NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
महामारी के न्यूमोनिया में राष्ट्रवादी बुख़ार!
अगर कुछ शुभेच्छुओं को लगता रहा हो कि इतने बड़े संकट के बाद दुनिया में नए किस्म का भाईचारा पनपेगा, तो उन्हें सावधान हो जाना चाहिए।
अरुण कुमार त्रिपाठी
07 May 2020
कोरोना वायरस
प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो साभार: EKOenergy

कोरोना महामारी से बुरी तरह त्रस्त दुनिया बीमारी से उबरने के बजाय राष्ट्रवाद नाम की नई बीमारी को आमंत्रित कर रही है। अगर कुछ शुभेच्छुओं को लगता रहा हो कि इतने बड़े संकट के बाद दुनिया में नए किस्म का भाईचारा पनपेगा, तो उन्हें सावधान हो जाना चाहिए। महामारी में वायरस के संक्रमण के साथ ही राष्ट्रवाद का वह बुख़ार भी तेज होता जा रहा है जो दुनिया को नए किस्म के युद्ध की ओर ले जा सकता है। इसकी एक झलक हम अमेरिका और चीन के टकराव के रूप में देख सकते हैं तो दूसरी ओर ब्रिटेन, फ्रांस, भारत, ब्राजील, इटली और जापान में तेजी से सिर उठाती राष्ट्रवादी प्रवृत्तियों के रूप में। इनकी विडंबना यह है कि उदार लोकतंत्र वाले इन देशों ने चीन से कोई सबक सीखने का प्रयास ही नहीं किया। इस रवैए के चलते उन्होंने अपने यहां भारी जनधन की हानि उठाई है। उल्टे उन्होंने चीन पर लैब में कोरोना वायरस तैयार करने का आरोप लगाया और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस आरोप को लगातार चुनावी मुद्दा बनाते जा रहे हैं। उससे भी बड़ी बात यह है कि अधिनायकवाद के आधार पर चीन की आलोचना करने वाले इन देशों के शासक अपने आप में अधिनायकवादी होते जा रहे हैं।

दुनिया की मौजूदा स्थिति पर फिट बैठनी वाली एक कहानी कभी मशहूर दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने लिखी थी। यह कथा परमाणु युद्ध की आशंका और मानव जाति की प्रतिक्रिया पर केंद्रित थी। कहानी का नाम है `इन्फ्रा रेडियोस्कोप’। शीत युद्ध को लक्ष्य करके लिखी गई कहानी बताती है कि दुनिया की परमाणु शस्त्र संपन्न शक्तियां एक दूसरे को खत्म कर देने की तैयारी में लगी हैं। इसी बीच उन्हें पता चलता है कि दुनिया पर कोई बाहरी खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे की आशंका में वे शक्तियां एक हो जाती हैं और अपनी दुश्मनी व होड़ भुलाकर सहयोग करने लगती हैं। दरअसल कहानी में कुछ वैज्ञानिकों, प्रकाशकों और उद्योगपतियों ने मिलकर एक साजिश रची थी और एक झूठ फैला दिया। उन्होंने कहा कि इन्फ्रा रेडियोस्कोप नाम के यंत्र से देखा गया है कि मंगल ग्रह के निवासी आक्रमण करने के लिए धरती पर पहुंच गए हैं। उन्हें नंगी आंखों से तो नहीं देखा जा सकता लेकिन इन्फ्रा रेड प्रकाश से पहचाना जा सकता है।

उन लोगों ने कहा कि मंगल ग्रह के वासी धरती पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। इस ख़बर के साथ ऐसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों का नाम जोड़ दिया जाता है कि लोग अविश्वास न कर पाएं। इस खबर ने कुछ समय के लिए महाशक्तियों की पारस्परिक शत्रुता समाप्त कर दी। लेकिन साज़िश की कहानी गढ़ने वाले ज्यादा समय तक उस झूठ को टिका नहीं पाते। उन्हें खुद ही पश्चाताप होता है और वे इस रहस्य से पर्दा उठा देते हैं कि मंगल ग्रह के निवासियों के आने की कहानी गढ़ी हुई है। उसके बाद मैत्री का वातावरण मिट जाता है और महाशक्तियां एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए लड़ कर दुनिया को समाप्त कर देती हैं।

