NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
मज़दूरों की मौत पर जनता का राष्ट्रीय शोक, जीवन व आजीविका के लिए सरकार से जवाबदेही की मांग
रोज़ी रोटी अधिकार अभियान के आह्वान पर दिल्ली, बिहार, राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं झारखंड में बड़े पैमाने पर लोगों ने शोक दिवस मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। 5 हजार से ज्यादा संस्थाएं एवं कई नेटवर्क इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
राजु कुमार
01 Jun 2020
मज़दूरों की मौत पर जनता का राष्ट्रीय शोक

कोविड-19 के कारण लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के जीवन एवं आजीविका की जवाबदेही की मांग और सरकारी उपेक्षा से असमय हुई मौतों को लेकर रोज़ी रोटी अधिकार अभियान ने आज पहली जून को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया। सुबह से ही पूरे देश में रोज़ी रोटी अधिकार अभियान से जुड़ी संस्थाओं ने शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक विरोध प्रदर्शन किया। सरकारों को उत्तरदायी बनाने के लिए दोपहर बाद से ट्विटर पर #शोकदिवस #DayOfMourning हैशटैग के साथ विरोध प्रदर्शन के फोटो, वीडियो, मांगों के पोस्टर, संदेश आदि को स्ट्रोम किया गया।

रोज़ी रोटी अधिकार अभियान राष्ट्रीय सचिवालय की समन्वयक आयशा ने बताया, ‘‘दिल्ली, बिहार, राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं झारखंड में बड़े पैमाने पर लोगों ने शोक दिवस मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। 5 हजार से ज्यादा संस्थाएं एवं कई नेटवर्क इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।”

उन्होंने बताया, “देश की राजधानी दिल्ली में नीति आयोग के बाहर भी अभियान से जुड़े साथियों ने प्रदर्शन किया। दिल्ली की 40 बस्तियों में प्रदर्शन की सूचना है। दिल्ली में एनसीपीआरआई की अंजलि भारद्वाज, एनएफआईडब्ल्यू की राष्ट्रीय महासचिव एनी राजा सहित कई वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।’’

RTF - Outside of NITI Ayog, Delhi.jpg

आयशा ने बताया, ‘‘विरोध प्रदर्शन में छोटे-छोटे समूह में, सुरक्षित दूरी का ध्यान रखते हुए मृतकों की याद में 2 मिनट का मौन रखा गया। कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रैलियां निकाली गई। शहरों में भी कलेक्टर ऑफिस के सामने, जिला पंचायत के सामने और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं। सांस्कृतिक प्रतिरोध करते हुए लोगों ने जनगीत गाए। इन विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें एवं वीडियो को सोशल मीडिया पर लोग साझा कर रहे हैं। ट्विटर पर #शोकदिवस #DayOfMourning हैशटैग के साथ स्ट्रोम किया जा रहा है।’’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणासी में मनरेगा मज़दूर यूनियन सहित कई संस्थाओं ने विरोध प्रदर्शन एवं शोक सभा का आयोजन किया। यूनियन के महेन्द्र ने बताया, ‘‘हमने गांव-गांव में मनरेगा मज़दूरों की बैठक की। तख्ती लेकर गांवों में प्रदर्शन किया। मज़दूरों ने बताया कि लॉकडाउन के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।’’

Varanasi - MNREGA Labour 1.jpg

रोज़ी रोटी अधिकार अभियान और सहयोग से जुड़ी लखनऊ की सुनीता सिंह ने बताया, ‘‘गोरखपुर, वाराणासी, लखनऊ सहित प्रदेश के 15 जिलों में 8 नेटवर्क संस्थाओं ने शोक दिवस मनाया। इसके साथ ही उन्होंने मौन सत्याग्रह किया। केन्द्र के साथ-साथ राज्य सरकार से भी मांग की गई कि गरीबों एवं मज़दूरों को एक साल तक मुफ्त राशन दिया जाए।’’

