NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या फिर कुछ और....
रवि शंकर दुबे
10 Jan 2022
Muslim Dharm Sansad

हिन्दुस्तान में हिन्दुत्व के नाम पर नफरत के जो बीज बोए जा रहे हैं, उसकी जड़ें तलाशना अब बहुत ज़रूरी हो गया है। पोस्टरों, भाषणों, आयोजनों के जरिए जिस तरह से लोगों के भीतर एक-दूसरे के प्रति घृणा पैदा की जा रही है, ये आने वाले वक्त में कितना ख़तरनाक साबित हो सकता है इसकी आहट भी शायद ही किसी को हो। हालांकि ज़रूरत है इन विषयों को गंभीरता से विचारने की, इन पर शांति से चर्चा करने की और इनका हल ढूंढ निकालने की। एक तबका जहां इन नफरती आयोजनों को और ज्यादा विस्तार देने में सराबोर है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के बरेली में इसके खिलाफ लड़ाई की एक पहल भी की जा चुकी है।

बरेली में मुस्लिम धर्म संसद का आयोजन

बरेली में शुक्रवार 7 जनवरी यानी जुमे के दिन आईएमसी के बुलावे पर इस्लामिया मैदान में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, कहने को तो ये हुजूम भी धर्म संसद में इकट्ठा हुआ था, लेकिन और धर्म संसदों की तरह यहां से नफरती भाषण नहीं परोसे गए, बल्कि लोगों से नफरत के खिलाफ एकजुट होने की अपील की गई। दरअसल मुस्लिमों की इस धर्म संसद को हरिद्वार समेत बाकी राज्यों और शहरों में हो रही हिन्दुत्व के नाम पर धर्म संसदों में बोई जा रही नफरत के खिलाफ आयोजित किया गया था, इसमें आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा ने हिन्दुओं से अधर्म के खिलाफ जंग में मुसलमानों का साथ देने की अपील की। 

‘’भगवान राम ने रावण को मारा, क्या रावण मुसलमान था?’’

मौलाना तौकीर ने ये भी चेतावनी दी की जब तक हरिद्वार में हुई धर्म संसद के दौरान मुसलमानों को धमकी देने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी, हर जुमे को करीब 20 हज़ार नौजवान विरोध करने निकलते रहेंगे। हालांकि अधर्म के खिलाफ धर्म को बढ़ावा देने वाला भाषण देते वक्त कई जगह मौलाना विवादित भी बोल गए, और बिना नाम लिए कह गए कि अगर मुस्लिम नौजवान बेकाबू हो गए तो पूरे हिन्दुस्तान में पनाह नहीं मिलेगी। लेकिन उनके भाषण का मूल सार अपना गुस्सा जताते हुए भी हिन्दू और मुसलमानों की एकता का ही था। उन्होंने दोनों के बीच नफरत की दीवार को गिराने के लिए पौराणिक कथाओं का भी सहारा लिया। उन्होंने कहा कि ‘’क्या रावण मुसलमान था, भगवान राम ने रावण का वध किया था... कृष्ण ने कंस का वध किया, क्या कंस मुसलमान था। पांडवों ने कौरवों का वध किया, क्या कौरव मुसलमान थे।‘’

तौकीर ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा ‘’किस किताब में लिखा है कि हिन्दू और मुसलमानों को लड़ना चाहिए। हर दौर में अच्छे और बुरे के बीच जंग हुई है। इसलिए हिन्दुओं को अच्छाई का साथ देना चाहिए।”

मौलाना तौकीर रज़ा के भाषणों में बोले गए कुछ वक्तव्य भले ही एक समूह विशेष को नागवार गुज़रे, लेकिन इनमें जो तार्किकता थी उसे ज़हन में उतारना और समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में हुई धर्म संसदों में जहां महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्द कहे गए, हरिद्वार में जैसे मुसलमानों के खिलाफ आग उगली गई, उससे इतर बरेली में हुई धर्म संसद समाज में एक शांतिपूर्ण सौहार्द पैदा करने के लिए अच्छी पहल है।

अगर आप ग़ौर करेंगे तो पिछले कुछ वक्त में हिन्दू युवा वाहिनी, बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद समेत तमाम हिंदुत्ववादी संगठन, कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं, खुद को जबरन देशभक्त का तमगा दिए घूमने वाले इन संगठनों की सक्रियता समाज के लिए कितनी घातक साबित हो सकती है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं, कि इन लोगों ने काशी की गलियों में मुसलमान विरोधी पोस्टर लगा दिए हैं।   

हरिद्वार की धर्म संसद में क्या हुआ था?

