NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत बेनतीजा, अगली बैठक 3 दिसंबर को
सरकार और किसान संगठनों के बीच क़रीब तीन घंटे से भी ज़्यादा चली बैठक का यह नतीजा निकला है कि अगली बैठक 3 दिसंबर को होगी। इस दौरान आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Dec 2020
सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत बेनतीजा
दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत हुई। फोटो साभार: economictimes

तीन नये कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच आज, मंगलवार को दोपहर से शाम तक क़रीब तीन घंटे से भी ज़्यादा चली बैठक बेनतीजा रही। बैठक का कुल मिलाकर यह नतीजा निकला है कि अगली बैठक 3 दिसंबर को होगी। इस दौरान आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

कुल मिलाकर गतिरोध वहीं बना हुआ है, जहां बैठक से पहले था। बैठक में सरकार की ओर से किसानों से अगली बातचीत के लिए एक छोटी कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया। और कहा कि बातचीत होगी तो सभी से होगी। फिलहाल सरकार ने इस बात को मान लिया है। लेकिन इससे आगे की राह अब 3 तारीख़ के बाद ही निकलेगी।  

दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई आज की बैठक में करीब 35 आंदोलनकारी किसान संगठनों के नेताओं ने शिरकत की और बाहर निकलकर बताया कि बैठक लगभग बेनतीजा रही। अब तीन तारीख को मंत्री, अधिकारी और किसान नेता फिर बैठेंगे। किसान इस बैठक में बिंदुवार अपनी आपत्तियां और समस्याएं लेकर जाएंगे। जिसपर बातचीत होगी। इस दौरान आंदोलन न केवल लगातार जारी रहेगा बल्कि उसका विस्तार भी किया जाएगा।

आज विज्ञान भवन में बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ रेल तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश, जो पंजाब के एक सांसद भी हैं, भी मौजूद रहे।

बैठक के बाद कृषि मंत्री तोमर ने पत्रकारों से कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। अब अगली बैठक तीन तारीख को बुलाई गई है।

बैठक से कुछ घंटे पहले केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, नरेन्द्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने केंद्र के नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन पर लंबी चर्चा की।

शुक्रवार को हुई छिटपुट हिंसा की घटना के बाद किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है और अधिकतम पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा सिंघू और टिकरी सीमाओं पर शांतिपूर्ण धरना जारी है। सोमवार को गाजीपुर की सीमा पर प्रदर्शनकारियों का हुजूम जुट गया था।

विपक्षी दलों ने भी अपना दबाव बढ़ा दिया है और केंद्र सरकार से किसानों के ‘‘लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान’’ करने और नये कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली से लगती सीमाओं के प्रवेश मार्गो पर मंगलवार को लगातार छठे दिन डटे हुए हैं।

किसान तीनों नए कृषि कानूनों को काला कानून बता रहे हैं। इन कानूनों को लेकर किसानों की कई आपत्तियां हैं। और सबसे ज़्यादा डर एपीएमसी मंडी और एमएसपी ख़त्म होने का है। किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों की वजह से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी जिससे किसान बड़े निगमित घरानों (कॉरपोरेट्स) की ‘दया’ के मोहताज हो जाएंगे।

सरकार निरंतर यह कह रही है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे और कृषि में नई प्रौद्योगिकियों का समावेश बढ़ेगा।

केन्द्र को एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए: जेजेपी

उधर, हरियाणा में भाजपा गठबंधन का हिस्सा जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने मंगलवार को कहा कि केन्द्र को प्रदर्शन कर रहे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लिखित आश्वासन देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

नए तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केन्द्र के बीच जारी बातचीत के दौरान पार्टी का यह बयान दिया।

जेजेपी प्रमुख एवं पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला ने कहा, ‘‘ जब केन्द्रीय कृषि मंत्री (नरेन्द्र सिंह तोमर) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार कह रहे हैं कि एमएसपी जारी रहेगा, तो उस पंक्ति को जोड़ने में (कानून में) क्या आपत्ति है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम चाहते हैं कि इस बात का जल्द से जल्द कोई समाधान निकले। हमने सरकार में शामिल लोगों से किसानों की समस्या का समाधान ढूंढने को कहा है।’’

