NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
भारत
राजनीति
सरकारी आवास खाली करने का फ़रमान मिलने पर कलाकार सकते में, कहा- प्रताड़ित और अपमानित महसूस कर रहे हैं
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इस साल अक्टूबर में कलाकारों, नर्तकों और संगीतकारों सहित कुल 27 प्रतिष्ठित कलाकारों को नोटिस जारी कर उन्हें दिल्ली में आवंटित सरकारी आवास 31 दिसंबर तक खाली करने को कहा था। कलाकारों ने कहा कि सरकार के इस रवैये से वे ‘प्रताड़ित’, ‘अपमानित’ और ‘दुखी’ महसूस कर रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Nov 2020
  सरकारी आवास खाली करने का फ़रमान मिलने पर कलाकार सकते में, कहा- प्रताड़ित और अपमानित महसूस कर रहे हैं
(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली: पद्मश्री से सम्मानित भारती शिवाजी सहित कई प्रतिष्ठित कलाकारों को सरकार ने दिल्ली में आवंटित सरकारी मकान खाली करने का नोटिस भेजा है। ऐसे में कलाकारों ने सोमवार को कहा कि सरकार के इस रवैये से वे ‘प्रताड़ित’, ‘अपमानित’ और ‘दुखी’ महसूस कर रहे हैं।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने इस साल अक्टूबर में कलाकारों, नर्तकों और संगीतकारों सहित कुल 27 प्रतिष्ठित कलाकारों को नोटिस जारी कर उन्हें दिल्ली में आवंटित सरकारी आवास 31 दिसंबर तक खाली करने को कहा था। साथ ही कहा था कि ऐसा नहीं करने पर सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जा धारकों से संपत्ति मुक्त करना) कानून के तहत सारे आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिन अन्य कलाकारों को आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है, उनमें जतिन दास, पंडित भजन सपोरी, पंडित बिरजू महाराज, रीता गांगुली और उस्ताद एफ. वसीफुद्दीन डागर शामिल हैं।

मोहिनीअट्टम नृत्यांगना भारती शिवाजी का कहना है कि ‘‘वह सकते में हैं’’ और उन्होंने अभी तय नहीं किया है कि क्या करना है।एशियन विलेज में आवंटित आवास में रह रहीं शिवाजी का कहना है, ‘‘यह प्रताड़ना है। मेरे पास कोई और जमीन या संस्थान नहीं है, मैं अपना सारा सृजनात्मक काम घर से ही करती हूं। लेकिन ऐसा लगता है कि सत्ता के लिए पारंपरिक कलाओं का कोई मोल नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं का संरक्षण करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे कलाकारों को सरकार कम से कम आवास देने का काम तो कर ही सकती है।

कई कलाकारों ने अपने वर्तमान आवासीय स्थिति को ‘अवैध’’ बताए जाने पर आपत्ति जतायी है।

कुचिपुड़ी नर्तक गुरु जयराम राव की पत्नी और कुचिपुड़ी नृत्यांगना वनाश्री राव का कहना है कि इस शब्द से ऐसा लगता है कि उन्होंने मकान पर ‘अवैध’ कब्जा किया हुआ था। मकान वनाश्री के नाम पर आवंटित है।

उन्होंने बताया कि मकान आवंटित होने के पहले तीन साल के बाद उन्हें वहां रहने की अनुमति दी गई, लेकिन 2014 के बाद से वह सरकारी नियमों के तहत मकान का किराया देती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘2018 में, सरकार ने पिछले चार साल का कुछ 8-9 लाख रुपये का बकाया किराया का नोटिस भेजा था। हम उसका भुगतान भी कर रहे हैं, कभी 60 हजार तो कभी एक लाख रुपये करके, क्योंकि एक साथ इतना पैसा होना संभव नहीं है।’’

वनाश्री ने कहा, ‘‘सबकुछ करने के बावजूद हमारे साथ अतिक्रमण करने वालों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। हमने अतिक्रमण नहीं किया है।’’

भारतीय नृत्य इतिहासकार सुनील कोठारी भी राव के विचारों से सहमत हैं। उनका कहना है, ‘‘मैं पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हूं। मैंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य और अन्य सहयोगी कलाओं पर कई पुस्तकें लिखी हैं और तमाम समितियों का सदस्य रहा हूं और मेरी सरकार बदले में मुझे यह दे रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘88 साल की उम्र में मुझे ‘गेट आउट’ (बाहर निकलो) का नोटिस भेजा रहा है, मैं अपमानित महसूस कर रहा हूं। मुझे उस जगह से निकाला जा रहा है, जो पिछले 20 साल से मेरा घर है।’’

