NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
सामूहिक विनाश के प्रवासी पक्षी
रूसियों ने चौंकाने वाला दावा किया है कि, पेंटागन की जैव-प्रयोगशालाओं में तैयार किए गए डिजिटलीकृत प्रवासी पक्षी वास्तव में उनके क़ब्ज़े में आ गए हैं।
एम. के. भद्रकुमार
22 Apr 2022
Translated by महेश कुमार
Migratory
प्रसिद्ध माइग्रेटरी पक्षी अल्बाट्रॉस प्यार के पक्षी नाम से भी जाना जाता है। इसकी खूबी एकांगी होना है, जो एक साथी के साथ दीर्घकालिक बंधन बनाता है जो संबंध शायद ही कभी टूटता है। तब तक, जब तक कि किसी एक पक्षी की मृत्यु नहीं हो जाती, तब तक इनके जोड़े कभी नहीं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 6 अप्रैल को यूक्रेन सहित अन्य देशों में जारी जैविक गतिविधियों के संबंध में जैविक सुरक्षा पर रूब्रिक अररिया फॉर्मूला बैठक के तहत एक असाधारण कार्यक्रम का आयोजन किया। अनुमानतः, अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और पश्चिमी मीडिया ने भी इस बैठक के बारे में रिपोर्ट को ब्लैकआउट कर दिया था। लेकिन इस बैठक में जो हुआ, पश्चिमी देशों और अमरिका की हरकत उसके गहन महत्व को कम नहीं कर सकती हैं।

दो घंटे से अधिक समय तक चलने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक का मुख्य केंद्र, रूसी सशस्त्र बलों के विकिरण, रासायनिक और जैविक रक्षा बलों के प्रमुख, जनरल इगोर किरिलोव का यह खुलासा था कि वाशिंगटन विभिन्न देशों में जैविक प्रयोगशालाएं बना रहा है और उन्हें एक एकीकृत प्रणाली से जोड़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने 2005 से सैन्य जैविक कार्यक्रमों पर 5 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए हैं और उन्होने आगे विस्तार से बताया कि अमरीका ने अकेले रूस और चीन की सीमा वाले क्षेत्रों में, इस दौरान लगभग 60 सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया है। प्रयोगशालाओं के यूक्रेनी नेटवर्क के भीतर 14 आबादी वाले स्थानों में 30 सुविधाओं को जैविक स्थिति पर अनुसंधान करने और निगरानी करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रूस का उक्रेन अभियान शुरू होने से ठीक पहले फरवरी की शुरुआत में यूक्रेनी जैविक प्रयोगशालाओं से अत्यधिक संवेदनशील सामग्री अमेरिका को निर्यात की गई थी, और बाकी को नष्ट करने का आदेश दे दिया गया था, ऐसा इसलिए किया गया ताकि ये सब रूसी हाथों में न पड़ जाएं। लेकिन यह कवर-अप केवल आंशिक रूप से सफल रहा। वास्तव में, रूस के क़ब्ज़े में अत्यधिक आपत्तिजनक साक्ष्य आ गए हैं।

पहले भी, रूस पेंटागन की जैविक सैन्य गतिविधियों के बारे में कई दस्तावेज जारी कर चुका है,  जो अमरिका के खिलाफ देशों में लक्षित थे और वायरल हथियारों के विकास के लक्ष्य के साथ  जैविक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की एक विश्वव्यापी परियोजना की ओर इशारा करते थे।

अप्रैल 6 में सुरक्षा परिषद के सम्मेलन की कार्यवाही सार्वजनिक डोमेन में है और सबके लिए सुलभ है। नीचे दिया गया वीडियो देखें:

रूस ने विशिष्ट आरोप लगाए हैं, जिन पर खास उंगली उठाई गई है वे निम्न हैं:

  • पेंटागन यूक्रेन में बायो-लैब के लिए फंडिंग कर रहा है; 
  • इन जैव-प्रयोगशालाओं का स्थान (न केवल यूक्रेन में बल्कि दुनिया भर के 36 देशों में मौजूद है);
  • बीमारियाँ और महामारियाँ जिन पर शोध कार्य चल रहा है, उनकी समाधान के साधनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जिन देशों में उनका परीक्षण किया जा रहा है (यहां तक कि इन देशों की सरकारों की जानकारी के बिना भी); और निश्चित रूप से,
  • कोरोनावायरस से संबंधित प्रयोग (और इस वायरस को प्रसारित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चमगादड़) भी इसमें शामिल हैं। 

हालांकि, अमेरिका ने अब तक इस तरह के आपत्तिजनक सबूतों की किसी भी किस्म की जांच  और सत्यापन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और एक सत्यापन तंत्र की मांग को ख़ारिज़ कर दिया है। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि अमेरिका एक अंतरराष्ट्रीय सत्यापन प्रक्रिया की अनुमति देगा जो इसे मानवता के खिलाफ अपराधों में लिप्त होने के रूप में उजागर करने की क्षमता रखता है - हालांकि जैविक हथियार सम्मेलन (बीडब्ल्यूसी) और संयुक्त राष्ट्र सहित स्पष्टीकरण सुनने के उपयुक्त ढांचे मौजूद हैं ताकि संबंधित देश को, निष्पक्ष तरीके से सुना जा सके।

एक दिमाग हिला देने वाली "खोज" जिस पर यूक्रेन में रूसी सेना ने कब्ज़ा कर लिया है वह पेंटागन द्वारा वित्त पोषित प्रयोगशालाओं द्वारा गिने-चुने पक्षियों का इस्तेमाल है। यह लगभग विज्ञान कथा जैसी है और सर अल्फ्रेड हिचकॉक इस पर एक महाकाव्य रूपी फिल्म बना सकते थे जहां धोखे में भी मासूमियत दिखाई जाती है और प्रकृति के प्रति मनुष्य की क्रूरता असहनीय रूप से विचित्र हो जाती है। यह परियोजना इस तरह काम करती है:

