NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
घटना-दुर्घटना
नज़रिया
समाज
भारत
राजनीति
मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी
एक बात साफ़ हो चली है, वह यह कि भारत में मुसलमानों के क़त्लेआम या जनसंहार (जेनोसाइड) की आशंका व ख़तरा काल्पनिक नहीं, वास्तविक है। इस मंडराते ख़तरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
अजय सिंह
13 Apr 2022
ramnovmi
प्रतीकात्मक तस्वीर- न्यूज ट्रैक

10 अप्रैल 2022 को रामनवमी के ‘त्योहार’ के दिन—अगर इसे त्योहार कहा जाये!—देश के काफ़ी बड़े हिस्से में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जिस तरह, एक साथ व पूर्व-नियोजित तरीक़े से, हिंदुत्ववादी ताक़तों की ओर से डरावनी हिंसा और नफ़रत का प्रदर्शन किया गया, उससे एक बात साफ़ हो चली है। वह यह कि भारत में मुसलमानों के क़त्लेआम या जनसंहार (जेनोसाइड) की आशंका व ख़तरा काल्पनिक नहीं, वास्तविक है। इस मंडराते ख़तरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

यह ख़तरा इसलिए भी और बढ़ जाता है कि मुस्लिम-विरोधी हिंसा और नफ़रत को केंद्र और कई राज्यों में सत्ता के शीर्ष पर बैठी हिंदुत्व फ़ासीवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का खुला राजनीतिक संरक्षण व प्रोत्साहन मिला हुआ है। सत्ता के ऊंचे पायदान से मिले बढ़ावा की वजह से यह हिंसा—जिसमें यौन हिंसा का ख़तरा शामिल है—बर्बर और वीभत्स हुई जा रही है।

इस हिंसा का बेशर्म प्रदर्शन जुलाई 2021 में सामने आई मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा से भरी हुई, अश्लील टिप्पणियों से अटी हुई, यौन विकृति से लिजलिजाती हुई सुल्ली डील्स और बाद में 1 जनवरी 2022 को बुल्लीबाई डील्स  में हो चुका है। इसे करने वाले अपराधी समूहों को जिस तरह से खुल्ला छोड़ा, वह राजनीतिक वरदहस्त को बेनक़ाब करने के लिए पर्याप्त है। मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा को सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना, पहले भी होता रहा है— गुजरात 2002 से लेकर मुज़फ़्फ़रनगर 2013 में बहुत खुलकर यौन हिंसा का तांडव देखा गया। हालांकि उससे पहले भी तमाम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण इस लम्पट-अपराधी मानसिकता के साथ किये गये, इस बार उसका नंगा रूप सामने आया।

हर जगह, जहां भी हमला बोला गया, वहां डीजे से लेकर नारों तक में यह वहशी उन्माद था। बलात्कार को आधिकारिक तौर पर मंच से स्थापित करने की, उन्मादी भीड़ को उसके लिए तैयार करने की पूरी कोशिश की गई। इस तरह से सुल्ली डील्स और बुल्ली डील्स के जरिये जो यौन हिंसा को जायज़ ठहराने का अपराध शुरू हुआ था, वह रामनवमी के नाम पर डीजे की धुन में बलात्कार के सुर में निकाल रहा था। यह एक भयावह दृश्य था। मुसलमानों के क़त्लेआम या जनसंहार (जेनोसाइड) की तैयारी का हिस्सा था।

ग़ौर करने की बात है कि जिन राज्यों में ग़ैर-भाजपा विपक्षी पार्टियों की सरकारें हैं, वहां भी मुस्लिम-विरोधी हिंसा और नफ़रत का सैलाब उमड़ता चला आ रहा है। इसकी व्याख्या किस तरह की जाये? इन ग़ैर-भाजपा शासित राज्यों में भी नफ़रत और हिंसा का कारोबार चलानेवालों को सरकार का ख़ौफ़ नहीं है।

रामनवमी के दिन जिन राज्यों में मुस्लिम विरोधी हिंसा व नफ़रत का खुलेआम, पुलिस की मौजूदगी में, डरावना प्रदर्शन किया गया, उनकी सूची पर ध्यान दीजियेः गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, तेलंगाना और गोवा। इनमें से राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है, तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति की सरकार है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है।

दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हिंदुत्ववादी गिरोह ने हॉस्टल में गोश्त खाने/परोसने के सवाल पर वामपंथी छात्रों पर हमला कर दिया, जिसमें कई छात्र व छात्राएं घायल हो गयीं। सवाल यह है कि इन विपक्षी दलों ने क्यों यह होने दिया। क्यों नहीं समय रहते इस पर रोक लगाई। कैसे वहां पुलिस ने मुस्लिम बहुल इलाकों में इन जुलूसों को निकलने की इजाज़त दी। हिंसा, तनाव, आगज़नी होने के बाद—क्यों नहीं दोषियों को (जिनके चेहरे सबके सामने थे) गिरफ़्तार किया गया। दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र हिंसा के विरोध में उतरे लेकिन क्यों नहीं विपक्ष का कोई नेता सामने आया।

रामनवमी का ‘त्योहार’ लंबे समय से मुस्लिम-विरोधी रहा है, और अब तो वह चरम पर पहुंच गया है। रामनवमी का मतलब हो गया है, इस्लामाफ़ोबिया (इस्लाम से ख़ौफ़ व नफ़रत)। रामनवमी के मौक़े पर जो लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद/शुभकामना देती/देते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि ऐसा करने का मतलब है, मुस्लिम-विरोधी हिंसा व नफ़रत को और बढ़ावा देना। वक़्त आ गया है कि रामनवमी के जुलूस पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बारे में सोचा जाये।

(लेखक कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे भी पढ़ें : बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

Muslims
anti-muslim propaganda
Hindutva
Hindu Nationalism
Hindu Right Wing
Ramnavami

Related Stories

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

अब भी संभलिए!, नफ़रत के सौदागर आपसे आपके राम को छीनना चाहते हैं

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

बुराड़ी हिंदू महापंचायत: धार्मिक उन्माद के पक्ष में और मुसलमानों के ख़िलाफ़, पत्रकारों पर भी हुआ हमला

मथुरा: गौ-रक्षा के नाम पर फिर हमले हुए तेज़, पुलिस पर भी पीड़ितों को ही परेशान करने का आरोप, कई परिवारों ने छोड़े घर

ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक

झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए

मथुरा: शाही ईदगाह पर कार्यक्रम का ऐलान करने वाले संगठन पीछे हटे, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा


बाकी खबरें

  • russia
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस यूक्रेन में हस्तक्षेप करेगा
    25 Jan 2022
    रूस के नज़रिये से इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका यह है कि यूक्रेन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता फिर से हासिल करे और वाशिंगटन का मुंह ताकना बंद कर अपने भाग्य का फैसला खुद करे।
  •  RPN Singh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव:  कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, बीजेपी में शामिल हुए आरपीएन सिंह
    25 Jan 2022
    यूपी कांग्रेस के स्टार प्रचारक की लिस्ट में शामिल आरपीएन सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं, आरपीएन सिंह कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते थे।
  • Uttarakhand congress women wing
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बेटी पढ़ाओ’ और ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ के नारों को खोखला बताती उम्मीदवारों की लिस्ट
    25 Jan 2022
    कुल 70 में से 59 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है, लेकिन मात्र 5 महिलाओं को टिकट मिला है, वहीं कांग्रेस की 64 उम्मीदवारों की सूची में मात्र 6 महिलाएं हैं।
  • Pradhan mantri awas yojna
    सरोजिनी बिष्ट
    “2022 तक सबको मिलेगा पक्का घर” वायदे की पड़ताल: ठगा हुआ महसूस कर रहे गरीब परिवार
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश और केंद्र, दोनों सरकारों ने अपने पांच साल के कार्यकाल के भीतर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सभी शहरी और ग्रामीण गरीबों को पक्का घर देने का वादा किया था। सरकार दावे कुछ भी…
  • ntpc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : रेलवे परीक्षा परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन
    25 Jan 2022
    भारी संख्या में अभ्यर्थियों ने बिहार की राजधानी पटना और आरा में रेलवे ट्रैक पर गत सोमवार को प्रदर्शन किया वहीं आज मंगलवार को नालंदा, बक्सर, नवादा समेत अन्य स्टेशनों पर उन्होंने रेलवे ट्रैक पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License