NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
‘मिशन कर्मयोगी’: ‘न्यू इंडिया’ किस तरह का होगा, यह ‘भविष्य के लिए तैयार हो रहे’ सिविल सर्वेंट्स के ज़रिये तय होगा ?
‘इटली के तानाशाह,बेनिटो मुसोलिनी की भविष्यवाणी के मुताबिक़, फ़ासीवाद तब आता है,जब राज्य का निगमों में विलय हो जाता है। अब ऐसा होते हुए दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या 'भविष्य के लिए तैयार' सिविल सेवक इस 'न्यू इंडिया' को ज़मीन पर उतारने जा रहे हैं ? '
एम.जी. देवसहायम
22 Sep 2020
Mission Karmayogi
फोटो कैप्शन: प्रतीकात्मक फ़ोटो, साभार: द इंडियन एक्सप्रेस

2 सितंबर, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सभी स्तरों पर अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती के बाद के प्रशिक्षण तंत्र को उन्नत करने के मक़सद से सिविल सेवकों के लिए एक नयी क्षमता-निर्माण योजना, 'मिशन कर्मयोगी' को मंज़ूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री,प्रकाश जावड़ेकर ने इस योजना की घोषणा करते हुए अब तक के सबसे बड़े मानव संसाधन विकास कार्यक्रम क़रार दिया,उन्होंने कहा: “मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य भविष्य के लिए भारतीय सिविल सेवकों को तैयार करना है।” प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह अभियान सरकार के मानव संसाधन प्रबंधन कार्य में "मौलिक" सुधार करेगा और उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सिविल सेवकों की क्षमता बढ़ाने वाले अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे में मज़बूती लायेगा।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव, सी.चंद्रमौली ने इससे भी आगे बढ़ते हुए कहा कि इस मिशन को "न्यू इंडिया" के अनुरूप सही मनोभाव, कौशल और ज्ञान से सुसज्जित 'भविष्य के लिए तैयार' सिविल सेवकों का निर्माण करने के लिए गठित किया गया है। चूंकि इस मिशन का मक़सद न्यू इंडिया के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है, इसलिए हमें इस विज़न और ज़मीनी हक़ीक़त पर आलोचनात्मक नज़र डालने की ज़रूरत है।

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया न्यू इंडिया मूवमेंट 2017-2022, ग़रीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, जातिवाद और अस्वच्छता मुक्त भारत की परिकल्पना करता है; इसका मक़सद सुशासन और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए पूरे देश को एकजुट करना है।

इस 'आंदोलन' के तहत भारत सरकार ने डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र (DBT), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना, जन सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, अटल पेंशन योजना, ग़रीबों के लिए खाद्य सुरक्षा योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना, मिशन इन्द्रधनुष, स्वच्छ भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, भारत में और ग़रीबों के लिए आवास जैसी प्रमुख योजनायें शुरू की गयी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक़, ‘न्यू इंडिया’ का विचार ग़रीबों को मौक़ा देना है:“ एक ऐसा नया भारत बनाना है,जहां ग़रीबों को दान के ज़रिये कुछ भी नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें अपने ख़ुद की कार्यप्रणाली की रूप-रेखा बनाने के मौक़े की तलाश है…भारत के लोग आज किसी सरकारी निवाले के इंतज़ार में नहीं हैं। वे तो महज़ अपने लिए पैदा किया जाने वाला मौक़ा चाहते हैं, ताकि वे अपनी आजीविका और समृद्धि के लिए काम कर सकें।” इस न्यू इंडिया का सपना किसान की आय को दोगुना करना और वर्ष 2022 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इस 'न्यू इंडिया' ने भारतीय प्रवासियों को प्रेरित किया, जिन्होंने स्वेच्छा से दुनिया भर में काम कर रहे पेशेवरों की एक बड़ी संख्या के साथ एक अभूतपूर्व अभियान शुरू किया, अपने स्वयं के पैसे, समय और संसाधनों को ख़र्च करके मोदी का समर्थन किया और उन्हें एक दूसरे कार्यकाल के लिए चुना।

इस सब के बाद, ‘मिशन कर्मयोगी’ को अब ‘न्यू-इंडिया’ के विज़न और एजेंडे को ज़मीनन पर उतारने के लिए ‘भविष्य के लिए तैयार’ सिविल सेवकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आख़िर सही मायने में यह चमत्कारिक मिशन है क्या ?