दुनिया भर में अपने ‘पंखा कलेक्शन’ के लिए मशहूर पेंटर जतिन दास का कहना है कि ‘अपराधी’ की तरह व्यवहार किए जाने से वह ‘अपमानित’ महसूस कर रहे हैं।

 

उनका कहना है, ‘‘मैं यह सोचकर शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं कि अपने काम और देश को 16 साल का समय देने के बाद भी अगर मैंने मकान खाली नहीं किया तो सड़क पर आ जाऊंगा।’’

शहर में उनके अपने मकान क्यों नहीं है, यह समझाते हुए दास, शिवाजी और राव ने कहा कि उन्हें जो पैसे मिलते हैं, वे सृजन के काम में लग जाते हैं।

अगले महीने 80 साल के हो रहे दास का कहना है, ‘‘मैं कोई व्यावसायिक कलाकार नहीं हूं। मैं कला के व्यापार में नहीं हूं। मेरी पेंटिग से जो भी कमाई होती है, उसे मैं अपनी अगली पेंटिंग बनाने का सामान जुटाने में लगा देता हूं।’’

सभी कलाकारों ने नोटिस भेजे जाने के टाइमिंग को लेकर नाराज़गी और चिंता जाहिर की। कलाकारों का कहना है कि वे सभी लोग 65 साल की उम्र से अधिक है। इस कोरोना महामारी के समय में बिना कोई विकल्प दिए उनसे उनका शेलटर छीनना, जो पूरी तरह अनुचित है।

वनाश्री राव ने कहा, ‘महामारी के समय प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरे देश के मकान मालिकों को अपने किरायेदारों को घर से नहीं निकालना चाहिए और किराया भी कम करना चाहिए, लेकिन वह खुद हमारे साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है।’

कलाकारों ने इस असंवेदनशीलता को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है। 14 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में कलाकारों ने उनसे इस मामले पर ध्यान देने और कलाकार समुदाय का समर्थन करने का आग्रह किया है।

पत्र में कहा गया है, ‘हम अपने भविष्य की सुरक्षा और पेशेवर काम को लेकर भी चिंतित हैं। ’

पत्र में कहा गया है कि, ‘कई बार सरकार और हमारा देश हमें ‘दिग्गज’ और ‘सांस्कृतिक राजदूत’ कहते हैं, तो हमें लगता है कि हमारी सरकार खासकर संस्कृति मंत्रालय को हमारे विस्तार (रहने के समय) की तुरंत सिफारिश करनी चाहिए।’

ऐसा ही पत्र संस्कृति मंत्री, संस्कृति सचिव और अन्य अधिकारियों को भी भेजा गया है, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं आया है।

नृत्य इतिहासकार सुनील कोठारी कहते है कि , ‘संस्कृति मंत्री हमसे मिलना नहीं चाहते हैं। मैं अपने आवास का किराया दे रहा हूं, जो साल 2014 से 15 हजार रुपये महीना है। मैंने शादी नहीं की है। मै अकेला रहता हूं, लेकिन मेरे पास हजारों किताबें हैं, मुझे कहा जाना चाहिए?’

उन्होंने कहा, अगर उन्हें ये जगह चाहिए तो उन्हें कम से कम हमें एक अलग आवास देना चाहिए। लेकिन सरकार को शयद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए है। संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने साफतौर पर कहा कि वो कुछ नहीं कर सकते है जो कर सकते थे वो कर चुके है।

आप सोचिए जिस पर देश को नाज़ होना चाहिए हम उनसे उनका घर भी छीन रहे है, जो कलाकर के हैसियत से तो छोड़िए इस माहमारी में घोर गैरमानवीय भी है।

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

 

order to vacate the government house
Delhi
artist
Central Government

Related Stories

पर्यावरण, समाज और परिवार: रंग और आकार से रचती महिला कलाकार

सार्थक चित्रण : सार्थक कला अभिव्यक्ति 

आर्ट गैलरी: प्रगतिशील कला समूह (पैग) के अभूतपूर्व कलासृजक

आर्ट गैलरी : देश की प्रमुख महिला छापा चित्रकार अनुपम सूद

छापा चित्रों में मणिपुर की स्मृतियां: चित्रकार आरके सरोज कुमार सिंह

जया अप्पा स्वामी : अग्रणी भारतीय कला समीक्षक और संवेदनशील चित्रकार

कला गुरु उमानाथ झा : परंपरागत चित्र शैली के प्रणेता और आचार्य विज्ञ

चित्रकार सैयद हैदर रज़ा : चित्रों में रची-बसी जन्मभूमि

कला विशेष: भारतीय कला में ग्रामीण परिवेश का चित्रण

कला विशेष: जैन चित्र शैली या अपभ्रंश कला शैली


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License