Sangtin Kisan Mazdoor Sangthan - Sitapur, UP.jpg

एमकेएसएस से जुड़े जयपुर के मुकेश ने बताया, ‘‘राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन किया गया। जयपुर में एफसीआई गोदाम के सामने और कलेक्टर ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया गया। हमने मुख्यमंत्री के नाम से कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कहा है कि केन्द्र सरकार जब निर्णय ले, तब ले, लेकिन राज्य सरकार मज़दूरों के हक में तत्काल निर्णय ले।’’

NFIW, Jaipur Collector office.jpg

आरटीएफ रायपुर के गंगाराम पैकरा ने बताया, ‘‘हमने छह जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। इसमें विशेष रूप से मनरेगा मज़दूर शामिल हुए। मज़दूरों को बताया गया कि मज़दूरों के असमय मौत पर राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया जा रहा है, तो उन्हें आश्चर्य हुआ। नेताओं की मौत पर ऐसा होता आया है, लेकिन ऐसा पहली बार है कि मज़दूरों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शोक दिवस मनाया गया।’’

Rajpur - Chhattisgarh.jpg

बिहार आरटीएफ से जुड़े रूपेश कुमार ने बताया, ‘‘पूरे बिहार में प्रदर्शन करते हुए केन्द्र एवं राज्य दोनों सरकारों को मज़दूरों के प्रति असंवेदनशील बताया गया। मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर महिला की मौत पर लोगों ने आक्रोश जाहिर किया। मज़दूरों ने नागर समाज को धन्यवाद दिया कि सरकार के बजाय इन्होंने मज़दूरों के घाव पर मलहम लगाया। यदि सरकार जल्द राहत नहीं देती है, तो मज़दूरों की ओर से उसे नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।’’

NAPM Vaishali, Bihar.jpg
झारखंड एडीआर व आरटीएफ से जुड़े अशर्फीनंद प्रसाद ने बताया, ‘‘16 जिलों में पंचायत व विकासखंड कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया। सोशल डिस्टेसिंग के साथ रैलियां भी निकाली गई। प्रवासी मज़दूरों की मौत पर मुआवजे की मांग राज्य सरकार से की गई और इसके साथ ही उन्हें तुरंत रोजगार उपलब्ध कराने की बात की गई। 7 जून तक कार्यक्रम करने के बाद राज्य सरकार को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा।’’

मध्यप्रदेश आरटीएफ की अंजलि ने बताया, ‘‘राज्य में 20 जिलो में 9 संस्थाओं ने विरोध प्रदर्शन किया है, इसमें बघेलखंड एवं बुंदेलखंड के जिले शामिल हैं, जहां पहले भी मज़दूरों की समस्या रही है और वहां से पलायन बड़े पैमाने पर होता रहा है। संस्थाओं के बैनर तले मजदूरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। ट्विटर पर मध्यप्रदेश की 20 संस्थाएं विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं।’’ मध्यप्रदेश भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने 12 जिलों में प्रदर्शन करते हुए सरकार की नाकामियों को उजागर किया। मध्यप्रदेश से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों के प्रति राज्य सरकार की उपेक्षा को उल्लेखित करते हुए कहा किया सरकार का रवैया मज़दूर विरोधी रहा है।”

Satna, Madhya Pradesh.jpg

राष्ट्रीय स्तर पर रोज़ी रोटी अभियान ने मांग की है कि -

1. सार्वभौमिक रूप से प्रति माह अगले छह महीने तक पीडीएस से 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल एवं 800 ग्राम तेल मुफ्त दिया जाए।
2. आंगनवाड़ी एवं शालाओं में मध्याह्न भोजन के माध्यम से पका हुआ भोजन सुनिश्चित किया जाए।
3. प्रवासी मज़दूरों एवं देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए मज़दूरों को सुरक्षित घर जाने की मुफ्त व्यवस्था की जाए।
4. प्रत्येक गरीब परिवार को हर माह 7 हजार रुपये नकद दिया जाए।
5. मनरेगा के तहत प्रत्येक व्यक्ति एवं गांव लौटे सभी प्रवासी मज़दूरों को 240 दिन काम दिया जाए। शहरों में भी काम दिया जाए।
6.  सभी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएं।

