NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
मोदी मंत्रिमंडल फेरबदलः चुनावी तीर के साथ नाकामी छुपाने के लिए मेकअप
बात बोलेगी: जनता के सवालों और गुस्से में घिरी सरकार को निगेटिव से पॉजिटिव न्यूज़ में लाने के लिए प्रचार-प्रसार, मीडिया के बैंड-बाजे के साथ परोसा गया मंत्र मोदी की ड्रीम टीम, मोदी मंत्र...मानो इससे पहले का मंत्रिमंडल मोदी टीम नहीं था या उसमें जो नगीने रखे गये थे, उनका चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नहीं किया था---
भाषा सिंह
07 Jul 2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से आज यानी 7-7-2021 को जो मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार किया, उसका समय बिल्कुल सटीक चुना। इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था। जनता के सवालों और गुस्से में घिरी सरकार को निगेटिव से पॉजिटिव न्यूज़ में लाने के लिए प्रचार-प्रसार, मीडिया के बैंड-बाजे के साथ परोसा गया मंत्र मोदी की ड्रीम टीम, मोदी मंत्र...मानो इससे पहले का मंत्रिमंडल मोदी टीम नहीं था या उसमें जो नगीने रखे गये थे, उनका चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नहीं किया था---इसे ही कहते हैं ब्रांडिग और आज के मंत्रिमंडल विस्तार से यह साबित होता है कि मोदी सरकार ब्रांडिंग करने में, ट्वीट में अपने वरिष्ठ मंत्रियों से कॉपी-पेस्ट करके एक ही ट्वीट करवाने में उस्ताद है।

इस बार एक तरह से मोदी सरकार ने अपनी नाकामी को स्वीकार किया और इसका ठीकरा फोड़ा उन कई वरिष्ठ-वाचाल मंत्रियों पर, जो अलग-अलग वजहों से खबरों में बने थे और निगेटिव कवरेज को मैनेज नहीं कर पा रहे थे। प्रकाश जावेड़कर, हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद को इस कड़ी में देखा जा सकता है। 2014 से लेकर अब तक ---मंत्रिमंडल फेरबदल या विस्तार में इस बार क्या दांव खेलने जा रहे हैं मोदी, इसका मोटा-मोटा अंदाजा हो गया था और उसी के मुताबिक खबरें भी छापी जा रहीं थी। यह आभास सभी को था कि मंत्रिमंडल में किन्हें जगह मिलेगी—चाहे वह ज्योतिरादित्य सिंधिया हों, अनुराग ठाकुर या फिर अनुप्रिया पटेल। 43 लोगों में से अधिकांश के नाम पहले से मीडिया में चल रहे थे। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मेहरबानी होनी ही थी, जातिगत समीकरणों का भी जमकर ध्यान रखा जाना था। लेकिन सातों नये मंत्रियों को राज्य मंत्री का दर्जा मिला और उत्तर प्रदेश से एक कैबिनेट मंत्री संतोष गंगवार का पत्ता कट गया।

मोदी सरकार ने यह भी साबित किया कि जो दूसरी पार्टी को छोड़कर-तोड़कर, अपनी पार्टियों की सरकार को गिराकर भाजपा का दामन पकड़ते हैं, उन्हें नुकसान नहीं होने देते—आज जिस तरह से कांग्रेस को गचका देकर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया सीना चौड़ा करके आगे की सीट पर विराजमान थे और पदग्रहण के बाद मोदी उन्हें सीख दे रहे थे, वह आने वाले दिनों के लिए नसीहत है। महाराष्ट्र के शिवसेना-कांग्रेस से नारायण राणे को जिस तरह से पहले नंबर पर शपथ दिलाई गई। याद रहे कि उनके औऱ उनके परिवार के ऊपर ईडी ने 300 करोड़ रुपये की मनी लॉन्डरिंग का केस किया था।

एक और अहम चीज जो दर्ज की जानी चाहिए और जिस पर आगे सघन चर्चा व विश्लेषण होना चाहिए, वह यह कि इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कमान बहुत मजबूत हुई है। खासतौर से गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से जिन लोगों को इंट्री मिली है—वह दूरगामी रणनीति के तहत किया गया है। बंगाल से मतुआ समाज के सांसद शांतनुठाकुर के साथ कई पहली बार सांसद बने लोगों को जगह देकर आगे बंगाल पर फोकस को बनाए रखा। ओबीसी और दलित कार्ड के जरिए उत्तर प्रदेश में कई समीकरणों को जगह दी है। दलितों में भी ऐसी उप-जातियों पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काम को ठोस आधार देने की नजर से कई इंट्री की गई हैं।

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

modi cabinet
modi cabinet reshuffle
cabinet minister
Union Minister of State
Electoral politics
UP ELections 2022
gujrat election 2022
karnataka
caste equation
modi sarkar
Modi government

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़

कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...

हिजाब मामले पर कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम महिलाओं के साथ ज़्यादतियों को देगा बढ़ावा

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

यूपी की सियासत: मतदान से ठीक पहले पोस्टरों से गायब हुए योगी!, अकेले मुस्कुरा रहे हैं मोदी!!

अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत

यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License