NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मणिपुर: नए डिजिटल मीडिया नियमों के तहत पत्रकार के खिलाफ़ जारी नोटिस को वापस लिया
पोजेल चाओबा के समाचार पत्र द फ्रंटियर मणिपुर के नाम भेजे गए नोटिस के खिलाफ व्यापक नाराजगी के बीच, केंद्र ने राज्य सरकार के प्राधिकार को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के लिए कहा है।
मान्या सैनी
04 Mar 2021
मणिपुर के पत्रकार पोजेल चोबा
मणिपुर के पत्रकार पोजेल चोबा। चित्र साभार: स्क्रॉल.इन 

पत्रकार पोजेल चाओबा के समाचार पत्र, द फ्रंटियर मणिपुर के नाम भेजे गये नोटिस को लेकर व्यापक नाराजगी के बीच, केंद्र ने हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार प्रशासन के प्राधिकार को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के लिए कहा है। इस वापसी के आदेश को जारी करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्पष्टीकरण दिया गया है कि नए डिजिटल मीडिया नियमों के अनुपालन को लेकर इसके द्वारा राज्य सरकारों को कोई शक्तियां नहीं सौंपी गई हैं, मान्या सैनी की रिपोर्ट।

मणिपुर पुलिस ने समाचार संगठन, द फ्रंटियर मणिपुर (टीएफएम), और इसके कार्यकारी निदेशक, पोजेल चाओबा के खिलाफ नए डिजिटल मीडिया दिशानिर्देशों के तहत जारी किये गए क़ानूनी नोटिस को कुछ ही घंटों के भीतर वापस लेने का फैसला किया है। इस वापस लिए जाने वाले नोटिस में कहा गया है, “आपको यह सूचित किया जाता है कि इस कार्यालय द्वारा 1 मार्च 2021 को जारी सम संख्या वाले नोटिस को, तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।”

नोटिस वापस लिए जाने पर टिप्पणी करते हुए चाओबा ने द वायर को बताया कि उन्होंने शाम 6 बजे के समय अपने ऑफिस के गेट पर इस नोटिस को चस्पा पाया था। उनका कहना था “इसे उसी पश्चिम इम्फाल जिला मजिस्ट्रेट, नोरेम प्रवीण सिंह द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था।”

समाचार पत्र को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत परिभाषित नए नियमों के अनुपालन को साबित करने वाले दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के संबंध में जारी नोटिस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी नाराजगी के बीच इस कदम को उठाया गया है। मीडिया और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे नागरिक समाज संगठनों की ओर से द फ्रंटियर मणिपुर के खिलाफ कार्रवाई के बाद बोलने और प्रेस की स्वतंत्रता जैसी महत्वपूर्ण चिंताओं को उठाया गया था। 

Here’s a closer photo of the retraction notice pic.twitter.com/c3DDOqzdHj

— Ushinor Majumdar (@_Ushinor) March 2, 2021

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, अमित खरे ने मणिपुर सरकार को स्पष्ट करते हुए लिखा कि सिर्फ मंत्रालय के पास ही दस्तावेजीकरण, सूचना के खुलासे, आचार संहिता के अनुपालन और 3-स्तरीय तंत्र वाली पद्धति से शिकायतों के निवारण की शक्तियाँ हैं। इसमें आगे कहा गया है कि “राज्य सरकारों, जिला मजिस्ट्रेट, या पुलिस कमिश्नर को” कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं। इस पत्र को दिनांक 2 मार्च को मणिपुर के मुख्य सचिव राजेश कुमार के नाम संबोधित किया गया, और इसमें जिला मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित खानासी नेइनासी के प्रकाशक को जारी किये गए नोटिस का उल्लेख किया गया था। 

UPDATE: this letter might clarify why the notice was retracted.
Secy @GoI_MeitY wrote to DM-Imphal saying:
1. Central govt has powers under new IT rules
2. Rules are for media platforms
Can we conclude, not for arbitrarily targeting social media discussions? pic.twitter.com/tjgsyDoSbJ

— Ushinor Majumdar (@_Ushinor) March 2, 2021

प्रारंभिक नोटिस में टीएफएम द्वारा अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर आयोजित ऑनलाइन चर्चा “घेरेबंदी के तहत मीडिया: क्या पत्रकार बेहद कठिन दौर के बीच में जी रहे हैं” नामक शीर्षक पर आपत्ति दर्ज की गई थी। इस पैनल में स्थानीय स्वतंत्र पत्रकार सहित टीएफएम के कर्मचारी, किशोरचन्द्र वांगखेम ग्रेस जाजो, और चाओबा के साथ-साथ निंगलुन हंघाल शामिल थे। 

यह सप्ताहांत शो नियमित तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, भाषण और मीडिया की आजादी पर हो रहे हमलों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा का आयोजन करता है। संयोगवश जिस टॉक शो प्रकरण पर मणिपुर सरकार ने आपत्ति दर्ज की थी, उसका विषय पिछले हफ्ते केंद्र द्वारा घोषित नए डिजिटल मीडिया नियमन नियमों और इसके समाचार संस्थानों पर इसे क्रियान्वित किये जाने पर पड़ने वाले असर को लेकर था। शो को फेसबुक पर प्रसारित किये जाने के एक दिन बाद इस नोटिस को भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि टीएफएम को नए नियामक दिशानिर्देशों का पालन करना आवश्यक था, क्योंकि इसके द्वारा सोशल मीडिया पर समाचार और सम-सामयिक विषयों को मुहैया कराया जाता है।

द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए चाओबा ने अपीलीय अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में सूचना को प्रस्तुत किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उनका यह भी कहना था कि यह नोटिस “मीडिया और डिजिटल मीडिया पर एक सोचा-समझा हमला है” और उन्होंने दस्तावेजीकरण की मांग कर रहे पुलिस अधिकारियों के इसमें शामिल होने की निंदा की। 

चाओबा के मुताबिक, 2 मार्च को उनके कार्यालय में छह से सात की संख्या में पुलिस अधिकारी नोटिस के साथ दाखिल हुए थे। इसके साथ ही उनका कहना था कि टीएफएम ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया था और इसलिए सरकार की कार्रवाई  “दर्शाती है कि शासन द्वारा हमारा उत्पीड़न किया जा रहा है, हमारे ऊपर इस प्रकार के नोटिस थोपे जा रहे हैं। इस प्रकार का डराना-धमकाना, व्यवस्थित प्रताड़ना और दमन है।”

यह लेख मूल रूप से द लीफलेट में प्रकाशित हुआ था। 

(मान्या सैनी सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ़ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, पुणे में पत्रकारिता की छात्रा हैं और द लीफलेट के साथ इंटर्न के तौर पर सम्बद्ध हैं।)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करे

Notice Issued to Manipur Journalist Under New Digital Media Rules Withdrawn

freedom of speech
Freedom of the Press
Fundamental Rights
India
Leaflet Reports
Right To Informtion

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License