आपको याद दिलाते चलें कि अभी बीते महीने 17 से 19 दिसंबर के बीच हरिद्वार में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जिसमें शामिल हुए साधु-संतों के विवादित भाषण खूब वायरल हुए, इन वायरल वीडियोज़ में धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री बनने से रोकने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर तमाम विवादित बयान दिए गए थे। हद तो वहां हो गई जब एक महिला संत ने कॉपी-किताबें रखकर हाथ में शस्त्र उठाने की अपील की। इस तरह के ख़तरनाक वीडियो वायरल होने के कई बाद तक कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई, हालांकि बाद में उत्तराखंड पुलिस ने यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिज़वी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी समेत अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इसके बाद भड़काऊ भाषण देने के खिलाफ संत धर्मदास और साध्वी अन्नपूर्णा के खिलाफ भी मुकदमा लिखा गया। 

छत्तीसगढ़ की धर्म संसद में क्या हुआ था?

हरिद्वार के बाद छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुई धर्म संसद की चर्चा शुरू हो गई जहां एक कालीचरण नाम के संत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया, हालांकि यहां आयोजनकर्ताओं में से ही एक रायपुर नगर निगम के सभापति और कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कालीचरण महाराज को जेल भेज दिया था।

ख़ैर... ऐसी ओछी टिप्पणियों और बयानों पर कार्रवाई तो होनी ही चाहिए, लेकिन सवाल ये हैं कि भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्य यानी उत्तराखंड के हरिद्वार में हुई धर्म संसद पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यानी साफ है कि कहीं न कहीं ऐसे विवादित बयानों, देश में नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों को बढ़ावा देने वालों पर भारतीय जनता पार्टी का भी हाथ है।

बात सिर्फ धर्म संसदों तक सीमित नहीं है, पिछले कुछ वक्त में देखा गया है कि कैसे स्कूलों में छोटे-छोटे बच्चों को शस्त्र उठाने की शपथ दिलवाई जा रही है, कैसे काशी की सड़कों, घाटों पर पोस्टर लगातार गैर हिन्दुओं को धमकाया जा रहा है। पिछले दिनों हमने देखा कि क्रिसमस के दिन ईसाइयों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया, कई जगहों पर संता बनने वालों की पिटाई तक कर दी गई, साथ ही आरोप लगाया गया कि ये पश्चिमी सभ्यता हमारे बच्चों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाती है। इतना ही नहीं बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के लोगों ने नया साल मनाने वालों को भी चेतावनी दी।

मुसलमानों के खिलाफ हिन्दुओं ने ली शपथ!

हिन्दुओं को उकसाने और नफरत भरा एक और वीडियो अब छत्तीसगढ़ के सरगुजा से वायरल हो रहा है, इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हजारों ग्रामीण मुस्लिमों का बहिष्कार करने की शपथ ले रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ये घटना 5 जनवरी की है, जहां लुंड्रा थाना क्षेत्र कुंदीकला गांव के लोगों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से किसी तरह का संबंध नहीं रखने की कसम खाई है। 

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कई ग्रामीण एक स्थान पर शपथ लेते दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति उनसे शपथ लेने की बात कहता दिखाई देता है और ग्रामीण हाथ उठाकर उस संकल्प को दोहराते हैं, वीडियो में लोग यह कहते सुनाई देते हैं, ‘‘हम संकल्प लेते हैं कि आज से हम हिंदू किसी भी मुसलमान दुकानदार से किसी भी प्रकार का सामान नहीं खरीदेंगे और न ही उन्हें किसी भी तरह का सामान बेचेंगे, आज से हम किसी मुसलमान व्यक्ति को अपनी जमीन पट्टे पर नहीं देंगे या बिक्री नहीं करेंगे, अगर किसी व्यक्ति के पास जमीन पट्टे पर है तो उसकी तत्काल वापसी कराएंगे, जो फेरीवाले हमारे गांव में आते हैं, हमारे क्षेत्र में आते हैं, गांव में उसकी जांच के बाद यदि वह हिंदू हुआ तभी उससे सामान खरीदा जाएगा, अन्यथा नहीं…’’

सरगुजा के जिलाधिकारी संजीव झा का कहना है कि इस घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इलाके का दौरा किया, जिससे ये पता चला कि नए साल के दौरान पड़ोसी राज्य के बलरामपुर से कुछ लोग यहां नए साल का जश्न मनाने आए थे, उन्हीं के साथ झगड़े के बाद ये सारा मामला सामने है, हालांकि मामले की जांच वीडियो के आधार पर की जा रही है।

आज के दौर में ऐसे वीडियो, धर्म संसद में विवादित बयान, राष्ट्रपिता के लिए अपशब्द या किसी धर्म के प्रति नफरत भरे भाषण सुनने को मिल ही जाते हैं, लेकिन इसके पीछे आख़िर क्या कारण हो सकता है? 