इस कहानी में मंगल ग्रह वासियों के आक्रमण की जगह पर कोरोना के आक्रमण को रखकर देखिए कहानी का अंतिम चरण चरितार्थ होता दिखने लगता है। कहानी की सीख यही है कि वैश्विक एकता या विश्व बंधुत्व एक अस्थायी भाव है और मानव समुदाय के भीतर एक प्रकार का क्षेत्रीय अधिकार कुंडली जमाए बैठा रहता है। वही उसे कट्टर राष्ट्रवादी बनाता रहता है। महामारी से निपटने में सबसे बड़ी दिक्कत नस्ल, जाति, वर्ग और राष्ट्र के विभाजन की है। महामारी अमीर, गरीब और कमजोर ताकतवर का भेद नहीं देखती। न ही वह जाति और नस्ल का अंतर देखती है। लेकिन इन अंतरों में बंटा मानव समुदाय उससे बाहर निकल ही नहीं पाता। इस समय अमेरिका और चीन के बीच इस वायरस की उत्पत्ति और उससे जुड़ी राजनीति और अर्थव्यवस्था पर आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो चला है।

इस दौरान उन वैश्विक संस्थाओं की जमकर लानत मलानत हो रही है जिनके सहारे दुनिया समृद्ध बनने और स्वस्थ होने का सपना देख रही थी। हालांकि उन संस्थाओं के चरित्र पर कई तरह का संदेह रहा है लेकिन राष्ट्राध्यक्षों की ओर से उन्हें नष्ट करने का इतना खुला अभियान कभी नहीं चला।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि डब्ल्यूएचओ ज्यादा बुरा है या डब्ल्यूटीओ, कहा नहीं जा सकता। उनके विदेश मंत्री माइक पांपियो कहते हैं कि कोविड-19 वायरस चीन की प्रयोगशाला में पैदा हुआ, इस बात को वे पूरे यकीन के साथ कह सकते हैं। दूसरी ओर चीन डब्ल्यूएचओ के हवाले से कहता है कि यह वायरस प्राकृतिक है। अपनी बात के समर्थन में चीन अमेरिकी राष्ट्रपति के वैज्ञानिक सलाहकार एंथनी फाउची और अमेरिका के चीफ आफ ज्वाइंट स्टाफ मार्क मिले का हवाला देता है। मिले ने कहा था कि हमें नहीं मालूम कि कोरोना कहां पैदा हुआ। फाउची को भी अभी लैब वाली थ्योरी पर यक़ीन नहीं है।

इधर भारत में भी चीनी सामानों के बहिष्कार की छिटपुट मांगें शुरू हो गई हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तो चीन से टेस्ट किट मंगाने से मना भी किया था। हाल में चीन से आयातित सामानों की खराब किस्में इस चीन विरोधी भावना में बढ़ोतरी कर रही हैं। लेकिन मामला चीन विरोध तक ही नहीं सीमित है। दुनिया के 60 देशों ने मास्क, पीपीई और दूसरे मेडिकल सामानों के निर्यात को या तो बहुत कम कर दिया है या प्रतिबंधित कर दिया है। इससे गरीब देश सहम गए हैं। यूरोपीय संघ के कमजोर पड़ने के साथ उसके सदस्य देश अपनी स्थिति खुद ही संभालने के लिए कमर कस रहे हैं। वे दूसरे देशों को अनाज भी भेजने से मना करने लगे हैं।

