NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन
वामपंथियों ने 1992 में ढहाई गई बाबरी मस्जिद को याद करने के लिए कोलकाता में कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिसने देश के सामाजिक ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल दिया।
संदीप चक्रवर्ती
08 Dec 2021
babri
बाबरी मस्जिद का चित्र। केवल प्रतीकात्मक उपयोग के लिए

कोलकाता: वाम मोर्चा और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की सांस्कृतिक मोर्चा एकता ने ​बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट कोलकाता में नुक्कड़ कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व वाली ताकतों ने 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद की विरासत संरचना को ध्वस्त कर दिया था। 

कोलकाता जिले के एक एसएफआई कार्यकर्ता आकाशनील, जिनका जन्म बाबरी मस्जिद गिरने के वर्ष (1992) में हुआ था, उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि इस जघन्य घटना ने जैसे उनके जन्म वर्ष को कलंकित कर दिया था। 

विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर, कई लोगों ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री (अब दिवंगत) ज्योति बसु के भाषण को प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने भाजपा को एक बर्बर पार्टी के रूप में आरोपित करते हुए 6 दिसंबर 1992 की घटनाओं को याद किया था। 

विश्वविद्यालय संस्थान में आयोजित कार्यक्रम को न्यायमूर्ति चंद्रू ने और एसएफआई के महासचिव मयूख विश्वास ने संबोधित किया। यह वे ही न्यायमूर्ति चंद्रू हैं, जिनके जीवन पर 'जय भीम' फिल्म बनाई गई है।

भारत में जाति असमानता पर बोलते हुए न्यायमूर्ति चंद्रू ने अपने भाषण में बीआर अंबेडकर को उद्धृत किया और देश के सामाजिक जीवन में उच्च जाति के वर्चस्व पर प्रकाश डाला।

न्यायमूर्ति चंद्रू ने अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों से एसएफआई के प्रति अपने जुड़ाव और तिरुवनंतपुरम में एसएफआई के पहले अखिल भारतीय सम्मेलन में एक प्रतिनिधि के रूप में बोलने के अपने अनुभव भी बताए। उन्होंने कहा कि छात्र-सक्रियता के उन दिनों ने उन्हें पहले एक वकील के रूप में और फिर एक न्यायाधीश के रूप में सीमांत वर्गों के लिए लड़ने में मदद की। 

जस्टिस चंद्रू ने भी 6 दिसंबर 1992 का अपना अनुभव सुनाया, जिस दिन बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया था। उन्हें भी देश के लाखों भारतीयों के साथ गहरा सदमा लगा था। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जो धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित है, विरासत की जगह और अल्पसंख्यकों के पूजास्थल तब भी नष्ट कर दिए गए थे। यह सब टीवी चैनल पर दिखाया जा रहा था। चैनल उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन पर अयोध्या से होने वाली घटनाओं का लाइव प्रसारण कर रहे थे। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि बाबरी विध्वंस के जरिए उस दिन भारत के धर्मनिरपेक्ष गणराज्य को ध्वस्त कर दिया गया था। 

6 दिसंबर 1992​​ यह भी याद दिलाता है कि देश की धर्मनिरपेक्षता को कैसे खत्म किया गया है। न्यायमूर्ति चंद्रू ने कहा कि देश को एक बहुलवादी समाज बनाने में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भी नजरअंदाज कर दिया गया, जब मस्जिद गिराने के आरोपितों को भी मामले से बरी कर दिया गया। एक कानून के छात्र के रूप में, जस्टिस चंद्रू ने 1992 की घटनाओं में लोगों के जमावड़े का विवरण विभिन्न स्रोतों से लिया और​ भारत की संविधान सभा के गठन के बाद दिए गए अम्बेडकर का भाषण को उद्धृत करते हुए देश की धर्मनिरपेक्षता के लिए उसके खतरे बताए। उन्होंने हाल के एक घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया, जहां एक कॉफी टेबल बुक में संविधान के बारे में बताते हुए उसकी प्रस्तावना में दिए गए "धर्मनिरपेक्ष समाजवादी" वाक्यांश का उल्लेख नहीं किया गया था। 

कार्यक्रम को एसएफआई के राज्य सचिव सृजन भट्टाचार्य ने भी संबोधित किया। धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गीतों को लिखने वाले होनहार युवा गायकों द्वारा एकता संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

कोलकाता में लेनिन की मूर्ति के तहखाने के सामने आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में, वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बसु  एवं माकपा के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्र वाम मोर्चा के घटक दलों के नेताओं के साथ विरोध कार्यक्रम में शामिल हुए। 

कार्यक्रम में बोलते हुए, बिमान बसु ने देश पर शासन करने वाली भाजपा के नेतृत्व वाली ताकतों के खिलाफ चेतावनी दी क्योंकि वे वही ताकतें थीं, जिन्होंने बाबरी मस्जिद को नष्ट कर दिया था और कानून के शासन पर बहुत कम ध्यान दिया था। उन्होंने कहा कि वे ही ताकतें अब ऐसे कानून बना रही हैं, जो प्रकृति में "अलोकतांत्रिक, कार्यकर्ता-विरोधी और किसान विरोधी” हैं। 

डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने अपने भाषण में, वर्तमान भाजपा नेताओं और गौतम अडानी और मुकेश अंबानी जैसे अरबपतियों के बीच एक नापाक संबंध का आरोप लगाया। उन्होंने संसद, संसदीय प्रक्रियाओं और आम लोगों को दरकिनार कर भाजपा द्वारा देश को चलाने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने यह भी दावा किया कि 6 ​दिसम्बर ​​आजादी के बाद के भारत में 'ब्लैक डे' के रूप में चिह्नित हो गया है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

newsclick.in/On-29th-Anniversary-Babri-Masjid-Demolition-Condemned-Kolkata

babri masjid
Babri Demolition
RSS
BJP
VHP
SFI
CPIM
West Bengal
Left Front

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2 हज़ार नए मामले, 71 मरीज़ों की मौत
    19 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,075 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.06 फ़ीसदी यानी 27 हज़ार 802 हो गयी है।
  • Nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    पैगाम-ए-आज़ादी। जवाहरलाल नेहरु पर लेक्चर अदित्या मुख़र्जी द्वारा। लोकतंत्रशाला
    18 Mar 2022
    पैगाम-ए-आजादी श्रंखला लोकतंत्रशाला और न्यूजक्लिक की एक संयुक्त पहल है, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर केंद्रित है। श्रृंखला का यह व्याख्यान जवाहरलाल नेहरू पर केंद्रित होगा और आदित्य…
  • असद शेख़
    ओवैसी की AIMIM, मुसलमानों के लिए राजनीतिक विकल्प या मुसीबत? 
    18 Mar 2022
    यूपी चुनाव के परिणाम आ चुके हैं, भाजपा सरकार बनाने जा रही है, इस परिप्रेक्ष्य में हम ओवैसी की पार्टी से जुड़े तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा करेंगें– पहला ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल…
  • neo librelism
    प्रभात पटनायक
    नवउदारवादी व्यवस्था में पाबंदियों का खेल
    18 Mar 2022
    रूस के ख़िलाफ़ अब तक जो पाबंदियां लगायी गयी हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूसी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं को, पश्चिमी दुनिया के वित्तीय ताने-बाने से काटे जाने का ही है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  
    18 Mar 2022
    रिपोर्ट्स में पता चला है कि 2019-2020 में हुए दस चुनावों में से नौ में बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में विज्ञापनों के लिए फ़ेसबुक पर 29 फ़ीसदी कम कीमत चुकानी पड़ी थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License