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भारत
राजनीति
डीयू प्रशासन का नोटिस, विरोध-प्रदर्शन करने वाले 24 घंटे पहले आयोजन की सूचना दें
नोटिस के अनुसार, आयोजकों द्वारा 24 घंटे पहले प्रॉक्टर कार्यालय को कार्यक्रम की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। हालांकि तमाम छात्र संगठनों ने इसे अलोकतांत्रिक बताया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Dec 2019
DU

नई दिल्ली: देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर कहा है कि किसी भी ‘विरोध प्रदर्शन’ या ‘जमावड़े’ की उसे अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए।

इस संबंध में प्रॉक्टर नीता सहगल द्वारा 27 दिसंबर को जारी किए गए एक नोटिस के अनुसार आयोजक को कार्यक्रम की जानकारी, वक्ताओं की सूची, प्रतिभागियों की अपेक्षित संख्या आदि जैसी अन्य जानकारियां प्रस्तुत करनी होगी।

नोटिस के अनुसार,“कला संकाय गेट और आसपास के क्षेत्र के बाहर एकत्रित होने और विरोध-प्रदर्शन की पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। आयोजकों द्वारा 24 घंटे पहले प्रॉक्टर कार्यालय को कार्यक्रम की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है।”
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आपको बता दें यह नोटिस एनआरसी और सीएए के विरोध में आयोजित उस कार्यक्रम के दो दिन बाद आया है जिसमें लेखिका अरुधंति राय और कलाकार जीशान अयूब ने हिस्सा लिया था।

वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे “अलोकतांत्रिक” करार दिया और कहा कि यह नागरिकों के विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का हनन है।

छात्र संगठन द्वारा जारी स्टेटमेंट में कहा गया है, 'प्रतिरोध हमारा अधिकार है! हमे विरोध करने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है! प्रतिरोध करना सभी नागरिकों और छात्रों का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी तरह के पेपरवर्क से मुक्त रखना चाहिए।'

वहीं, एक दूसरे छात्र संगठन क्रांतिकारी युवा संगठन ने प्रशासन के इस नोटिस की निंदा की है और कहा है, 'यह मनमाना नोटिस छात्रों और छात्र संगठनों की लोकतांत्रिक आवाज पर आघात करने का प्रयास करता है।'

दूसरी ओर डीयू प्रशासन के इस आदेश पर शिक्षकों ने भी रोष व्यक्त किया है। आपको बता दें कि डीयू में एडहॉक शिक्षकों के समर्थन में विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी हाल में प्रदर्शन किया था।

प्रशासन के इस आदेश पर डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के वाइस प्रेसीडेंट राजीव कुमार कहते हैं, 'प्रशासन किस आधार पर पूर्व में सूचना देने की बात कर रहा है। आर्ट फैकल्टी गेट के बाहर की जगह कैंपस के अंदर नहीं आती है। यह प्रशासन द्वारा छात्रों और शिक्षकों के लिए उपलब्ध सार्वजनिक जगह को भी हथियाने का प्रयास है।'

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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