NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
विज्ञान
जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
संदीपन तालुकदार
24 Feb 2022
covid

ओमिक्रॉन अभी ही दुनियाभर के अधिकांश हिस्सों में महामारी को प्रभावी तौर बनाये हुए है। यह एक पूरी तरह से स्थापित तथ्य बन चुका है कि ओमिक्रॉन के पास प्रसार के मामले में असाधारण क्षमता है; हालाँकि अच्छी बात यह है कि संभवतः इससे संक्रमित व्यक्तियों के बीच में रोग की गंभीरता कम हो रही है। जहाँ एक ओर ओमिक्रॉन अभी भी सारी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीँ इसके सब-वैरिएंट, अर्थात बीए.2 नामक संस्करण ने इस बीच और भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसा विशेष कर जापान से आये नवीनतम अध्ययन की वजह से है, जिसमें दावा किया गया है कि बीए.2 पर प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया है कि यह डेल्टा जैसे ज्यादा गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। महत्वपूर्ण तौर पर, इस अध्ययन को हैमस्टर्स (चूहे की प्रजाति) पर आजमाया गया था, और शोधकर्ताओं ने पाया है कि बीए.2 के पास मूल ओमिक्रॉन वैरिएंट की तरह ही प्रतिरक्षा से बच निकलने की क्षमता तो है ही, और साथ ही यह उससे भी कहीं अधिक गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। 

इसने अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में इस मांग के साथ चिंता भी बढ़ा दी है कि बीए.2 को भी ‘वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न’ की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। बीए.2 के खतरों और भारतीय कोविड परिदृश्य में इसके क्या संभावित निहितार्थ हो सकते हैं, के साथ-साथ इस बारे में निश्चित रूप से क्या कहा जा सकता है, को समझने के लिए न्यूज़क्लिक ने आईआईएसइआर (भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान) पुणे के विख्यात प्रतिरक्षा विज्ञानी सत्यजित रथ से संपर्क साधा।

न्यूज़क्लिक (एनसी): बीए.2 एक छलिया वैरिएंट है क्योंकि पीसीआर टेस्ट में इसे आसानी से नहीं पता लगाया जा सकता है। हाल ही में, विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय मंडली में इस बात का दावा किया जा रहा था कि इस सब-वैरिएंट को चिंता का एक वैरिएंट माना जाना चाहिए, विशेष रूप से एक जापानी अध्ययन के बाद जिसमें यह दावा किया गया है कि बीए.2 तेजी से फैल सकता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। आप इसे कैसे देखते हैं? क्या हमें पता है कि बीए.2 एक घातक वैरिएंट है या ये चिंताएं महज एहतियात बरतने के लिए दी जा रही हैं?

सत्यजित रथ (एसआर): ‘छलिया’ शब्दावली उपयोगी होने से कहीं अधिक नाटकीय है। इसके जोरदार अर्थ से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि पीसीआर परीक्षण में बीए.2 का पता नहीं लगाया जा सकता है। बल्कि इसका ठीक उलट है। वास्तव में इसका बिलकुल पता लगाया जा सकता है; बात सिर्फ इतनी है कि पीसीआर टेस्ट के नतीजों में इसके तनाव की पहचान का संकेत नहीं मिल पाता। यह सारा गड़बड़झाला मूल अनुसंधान से शुरू हुआ कि 2020/2021 में बाजार में बिकने वाले विभिन्न आरटी-पीसीआर किट्स में से कुछ (लेकिन सभी नहीं) थोड़ा गड़बड़ नतीजे दे रहे थे, जिसमें यह दर्शाया जा रहा था कि नमूने में ओमिक्रॉन बीए.1 वंश का वायरस हो सकता है। ये अजीब परिणाम देने वाली परीक्षण किट्स अपने तीन लक्ष्यों में से एक के तौर पर वायरल स्पाइक प्रोटीन जीन को उपयोग में लाती हैं। चूँकि बीए.1 स्पाइक प्रोटीन का आनुवांशिक कोड 2020/2021 वाले पूर्व के वायरस स्ट्रेन से काफी भिन्न है, जिसका पता नहीं चल पाता है, इसलिए परीक्षण में तीन वायरल जीन में से दो के लिए नतीजा ‘पॉजिटिव’ दिखाता है। इस ‘एस-ड्रॉप्स’ का आशय है कि बीए.1 वायरस हो सकता है। बीए.2 वायरस की वंशावली इस ‘एस-ड्राप’ को नहीं दिखाता है, इसलिए इसे झट से ‘छलिया वैरिएंट’ का ठप्पा दे दिया गया। हालांकि, इस प्रकार की पहचान कहीं से भी निश्चयात्मक नहीं है, और यह पूर्ण आनुवांशिक अनुक्रमण है जो वायरस स्ट्रेन और इसकी वंशावली की पहचान को स्थापित करता है।  

निश्चित रूप से कुछ संकेत हैं, विशेषकर डेनमार्क में महामारी विज्ञान के साक्ष्य से, कि बीए.2 स्ट्रेन संभवतः बीए.1 स्ट्रेन (दोनों स्ट्रेन ओमिक्रॉन परिवार से संबंध रखते हैं) की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से फैल सकते हैं। वैसे भी बीए.1 स्ट्रेन पहले से ही पूर्व के स्ट्रेन की तुलना में कहीं अधिक तेजी से फैलता है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि बीए.2 के प्रसार की दर में इस बढ़ोतरी के क्या नतीजे हो सकते हैं।

