NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं ही नहीं है, यह दक्षिणपंथियों, हिन्दुत्ववादियों की 'हिंदू राष्ट्र' की वृहत परियोजना का ही हिस्सा हैं। अगर किसी को शक हो तो ये पूरी क्रोनोलॉजी पढ़िए, समझिए।
मुकुल सरल
05 Apr 2022
hindutva
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार गूगल

नफ़रत की क्रोनोलॉजी


पहले वे अज़ान के ख़िलाफ़ आए


सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर में घंटा बजाते हुए

शंख फूंकते हुए

पूरे गले से माइक पर आरती गाते हुए

मैंने किया ऐलान

हां, किसी को हक़ नहीं है दूसरों की नींद में ख़लल डालने का


रात के दो बजे

डीजे पर फ़िल्मी गानों से सजे

देवी जागरण के मंच से भी

मैंने यही बात दोहराई


हां, अब मस्जिदों पर लाउडस्पीकरों की क्या ज़रूरत है

अब तो सबके पास है घड़ी

और सब हैं इतने जानकार

कि ख़ुद ही देख सकें कि नमाज़ का टाइम हो गया है या नहीं,

रोज़ा इफ़्तार या सहरी का वक़्त क्या है!


फिर वे नमाज़ के ख़िलाफ़ आए

कांवड़ियों पर फूल बरसाते हुए

रास्ते रोक कर भंडारे लगाते हुए

मैंने कहां- हां, खुले में नमाज़ की क्या है ज़रूरत


बीच सड़क पर भव्य टेंट सजाते हुए

स्वामी जी के धारावाहिक सत्संग में भी

मैंने यही बात दोहराई


हां, अपने धार्मिक आयोजन के लिए किसी को सार्वजनिक सड़क रोकने की इजाज़त नहीं दी जा सकती


फिर वे हिजाब के विरुद्ध आए

मैंने भी कहा- हां, 21वीं सदी में हिजाब की क्या है ज़रूरत

ये तो औरतों को ग़ुलाम बनाने की प्रथा है


इस बीच उन्होंने जींस पहनने वाली महिलाओं पर हमला किया

उन्होंने मोबाइल रखने वाली महिलाओं पर हमला किया

उन्होंने लिखने-पढ़ने-बोलने वाली महिलाओं की नीलामी की

आंदोलन करने वाली महिलाओं को वैश्या कहा

प्रेम और प्रेम विवाह को जिहाद बताया

ऐप बनाए, बोली लगाई, गालियां दीं

पार्कों में रुसवा किया

सरेआम सज़ाएं मुकर्रर कीं

उन्होंने हर स्वतंत्र और आधुनिक सोच रखने वाली महिला को घर के भीतर धकेलने की साज़िश की


मैंने भी कहा- हां, इतनी आज़ादी भी ठीक नहीं

बिना घूंघट, नंगे सर बहुएं अच्छी नहीं लगती

मैं तो बिना दुपट्टे अपनी बहन और बेटी तक को बाहर न जाने दूं


हां, लेकिन मैं इस बात पर कायम हूं कि हिजाब और बुर्का पिछड़ेपन की निशानी हैं और हमें मुसलमान औरतों को इस ग़ुलामी से मुक्त कराना ही होगा।

बिल्कुल तीन तलाक़ की तरह। जिसमें हमने एक सिविल मैटर को आपराधिक मामला बना दिया।

पहली बार किसी हिंदू प्रधान (बिना बताए अपनी पत्नी को छोड़ने वाले) ने मुसलमान औरतों का दर्द समझा।


और ये तो स्कूल-कॉलेज यूनिफॉर्म का मामला है

कलावा बंधी अपनी कलाई झटकते हुए

अपनी राखी, अपना जनेऊ ठीक करते हुए

अपना टीका और गहरा बनाते हुए

अपने साथी की पगड़ी संभालते हुए

मैंने दो टूक कहा- हिजाब तो नहीं होगा बर्दाश्त


हां, हमारी बेटियों को अंग्रेज़/ईसाई बनाने की कोशिश भी नहीं की जाएगी बर्दाश्त

हमने मिशनरी और कॉन्वेंट स्कूल-कॉलेजों को जारी कर दी है एडवाइजरी (चेतावनी)

कि यूनिफॉर्म के नाम पर भी लड़कियों के लिए

पेंट-शर्ट या स्कर्ट नहीं चलेगी हमारे भारत में


कुमकुम-बिंदी, काजल, कुंडल, चूड़ी-नथुनी भी है हमारी परंपरा,

सरस्वती पूजा है हमारी आस्था...

सरस्वती तो हैं ज्ञान की देवी...शिक्षा के मंदिर में उनकी पूजा नहीं होगी तो किसकी होगी!

और गीता...गीता तो है ही ईश्वर का संदेश...इसे तो सबको पढ़ना और पढ़ाना चाहिए

इस सबसे किसी को क्या ऐतराज़ हो सकता है और हो भी तो तुम्हारे ऐतराज़ के मायने क्या हैं?