सबसे पहले, पेंटागन पक्षियों के प्रवास का अध्ययन करने और पूरे मौसम में उनका अवलोकन करने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों और प्राणीविदों के पास उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा तक पहुँचता है, जिस रास्ते से ये पक्षी हर साल एक देश से दूसरे देश में अपनी मौसमी यात्रा पर जाते हैं और यहाँ तक कि एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप जाते हैं। 

उक्त डेटा के अध्ययन के आधार पर, प्रवासी या आवारा पक्षियों के झुंड को पकड़ा जाता है, उन्हे डिजीटल किया जाता है और कीटाणुओं के कैप्सूल उनमें ठूंस दिए जाते हैं, जिन्हे कंप्यूटर के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए उनमें एक चिप लगाई जाती है। फिर उन पक्षियों को लक्षित देशों के प्रवासी पक्षियों के झुंड में छोड़ दिया जाता है, जिन देशों के खिलाफ अमेरिकी खुफिया एजेंसी शत्रुता के इरादे रखती है। 

बेशक, ये प्रवासी पक्षी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में, एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में बड़ी दूरी तय करते हैं। उदाहरण के लिए, भटकते हुए अल्बाट्रॉस को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में कम से कम 8,500 किमी पूर्व की ओर दक्षिण अमेरिका के तट पर प्रवास करने के लिए जाना जाता है, और कई शर्मीले अल्बाट्रॉस हिंद महासागर से दक्षिण अफ्रीका के तट पर पश्चिम की ओर पलायन करते हैं।

पेंटागन जैव-प्रयोगशालाओं में डिजीटल किए गए पक्षियों की लंबी उड़ान के दौरान, उपग्रहों के माध्यम से चरण-दर-चरण उनकी गतिविधियों की निगरानी रखी जाती है और उनके सटीक स्थान निर्धारित किए जाते हैं। विचार यह है कि यदि बाइडेन प्रशासन (या सीआईए) को रूस या चीन (या उस मामले में भारत) को नुकसान पहुंचाने की जरूरत है, तो पक्षी जब आसमान में होते हैं तो उनकी चिप को नष्ट कर दिया जाता है।

सीधे शब्दों में कहें, महामारी ले जाने वाले पक्षी को मार डालो। अफसोस की बात है कि मेरा दिमाग अमेरिकी लेखक हार्पर ली के उपन्यास, टू किल ए मॉकिंग बर्ड, बुराई द्वारा नष्ट की गई मासूमियत की भूतिया कहानी पर वापस आ जाता है।

अब वास्तविकता में लौटते हैं, एक बार जब "डिजिटाइज्ड" पक्षी को मार दिया जाता है और उसके पास मौजूद कीटाणुओं का कैप्सूल निकल जाता है, तो यह बीमारी "एक्स” या "वाई" देश में फैल जाती है। यह युद्ध या तख्तापलट या कलर क्रांति की जरूरत के बिना किसी दुश्मन देश को नुकसान पहुंचाने का एक कम लागत वाला अत्यधिक प्रभावी तरीका बन जाता है।

अब रूसियों ने चौंकाने वाला दावा पेश किया है कि वे वास्तव में पेंटागन की जैव-प्रयोगशालाओं में डिजिटलीकृत ऐसे प्रवासी पक्षी उनके कब्जे में हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से प्रवासी पक्षियों की संख्या को प्रतिबंधित करता है क्योंकि वे स्वतंत्र रूप से अन्य देशों के नीले आकाश और हवा को पार करते हैं। कीटाणुओं की आपूर्ति करके ये पक्षी सामूहिक विनाश के हथियार बन जाते हैं। क्या यह मानव चतुराई है! लेकिन अमेरिका को तो अंतरराष्ट्रीय कानून से पूरी छूट प्राप्त है।

लब्बोलुआब यह है कि केवल अमेरिकी खुफिया एजेंसी - और राष्ट्रपति बाइडेन, शायद, अगर उन्हे  याद है – तो वे यह जानते होंगे कि इस सदी में अब तक सभी मनुष्यों को सामूहिक विनाश के पक्षियों द्वारा संक्रमित किया जा चुका है। क्या यह जांच का विषय है कि, इबोला ने अफ्रीका को तबाह कर दिया था और आने वाली तबाही का अग्रदूत था?

कोविड-19 के बारे में क्या जाना जाता है, जिसे अमेरिका द्वारा प्रशासित वित्त पोषित प्रयोगशालाओं से उत्पन्न होने के लिए जाना जाता है? यह बहुत संभव है कि अमेरिका ने चीनी नागरिकों को मारने के लिए प्रवासी पक्षियों का इस्तेमाल किया हो। स्पष्ट रूप से, अमेरिका अपनी वैश्विक गिरावट को उलटने की अपनी हताशा में विश्व व्यवस्था में अपने आधिपत्य को जमाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहा है, जबकि दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही  है।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Migratory Birds of Mass Destruction

Biological Weapons
US BIO-LABS IN UKRAINE

Related Stories


बाकी खबरें

  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    09 Mar 2022
    जो चैनल भाजपा गठबंधन को बहुमत से 20-25 सीट अधिक दे रहे हैं, उनके निष्कर्ष को भी स्वयं उनके द्वारा दिये गए 3 से 5 % error margin के साथ एडजस्ट करके देखा जाए तो मामला बेहद नज़दीकी हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License