनाधिकृत बस्तियों में रहते हैं। मुंबई में तकरीबन 62% प्रवासी श्रमिक झुग्गियों में निवास करते हैं। अध्ययन में दावा किया गया है कि दिल्ली में प्रति माह 43 अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की मौत हो जाती है, जबकि गुजरात में यह आंकड़ा 35, हरियाणा में 41 और महराष्ट्र में 38 लोगों का है। इसके पीछे की वजह निर्माण स्थलों पर होने वाली दुर्घटनायें, आत्महत्या, पेट-संबंधी बीमारियाँ और हृदय रोग पाई गई हैं।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि दिल्ली में 51.2%, गुजरात में 53%, हरियाणा में 56% और महाराष्ट्र में 55% प्रवासी श्रमिकों के पास समुचित जानकारी और भाषाई अड़चनों के कारण उपलब्ध योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच बना पाने का संकट बना हुआ है।

एनएचआरसी के अध्ययन में कहा गया है कि “अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन को संबोधित करने के लिए जिस संस्थागत तंत्र और केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता थी, के अभाव के कारण ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।”

इसमें आगे कहा गया है कि ऐसा एक भी संस्थागत ढांचा मौजूद नहीं था, जो अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के विभिन्न प्रकार के मानवाधिकार उल्लंघनों के मुद्दों को संबोधित करता हो। यह स्थिति हर स्तर पर बनी हुई है, वो चाहे राष्ट्रीय स्तर पर हो या राज्यों के स्तर पर। इसके अनुसार “अंतर-राज्यीय श्रमिकों की लिए पात्रता और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय रणनीति को तैयार करने की आवश्यकता है। अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के अनुभवों के आधार पर सहायक नीतियों के ढांचे को खड़ा करने की जरूरत है। केंद्र, राज्य और समुदाय आधारित संगठनों द्वारा समर्थित स्थानीय सरकारों की भागीदारी के साथ एक बहु-आयामी रणनीति, प्रवासी मजदूरों की जटिल समस्याओं के समाधान हेतु तत्काल आवश्यक है।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

https://www.newsclick.in/Migrant-Workers-Without-Access-Social-Protection-Healthcare-NHRC-Study 

migrants
COVID
COVID-19
Coronavirus
NHRC

Related Stories

फादर स्टेन की मौत के मामले में कोर्ट की भूमिका का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी

कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए हताश भारतीयों ने लिया क़र्ज़ और बचत का सहारा

कोविड-19: दूसरी लहर के दौरान भी बढ़ी प्रवासी कामगारों की दुर्दशा

यूपी: उन्नाव सब्ज़ी विक्रेता के परिवार ने इकलौता कमाने वाला गंवाया; दो पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी

भाजपा शासित एमपी सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए व्यापम आरोपियों के निजी अस्पतालों को अनुबंधित किया

उत्तर प्रदेश : योगी का दावा 20 दिन में संक्रमण पर पाया काबू , आंकड़े बयां कर रहे तबाही का मंज़र

गोल्ड लोन की ज़्यादा मांग कम आय वाले परिवारों की आर्थिक बदहाली का संकेत

महामारी प्रभावित भारत के लिए बर्ट्रेंड रसेल आख़िर प्रासंगिक क्यों हैं

कार्टून क्लिक: सरकार की आलोचना ज़रूरी लेकिन...

कोरोना महामारी के बीच औरतों पर आर्थिक और सामाजिक संकट की दोहरी मार!


बाकी खबरें

  • रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    वित्त अधिनियम के तहत ईपीएफओ फंड का ट्रांसफर मुश्किल; ठेका श्रमिकों के लिए बिहार मॉडल अपनाया जाए 
    22 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ईपीएफओ के अधीन रखे गए 100 करोड़ के 'बेदावा' फंड को वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में हस्तांतरित करने पर अपनी आपत्ति जताई है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार दिवस: देश के पहले सत्याग्रह वाला चंपारण, गांधी से जेपी तक
    22 Mar 2022
    आज बिहार का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। तीन दिनों तक राज्य की राजधानी पटना के गांधी मैदान में नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होगी प्रवेश परीक्षा, 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश खत्म
    22 Mar 2022
    अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों को स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्रों के दाखिले के लिए विश्वविद्यालय संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) में प्राप्त अंकों का उपयोग करना होगा। जुलाई के पहले सप्ताह में सीयूईटी का…
  • रवि कौशल
    शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा
    22 Mar 2022
    शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का नया मसौदा ढांचा, कला एवं विज्ञान क्षेत्र में स्नातकोत्तर डिग्री की जरूरत को खत्म करने जा रहा है और स्नातक स्तर के कार्यक्रम को कमजोर बनाने वाला है। 
  • भाषा
    अखिलेश यादव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
    22 Mar 2022
    अखिलेश यादव हाल में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में करहल विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए हैं। वह आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से सपा के लोकसभा सदस्य थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License