हम अपनी परंपरा, अपनी आस्था से किसी को खिलवाड़ नहीं करने देंगे।


क्या आपने पूछा बकरीद...क़ुर्बानी?

जी हां, मैं इसके भी ख़िलाफ हूं


अख़लाक़ और पहलू ख़ान के

लिंचरों को माला पहनाते हुए

मैंने उनके साथ ज़ोर से दोहराया

हां, कब तक धर्म के नाम पर

जानवरों की क़ुर्बानी दी जाती रहेगी।


मैं तो मिड मील तक में अंडा दिए जाने के ख़िलाफ़ हूं

प्याज़ लहसुन तक मुझे बर्दाश्त नहीं (और दलित भोजनमाता!...ये विषय और कभी)


और मत पूछिए!


हां हां आपको भी पता ही है

शुरुआत एक पुरानी मस्जिद से हुई थी

मैंने भी कहा था- हां राम के नाम पर अयोध्या में मंदिर नहीं बनेगा तो कहां बनेगा


और उन्होंने कोर्ट में झूठा शपथ पत्र देकर मस्जिद ढहा दी

हां हां अब उसी कोर्ट की कृपा से मंदिर निर्माण शुरू हो चुका है

और रामजी की कृपा से न्यायाधीश जी सांसद का पद पा चुके हैं

और मथुरा-काशी का अभियान शुरू हो चुका है

ये चमत्कार नहीं तो क्या है...


आगे मत पूछिए

हिंदू-मुस्लिम का सवाल

अस्सी-बीस का बवाल


आपने...

सॉरी...

तुमने ही किया था इंकार

बेदख़ली का क़ानून (सीएए-एनआरसी) मानने से

अब भुगतो...


‘धर्म संसद’ में नरसंहार का ऐलान हो चुका है

मुझे बहुत तैयारी करनी है


नहीं नहीं तरस मत खाइए

सहानुभूति मत जताइए

कि अंत में मेरे पक्ष में बोलने वाला कोई नहीं बचेगा

अपनी फ़िक्र कीजिए

अपनी ख़ैर मनाइए

जाइए भाग जाइए

ये देश तुम्हारा नहीं है

...

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

Hindutva
Communalism
hindu rashtra
dharm sansad
azan
NAMAZ
Hijab Controversy  

Related Stories

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

कार्टून क्लिक: आधे रास्ते में ही हांफ गए “हिंदू-मुस्लिम के चैंपियन”

विचार: राजनीतिक हिंदुत्व के दौर में सच्चे साधुओं की चुप्पी हिंदू धर्म को पहुंचा रही है नुक़सान

रवांडा नरसंहार की तर्ज़ पर भारत में मिलते-जुलते सांप्रदायिक हिंसा के मामले


बाकी खबरें

  •  Bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार खाद संकटः रबी की बुआई में देरी से किसान चिंतित, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
    10 Dec 2021
    अब मुजफ्फरपुर जिले के दस गांव के किसानों ने डीएपी खाद समेत अन्य खाद और बीज की भारी कमी को लेकर एनएच-722 पर प्रदर्शन किया और करीब छह घंटे तक मार्ग को जाम रखा।
  • Ghanshyam Tiwari
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में सपा की जीत संविधान की जीत होगी : घनश्याम तिवारी
    10 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश के चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश और देश की राजनीती में सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं. हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मेरठ में हुई रैली में लाखो की संख्या में लोग देखने को मिले। आने वाले…
  • omicron
    संदीपन तालुकदार
    ओमिक्रोन के नए संस्करण का पता चला, यह टीके की सुरक्षा को दे सकता है मात
    10 Dec 2021
    जैसा कि पहले प्रयोगशाला अध्ययनों के द्वारा सुझाया गया है, और यह सच हो सकता है कि कोविड टीकों के द्वारा प्रदान की गई कुछ सुरक्षा से ओमिक्रोन बचकर निकल सकता है।
  • rights
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पत्रकारों पर बढ़ते हमले क्या आलोचना की आवाज़ दबाने की कोशिश है?
    10 Dec 2021
    सीपीजे की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक दिसंबर 2021 तक दुनिया भर में 293 पत्रकार अपने काम के लिए विभिन्न देशों की जेलों में बंद थे। रिपोर्ट के अनुसार चीन में पत्रकारों की सबसे बुरी स्थिति है, तो वहीं भारत…
  • opposition
    बी. सिवरामन
    विपक्षी खेमे की चिंताजनक विभाजनकारी प्रवृत्तियां
    10 Dec 2021
    टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में मुंबई में फ़िल्मकारों के बीच जा कर कहा था कि "“यूपीए क्या है? कोई यूपीए नहीं है!" उनकी इस टिप्पणी की आलोचना शिवसेना ने भी की है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License