NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
रोज़गार के रिपोर्ट कार्ड में मोदी सरकार फिर फेल
पिछले 4 महीने में भारत की बेरोज़गारी दर और अधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
अजय कुमार
04 Jan 2022
unemployment

अब तक उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तकरीबन 10 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। दबी जुबान में बात करने वाले कह रहे हैं कि यह आंकड़ा चुनाव खत्म होते-होते 60 हजार करोड़ रुपए को पार कर जाएगा। यह 60 हजार करोड़ रुपया अगर ढंग की जगह पर खर्च किया जाए तो कितने रोजगार पैदा होते। कितने बेरोजगार अपनी जिंदगी की तंगहाली से छुटकारा पा लेते।

लेकिन यह 60 हजार करोड़ रुपए हर उस काम पर खर्च किए जाते हैं जिसके जरिए लोगों को सच से दूर रह कर के वोट वसूला जा सके। उदाहरण के तौर पर टीवी पर चमचमाते हुए चेहरों को देख लीजिए। टीवी पर चमचमाते हुए चेहरे जिनमें से अधिकतर झूठ बोलने के सिवा कुछ भी नहीं करते हैं, जिनकी आमदनी महीने में ₹5 की भी नहीं होनी चाहिए। वह महीने में तकरीबन 20 से 40 लाख रुपए की सैलरी उठाते हैं। सच को दूर रखकर झूठ के कारोबार को जो लोग बढ़ा रहे हैं, उनके पास रोजगार भी है। पैसा भी है। उनकी जिंदगी भी मजे से चल रही है। लेकिन वहीं पर एक दूसरा भारत है। जहां पर बेरोजगारी का गजब आलम है।

बेरोजगारी का आलम देखिए। मध्य प्रदेश के उज्जैन में माली चपरासी सफाई कर्मी के लिए इधर बीच तकरीबन 60 भर्तियां निकलीं। योग्यता रखी गई 8वीं, 10वीं और 12वीं पास। इन 60 पदों को पाने के लिए लाइन में लगे थे तकरीबन 26000 लोग। जिसमें वह भी शामिल थे जिनके पास ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्रियां थीं। यह बेरोजगारी का केवल एक उदाहरण है। केवल मध्य प्रदेश के रोजगार पंजीयन के दफ्तरों में बेरोजगारी की संख्या 33 लाख है। जिसे भरने में तकरीबन 20 साल लग जाएंगे। यह हाल केवल मध्यप्रदेश का नहीं है बल्कि भारत के अधिकतर इलाकों का है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने साल 2021 के अंतिम महीने यानी दिसंबर के बेरोजगारी दर के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा की बेरोजगारी दर 34.1% है। यानी हरियाणा में काम की तलाश में निकले 34% लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान में यह आंकड़ा 27% का है। बिहार में 16% का है। झारखंड में 17% का है। यह सारे आंकड़े बता रहे हैं कि देश के बड़े राज्यों में बेरोजगारी की बहुत बड़ी फौज खड़ी है। यह तो केवल आंकड़ों की बात है। अगर इन आंकड़ों को खोल कर देखा जाए और इनके भीतर छिपी सरकार की साजिश उजागर हो जाए तो बेरोजगारी का भयावह स्वरूप सामने दिखेगा। उत्तर प्रदेश को ही देख लीजिए। यहां चुनाव होने जा रहे हैं। हिंदू मुस्लिम जमकर हो रहा है। योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर साल 2017 से घटकर 5% पर पहुंची है। जबकि छानबीन करने पर पता चलता है कि इस आंकड़े की सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट पहले से गिर रहा है। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का आलम इतना गहरा है कि लोगों ने काम की तलाश करना ही छोड़ दिया है। उस केटेगरी से ढेर सारे लोग बाहर हो गए हैं जिस केटेगरी का इस्तेमाल बेरोजगारी दर निकालने के लिए किया जाता है।

इसलिए उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर 5% दिखाई जा रही है। इस बारे में योगी आदित्यनाथ कुछ भी नहीं कहते। योगी आदित्यनाथ यह नहीं बताते कि साल 2017 के बाद से लेकर अब तक उनकी सरकार ने ऐसा क्या किया कि उत्तर प्रदेश का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट बढ़ने की बजाय घट गया। साल 2017 में उत्तर प्रदेश का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 38% था। यह घटकर के अगस्त 2021 में 34% पर पहुंच गया। इसके बारे में योगी आदित्यनाथ नहीं बताते हैं। यह आकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी की हालत भारत की औसत बेरोजगारी की हालत से बहुत ज्यादा अधिक है।

सीएमआई के आंकड़ों के मुताबिक भारत की औसत बेरोजगारी दिसंबर महीने में पिछले 4 महीने में सबसे अधिक ऊंचाई पर पहुंच गई है। देश की बेरोजगारी दर बीते दिसंबर में 7.91% पर पहुंच गई। बेरोजगारी के मामलों में शहरों की स्थिति ज्यादा खराब है, यहां बेरोजगारी दर 9.30% है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 7.28% है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के निदेशक महेश व्यास का कहना है कि दिसंबर में रोजगार की तलाश में तकरीबन 83 लाख घूम रहे थे। रोजगार महज 40 लाख लोगों को मिला। इसी ने बेरोजगारी दर को पिछले 4 महीने में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया।

