NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार के कारनामे : जनता पर बेरोज़गारी और महंगाई की दोहरी मार
बेरोज़गारी बढ़ रही है, मुद्रास्फ़ीति, खाद्य मुद्रास्फ़ीति अपने छह साल के सबसे ऊँचे स्तर पर है, निर्यात नीचे जा रहा है, औद्योगिक उत्पादन और निवेश में भी ठहराव नज़र आ रहा है। 
सुबोध वर्मा
17 Feb 2020
Translated by महेश कुमार
Modi Govt at Work

ऐसा लगता है कि पिछले छह महीनों में, मोदी सरकार निश्चित रूप से डूबती हुई अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे रही है, जिसके तहत हड़बड़ाहट से भरी बैठकें की जा रही हैं, कॉर्पोरेट्स को मुफ़्त और शानदार तोहफ़े देने की घोषणा की जा रही है, बाज़ारों को फ़र्ज़ी आश्वासन दिए जा रहे हैं और धोखाधड़ी के बजट के ज़रिये घाटे पर नज़र रखने और विदेशी निवेशकों को ख़ुश रखने की बात की जा रही है। आख़िर इन सबके परिणाम हैं क्या? शून्य, जिसका अंदाज़ा मौजूदा संख्या से लगा सकते हैं। और, हालात इससे भी बदतर नज़र आएंगे अगर कोई जा कर संकट से घिरे लोगों से बात करता है।

बेरोज़गारी के साथ बड़े पैमाने पर बेलगाम होती क़ीमतें लोगों के लिए दोहरी मार का काम कर रही हैं। लेकिन मोदी सरकार अब तक इन दोनों कों नियंत्रण में लाने में असमर्थ है। वास्तव में, अर्थव्यवस्था के सेहत पर बाक़ी के संकेत भी लाल स्याही में डूब गए हैं: निर्यात लगातार छठे महीने में नीचे आया है और आयात दसवें महीने में गिर गया है; जनवरी 2019 के अंत में बैंक क्रेडिट विकास दर 14.8 प्रतिशत से घटकर इस साल जनवरी में 7.1 प्रतिशत हो गई है; और औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक कमोबेश स्थिर रहा है। सरकार द्वारा किए जा रहे सभी "प्रयासों" का यह सबसे निचला स्तर है।

लगातार बढ़ती बेरोज़गारी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के नवीनतम आंकडे कहते हैं कि साप्ताहिक अनुमान के अनुसार 14 फ़रवरी को समग्र बेरोज़गारी दर 7.3 प्रतिशत थी। यह लगभग 7 प्रतिशत से ऊपर पिछले एक वर्ष से चल रही है, कभी-कभी यह 8 प्रतिशत से ऊपर भी चली जाती है।

लेकिन अगर आप इसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग देखते हैं, तो तस्वीर और भी भयावह दिखेगी। इस फरवरी में शहरी बेरोज़गारी 9.3 प्रतिशत से भी अधिक थी, जबकि ग्रामीण बेरोज़गारी में थोड़ा सुधार हुआ था और यह 6.6 प्रतिशत पर थी। नीचे दिया चार्ट देखें।

graph 1_5.JPG

शहरी बेरोज़गारी मई 2017 में 4.9 प्रतिशत से लगातार बढ़ते हुए 9 प्रतिशत से अधिक पहुँच गई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, उदाहरण के लिए, दिल्ली विधानसभा चुनावों में युवाओं की भारी संख्या ने बेरोज़गारी से उपजे असंतोष के कारण भाजपा के ख़िलाफ़ मतदान किया। 

ग्रामीण क्षेत्रों में भी, मई 2017 में बेरोज़गारी इसी तरह 3.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान स्तर पर पहुंच गई है। यदि आप सोच रहे हैं कि ग्रामीण नौकरियों की स्थिति बेहतर है – तो ज़रा फिर से सोचें। ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के आंकड़े निचले स्तर पर इसलिए नहीं हैं क्योंकि वहां अधिक उत्पादक रोज़गार उपलब्ध हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कृषि में उत्पादन में वृद्धि किए बिना अधिक लोगों को खपाने की क्षमता है। यदि कोई एक परिवार खेतों में काम कर रहा है, और एक अन्य सदस्य उनके साथ जुड़ जाता है तो वह उत्पादन बढ़ाए बिना रोज़गारशुदा हो जाएगा।

इस व्यवस्था में सब की समान और साझा आय होगी, लेकिन काफ़ी छोटे शेयर/हिस्से/आय के साथ। एक सर्वेक्षण में एक अतिरिक्त व्यक्ति "रोज़गार" में  मिलेगा, लेकिन वास्तव में वह यहाँ प्रच्छन्न बेरोज़गारी का प्रतिनिधित्व करता है। जो बेहतर रोज़गार का नहीं बल्कि संकट का निशान है।

