NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
12 साल के बाद NHRC का निर्णय : सलवा जुडूम और एसपीओ ने ही कोंडासावली गाँव जलाया
पीयूसीएल ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही इतने समय बाद न्याय पर सवाल उठाते हुए दोषी अधिकारीगण को दंडित करने की माँग की है।
तामेश्वर सिन्हा
13 Feb 2020
NHRC
प्रतीकात्मक फोटो। साभार : पत्रिका

बस्तर : पी यू सी एल की महासचिव सुधा भारद्वाज द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जाँच उपरान्त इसकी पुष्टि की है कि सुकमा ज़िले के गाँव कोंडासावली, कर्रेपारा और कामरागुडा में सन् 2007 में सलवा जुडूम और स्थानीय एसपीओ ने ही गाँवों में 95 घरों को जलाया और 7 ग्रामीणों की हत्या की थी। आयोग ने इस घटना में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों की संलिप्तता को स्पष्ट मानते हुए उस समय की राज्य सरकार को भी कठघरे में लिया है। आयोग ने राज्य सरकार को अनुशंसा देते हुए कि मृत व्यक्तियों के परिवार वालों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा शीघ्र दिया जाये आदेश पारित किया है।

इस घटना में मृतकों के नाम हैं – (1) मंडावी भीमा, कोंडासावली (2) बारसे सुकलू, कर्रेपारा (3) बारसे नंदा, कर्रेपारा (4) कुंजाम बोदा, कर्रेपारा (5) सुदाम भीम पि. मगड़ू, परलागट्टा (6) सुदाम भीम पि. जोगा, परलागट्टा (7) मीडियम अय्यती, परलागट्टा

सन् 2007 में इस आगज़नी और हत्या की भयावह घटना के बाद उक्त तीनों गाँव के ग्रामीण गाँव छोड़कर चले गये थे। कुछ वर्ष पश्चात्, सलवा जुडूम की मुहिम खत्म होने के बाद जब वे गाँव लौटे तो उन्होंने निर्णय लिया कि वे इस घटना की शिकायत करेंगे और सन् 2013 में उन्होंने सरपंच द्वारा पुलिस थाने में लिखित शिकायत पेश की। परन्तु उस शिकायत पर कार्रवाई करने की जगह, उन गाँव वालों और उनके सरपंच पर ही पुलिस कर्मियों और वहाँ के पूर्व सलवा जुडूम के नेताओं द्वारा हमला हुआ, और एक घटना में एक मृतक की पत्नी को भी मारा गया।

इससे व्यथित हो कर गाँव वालों ने पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई से सम्पर्क किया और अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, महासचिव ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इन गाँवों की ओर से लिखकर शिकायत दर्ज की। आयोग की निगरानी में सुकमा पुलिस ने ग्रामीणों की एफआईआर तो दर्ज की, पर उस पर जाँच फिर भी सही तरीके से नहीं की गई।

इस सब को देखते हुए – कि पहले ही FIR दर्ज करने में 7 साल का विलम्ब हुआ और फिर स्थानीय अधिकारीगण जाँच में भी लापरवाही कर रहे हैं - आयोग ने दिनांक 23.9.2019 के अपने आदेश में कहा कि –

“आयोग का यह निष्कर्ष है कि ये घटनायें पुलिस, राजस्व और जिला सुकमा के अन्य अधिकारियों के संज्ञान में घटना होने के तुरंत बाद आ गई थी, लेकिन पुलिस और ज़िला अधिकारियों ने जानबूझकर इन हत्याओं और आगज़नी की घटनाओं को नज़रअंदाज़ किया।“

इस जघन्य अपराध में सुकमा ज़िले के अधिकारीगण की संलिप्तता दर्शाते हुए आयोग लिखता है कि –

“ वास्तव में, राज्य और ज़िला सुकमा के अधिकारियों द्वारा सात साल तक इन घटनाओं का संज्ञान नहीं लिया जाना, इस बात को बहुत मज़बूती से दर्शाता है कि यह अपराध सुकमा ज़िले/ राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा ही किया गया है।"