इस विरोध प्रदर्शन और शोक दिवस के लिए रोज़ी रोटी अधिकार अभियान ने एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया है, ‘‘पिछले 2 महीनों से पूरे देश में लागू किये गए लॉकडाउन ने देश भर के लोगों को खासकर गरीब, बेघर, हाशिए पर खडे लोगों को एवं प्रवासी मज़दूरों को अभूतपूर्भूव संकट में डाला है। 22 मई तक देश में कुल 667 मौतें हुई हैं जिनका कारण कोविड संक्रमण नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटना (205 मौतें), भूख और लॉकडाउन (114 मौतें) के चलते हुई पीड़ा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में चक्रवात अम्फान द्वारा आई प्राकृतिक आपदा ने लोगों पर दोहरी मार डाली है। इन मसलों पर केंद्रीय सरकार की प्रतिक्रिया बहुत ही निर्दयी है। ऐसी परिस्थिति में शोक सिर्फ लोगों की मौत एवं उनकी आजीविका और आकांक्षाओं के दमन का नहीं है, बल्कि यह एक तरीका है सरकार को आईना दिखाने का, जवाबदेही तय करने का, सवाल पूछने का और लोगों की परेशानियों पर बेरहम प्रतिक्रिया पर जवाब मांगने का।’’

अभियान का कहना है कि अभी तक हमने ‘थाली बजाओ’, ‘दिया जलाओ’, ‘फूल बरसाओ’  और न जाने कैसे कैसे बिना मतलब के उत्सव एवं समारोह देखे हैं। उस पर सरकार ने राहत कार्य की घोषणा करने में देरी भी की और वह सारी घोषणाएं अभी की स्थिति के लिए अपर्याप्त है। पहले तो सरकार ने प्रवासी मज़दूरों की परेशानियों से मूंह मोड़ा और फिर मज़दूरों को उनके राज्य एवं घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेन एवं बस चलाने में काफी देरी की। दुर्भाग्य से आगे जो कुछ हुआ वह बहुत ही दुखद था, चाहे वह मज़दूरों की सड़क एवं ट्रेन से मौत की खबर या फिर श्रमिक ट्रेनों में खाने एवं पीने के पानी की कमी। मज़दूरों की परेशानी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसे में मज़दूरों की समस्याओं के समाधान और उनकी आवाज़ सरकार तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया।

इस अभियान में रोज़ी रोटी अधिकार अभियान के साथ भारत ज्ञान विज्ञान समिति, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, जन संगठनों का राष्ट्रीय समन्वय, पीयूसीएल, एनसीपीआरआई, एमकेएसएस, सूचना एवं रोजगार अभियान, सेवा भारत, असंगठित क्षेत्र के मज़दूर अभियान, राष्ट्रीय विकलांग आंदोलन, समग्र टिकाऊ खेती के लिए समन्वय, जन स्वास्थ्य अभियान, एनएफआईडब्ल्यू, पश्चिम बंग खेत मज़दूर समिति, एचआरएलएन, भारत मुस्लिम महिला आंदोलन, मातृत्व स्वास्थ्य व मानव अधिकार का राष्ट्रीय समन्वय, एकता नारी शक्ति संगठन, नेशनल फिशरवर्कर्स फोरम सहित कई आंदोलन एवं संस्थाएं शामिल हुईं।

COVID-19
Coronavirus
Workers and Labors
Nationwide Protest
Migrant workers
Labors death
Narendra modi
modi sarkar
Delhi
Bihar
Rajasthan
Odisha
Gujarat
West Bengal
Chhattisgarh
Madhya Pradesh
Uttar pradesh
Jharkhand

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License