किसानों के समर्थन में सिंघू बॉर्डर पर आईं बिलकिस दादी को वापस भेजा गया

राष्ट्रीय राजधानी में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में कई महीनों तक चले प्रदर्शन का चेहरा रहीं बिलकिस दादी किसानों के समर्थन में सिंघू बॉर्डर पर पहुंची थीं, जहां दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

‘शाहीन बाग की दादी’ के नाम से मशहूर बिलकिस ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। सिंघू बॉर्डर पर पहुंचते ही उन्हें दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने रोक दिया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “उन्हें सिंघू बॉर्डर पर रोक दिया गया और पुलिस उन्हें दक्षिण पूर्वी दिल्ली में स्थित उनके आवास तक छोड़ आई।”

राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग में सीएए के विरोध में कई महीनों तक चले प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आई बिलकिस (82) को टाइम मैगजीन की 100 सर्वाधिक प्रभावशाली हस्तियों की सूची में स्थान मिला था।

कई पूर्व खिलाफ पुरस्कार लौटाएंगे

पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड सम्मानित सहित कई पूर्व खिलाड़ियों ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि दिल्ली कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘बल’ प्रयोग के विरोध में वे अपना पुरस्कार लौटाएंगे।

इन खिलाड़ियों में पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड विजेता पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवॉर्ड से ही सम्मानित हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर शामिल हैं।

इन खिलाड़ियों ने कहा कि पांच दिसंबर को वे दिल्ली जाएंगे और राष्ट्रपति भवन के बाहर अपने पुरस्कार रखेंगे।

उन्होंने दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार द्वारा पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले छोड़ने की निंदा की।

चीमा ने मंगलवार को कहा, ‘‘हम किसानों के बच्चे हैं और वे पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। हिंसा की एक भी घटना उस दौरान नहीं हुई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब वे दिल्ली जा रहे थे तो उनके खिलाफ आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल हुआ और पानी की बौछारें छोड़ी गई। अगर हमारे बड़ों और भाइयों की पगड़ी उछाली गई, तो हम अपने अवॉर्ड और सम्मान का क्या करेंगे? हम अपने किसानों का समर्थन करते हैं। हमें ऐसे अवॉर्ड नहीं चाहिए, इसलिए उन्हें लौटा रहे हैं।’’

सिंह ने कहा कि कई पूर्व खिलाड़ी पांच दिसंबर को दिल्ली जाएंगे और अपने पुरस्कार लौटाएंगे।

पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए सिंह ने कहा, ‘‘ अगर किसान ऐसे कानून नहीं चाहते है तो केंद्र सरकार उनपर यह क्यों लाद रही है।’’

उन्होंने कहा कि पांच दिसंबर को पूर्व खिलाड़ी दिल्ली की सीमा पर हो रहे किसानों के प्रदर्शन में भी शामिल होंगे।

चीमा ने कहा कि कौर और अर्जुन अवॉर्ड (शाटफुट) विजेता बलविंदर सिंह सहित कई खिलाड़ी उनका समर्थन कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने एक कृषि कानून की अधिसूचना जारी की

इस बीच ख़बर है कि दिल्ली सरकार ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों में से एक की अधिसूचना जारी कर दी है जबकि बाकी दो अन्य पर विचार किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) कानून, 2020 को 23 नवंबर को अधिसूचित किया गया था।

उन्होंने कहा, ' बाकी दो कानूनों पर दिल्ली सरकार के विकास विभाग द्वारा विचार किया जा रहा है।'

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने कहा कि अधिसूचना के तहत किसान अपनी फसल मंडी के बाहर सहित कहीं भी बेच सकते हैं। दिल्ली में कई साल पहले से ही फलों और सब्जियों की बिक्री विनियमन मुक्त थी और अब अनाज के लिए भी यह लागू हो गया है।