• यह सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण की नींव रखने वाला एक ऐसा राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, ताकि वे दुनिया भर के सर्वोत्तम प्रणाली और चलन को सीखते हुए भी भारतीय संस्कृति के साथ मज़बूती के साथ जुड़े रहें।

• सिविल सर्विसेज क्षमता निर्माण राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCSCB) नामक यह मिशन मानव संसाधन प्रबंधन को ‘नियम-आधारित’ से-भूमिका-आधारित’ स्वरूप में बदलना चाहता है।

• भविष्य के लिए नौकरशाहों को तैयार करना और भर्ती के बाद सरकार में सुधार लाना।

• सिविल सेवकों को ज़्यादा सर्जनात्मक, रचनात्मक, कल्पनाशील, अभिनव, सक्रिय, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना। यह व्यक्तिपरक मूल्यांकन को ख़त्म करने में मदद करेगा, और कर्मचारियों के वैज्ञानिक रूप से विकसित, वस्तुनिष्ठ और वास्तविक समय आधारित मूल्यांकन को सुनिश्चित करेगा।

• इस मिशन की एक कोशिश कोटरी में काम करने की संस्कृति को ख़त्म करना है और राष्ट्र की दृष्टि और हमारी साझा आकांक्षा और हमारे साझे भविष्य के लक्ष्यों की एक समान प्राप्ति के लिए एक साझे मंच की शुरुआत के साथ पूरे देश में फैले प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और संस्थानों की बहुलता को दूर करना है।

मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम को iGOT- Karmayogi नामक एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म स्थापित करके निष्पादित किया जायेगा। विशिष्ट भूमिका-दक्षताओं से युक्त कोई सिविल सेवक उच्चतम मानकों के कुशल सेवा निष्पादन को सुनिश्चित करने में सक्षम होगा। यह मंच, मिशन कर्मयोगी-सिविल सेवा क्षमता निर्माण राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCSCB) के लिए एक ऐसे लॉन्चपैड के तौर पर कार्य करेगा, जो व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत स्तरों पर क्षमता निर्माण तंत्र के व्यापक सुधार को सक्षम बनायेगा।

मिशन कर्मयोगी-सिविल सेवा क्षमता निर्माण राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCSCB) प्रधानमंत्री की मानव संसाधन परिषद द्वारा शासित होगा, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। यह परिषद सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को मंज़ूरी देगी और इसकी समीक्षा करेगी और इसमें एक कैबिनेट सेक्रेटरी कोऑर्डिनेशन यूनिट होगा,जिसमें चुनिंदा सचिव और कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी शामिल होंगे। एक क्षमता निर्माण आयोग भी होगा, जिसमें सम्बन्धित क्षेत्रों और विश्व स्तर के पेशेवरों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह आयोग वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाओं को तैयार करेगा और इसकी निगरानी करेगा और सरकार में उपलब्ध मानव संसाधनों का लेखा-जोखा रखेगा।

इस सब पर पकड़ बनाये रखने के लिए एक पूर्ण स्वामित्व वाला विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle-SPV) होगा, जो iGOT-Karmayogi प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करेगा। इसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत स्थापित किया जायेगा। एसपीवी एक "अलाभकारी " कंपनी होगी और iGOT-Karmayogi प्लेटफ़ॉर्म का स्वामित्व और प्रबंधन करेगी। एसपीवी विषय-वस्तु सत्यापन, स्वतंत्र प्रमाणित आकलन और टेलीमेट्री डेटा उपलब्धता से सम्बन्धित इस प्लेटफ़ॉर्म की प्रमुख व्यावसायिक सेवाओं की विषयवस्तु, मार्केट प्लेस का प्रबंधन और निर्माण और संचालन करेगी। एसपीवी भारत सरकार की ओर से सभी बौद्धिक संपदा अधिकारों पर स्वामित्व रखेगी।