बीए.2 वायरस स्ट्रेन पर जापानी अध्ययन सिर्फ यह सुझाता है कि बीए.1 स्ट्रेन की तुलना में हैम्स्टर्स पर कहीं अधिक गंभीर रोग का कारण हो सकता है। इस तथ्य को मानव अध्ययनों से प्रमाणित नहीं किया गया है। मुझे ऐसे एक भी सुबूत नहीं मिल सका है, जिससे यह पता चल सके कि बीए.1 स्ट्रेन की तुलना में बीए.2 के कारण मनुष्यों में अधिक गंभीर रोग का कारण हो सकता है। सार्स-सीओवी-2 के कारण हैम्स्टर्स और मनुष्यों के बीच में रोगों का कारण अपने विवरण में काफी भिन्न है। इसलिए मुनष्यों के लिए हैम्स्टर्स से हासिल साक्ष्य का सरल वाह्य आकलन को बिना किसी और तथ्य के लागू नहीं किया जाना चाहिए।  

एनसी: ऐसा कहा जा रहा है कि बीए.2 भारत में भी तबाही का कारण बन सकता है। लेकिन हाल ही में, आईएमए के राष्ट्रीय कोविड टास्कफ़ोर्स के सह-अध्यक्ष, डॉ. राजीव जयदेवन ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि बीए.2 से भारत में कोई उछाल आने की संभावना नहीं है। उनकी यह भी टिप्पणी थी कि जो लोग पहले से बीए.1 से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें बीए.2 से संक्रमण नहीं होने वाला है। आप इसे कैसे देखते हैं?

एसआर: एक बार फिर से, सभी तथ्य अभी तक प्रारंभिक अवस्था में ही हैं। हालाँकि, जबकि इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि कई देशों में (लेकिन सभी में नहीं) बीए.2 वायरस स्ट्रेन के द्वारा बीए.1 वायरस स्ट्रेन को स्थानापन्न किया जा रहा है, लेकिन इनमें से कहीं भी इस प्रतिस्थापन के साथ मामलों की संख्या में वृद्धि का रुझान नहीं दिख रहा है। इसलिए सुखद विचार में ऐसा प्रतीत होता है कि बीए.1 के संसर्ग में रह चुके लोगों के लिए बीए.2 संक्रमण से काफी हद तक बचाव मुमकिन है।

एनसी: क्या हम भारत में कोविड की स्थिति के आंकड़ों से इस निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं कि क्या बीए.2 किसी प्रकार की कोई चिंता का विषय है?

एसआर: हमें फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है, हालाँकि हमें सतर्क रहना चाहिए और निरंतर नजर बनाये रखने की जरूरत है। हालाँकि, भारत में हमारी प्रमुख समस्या कहीं अधिक बुनियादी है: हमारे वायरस परीक्षण का पैमाना और प्रणाली और हमारे वायरस आनुवांशिक अनुक्रमण अभी भी जितनी जरूरत है उससे नीचे है, भले ही बीए.2 आ जाए या बीए.2 न आये।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Omicron BA.2 Sub-Variant: What We Know So Far

Omicron variant
BA.2 Sub-Variant
BA.2 Disease Severity
satyajit rath
Immune Evasion
Covid Vaccine
COVID-19
Indian Medical Association

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • Kamala Nehru Hospital,
    न्यूज़क्लिक टीम
    कमला नेहरू अस्पताल, भोपाल: हादसे की रात क्या हुआ?
    11 Nov 2021
    भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल परिसर के कमला नेहरू अस्पताल में सोमवार को भीषण आग लगने के बाद से अब तक करीब 12 बच्चों की मौत हो गयी हैI
  • covid
    काशिफ़ काकवी
    मप्र : 90,000 से अधिक आशाकर्मियों को नहीं मिला वेतन
    11 Nov 2021
    स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम द्वारा टीकाकरण के लिए आउटसोर्स किये गए सैकड़ों एएनएम कर्मियों और पैरामेडिकल टीकाप्रदाताओं को प्रतिदिन के हिसाब से 500 रूपये का भुगतान किया जाना था। लेकिन वास्तविकता यह है कि…
  • sun
    डेनियल रॉस
    क्या इंसानों को सूर्य से आने वाले प्रकाश की मात्रा में बदलाव करना चाहिए?
    11 Nov 2021
    सूर्य विकरण को तकनीक के ज़रिए प्रबंधित करना संभव है। लेकिन यहां नैतिक और राजनीतिक चिंताएं हैं।
  • Mafia makes poison by mixing pesticides in alcohol
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    शराब में कीटनाशक मिलाकर ज़हरीला बनाते हैं माफ़िया!
    11 Nov 2021
    मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के सकरा इलाके में हुई छापेमारी के दौरान मौके से अधिकारियों को कीटनाशक मिला है जिससे लगता है कि शराब बनाने में इन कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता था।
  • Drugs worth Rs 313 crore seized from three people in Gujarat
    भाषा
    गुजरात में तीन लोगों के पास से 313 करोड़ रुपये मूल्य की मादक पदार्थ जब्त
    11 Nov 2021
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को महाराष्ट्र के ठाणे के रहनेवाले सज्जाद घोसी नाम के व्यक्ति को एक गुप्त सूचना के आधार पर खम्भलिया कस्बे के एक अतिथिगृह से गिरफ्तार किया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License