NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना पर गुपचुप तरीके से ताला लगा दिया है
अब तक ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में 2 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि किसान द्वारा दी जाती थी व बाकी 98 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि का भुगतान केंद्र व प्रांतीय सरकारों द्वारा 50 प्रतिशत - 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी में किया जाता था।
भाषा
20 Feb 2020
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
Image courtesy : The Economic Times

लेकिन मोदी सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर यह निर्णय लिया कि भारत सरकार बीमा प्रीमियम राशि की 50 प्रतिशत की बजाए केवल 25 प्रतिशत राशि का भुगतान ही करेगी।’’उन्होंने दावा किया कि किसान को अब 27 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि का भुगतान करना पड़ेगा।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने को लेकर बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस योजना को गुपचुप तरीके से बंद किया जा रहा है और अब किसानों को प्रीमियम की 27 फीसदी राशि का भुगतान करना पड़ेगा।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह दावा भी किया कि मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना की आड़ में ‘निजी कंपनी मुनाफा योजना’ चलाई है जिससे निजी बीमा कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मोदी मंत्रिमंडल ने बुधवार शाम देश के किसान पर एक और हमला बोला जब गुपचुप तरीके से ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ व ‘मौसम आधारित फसल बीमा योजना’ पर केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रीमियम राशि में 100 प्रतिशत कटौती कर देश के किसान को अपने रहमोकरम पर छोड़ दिया।’’

 सुरजेवाला ने कहा, ‘‘अब तक ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में 2 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि किसान द्वारा दी जाती थी व बाकी 98 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि का भुगतान केंद्र व प्रांतीय सरकारों द्वारा 50 प्रतिशत - 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी में किया जाता था।

लेकिन मोदी सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर यह निर्णय लिया कि भारत सरकार बीमा प्रीमियम राशि की 50 प्रतिशत की बजाए केवल 25 प्रतिशत राशि का भुगतान ही करेगी।’’उन्होंने दावा किया कि किसान को अब 27 प्रतिशत बीमा प्रीमियम राशि का भुगतान करना पड़ेगा।

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘‘जब भारत सरकार ही अपनी प्रीमियम राशि का भुगतान नहीं कर रही, तो फिर प्रांतीय सरकारों को अपने हिस्से का 50 प्रतिशत देने के लिए बाध्य कौन करेगा?’’उन्होंने कहा कि अगर प्रांतीय सरकारों ने भी देय प्रीमियम राशि में 25 प्रतिशत की कटौती की तो फिर किसान द्वारा दी जाने वाली प्रीमियम राशि बढ़कर 52 प्रतिशत हो जाएगी जिसका भुगतान किसान के लिए असंभव होगा।

सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘ मोदी मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय किया है कि देश के 151 जिलों के लिए अब एक नयी योजना बनाएंगे। मतलब साफ है कि देश के कुल लगभग 732 जिलों में से 151 आपदाग्रस्त जिलों में फसल बीमा योजना अब लागू ही नहीं रहेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार के अपने आंकड़े भी यह दर्शाते हैं कि तीन साल में बीमा कंपनियों ने पीएम फसल बीमा योजना से 77,801 करोड़ रुपये प्रीमियम लिया तथा 19,202 करोड़ रु. का मुनाफा कमाया।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने यह निर्णय भी लिया कि अगर राज्य सरकारों ने किसी वजह से फसल बीमा योजना में प्रीमियम राशि देने में देरी की तो संबंधित राज्य में योजना बंद कर दी जाए। यानी गलती सरकार करे और भरपाई किसान करे।’’

दरअसल, सरकार ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (पीएमएफबीवाई) को किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाने का फैसला किया। इसमें अब ऐसे किसान, सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को अपनाने या न अपनाने को स्वतंत्र होंगे जिन्होंने फसल कर्ज ले रखा है या जो फसल कर्ज लेना चाहते हैं ।

सरकार का कहना है कि कुछ किसान संगठनों और राज्य सरकारों ने इस कार्यक्रम को लागू किए जाने के विषय में कुछ चिंताएं जताई थीं। उसके मद्देनजर यह निर्णय किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
PM Crop Insurance Scheme
Narendra modi
farmer
Agriculture
Agriculture Crises
भारतीय कृषि
कृषि संकट
modi sarkar

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License