NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
निर्माण मज़दूरों की 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल,यूनियन ने कहा- करोड़ों मज़दूर होंगे शामिल
भारत की निर्माण मज़दूर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर ने कहा कि इस हड़ताल में केंद्रीय मुद्दों के साथ साथ राज्य के अपने मुद्दे भी शामिल होंगे। इस हड़ताल में हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में हड़ताली कमर्चारी दो दिन का पड़ाव डालेंगे। जबकि पूरे देश में जिला ब्लॉक स्तर पर हज़ारों जगह कार्यक्रम होंगे।
मुकुंद झा
30 Nov 2021
workers
फाइल फोटो।

देश भर में निर्माण मज़दूर अपनी मांगों को लेकर 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल करेंगे। सेंट्रल ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से संबंधित भारत की निर्माण मज़दूर फेडरेशन ने देश में निर्माण मज़दूरों की मांगो को लेकर इस दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियन ने दावा किया कि इस दिन देशभर में निर्माण, मनरेगा व निर्माण क्षेत्र के करोड़ों मजदूर हड़ताल करके काम ठप्प करेंगे। इस दौरान यूनियन देशभर में विरोध प्रदर्शन और रैली निकालेंगे।

लेकिन एक बड़ा सवाल है इन मज़दूरों को हड़ताल पर जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या है इनकी मांगे-

निर्माण मज़दूर कौन हैं?

हमें ये समझना होगा कि निर्माण मज़दूर कौन होता है और ये अन्य मजदूरों से कैसे भिन्न हैं? जो मज़दूर निर्माण कार्यों जैसे भवन बनाने व मरम्मत करने सड़क-पुल, रेलवे बिजली का उत्पादन, टावर्स बांध \नहर \जलाशय, खुदाई, जल पाइप लाइन बिछाने, केबल बिछाने जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं, उनमें बहुत से राजमिस्त्री, बढ़ई, वेल्डर, पॉलिश मैन, क्रेन ड्राईवर, बेलदार व चौकीदार भी होते हैं, ये सब भी निर्माण मज़दूर कहलाते हैं। ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के मज़दूरों का भी पंजीकरण निर्माण मज़दूरों के तहत ही किया जाता है।

निर्माण मज़दूरों को दो हिस्सों में देखना होगा- एक वे हैं जो दिहाड़ी पर रोज़ाना काम करते हैं। देश के छोटे बड़े सभी शहरों-गाँवों में सुबह से ही लेबर चौक पर सस्ते श्रम और श्रमिकों का बाज़ार लगता है। और मज़दूरों का दूसरा हिस्सा वो है जो बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों में काम करता है, जैसे मेट्रो, बड़े शॉपिंग मॉल, बड़ी रिहायशी और सरकारी इमारतों का निर्माण।

इसके अलावा, ये श्रमिक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऊंची इमारतों पर काम करते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप ख़तरनाक स्थिति पैदा हो जाती है। दुर्घटनाओं के समय, कुछ अपवादों को छोड़कर, उन्हें कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जाती है।

“ निर्माण मज़दूर के पास हड़ताल के आलाव नहीं कोई विकल्प ”

भारत की निर्माण मज़दूर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह ने न्यूज़क्लिक से फोन पर की गई बातचीत में बताया कि "ये हड़ताल निर्माण मज़दूरों की मज़बूरी है क्योंकि अब केवल एक यही विकल्प रह गया था,केंद्र की मोदी सरकार ने कई सालों के लंबे संघर्ष के बाद बने निर्माण मज़दूरों के हक़ में बने भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक (रोज़गार तथा सेवा शर्तों का नियमन) अधिनियम 1996 को सरकार पूरी तरह से खत्म कर इन्हे लेबर कोड में शामिल किया है और वहां बड़ी चालकी से मज़दूरों के अधिकारों को गोलमोल कर दिया गया है। इसे कमजोर कर सरकार निर्माण मज़दूर की सुरक्षा को छीन रही है। ऐसे में अब मज़दूरों के पास हड़ताल के आलाव कोई विकल्प नहीं था।"

सुखबीर ने आगे दावा किया की इस हड़ताल में कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस हड़ताल के दौरान लाखों मज़दूरों तो सड़को पर उतरेंगे जबकि करोड़ो निर्माण मज़दूर इस हड़ताल में कामबंदी पर रहेंगे।

भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक (रोज़गार तथा सेवा शर्तों का नियमन) अधिनियम 1996 में पारित किया गया था। इस अधिनियम में भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिकों के रोज़गार तथा सेवा शर्तों का विनियमित करने के साथ ही उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपायों के प्रावधान थे। जिसे अब सरकार अपने चार में से दो लेबर कोड सामजिक सुरक्षा और दूसरा ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन में शामिल कर रही है।