ऐसे में कोरोना से जिस वैश्विक सहयोग की उम्मीद बढ़ रही थी वह धूमिल होती दिख रही है। सभ्यताओं के संघर्ष का जो सिद्धांत कमजोर पड़ता दिख रहा था वह फिर सिर उठाने लगा है। भारत में कोरोना से ठीक पहले सीएए और एनआरसी के बहाने जो सांप्रदायिक और फासीवादी शक्तियां आक्रामक थीं वे नए तरीके से अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं। इस माहौल में जहां सैमुअल पी हटिंगटन की सभ्यताओं के टकराव की थ्योरी याद आती है, वहीं राबर्ट डी कापलान की `मानसूनः द इंडियन ओसेन एंड फ्यूचर आफ अमेरिकन पावर’ का भी स्मरण होता है। कापलान मानते हैं कि हिंद महासागर की परिधि पर स्थित देश अमेरिका के लिए यह बेहद महत्त्वपूर्ण है। हालांकि पहले उसने इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। चूंकि इस परिक्षेत्र में भारत और चीन का प्रभाव बढ़ रहा है इसलिए उसे संतुलित करने के लिए यहां अमेरिकी नौसेना का हस्तक्षेप तेज होगा। इसलिए महज संयोग नहीं है कि कोरोना से जूझ रहे इस समय में दक्षिण पूर्व चीन सागर में अमेरिकी नौसेना का बेड़ा सक्रिय हो गया है।

दुनिया में महामारी और युद्धों के बीच में एक प्रकार का रिश्ता रहा है। बीच में भले जुआल नोहा हरारी दोनों की समाप्ति की घोषणा करने लगे थे लेकिन वैसा होता हुआ दिखता नहीं है। संयोग देखिए कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध दोनों के बाद महामारी फैली और उसी के साथ दुनिया के इतिहास और भूगोल में व्यापक परिवर्तन हुआ। कहीं ऐसा न हो कि इस बार महामारी के बाद युद्ध हो और दुनिया का भू-राजनीतिक स्वरूप बदल जाए।

(अरुण कुमार त्रिपाठी वरिष्ठ लेखक और पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Global Pandemic
Global crisis
USA
China
italy
japan
Spain
Donand Trump
Global Economy

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • JANAZA
    ज़ाकिर अली त्यागी
    हरदोई: क़ब्रिस्तान को भगवान ट्रस्ट की जमीन बता नहीं दफ़नाने दिया शव, 26 घंटे बाद दूसरी जगह सुपुर्द-ए-खाक़!
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश के हरदोई बीजेपी से जुड़े एक शख़्स ने शव को दफ़्न करने से रोक दिया, और क़ब्रिस्तान की ज़मीन पर अपना दावा ठोक दिया, हैरानी की बात यह रही कि कार्रवाई करने की बजाय प्रशासन भी उनकी ताल में…
  • अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    एजाज़ अशरफ़
    अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    08 Jan 2022
    यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर क्यों रक्षा कर्मी हिंदुत्व के समर्थन में हैं और पर्यावरण का मुद्दा इस पहाड़ी राज्य के लिए चुनावी मुद्दा नहीं है।
  • ECI
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    5 राज्यों में चुनाव तारीख़ों की घोषणा, यूपी में 7 चरणों में चुनाव, 10 मार्च को मतगणना
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होगा, वहीं उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में 14 फरवरी को एक चरण में और मणिपुर में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। इसी के साथ 15 जनवरी तक रैली,…
  • रवि कौशल
    राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा
    08 Jan 2022
    दरअसल यह लोग राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) के तहत अगले चरण में पदों को बढ़वाने के लिए 70 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं। इनकी मांग है कि सीटों की संख्या को बढ़ाकर 50,000 किया जाए।
  • सोनिया यादव
    यूपी: देश के सबसे बड़े राज्य के ‘स्मार्ट युवा’ सड़कों पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
    08 Jan 2022
    एक ओर रैलियों में बीजेपी की योगी सरकार अपनी उपलब्धियां गिनवा रही है तो वहीं दूसरी ओर चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश के युवाओं ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License