NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
लापरवाही : छह महीने बाद भी बच्चों को नहीं मिली किताबें, अभिभावकों को चिंता
विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के लिए 8.95 लाख सेट किताब की डिमांड राज्य मुख्यालय को भेजी गयी थी, जिसमें केवल पांच हज़ार छात्र-छात्राओं को ही किताब मिल सकी हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Oct 2021
Muzaffarpur
प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार हिंदुस्तान टाइम्स

मौजूदा सत्र की पढ़ाई शरू हुए छह महीने बीत चुके हैं लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के करीब 8.90 लाख बच्चों को किताब नहीं मिल पाई है। ऐसे में बच्चे कैसे पढा़ई करें यह चिंता की बात है। इसको लेकर अभिभावकों अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। पिछले साल कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के बाद से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है। हालांकि बिहार में स्कूलों को खोल दिया गया है लेकिन किताब न होने के चलते बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एहतियाती तौर पर प्राइमरी स्तर का स्कूल अभी नहीं खोला गया है। 15 नवंबर तक इसके भी खुलने की संभावना है।

विभाग की लापरवाही

विभाग की लापरवाही के चलते बच्चों और अभिभावकों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के लिए 8.95 लाख सेट किताब की डिमांड राज्य मुख्यालय को भेजी गयी थी, जिसमें केवल पांच हजार छात्र-छात्राओं को ही किताब मिल सकी हैं। शिक्षा विभाग ने बच्चों को किताब उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निजी प्रकाशकों को दी है। 30 सितंबर तक का लक्ष्य रखा गया था। संकुल स्तर पर पुस्तक क्रय मेला लगाने को कहा गया था लेकिन 251 में केवल तीन संकुलों में ही किताब उपलब्ध कराई गई।

किताब ख़रीदने को विभाग की ओर से बच्चों को दिया जा रहा पैसा 

रिपोर्ट के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को किताब के लिए विभाग की ओर से पैसा दिया जा रहा है। छात्र या उनके अभिभावक के खाते में यह पैसा सीधे भेजा जा रहा है। वहीं प्रकाशक पुस्तक क्रय मेला लगाएंगे जहां से बच्चे खुद किताब खरीदेंगे। कक्षा के अनुसार किताबों के सेट की राशि तय की गयी है। वहीं प्रकाशकों ने जो किताबें उपलब्ध करायी है, उसमें कई क्लास का अधूरा सेट ही है।

बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी चौपट

बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी चौपट हो चुकी है जिससे अभिभावकों को अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। विभाग के साथ ही शिक्षकों की उदासीनता इसकी मुख्य वजह है। इसका खुलासा विभाग की पिछले महीने जारी रिपोर्ट में हुआ। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए तैयार इ-लॉट्स (इ-लाइब्रेरी फॉर टीचर्स एंड स्टूडेंट्स) पोर्टल से शिक्षक खुद तो जुड़ गये लेकिन बच्चों को इसके बारे में बताना मुनासिब नहीं समझा।

इस पोर्टल को 13 मई को लांच किया गया था जिस पर पहली से 12वीं क्लास तक के लिए लर्निंग मैटीरियल उपलब्ध है।

डीपीओ अमरेंद्र कुमार पांडेय प्रभात खबर से कहा कि जिले से पहली से आठवीं क्लास के लिए 8.95 लाख सेट पुस्तक की डिमांड की गयी थी। इसमें पहली क्लास के लिए किताब अभी नहीं मिली है। दूसरी से आठवीं क्लास की किताबों के आठ लाख से अधिक सेट सितंबर में उपलब्ध कराने के लिए प्रकाशकों को कहा गया था। अबतक केवल पांच हजार सेट किताबें ही जिले को मिली हैं। और किताबें कब तक मिलेंगी, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है।

Bihar
muzaffarpur
education
Education crises
Bihar education system
Online Education

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License