आपको बता दे 1996 अधिनियम के तहत कल्याणकारी बोर्ड की स्थापना की गई जिसे भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिकों का कल्याणकारी बोर्ड कहा जाता था। इन कल्याण बोर्डों के लिए राशि नियोक्ताओं (विनिर्माण श्रमिकों को रोज़गार देने वाली रियल एस्टेट कंपनियां) द्वारा विनिर्माण पर किए गए व्यय पर लगाए गए उपकर से हासिल होती थी।

इसलिए कल्याणकारी बोर्डों के संसाधनों को बढ़ाने के मद्देनज़र इस उपकर के लागू करने और वसूलने के लिए भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम 1996 पास किया गया।

सुखबीर ने कहा इन्हें इस तरह से इन कोडो में शामिल किया गया है जिससे ये मज़दूरों के अधिकारों को खत्म कर मालिकों को आज़ादी देता है जिससे वो मज़दूरों का और शोषण करे।

इसके साथ ही उन्होंने सरकार की मंशा पर भी कई सवाल उठाए और कहा "हमें जानकरी मिली है कि सरकार बिल्डरों पर लगने वाले कर की लिमिट 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख करने जा रही है। जो राज्यों में बने कल्याण बोर्ड के आर्थिक स्थति को कमजोर करेगा और जब बोर्ड के पास फंड नहीं होगा तो मज़दूरों का कल्याण क्या करेगी ? दूसरा अब इन कोडो के तहत राज्य स्तर पर जो कल्याणकारी बोर्ड बनेगा उसका स्वरूप ऐसा बनाया जा रहा है जिससे मज़दूर यूनियन का प्रतिनिधित्व को नकारा दिया जाए। "

राज्यस्तर पर होंगे विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में राजधानी भवन निर्माण यूनियन के महसचिव सिद्धेश्वर शुक्ला ने कहा कि इस हड़ताल में दिल्ली के लाखो निर्माण मज़दूर हिस्सा लेंगे। हड़ताल के पहले दिन हम जिला स्तरीय विरोध प्रदर्शन करेंगे। जबकि दूसरे दिन दिल्ली बिल्डिंग और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (DBOCWWB) मुख्यालय, सिविल लाइन्स में एक विशाल धरना देंगे।

उन्होंने बताया इस हड़ताल के लिए दिल्ली में बीते कई दिनों से प्रचार प्रसार चलाया जा रहा है।

हिमाचल में भी सीटू से सबन्धित हिमाचल प्रदेश मनरेगा व निर्माण मज़दूर फेडरेशन अपनी मांगों को लेकर दो दिसम्बर को प्रदेशव्यापी हड़ताल करेगी। इस दिन प्रदेशभर में निर्माणाधीन बिजली परियोजनाओं,फोरलेन,दीपक प्रोजेक्ट,मनरेगा व निर्माण क्षेत्र के हज़ारों मजदूर हड़ताल करके काम ठप्प करेंगे। इस दौरान यूनियन शिमला में श्रमिक कल्याण बोर्ड कार्यालय खलीनी में विशाल रैली करेगी जिसमें प्रदेशभर से हज़ारों मनरेगा व निर्माण कर्मी भाग लेंगे। सीटू ने चेताया है कि अगर प्रदेश सरकार व श्रमिक कल्याण बोर्ड ने मजदूरों की मांगों को पूर्ण न किया तो आंदोलन तेज होगा।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा,महासचिव प्रेम गौतम,यूनियन अध्यक्ष जोगिंदर कुमार व महासचिव भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि केंद्र व प्रदेश सरकारें लगातार मज़दूर विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं। मजदूर विरोधी चार लेबर कोडों को निरस्त करना भी इसी का एक हिस्सा है। कानून के खत्म होने से देश के करोड़ों मनरेगा व निर्माण मजदूर सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगे व श्रमिक कल्याण बोर्डों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा। केंद्र व प्रदेश सरकार पहले ही मार्च 2021 में श्रमिक कल्याण बोर्डों के तहत मनरेगा व निर्माण मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं में भारी कटौती कर दी गयी है। इसमें वाशिंग मशीन,सोलर लैम्प,इंडक्शन चूल्हा,टिफिन इत्यादि शामिल है। श्रमिक कल्याण बोर्डों की धनराशि को प्रधानमंत्री कोष में शिफ्ट करने की साज़िश चल रही है जिसका दुरुपयोग होना तय है।

हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड पंजीकृत मजदूरों के लाभ समय पर जारी नहीं कर रहा है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश श्रमिक कल्याण बोर्ड पर मजदूरों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी तीन सौ रुपये करने,एक सौ बीस दिन का काम सुनिश्चित करने,मजदूरों का पंजीकरण सरल व एक समान करने,मजदूरों को स्वीकृत सामग्री तुरन्त जारी करने,बोर्ड से मिलने वाली सहायता सामग्री बहाल करने,शिक्षण छात्रवृत्ति,विवाह,चिकित्सा इत्यादि की लंबित सहायता राशि जारी करने,मजदूरों की पेंशन दो हज़ार रुपये करने,जिलों में मजदूरों के पंजीकरण हेतु अतिरिक्त स्टाफ व श्रम कल्याण अधिकारी नियुक्त करने व लॉक डाउन अवधि की राशि सभी को तुरन्त जारी करने की मांग की।

राजस्थान में भवन निर्माण मिस्त्री मजदूर यूनियन ने भी इस हड़ताल को सफल बनांने के लिए लगातार बैठके जारी हैं। यहाँ भी निर्माण मजदूर फेडरेशन के राष्ट्रीय आह्वान पर 2 व 3 दिसंबर को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई जा रही है।

हनुमानगढ़ जिला संयोजक बहादुर सिंह चौहान ने बयान जारी करते हुए बताया कि 2 व 3 दिसंबर की देशव्यापी हड़ताल होगी और हड़ताल के दौरान जिला हेड क्वार्टर हनुमानगढ़ पर महापड़ाव डाला जाएगा जिसके लिए यूनियन के कार्यकर्ता गांव-गांव में जा रहे हैं और निर्माण मजदूर-कारीगरों को पर्चा वितरित करते हुए यूनियन की सदस्यता व अभियान चलाते हुए मजदूर-कारीगरों को लामबन्द किया जा रहा है।

यूनियन के नेताओं ने बताया कि प्रदेश के निर्माण कल्याण बोर्ड में जमा 328.50 करोड़ रुपये कोरोना काल में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने बिना बोर्ड की बैठक किए रुपयों को अपने कब्जे में ले लिया और अब उस पर कुंडली मार कर बैठ गई और इस पैसे को निर्माण मजदूरों पर खर्च करने की बजाय इसे खुर्द-बुर्द करना चाहती है। इसलिए भवन निर्माण मिस्त्री मजदूर यूनियन जिला कमेटी हनुमानगढ़ ने फैसला किया है कि बीजेपी-कांग्रेस के मजदूर विरोधी अजेंडे को जनता के बीच में ले जाया जा रहा है और 2-3 दिसंबर की हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया जाएगा।

इसी तरह हरियाणा में भी सीटू से संबंधित भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा पुरे राज्यभर में हर रोज निर्माण के मजदूर-कारेगरों की बैठके चल रही हैं।

यूनियन के नेताओं ने बताया कि देश व प्रदेश की भाजपा सरकार निर्माण मजदूरों के हकों पर लगातार हमले कर रही है। एक तरफ उनको लाभ से वंचित किया जा रहा है दूसरी तरफ कमर तोड़ महंगाई ने निर्माण मजदूर-कारीगरों व आम जनता का जीना दूभर कर दिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने मजदूरों के हक के लिए बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके चार लेबर कोड में बदल दिया है जिनसे मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का रास्ता खोल दिया है। इन कोडो में ना तो न्यूनतम वेतन का प्रावधान है और ना ही काम की समय सीमा तय की गई है। मजदूर थोड़े से थोड़े वेतन में दिन-रात पूंजीपतियों के यहां काम करेंगे।

उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश में निर्माण कल्याण बोर्ड में आज किसी का भी पंजीकरण नहीं हो रहा है बीजेपी-जेजेपी सरकार ने सेंट्रल प्रोसेसिंग सिस्टम (सीपीएस) के माध्यम से निर्माण मजदूरों को मिलने वाली सहायता राशि से वंचित कर दिया है और यह ढोंग किया जा रहा है कि सीपीएस से भ्रष्टाचार खत्म हो गया लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। बोर्ड में पंजीकृत निर्माण मजदूर कारीगरों को मृत्यु, कन्यादान, शादी, मातृत्व, पितृत्व लाभ मिलना तो दूर की बात है उनको साइकिल, औजार, महिला सम्मान का लाभ मिलना भी दुर्लभ हो गया है। प्रदेश के निर्माण कल्याण बोर्ड में जमा 4500 करोड़ रुपये जमा है जिन पर बीजेपी-जेजेपी ने अपनी निगाहे जमा रखी है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर ने कहा कि इस हड़ताल में केंद्रीय मुद्दों के साथ साथ राज्य के अपने मुद्दे भी शामिल होंगे। इस हड़ताल में हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में हड़ताली कमर्चारी दो दिन का पड़वा डालेंगे। जबकि पूरे देश में जिला ब्लॉक स्तर पर हज़ारों जगह कार्यक्रम होंगे।

Workers Strike
construction workers
CONSTRUCTION WORKERS PROTEST
Nationwide Protest
trade unions
CITU

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License