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मिशन यूपी : आगामी चुनाव में बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार करेंगे किसान
तीन कृषि क़ानूनों और आगामी चुनावों में बीजेपी का विरोध करने के लिए राज्य भर में क़रीब 18 रैलियाँ की जाएंगी।
अब्दुल अलीम जाफ़री
27 Jul 2021
मिशन यूपी : आगामी चुनाव में बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार करेंगे किसान

40 से ज़्यादा किसान यूनियनों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार 26 जुलाई को लखनऊ प्रेस क्लब से किसान आंदोलन के 8 महीने पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव के लिए 'मिशन यूपी' का ऐलान किया।

एसकेएम के वरिष्ठ नेताओं योगेंद्र यादव, राकेश टिकैत, मुकुट सिंह और दर्शन पाल ने सभी किसानों से एक खुला ख़त पेश कर भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) को वोट न देने का अनुरोध किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार गेहूं का एक-एक दाना तब तक खरीदेगी जब तक कि किसान अपनी उपज बेचने में रुचि नहीं दिखाते। लेकिन, यह कोरी बयानबाजी साबित हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में इसी अवधि में राज्य में गेहूं की खरीद 308 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी, और विडंबना यह है कि कुल सरकारी खरीद सिर्फ 56 लाख मीट्रिक टन है – जो इस साल की कुल अनुमानित उत्पादन का सिर्फ़ 18% है। सरकार ने आज तक एक भी क्विंटल दाल, सरसों, मसूर, चना और मक्का की खरीद नहीं की है। राज्य सरकार के रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बेचने को मजबूर हैं।" उन्होंने आगे यह भी बताया कि केंद्र के एगमार्केट पोर्टल के अनुसार जुलाई 2020 तक यूपी में गेहूं ख़रीदने की औसत क़ीमत 1,884 रुपये थी, जो एमएसपी से भी 91 रुपये कम है।

उन्होंने कहा कि 8 महीने तक कड़ी सर्दी, तपाने वाली गर्मी और बारिशों के बाद एसकेएम ने यूपी के हर व्यक्ति तक पहुँच कर आंदोलन को तेज़ करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया, "मिशन यूपी के दौरान, हरियाणा और पंजाब के किसान सादकों पर आएंगे और किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए कई कार्यक्रम करेंगे। वह 75 ज़िलों में रैली और महापंचायतें भी करेंगे।"

जब न्यूज़क्लिक ने पूछा कि एसकेएम पूर्वांचल क्षेत्र में किसानों के मुद्दों को कैसे संबोधित करेगा, जहां खेती करने वालों का एक बड़ा हिस्सा भूमिहीन है और नए क़ानूनों से अनजान है, यादव ने कहा कि उनके स्वयंसेवक, "जो पिछले आठ महीनों से सीमा पर डेरा डाले हुए हैं, जल्द ही किसानों के बीच जाएंगे और अपना अभियान शुरू करेंगे। वे क़ानूनों में खामियों के बारे में बात करेंगे और आवारा जानवरों, पानी की आपूर्ति, उर्वरक, बीज, रसायन और बिजली की क़ीमत जैसे उनके मुद्दों को भी संबोधित करेंगे, जो छोटे किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता है।"

यादव ने यह भी कहा कि किसान संगठनों को 8 महीने क्या, यह भी नहीं लगा था कि आंदोलन 8 दिन भी चल पाएगा। उन्होंने कहा, "इस आंदोलन से किसानों का आत्म-सम्मान वापस आया है और सरकार भी किसानों की ताक़त को पहचान गई है।"

भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी चल रहे किसान आंदोलन के लिए अगला प्रमुख गंतव्य होगा और उन्हें  पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर से 5 सितंबर को बड़े पैमाने पर 'किसान महापंचायत' के साथ मिशन की शुरूआत करने की उम्मीद है। तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ और आगामी चुनावों में भाजपा के विरोध में राज्य भर में कम से कम 18 रैलियां की जाएंगी।

टिकैत ने सरकार को चेतावनी दी कि वह किसानों को हल्के में न ले, उन्होंने यह भी कहा कि वह लखनऊ को भी दिल्ली बना देंगे और राज्य की राजधानी के लिए आने वाली हर सड़क को किसान "जाम कर देंगे"।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम लखनऊ को दिल्ली में बदल देंगे और राज्य की राजधानी के सभी रास्ते बंद कर दिए जाएंगे। यूपी हमेशा से आंदोलन का गढ़ रहा है। हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि तीनों क़ानून निरस्त नहीं हो जाते।"

राज्य में किसानों की समस्या पर विस्तार से बताते हुए, बीकेयू नेता ने आगे कहा, "राज्य में चार साल से गन्ना ख़रीद की दर नहीं बढ़ाई गई है, 12,000 करोड़ रुपये अभी भी किसानों का बकाया है। किसानों के लिए बिजली मुफ्त है हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में, लेकिन यूपी में, बिजली की दरें सबसे अधिक हैं। यूपी गुजरात बंता जा रहा है, जो पुलिस द्वारा चलाया जाता है, न कि सरकार द्वारा।" उन्होंने आगे कहा कि मूंग उगाने वाले किसानों को अपनी फसल सस्ते में बेचने को मजबूर होना पड़ा जबकि आलू किसान बर्बाद हो गए।

एसकेएम के वरिष्ठ नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि यूपी के किसानों के सामने आने वाले मुद्दे पंजाब और हरियाणा में किसानों के सामने आने वाले मुद्दों से अलग हैं। राज्य में आवारा पशुओं की समस्या ने किसानों के लिए और मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा, "सरकार ने गौ कल्याण उपकर लगाया और इसके लिए टैक्स लिया लेकिन इस मुद्दे को हल नहीं किया। गायों के प्रति उनका प्यार का भी पर्दाफ़ाश हो गया है।"

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

'Mission UP': Farmers to Campaign Against BJP in Upcoming Polls

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