NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
विपक्ष ने राष्ट्रपति से कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया
विपक्ष का दावा है कि दोनों विधेयक किसानों के हितों के खिलाफ हैं और इसमें खेती के कॉरपोरेट हाथों में जाने की आशंका है। विपक्षी नेताओं का यह भी दावा है कि यह कृषि क्षेत्र के लिए ‘‘मौत का फरमान’’ साबित होगा।
भाषा
21 Sep 2020
kovind

नयी दिल्ली: राज्यसभा में कृषि संबंधी दो विवादास्पद विधेयकों के हंगामे में पारित होने के एक दिन बाद कई विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अनुरोध किया है कि वह इन दोनों प्रस्तावित कानूनों पर हस्ताक्षर नहीं करें।

इसके अलावा सरकार ने ‘‘जिस तरीके से अपने एजेंडा को आगे बढ़ाया है’’, उसके बारे में भी विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, वाम दलों, राकांपा, द्रमुक, सपा, तृणमूल कांग्रेस और राजद सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में इस मामले में उनसे हस्तक्षेप करने और विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया है।

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही विधेयक कानून बन सकता है।

सरकार दोनों विधेयकों को कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार बता रही है। राज्यसभा ने रविवार को भारी हंगामे के बीच दोनों विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

इसे पढ़ें : कृषि सुधार या पूंजीपतियों की झोली में ‘किसानों’ की सरकार?

दोनों विधेयकों को प्रवर समिति में भेजने की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों ने मतविभाजन की मांग नहीं माने जाने पर सदन में भारी हंगामा किया। वे कोविड-19 दिशानिर्देशों की अनदेखी करते हुए आसन के बिल्कुल पास आ गए और उपसभापति हरिवंश की ओर कागज भी फेंके।

सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा में रविवार को जिस तरह से विधेयकों को पारित किया गया, उसे विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ करार दिया। विपक्षी दलों ने मिलने के लिए राष्ट्रपति से समय भी मांगा है। संभवत: मंगलवार को यह बैठक हो सकती है।

शिरोमणि अकाली दल नेतृत्व सोमवार को राष्ट्रपति से अलग से मुलाकात करेगा और उनसे विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध करेगा।

सूत्रों ने कहा कि विपक्षी नेताओं का ज्ञापन राष्ट्रपति को भेज दिया गया है। समझा जाता है कि कांग्रेस सांसद और मशहूर वकील अभिषेक सिंघवी ने ज्ञापन तैयार किया है।

विपक्ष का दावा है कि दोनों विधेयक किसानों के हितों के खिलाफ हैं और इसमें खेती के कॉरपोरेट हाथों में जाने की आशंका है। विपक्षी नेताओं का यह भी दावा है कि यह कृषि क्षेत्र के लिए ‘‘मौत का फरमान’’ साबित होगा।

सरकार का कहना है कि इस कानून के तहत किसानों को अपनी उपज की बिक्री के लिए कोई उपकर या शुल्क नहीं देना होगा।

इसे पढ़ें :  कृषि क्षेत्र पर कॉरपोरेट घरानों की सर्जिकल स्ट्राइक!

Ram Nath Kovind
Parliament of India
Agriculture Bill
farmer crises
agricultural crises
Farm Bills
MPs Suspended
Rajya Sabha
Modi Govt
Farmers’ Protests
Opposition Protests
Agri Bills

Related Stories

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान

ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

पूर्वांचल से MSP के साथ उठी नई मांग, किसानों को कृषि वैज्ञानिक घोषित करे भारत सरकार!

किसानों की ऐतिहासिक जीत के मायने

क्या चोर रास्ते से फिर लाए जाएंगे कृषि क़ानून!

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में 'धान का कटोरा' कहलाने वाले इलाके में MSP से नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर किसान

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है कृषि उत्पाद का मूल्य

खेती गंभीर रूप से बीमार है, उसे रेडिकल ट्रीटमेंट चाहिएः डॉ. दर्शनपाल


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License