तक़रीबन 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को इसके अंतर्गत लाने के लिए 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि के दौरान 510.86 करोड़ रुपये की राशि ख़र्च की जायेगी। यह ख़र्च आंशिक रूप से 50 मिलियन डॉलर के साथ बहुपक्षीय सहायता द्वारा वित्त पोषित है। हर एक सिविल सेवक में भागीदारी की एक भावना होगी, जो 431 रुपये प्रति वर्ष की सदस्यता लेगा। एसपीवी की स्थापना के अलावा, मुख्य प्रदर्शन संकेतक के डैशबोर्ड दृश्य पैदा करने के लिए iGOT- Karmayogi प्लेटफ़ॉर्म के सभी यूज़रों के प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए एक उपयुक्त निगरानी और मूल्यांकन ढांचा भी निर्धारित किया जायेगा।

आख़िर में ‘मिशन कर्मयोगी’ ख़ुद प्रधानमंत्री के सीधे आदेश और नियंत्रण में ‘न्यू इंडिया’ के लिए काम करने वाले सभी गुणों से संपन्न आदर्श सिविल सेवक का निर्माण करेगा ! (ग्राफ़ देखें)।

graph_8.png

डिज़ाइन और विषय-वस्तु के हिसाब से यह एक ऐसा उत्कृष्ट मिशन है,जो सिविल सेवकों के लिए ऊपर वर्णित ख़ासियत को एक साथ संचित करने को लेकर लंबे समय से महसूस की जाने वाली आवश्यकता को पूरा कर सकता है। यह इस मायने में अनूठा है कि इस मिशन को आईएएस, आईपीएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं जैसे सिविल सेवाओं के ऊपरी क्षेत्रों तक सीमित करने के बजाय, इस मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार के सभी सिविल कर्मचारियों को शामिल किया जायेगा, और इसके बाद इसमें एकरूपता भी लायी जायेगी। हालांकि, शुरू में यह राज्य सरकारों, कर्मचारियों और उन में काम करने वाले सिविल सेवकों के लिए लागू तो नहीं होगा, लेकिन वे इस मंच और इन सेवाओं का फ़ायदा उठा सकते हैं।

यह ‘न्यू इंडिया’ और उसके शासन के लिए यह एक शुभ संकेत तो है। लेकिन,समस्या उस दिशा को लेकर है,जिस दिशा में यह 'न्यू इंडिया' आगे बढ़ रहा है। सिविल सेवक अपने आप में कोई नहीं है,बल्कि शासन का महज़ एक ऐसा साधन है, जिसमें निर्वाचित राजनीतिक नेतृत्व और ज़मीन पर उतारे जाने वाली नीतियां शामिल होती हैं। इस न्यू इंडिया आंदोलन को भारत को ग़रीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, जातिवाद से मुक्त करने और सुशासन के कार्यों को अपनाकर पूरे देश को एकजुट करने वाला माना जा रहा है। लेकिन,पिछले कुछ सालों से ज़मीन पर जो कुछ भी हो रहा है, वह इसके ठीक उलट है।

शासन अपने पतन की ओर है और लोकतांत्रिक शासन वाले संस्थानों की दासता के साथ इस लोकतंत्र को टुकड़ों में विभाजित किया जा रहा है। 2014 में “मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस” के जिस नारे को एनडीए शासनकाल में लोकतंत्र की पहचान बनना चाहिए था, उस नारे को एक सख़्त और  ‘पुलिस राज’ द्वारा संचालित उच्च केंद्रीकृत और निरंकुश व्यवस्था के थोपने के साथ औंधे मुंह पलट दिया गया है। कृषि, बिजली, पर्यावरण, शिक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण आदि जैसे नाज़ुक क़ानून या नीतियों को उन लोगों की भागीदारी के बिना ही ख़तरनाक गति के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, जो संप्रभु हैं।

