NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
नॉर्ड स्ट्रीम 2 सर्टिफ़िकेट को जर्मनी ने किया निलंबित
जर्मन नेटवर्क कैस्केड के डेटा से पता चलता है कि यमल-यूरोप ट्रांसनेशनल गैस पाइपलाइन के रूप में जानी जाने वाली एक प्रमुख ट्रांजिट पाइपलाइन जर्मनी को जाने वाले सभी रूसी प्राकृतिक गैस शिपमेंट की दिशा पलट दी गई है।
एम. के. भद्रकुमार
23 Dec 2021
Translated by महेश कुमार
Nord Stream
जर्मनी ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 सर्टिफिकेट को निलंबित कर दिया है; जिसके चलते 21 दिसंबर, 2021 से जर्मनी में रूसी गैस का प्रवाह बंद हो जाएगा

जब ऊर्जा पर रूसी संसदीय समिति के अध्यक्ष पावेल ज़ावलनी ने पिछले शुक्रवार को पूर्वानुमान लगाया कि नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन अगले महीने की शुरुआत में जर्मनी को प्राकृतिक गैस की शिपिंग शुरू कर सकती है, तो इस पर विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन ज़ावल्नी काफी स्पष्ट थे,  और रॉयटर्स ने उन्हे यह कहते हुए उद्धृत किया था कि, "मैं बड़ी निश्चितता के साथ कह सकता हूं कि नॉर्ड स्ट्रीम 2 के माध्यम से पहली गैस की खेप जनवरी में भेजी जाएगी।"

उन्होंने कहा कि यूरोपीयन लोग नॉर्ड स्ट्रीम 2 के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से अपने पैरों को ऐसे वक़्त में नहीं खींचना चाहेंगे जब उनके गैस का भंडारण स्तर इतना कम हो गया है।

लेकिन ज़ावलनी जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बारबॉक का प्रभावी रूप से खंडन कर रहे थे, जिन्होंने केवल चार दिन पहले ही कहा था कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को निलंबित कर दिया गया है और इसके लिए "यूरोपीय कानून में स्पष्ट विनियमन के कारण ऊर्जा क्षेत्र के संबंध में [कंपनी की] संरचना को लेकर ऐसा किया गया है।"

तब से विशेषज्ञों की राय यह रही थी कि नई पाइपलाइन के माध्यम से जल्द से जल्द गैस मिल जाएगी, और ऐसा केवल 2022 की दूसरी छमाही तक हो सकता है।

इस बीच, अमेरिकी कांग्रेस के सांसद मांग करते रहे हैं कि वाशिंगटन को पाइपलाइन परियोजना को साधारण रूप से बंद कर देना चाहिए। बैरबॉक को अमेरिकियों का प्रतिनिधि होने की प्रतिष्ठा हासिल है और सामान्य धारणा यह है कि चांसलर के रूप में एंजेला मर्केल के जाने के बाद, 40 वर्षीय बैरबॉक जर्मनी को रूस को "कठिन" स्थिति में डालने के लिए दृढ़ संकल्प लगता है।

जाहिर है, क्रेमलिन खुश नहीं है। समुद्र के नीचे की नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन 11 अरब डॉलर की लागत से बनाई गई है। लेकिन क्रेमलिन ने इस विचार को अपने तक ही सीमित रखा। अब हम इसे जानते हैं, क्यों।

जर्मन नेटवर्क कैस्केड के डेटा से पता चलता है कि यमल-यूरोप ट्रांसनेशनल गैस पाइपलाइन के रूप में जानी जाने वाली एक प्रमुख ट्रांजिट पाइपलाइन जिसके ज़रिए जर्मनी को रूसी प्राकृतिक गैस शिपमेंट भेजना था उसे उलट दिया गया है। 

यमल-यूरोप अंतरराष्ट्रीय गैस पाइपलाइन उत्तर पश्चिमी साइबेरिया से बेलारूस और पोलैंड के माध्यम से पूर्वी जर्मनी में फ्रैंकफर्ट-एन-डेर-ओडर तक जाती है। पिछले साल, पश्चिमी यूरोप को भेजी जाने वाली सभी प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा बेलारूस से होकर गया था।