“इस तरह लम्बी अवधि तक इन घटनाओं का संज्ञान नहीं लेने की जानबूझकर की गयी चूक, इस तथ्य को दृढ़ता से इंगित करता है कि ये भयावह अपराध जगरगुंडा बेस कैंप के एसपीओ द्वारा किये गये थे, जैसा कि FIR no. 10/2013 के शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है।“

उक्त FIR पर सही रूप से विवेचना नहीं करना और आयोग के आदेश उपरांत भी अधिकारियों की इस प्रकरण में रुचि नहीं लेने के संदर्भ में आयोग ने इस जाँच को “ कवर अप” घोषित करते हुए लिखा है कि -

“जिस तरीके से पुलिस द्वारा इस मामले की जाँच की जा रही है और जिस तरीके से कोंटा तहसीलदार ने अपनी जाँच की है, उसको देखते हुए यह स्पष्ट है कि राज्य विभागों, और पुलिस और प्रशासन का उद्देश्य इन घटनाओं के बारे में सच्चाई का पता लगाना नहीं अपितु इन अपराधों को छिपाना है। तहसीलदार कोंटा की जाँच रिपोर्ट और विवेचक द्वारा दर्ज बयानों को पढ़कर ज़ाहिर है कि उनका उद्देश्य सत्य को स्थापित करना बिल्कुल भी नहीं है और वह केवल इस घटना का एक कवर अप ऑपरेशन कर रहे हैं।“

आयोग के इस आदेश का छत्तीसगढ पीयूसीएल ने स्वागत किया है और आदेश को जल्द से जल्द अमल कराने की मांग की है। पीयूसीएल ने इस बात पर भी चिन्ता व्यक्त की है कि जब आयोग ने इस बात को मज़बूती से रखा है कि सलवा जुडूम और एसपीओ ने इस जघन्य अपराध को कारित किया है, और पुलिस और प्रशासन के अधिकारीगण इसके कवर –अप में जुटे हैं, तो इन के खिलाफ किसी दांडिक कार्यवाही की अनुशंसा क्यों नहीं दी गई है।

बार बार यही देखा जा रहा है कि शासन द्वारा आदिवासियों, दलितों और कमज़ोर वर्ग के विरुद्ध घृणित अपराध किये जाते हैं, और जब वे स्थापित हो जाते हैं , तो पीड़ितों को केवल मुआवज़े से ही संतुष्टि करनी पड़ती है। पीयूसीएल ने आयोग और राज्य सरकार दोनों से माँग की है कि इन अपराधी अफसरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाये।

पीयूसीएल ने ये भी कहा है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के इस आदेश से यह बात भी स्पष्ट होती है कि पीयूसीएल महासचिव सुधा भारद्वाज किस प्रकार का और किस के लिए काम करती थी। उनके इसी प्रकार के मानव हितो के लिए काम करने से सरकारी तंत्र व हुक्मरानों को काफी चोट पहुंच रही थी।

सरकारी तंत्र तथा हुक्मरानों ने उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिए उन पर झूठे आरोप लगा कर उन्हें जेल में बंद करने का घृणित षड्यन्त्र किया है,ताकि शोषित, पीड़ित, आम जनता की आवाज़ दब जाए। छत्तीसगढ़ पीयूसीएल ने मांग की है कि दलित,आदिवासीऔर मज़दूर, किसानों के मानव अधिकारों को सुनिश्चित करने और संवैधानिक कानून के तहत आवाज़ उठाने वाले सुधा भारद्वाज और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए।

(तामेश्वर सिन्हा स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

NHRC
salwa judum
SPO
PUCL
सुधा भारद्वाज
Sudha Bhardwaj
Chhattisgarh
national human rights commission

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी

लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा

करौली हिंसा को रोकने में विफल रहे अधिकारियों को निलंबित करें: PUCL

छत्तीसगढ़: खैरागढ़ विधानसभा सीट के लिए मंगलवार को मतदान, तैयारी पूरी

सालवा जुडूम के कारण मध्य भारत से हज़ारों विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग 

पुरानी पेंशन बहाली मुद्दे पर हरकत में आया मानवाधिकार आयोग, केंद्र को फिर भेजा रिमाइंडर

छत्तीसगढ़: आदिवासियों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर वाले एड़समेटा कांड को 9 साल पूरे, माकपा ने कहा दोषियों पर दर्ज हो हत्या का मामला 


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License