कोविड-19 महामारी और अमानवीय लॉकडाउन के एक भारी कुप्रबंधन के चलते पूरी व्यवस्था पर दोहरी मार पड़ी है। जहां एक तरफ़ भारत दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाने की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ़, भारत की अर्थव्यवस्था एकदम  नीचे जा चुकी है। छोटे-छोटे उद्यम तबाह हो चुके हैं और लाखों लोगों को बेरोज़गारी, ग़रीबी और दरिद्रता में धकेला जा रहा है। और यह तब हो रहा है,जब अर्थव्यवस्था में बेहद ग़ैर-बराबरी पहले से मौजूद है। जहां सबसे अमीर 10% भारतीयों के पास देश की 77.4% संपत्ति है, सुपर अमीरों की श्रेणी वाले एक प्रतिशत अमीरों की कुल संपत्ति में हिस्सेदारी 51.5% है और नीचे के 60% लोगों के पास महज़ 4.7% संपत्ति है और ये लोग मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से बाहर हैं। करोड़पति और अरबपतियों की रोज़-ब-रोज़ बढ़ती संख्या के साथ यह विभाजन तेज़ी से बढ़ता ही जा रहा है।

विडंबना यह है कि पिछले कुछ वर्षों में ग़रीबों के नाम की क़समें खाते हुए केंद्र सरकार ने एक क्रॉनिक-कैपिटल संचालित ‘टेक्नो-कमर्शियल एकाधिकार(monopoly) / द्वयधिकार(duopoly)’ के विचार को पूरी मशक़्क़त के साथ आकार देती रही है। यह एक ऐसा विचार है,जिसमें सख़्त लॉकडाउन के तहत तेज़ी लायी जा रही है।

हालांकि जीडीपी -24% के आस-पास है, लेकिन वहीं कुछ ख़ास पूंजीपतियों की संपत्ति दोगुनी या तिगुनी हो गयी है। इस समय, जिस तरह से कई समृद्ध सार्वजनिक उपक्रमों की विशाल संपत्ति की बोली लगायी जाने वाली है और जिसे सस्ते में उपलब्ध कराया जा रहा है,इससे यह एकाधिकार / द्वयधिकार और मजबूत होगा। इन शिकारियों की सनक के लिए ख़ुद को उनके उत्पादों के उपभोग और उनकी सेवाओं के लिए किये जाने वाले भुगतान की कीमत के अधीन करते हुए इस तरह की खोटे और विकृत अर्थव्यवस्था ग़रीबों और जो इतना ग़रीब नहीं भी हैं, उनके इस विशाल हिस्से को घुटनों के बल खड़ा कर देगी। ऊपर से त्रासदी यह है कि इसे राज्य द्वारा सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है !

जैसा कि इटली के तानाशाह, बेनिटो मुसोलिनी ने कहा था कि फ़ासीवाद तब आता है, जब राज्य का निगमों में विलय हो जाता है। अब ऐसा होते हुए दिख रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या 'भविष्य के लिए तैयार' सिविल सेवक इस 'न्यू इंडिया' को ज़मीन पर उतारने जा रहे हैं ?

(लेखक पूर्व सेना और आईएएस अधिकारी हैं। इनके विचार व्यक्तिगत हैं।)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

‘Mission Karmayogi’: What Kind of ‘New India’ will these ‘Future-ready’ Civil Servants Serve?

Mission Karmayogi
UPSC
BJP
Narendra modi
Civil Services
IAS
IPS
IFS
Fascism

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • general strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?
    27 Mar 2022
    भारत के औद्योगिक श्रमिक, कर्मचारी, किसान और खेतिहर मज़दूर ‘लोग बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ 28-29 मार्च 2022 को दो दिवसीय आम हड़ताल करेंगे। इसका मतलब यह है कि न सिर्फ देश के विशाल विनिर्माण क्षेत्र…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License