यमल-यूरोप पाइपलाइन के माध्यम से प्रवाह शनिवार को अपनी क्षमता से घटकर 6 प्रतिशत, रविवार को 5 प्रतिशत और आज सुबह तक शून्य तक पहुँच गया था। 

सीधे शब्दों में कहें तो, रूस ने जर्मनी को गैस निर्यात को रोक दिया है और यह भी पता चलता है कि रूस और बेलारूस में सिस्टम के संचालक गज़प्रोम ने निकट भविष्य में जर्मनी में प्राकृतिक गैस को भेजने की कोई क्षमता या आदेश बुक नहीं किया है।

इस बारे में मॉस्को का स्पष्टीकरण यह है कि गज़प्रोम विदेशों में गैस के निर्यात पर रूस के भीतर घरेलू खपत को प्राथमिकता देता है और इस सप्ताह मास्को और अन्य बड़े रूसी शहरों में तापमान गिर गया है। यह एक प्रशंसनीय स्पष्टीकरण है।

हालांकि, यह एक ऐसे मोड़ पर हो रहा है जब कड़ाके की ठंड और सीमित आपूर्ति के कारण यूरोपीय ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं। यूरोप में कीमतें सोमवार को 7 प्रतिशत बढ़ीं और बढ़ रही हैं। 

जर्मनी पर दबाव बन रहा है क्योंकि उसका आपातकालीन भंडार पिछले सप्ताह 60 प्रतिशत से नीचे गिरकर "ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर" पर चला गया है, जो वर्षों में पहली बार हुआ है।

मॉस्को यह पेशकश कर रहा है कि यदि केवल नॉर्ड स्ट्रीम 2 को संचालित करने के लिए लाइसेंस दिया जाता है, तो गज़प्रोम जर्मनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति शुरू कर देगा। जर्मन नियामक की मंजूरी की प्रत्याशा में, गज़प्रोम ने अक्टूबर में दो समानांतर पाइपों में से पहले को तथाकथित तकनीकी गैस से भर दिया था और दूसरा दिसंबर में भरना शुरू कर दिया था।

लेकिन जर्मनी ने दावा किया है कि वह नियमों और विनियमों के प्रति सख्त है और नॉर्ड स्ट्रीम 2, जो स्विट्जरलैंड में पंजीकृत है, जिसे पहले जर्मन ऊर्जा प्रहरी BNetzA की जरूरतों का पालन करना होगा और अपने संचालन को पुनर्गठन करना होगा और साथ ही प्रासंगिक यूरोपीयन यूनियन के कानून का पालन करना होगा और उसके बाद ही जटिल अनुमोदन प्रक्रिया शुरू होगी, जो सितंबर में शुरू हुई भी थी और जिसे नवंबर के मध्य में निलंबित कर दिया गया था, वह फिर से शुरू हो सकती है।

BNetzA के प्रमुख जोचेन होमन ने 16 दिसंबर को भविष्यवाणी की थी कि नॉर्ड स्टीम 2 पर निर्णय "2022 की पहली छमाही में नहीं किया जा सकेगा।"

लब्बोलुआब यह है कि जहां सभी नायक यह दिखावा करते हैं कि यह एक व्यावसायिक मुद्दा है, वहीं अमेरिका ने इसे एक भू-राजनीतिक मुद्दे के रूप में बदल दिया है। सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका रूस के यूरोपीय ऊर्जा बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के विचार से घृणा करता है और नॉर्ड स्टीम 2 को अपने पालने में ही मारना चाहता है।

दूसरा, वाशिंगटन चिंतित है (जो ठीक ही है) कि रूसी ऊर्जा पर जर्मन की इतनी भारी निर्भरता अनिवार्य रूप से मास्को के प्रति बर्लिन के दृष्टिकोण को नरम कर देगी, जो ट्रान्साटलांटिक गठबंधन के हितों के लिए हानिकारक होगा।