सरकारी नौकरियां तो वैसे ही कम जारी की जा रही हैं। एक नौकरी पर हजारों दीवाने दिख जाते हैं। प्राइवेट नौकरियों का आलम बॉन्ड मार्केट से पता चलता है। आंकड़ा सामने आ रहा है कि पिछले 6 सालों में बांड के जरिए कंपनियों ने इस साल कम पैसा जुटाया है। जानकार कह रहे हैं कि इसका साफ मतलब है कि कंपनियां अपना विस्तार नहीं करना चाहती हैं। उनका पहले से रखा हुआ माल नहीं बिक पा रहा है तो वे विस्तार क्यों करेंगी? बाजार में मांग की इतनी कमी है कि पहले से मौजूद नौकरियां ही कम हो रही हैं। अगर कंपनियों का विस्तार नहीं होगा तो इसका मतलब है कि नौकरियों का विस्तार नहीं होगा।

आर्थिक असमानता घनघोर तरीके से बढ़ रही है। महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है। लोग कम पैसे पर शोषणकारी माहौल में काम कर रहे हैं। कम पैसे पर भी काम नहीं मिल रहा है। इन सब के जरिए लोगों की जिंदगी तो बदहाल होगी ही साथ में जब लोगों की जेब में पैसा नहीं होगा तो अर्थव्यवस्था भी पहले से और अधिक बदहाल होगी।

इन सबके बीच कोरोना कि दूसरी लहर आ चुकी है। इस दूसरी लहर से बचने के लिए दुनिया की गाड़ी फिर से ठप होने लगी है। जैसे-जैसे जीवन की गति रुक रही है भारत के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का डर भी बढ़ता जा रहा है। किसी के दरवाजे पर काम करने वाले चौकीदार से लेकर के रेहड़ी पटरी लगाकर जिंदगी गुजारा करने वाले तमाम लोगों से पूछिए तो उनके मुंह से निकले जिंदगी चलाने के डर के सामने हमारा आपका कोरोना की वजह से पैदा हुआ डर छोटा लगेगा।।

भाजपा अपनी पीठ पर मीडिया के सहारे राष्ट्रवादी होने का झूठा ठप्पा लगाती है। उस झूठे ठप्पे की सबसे बड़ी पोल खोल सच्चाई यही है कि बेरोजगारी भारत की सबसे गहरी परेशानी बनती जा रही है। देश का निर्माण इसीलिए होता है कि समाज खुशहाल दे सके। लेकिन जब देश को चलाने वाले देश के नागरिकों को काम ही मुहैया नहीं करवा पाएंगे तो कैसे कहा जा सकता है कि भाजपा राष्ट्रवादी है? और भाजपा को देश चलाने का हक मिलना चाहिए?

ये भी पढ़ें: महंगाई और बेरोज़गारी के बीच अर्थव्यवस्था में उछाल का दावा सरकार का एक और पाखंड है

unemployment
Modi Govt
unemployment in modi govt
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Hum bharat ke log
    अनिल सिन्हा
    हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है
    13 Feb 2022
    हम उस ओर बढ़ गए हैं जिधर नहीं जाने की कसम हमने ली थी। हमने तय किया था कि हम एक ऐसा मुल्क बनाएंगे जिसमें मजहब, जाति, लिंग, क्षेत्र, भाषा या विचारधारा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। हमने सोचा था कि…
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार
    13 Feb 2022
    रांची में छात्र युवा मार्च का नेतृत्व करते हुए भाकपा माले के युवा विधायक विनोद सिंह ने राजभवन के समक्ष आयोजित प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए राज्य के युवाओं तथा आम जनता की जन आकांक्षाओं के अनुरूप…
  • modi
    विजय विनीत
    यूपी चुनावः बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वनाथ कॉरिडोर की लोकप्रियता का असल इम्तिहान
    13 Feb 2022
    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर कुछ महीने पहले भाजपा ने बनारस के लोगों के पास एक ''महीन सियासी संदेश'' भेजा, लेकिन बनारसियों ने उसे अपने माथे पर चस्पा नहीं किया। ''बनारस की सरकार'' ने हाल ही में कई…
  • Punjab poll
    तृप्ता नारंग
    पंजाब चुनाव: नशीले पदार्थों की चपेट में नौजवान, कैसे पाई जाए मुक्ति?
    13 Feb 2022
    पंजाब में नशे के हालात समझने के सिलसिले में न्यूज़क्लिक ने कपूरथला ज़िले के डॉ संदीप भोला से बात की है..
  • hafte ki baata
    न्यूज़क्लिक टीम
    भाजपा को अब चुनावी तिकड़म और हिजाब-विवाद का आसरा
    12 Feb 2022
    क्या यूपी में पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा कुछ ज्यादा 'नर्वस' हो गयी है? क्या वह अगले चरणों के लिए कर्नाटक के हिजाब विवाद और कुछ खास चुनावी तिकड़म का सहारा लेने की फिराक में है? चुनाव के दौरान फरलो…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License