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लीबिया में युद्ध समाप्त करने और दिसंबर में चुनावों की रूपरेखा को अंतिम रूप देने को बातचीत फिर शुरू
ये वार्ता एक संवैधानिक ढांचे पर एक समझौते की योजना बनाने की कोशिश कर रही है जो देश को एकजुट करने के उद्देश्य से आगामी राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों को संचालित करेगा।
पीपल्स डिस्पैच
13 Aug 2021
लीबिया में युद्ध समाप्त करने और दिसंबर में चुनावों की रूपरेखा को अंतिम रूप देने को बातचीत फिर शुरू

लीबिया के युद्धरत पक्षों ने अपने राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने और देश में युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू कर दी है। बुधवार 11 अगस्त को हुई यह वार्ता संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। देश में निर्धारित दिसंबर 2021 के राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों को ध्यान में रखते हुए बातचीत की गई जो युद्ध, विदेशी सैन्य हस्तक्षेप और नागरिक संघर्ष के चलते नहीं हो पाया है।

इन पक्षों के बीच बैठक जिसे लीबियन पॉलिटिकल डायलॉग फोरम (एलपीडीएफ) कहा जाता है वह छह सप्ताह की असफल वार्ता की भरपाई के लिए हुआ है जो स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित की जा रही थी जिसमें लीबिया के 75 प्रतिनिधि आगामी चुनावों का संचालन करने के लिए संवैधानिक ढांचा को लेकर आम सहमति पर पहुंचने में असफल रहे थे।

लंबे समय से चले आ रहे विभिन्न राजनीतिक और जनजातीय मतभेदों वाले युद्धरत पक्षों द्वारा बातचीत के जरिए समझौता करने के ये प्रयास पिछले साल अक्टूबर में पहली बार तब शुरू हुए जब युद्धविराम और वार्ता के लिए युद्धरत पक्ष सहमत हुए। इस वार्ता ने अंततः उन्हें एक संक्रमणकालीन सरकार बनाने पर सहमति व्यक्त की जो प्रस्तावित चुनावों से पहले अंतरिम अवधि में लीबिया पर शासन करेगी और साथ ही चुनावों के आयोजन की निगरानी करेगी। इस समझौते ने विशेष रूप से दो सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण लीबियाई पक्षों के बीच हिंसा की समाप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया। इन पक्षों में एक तुर्की और प्रतिनिधि सभा के पूर्व-आधारित सरकार द्वारा समर्थित लीबिया की राजधानी त्रिपोली में स्थित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त नेशनल अकॉर्ड (जीएनए) और दूसरा रूस, ईजिप्ट और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा समर्थित विद्रोही जनरल खलीफा हफ्तार के नेतृत्व में लीबिया नेशनल आर्मी (एलएनए) है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला ये उत्तरी अफ्रीकी देश 2011 से युद्ध और अराजकता की स्थिति में है। अमेरिका और नाटो समर्थन से लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी को उखाड़ फेंका गया था जिससे देश में चरमपंथ और आतंकवाद में वृद्धि हुई है। बाद में अंतर्देशीय विभाजन और विरोधी ताकतों के बीच अंतर्कलह ने हिंसा और नागरिक संघर्ष को लम्बा खींच दिया। साथ ही साथ भू-राजनीतिक प्रकृति भी ग्रहण कर लिया जिसमें विभिन्न विदेशी शक्तियां पक्ष ले रही थीं और हिंसा को जारी रखने और यहां तक कि बढ़ाने में आर्थिक और सैन्य रूप से योगदान दे रही थीं।

libya
Libyan Civil War
War in Libya

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