हालांकि, पार्टी ने नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की किसानों की मांग का खुले तौर पर समर्थन किया है।

अधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2014 में फलों और सब्जियों को विनियमन मुक्त किया गया था, जिसके चलते कृषि उपज विपणन समिति के प्रबंधन वाली मंडियों के बाहर भी उत्पाद बेचे जा सकते थे।

उन्होंने कहा कि अधिसूचित कानून के बाद अब इस सूची में अनाज और पोल्ट्री भी शामिल हो गए हैं। नए कानून को अधिसूचित करने के साथ ही किसानों के आंदोलन का समर्थन करने को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ निशाना साधा।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया, ' अधिसूचना ने आप और केजरीवाल सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। वे नए कृषि कानूनों का फायदा किसानों को देना चाहते हैं जबकि किसानों को भ्रमित कर रहे हैं।'

वहीं, इस पर आप ने पलटवार करते हुए एक बयान में कहा, ' भाजपा को समझ नहीं आ रहा कि किसानों द्वारा जारी देशव्यापी आंदोलन से कैसे निपटें इसलिए हताशा में जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।'

उन्होंने कहा कि किसानों की मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर है और आप उसका समर्थन करती है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Farmer protest
Farm bills 2020
Farmer Government Meeting
DILLI CHALO
BJP
Narendra modi
Congress
MSP for farmers
delhi government
Arvind Kejriwal

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई


बाकी खबरें

  • इक्कीसवीं सदी में अठारहवीं सदी का जीवन जी रहे कारगिल शहीद के गांव वासी
    अजीत सिंह
    इक्कीसवीं सदी में अठारहवीं सदी का जीवन जी रहे कारगिल शहीद के गांव वासी
    27 Aug 2021
    आज भी कारगिल शहीद अनिल रावत के गाँव कुंडयू वासी बिना सड़क और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं।
  • एमनेस्टी ने हज़ारों श्रमिकों की मौतों की पर्याप्त जांच करने में कतर की विफलता को उजागर किया
    पीपल्स डिस्पैच
    एमनेस्टी ने हज़ारों श्रमिकों की मौतों की पर्याप्त जांच करने में कतर की विफलता को उजागर किया
    27 Aug 2021
    संगठन ने 2022 विश्व कप के इस मेजबान देश से विदेशी श्रमिकों की मौतों की सटीक और अंतर्निहित कारणों की जांच करने और पहचान करने का आह्वान किया है।
  • काबुल हवाई अड्डे के पास दो विस्फोटों में 100 से अधिक लोगों की मौत
    पीपल्स डिस्पैच
    काबुल हवाई अड्डे के पास दो विस्फोटों में 100 से अधिक लोगों की मौत
    27 Aug 2021
    इन धमाकों के कुछ घंटे पहले अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने चेतावनी जारी कर लोगों को 'आईएसआईएस-के' के ख़तरे के चलते हवाईअड्डे से दूर रहने को कहा। इसने बाद में इन विस्फोटों की जिम्मेदारी ली।
  • काबुल हवाई अड्डे पर धमाकों में कम से कम 95 अफ़ग़ानों की मौत : अधिकारी
    एपी/भाषा
    काबुल हवाई अड्डे पर धमाकों में कम से कम 95 अफ़ग़ानों की मौत : अधिकारी
    27 Aug 2021
    ‘इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत’ (आईएसकेपी) ने काबुल हवाईअड्डे के बाहर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है।
  • विशेष: गिनने और न गिनने के बीच जीती जागती जाति
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    विशेष: गिनने और न गिनने के बीच जीती जागती जाति
    27 Aug 2021
    हम सब जाति के पाखंड के शिकार हैं। अगर उसे समाज के स्तर पर तोड़ते हैं तो राजनीति के स्तर पर अपना लेते हैं और अगर राजनीति के स्तर पर तोड़ते हैं तो समाज के स्तर पर बना रहने देते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License