तीसरा, वाशिंगटन चाहता है कि यूक्रेन सालाना 1 बिलियन डॉलर से अधिक के पारगमन शुल्क का लाभार्थी बना रहे, जो कि गज़प्रोम उस देश से पश्चिमी यूरोप तक जाने वाली सोवियत-युग की पाइपलाइनों के इस्तेमाल के लिए कीव को भुगतान कर रहा था। कहने का तात्पर्य यह है कि, जबकि यूक्रेन को रूसी विरोधी देश के रूप में बदलने के लिए व्यवस्थित रूप से काम किया जा रहा है, फिर भी वाशिंगटन मास्को से यूक्रेनी अर्थव्यवस्था को सब्सिडी देने की अपेक्षा करता है जो कि आर्थिक रूप से संकट में है।

अंत में, अमेरिका को अपने खुद के शेल गैस निर्यात के लिए आकर्षक यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने की उम्मीद है। दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में, अमेरिका चाहता है कि यूरोप उसके ऊर्जा निर्यात पर निर्भर हो, जैसे नाटो हथियारों के निर्यात के मामले में उसका बंदी बाजार है।

नई जर्मन सरकार अमेरिकी जाल में फंस गई है। रूस पर सख्त कार्रवाई करके, बर्लिन ने रूस की सद्भावना को खो दिया है। हाल ही में बर्लिन में तैनात दो रूसी राजनयिकों के संदिग्ध आधार पर निष्कासन ने रूस के समर्थन को रोक दिया है। नाटो और अमेरिका के साथ मास्को के तनाव के संदर्भ में जर्मन मंत्री हाल ही में रूस के बारे में कठोरता से बोल रहे हैं।

जर्मनी ने यूक्रेन पर खरगोश के साथ चलने और शिकारी कुत्तों के साथ शिकार करने की दोहरी भूमिका निभाई है। एक ओर, इसने नॉरमैंडी चार प्रारूप (फ्रांस, जर्मनी, यूक्रेन, रूस) में रूस के साथ एक शांतिदूत की भूमिका निभाई है, जबकि उसी समय इसने गुप्त रूप से कीव को डोनबास स्थिति में विद्रोही होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

मास्को ने हाल ही में बर्लिन के साथ अपने राजनयिक पत्राचार को जारी करके जर्मनी की कपटपूर्ण भूमिका को उज़ागर किया है।

जैसे-जैसे सर्दियाँ शुरू होंगे वैसे-वैसे जर्मनी की ऊर्जा की जरूरत में वृद्धि होगी, आने वाले हफ्तों में गैस की कमी की उम्मीद की जा सकती है। सर्दियां ठंडी होने पर यूरोपीय महाद्वीप को रोलिंग ब्लैकआउट का सामना करना पड़ सकता है। गैस की कीमत आसमान छूने लगेंगी, जिसका असर उपभोक्ताओं और जर्मन उद्योग पर पड़ेगा।

मॉस्को केवल मौजूदा पाइपलाइनों के माध्यम से अधिक गैस निर्यात करके इन विकट परिस्थितियों में जर्मनी और यूरोप के बचाव में खड़ा हो सकता है। लेकिन गज़प्रोम इसे नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन की मंजूरी से जोड़ रहा है, जिसे उसने भारी लागत से बनाया है।

इसमें भी पकड़ यह है कि, नए जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने मर्केल की तुलना में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है और सहमति व्यक्त की है कि वाशिंगटन ने ज़ोर दिया है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया (एफटी के अनुसार) तो नॉर्ड स्ट्रीम 2 को रोकने के लिए "विचार" किया जाएगा।

जर्मन राजनेता अंततः उद्योग के कप्तानों पर ध्यान दे रहे हैं। ग्रीन पार्टी के चालीस वर्षीय बैरबॉक ग्रीनहॉर्न हैं। एक रूढ़िवादी सामाजिक डेमोक्रेट, शोल्ज़ को राजनीतिक शीर्ष नौकरियों का बहुत अनुभव है, हालांकि उनमें करिश्मे की कमी है और उन्हे अक्सर कम करके आंका जाता है।

विदेश नीति में, बात आकर फ़ेडरल चांसलर पर रुक जाती है - और स्कोल्ज़ विदेश नीति के माले में निरंतरता रखना चाहता है ताकि वह महामारी के समय में जर्मन अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित कर सके। यहां ज़ावलनी की बात सही हो सकती है।

Courtesy: Indian Punchline

एम.के. भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें:

Nord Stream 2 is a Double-Edged Geopolitical Tool

RUSSIA-GERMANY
ukraine
US-Germany

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License