उसी व्यक्ति को शहर में "बेरोज़गार" घोषित किया गया होगा क्योंकि किसी को भी इतनी आसानी से शहरी रोज़गार नहीं मिल सकता है, जब तक कि यह कोई स्वरोज़गार या अनौपचारिक रोज़गार न हो। और, शहरी भारत में बेरोज़गारी का यह बेहूदा स्तर मोदी की आर्थिक नीतियों की पूरी तरह से विफलता का जीवित प्रमाण है।

बढ़ती महंगाई 

डूबती अर्थव्यवस्था जो अधिक से अधिक परिवारों को ग़रीबी की तरफ़ धकेल रही है, का एक और भयानक  घटक है: उसे कहते हैं मुद्रास्फ़ीति या मूल्य वृद्धि। पिछले एक साल में, ख़ासतौर पर खाद्य पदार्थों की क़ीमतों ने तबाही मचाई हुई है। नीचे दिया चार्ट देखें।

graph 2_2.JPG

एक साल में, सामान्य मुद्रास्फ़ीति (सभी वस्तुओं और सेवाओं पर) 2.57 प्रतिशत से बढ़कर दर्दनाक स्तर यानी 7.59 प्रतिशत तक पहुँच गई है। लेकिन चार्ट में दी गई लाल रेखा पर ध्यान दें - आवश्यक खाद्य सामग्री की मूल्य वृद्धि ने तो आसमान छू लिया है और वह घातक रूप से -0.07 प्रतिशत से बढ़कर 11.79 प्रतिशत हो गई है। ये सभी संख्याएँ (सांख्यिकी मंत्रालय की साइट पर उपलब्ध है) साल दर साल की कहानी बताती हैं - यानी एक वर्ष में प्रतिशत की वृद्धि। क़ीमतें अब छह साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गई हैं।

इसका प्रभाव यह होगा कि वेतन या वेतन में किसी भी तरह की वृद्धि के बिना, उच्च क़ीमतों की वजह से आगे चलकर मज़दूर वर्ग/कामकाजी लोगों की तबाही होगी। क्योंकि ज़िंदा रहने के लिए परिवारों को खाद्य पदार्थों और अन्य चीज़ों पर अपने ख़र्च में कटौती करनी पड़ रही है। 

अमीरों के लिए आज़ादी और ग़रीब के लिए संघर्ष और हिंसा

वास्तव में, ऐसा लगता है कि वे लोगों के ख़राब होते हालात के बारे में या संकट के प्रति चिंतित नहीं हैं। वे सरकारी ख़र्च पर रोक लगाने या कम करने की नीतियों पर क़ायम हैं, उल्टे कॉर्पोरेट्स (घरेलू और विदेशी दोनों) को भारी रियायतें दे रहे हैं, सुरक्षात्मक श्रम और अन्य कल्याणकारी क़ानूनों को धता बता रहे हैं और सार्वजनिक क्षेत्र को खोखला कर रहे हैं। ये ऐसी नीतियां हैं जो अमीरों के खज़ानों को भरने का काम कर रही हैं, यह वह धोखे वाला सिद्धांत है कि आम लोगों तक कुछ तो पहुंचेगा।

जहां तक लोगों की बात है, तो मोदी और बीजेपी केवल आरएसएस के नुस्खे के बारे में सोच सकते हैं। जिसे एक भयानक संयोग कहिए- या फिर एक सोची-समझी चाल? - जब पिछले साल से अर्थव्यवस्था डूब रही है, मोदी सरकार ने लोगों में विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से कई चालें चली। इनमें अनुच्छेद 370 का निरस्त्रीकरण और बाद में, मुसलमानों के ख़िलाफ़ भेदभाव करते हुए नागरिकता क़ानूनों में बदलाव लाया गया, और जिसमें घृणा से भरपूर नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीज़न्स (NRC) का प्रस्ताव शामिल है। आरएसएस के ये नुस्खे आर्थिक तबाही से ध्यान हटाने के लिए उनकी विकट आवश्यकता को भी पूरा करते हैं, इसलिए यह कोई संयोग नहीं है बल्कि सोची-समझी चाल है।

संक्षेप में कहा जाए तो यह आर्थिक संकट के प्रति मोदी सरकार की पसंद का समाधान है: अमीरों को ग़रीबों का शोषण करने और लाभ कमाने की आज़ादी देना, ताकि ग़रीब/पीड़ित लोग आपस में लड़ते रहें। लेकिन, जैसा कि दिल्ली के चुनावों ने दिखाया है, लोग मोदी और शाह की सोच से आगे बढ़ कर भी सोच सकते हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Modi Govt at Work! Double Whammy of Unemployment and Price Rise

Modi government
UNEMPLOYMENT IN INDIA
PRICE RISE
Amit Shah
Inflation
Delhi Assembly Elections
Joblessness
BJP government
NRC
RSS BJP Combine

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License