RSS और BJP का क्या प्लान है?

खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा मसीहा बताने वाली संस्था ‘’संघ’’ यानी ‘’आरएसएस’’ 2025 में 100 बरस की हो जाएगी, ज़ाहिर है इसको लेकर तैयारियां भी ज़ोरों पर ही होंगी। और ये कहना भी ग़लत नहीं होगा कि हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में हुई ये धर्म संसदें इन तैयारियों का ही एक नमूना मात्र हैं। कुछ दिनों पहले 1 जनवरी को सफदर हाशमी की शहादत दिवस पर बोलते हुए वरिष्ठ किसान नेता, कॉमरेड डीपी सिंह ने भी आरएसएस की 100 वर्षगांठ का जिक्र किया था, इस दौरान उन्होंने कहा था कि “साल 2025 में संघ 100 साल का हो जाएगा, यानी संघ के लोग पूरे देश में हिन्दुत्व के पक्ष में माहौल बनाकर कुछ बहुत बड़ा करने वाले हैं, और अगर वो अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं तो हिंदुस्तान को तालिबान बनने से कोई नहीं रोक सकता।”

आरएसएस की विचारधारा से ही भारतीय जनता पार्टी ने जन्म लिया है, ऐसे में आरएसएस के ज़हन में आने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव भी होंगे। ये बात इसलिए भी अहम है क्योंकि अब जनता मोदी जी और योगी जी से काम का हिसाब मांगने लगी है। इस सबके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ग्राफ भी पहले से नीचे आय़ा है। इसलिए अब सत्ता में कायम रहने के लिए एक बार फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को ही बढ़ावा दिया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: बनारस में हिन्दू युवा वाहिनी के जुलूस में लहराई गईं नंगी तलवारें, लगाए गए उन्मादी नारे

Hindu Dharm Sansad
Muslim Dharm Sansad
Religion and Politics
BJP
RSS
Hindu
Muslim
Hate politics
communal politics

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    पीपल्स डिस्पैच
    दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    23 Aug 2021
    मालीबोंग्वे मडाजो जिन्होंने पांच खनन कंपनियों के 7,000 कर्मचारियों के हड़ताल का नेतृत्व किया था उनकी श्रम विवाद के बीच कमीशन फॉर कॉन्सिलिएशन, मेडिएशन एंड अर्बिट्रेशन (सीसीएमए) के दरवाज़े पर सरेआम…
  • कोरोना
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देश में 25,072 नए मामले, 389 मरीज़ों की मौत
    23 Aug 2021
    करीब 160 दिन बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या सबसे कम दर्ज की गई है।
  • सुंदरवती महिला महाविद्यालय
    सोनिया यादव
    बिहार: चोटी के जरिये पितृसत्ता की बेड़ियों में नहीं बंधना चाहतीं भागलपुर कॉलेज की लड़कियां
    23 Aug 2021
    नए ड्रेस कोड के हर नियम पर छात्राओं की पूरी सहमति है लेकिन बालों में चोटी बांधने वाले फरमान पर उनमें भारी नाराजगी है। उनका मानना है कि यहां मामला मानसिकता का है, जो अब धीरे-धीरे मनुवाद की ओर ले जाने…
  • गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    सबरंग इंडिया
    गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    23 Aug 2021
    अदालत ने कहा कि नागरिकों को इस तरह से अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। जीएसटी अपराधों के ऐसे मामलों में, समान स्थिति वाले व्यापारियों के खिलाफ PASA नहीं लगाया जा सकता है।
  • sc
    भाषा
    वकीलों को वरिष्ठ का दर्जा देने संबंधी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा उच्चतम न्यायालय
    23 Aug 2021
    “वकीलों का दर्जा निर्दिष्ट समिति द्वारा दिए गए अंकों के आधार पर तय होना चाहिए और मतदान का सहारा केवल तब लिया जाना चाहिए जब कोई और रास्ता न हो। उच्च न्यायालय मतदान एक अपवाद के रूप में नहीं बल्कि एक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License