NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
प्रयोगशाला में विकसित मिनिएचर मस्तिष्क कर रहा है वास्तविक जीवन की स्थितियों की नकल
यूसीएलए और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की शोधकर्ताओं की एक टीम ने इंसानी स्टेम कोशिकाओं से एक साल से (20 महीने) अधिक समय से एक मस्तिष्क कृत्रिम अंग को विकसित किया है और पाया है कि स्टेम-कोशिका से उत्पन्न की गई मस्तिष्क कृत्रिम अंग ठीक उसी प्रकार से काम कर रही है जैसा कि नवजात बच्चों के वास्तविक दिमाग व्यवहार करते हैं।
संदीपन तालुकदार
25 Feb 2021
प्रयोगशाला में विकसित मिनिएचर मस्तिष्क कर रहा है वास्तविक जीवन की स्थितियों की नकल
चित्र साभार: फ्लिकर.कॉम

एक प्रयोगशाला के भीतर मौजूद चीजों से कृत्रिम परिस्थितियों में लघु अंगों को विकसित करना कई दशकों से अनुसंधान के क्षेत्र में बेहद लुभावना विषय रहा है। अनुसंधान के इस क्षेत्र में कई उतार-चढाव के साथ वैज्ञानिकों ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी है, विशेषकर कृत्रिम अंगों को विकसित करने के क्षेत्र में – जिसे एक वास्तविक इंसानी अंगों का लघु और सामान्यीकृत संस्करण कह सकते हैं।

इंसानी स्टेम कोशिकाएं अपने आंतरिक चरित्र के कारण कृत्रिम अंग अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्टेम कोशिकायें को जब सही पोषण और परिस्थितियों के साथ प्रयोगशाला में मौजूद चीजों के साथ रखा जाता है, तो वे फलने-फूलने लगती हैं और एक विशेषीकृत कोशिका प्रकारों में तब्दील हो सकती हैं।

कृत्रिम अंग शोध का क्षेत्र शोध के मामले में एक महत्वपूर्ण घटक के तौर पर उभर चुका है जिसे आमतौर पर अनुवादन संबंधी शोध के नाम से जाना जाता है। ट्रांसलेशनल शोध के फलक में बुनियादी जीवविज्ञानं और नैदानिक परीक्षणों से लेकर प्रोद्योगिकी तक ज्ञान के परीक्षणों को शामिल किया जाता है जो क्रिटिकल चिकत्सकीय परिस्थितियों और जरूरतों को संबोधित करता है।

इस क्षेत्र में विकास के चरण में एक हालिया रिपोर्ट ने कुछ उत्साहवर्धक परिणाम सामने लाये हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया, लास एंजेल्स (यूसीएलए) और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मानव स्टेम कोशिकाओं से एक कृत्रिम मस्तिष्क अंग को विकसित किया है, जो कि एक साल से अधिक की उम्र (20 महीने) का है। अपने शोध में उन्होंने पाया है कि स्टेम कोशिका से उत्पन्न होने वाला यह कृत्रिम मस्तिष्क अंग ठीक उसी प्रकार से व्यवहार करता है जैसा कि नवजात बच्चों का वास्तविक मस्तिष्क करता है। इस शोध को नेचर न्यूरोसाइंस जर्नल में 22 फरवरी को प्रकाशित किया गया था।

इस शोध का निष्कर्ष है कि इस लंबी अवधि में एक मस्तिष्क कृत्रिम अंग कुछ आनुवांशिक लक्षण प्रदर्शित कर सकता है, जैसा नवजात शिशुओं के वास्तविक मस्तिष्क में प्रदर्शित करता है, विशेषतौर पर विकास के शुरूआती चरण में ऐसा देखने को मिल सकता है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में तंत्रिका विज्ञानी, सेर्गिऊ पास्का और यूसीएलए के स्नायुविज्ञानी डेनियल गेस्चविंड के नेतृत्व में इस दल ने प्रयोगशाला में उपलब्ध वस्तुओं के साथ पोषक तत्वों की सटीक मात्रा के साथ मानव स्टेम कोशिकाओं को मिलाने का काम किया। मूल कोशिकाओं में विकास को देखा गया और एक कृत्रिम मस्तिष्क अंग के तौर पर विकसित हुईं, जिस प्रकार से वास्तविक मस्तिष्क में न्यूरोन एवं अन्य कोशिका तत्व पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं ने समय-समय पर विकसित हो रहे अंगों की कुछ कोशिकाओं को उनके भीतर आरएनए अनुक्रम को बनाये रखने के लिए अलगाव में रखा। ऐसा करते हुए शोधार्थी यह पता लगा सकने में सक्षम हो सकते हैं कि इस दौरान कौन से जीन सक्रिय हैं। इस डेटा के साथ उन्होंने डेटाबेस में संग्रहित वास्तविक इंसानी मस्तिष्क से आरएनए का मिलान किया।

दल ने पाया कि जब कृत्रिम अंग 250 से 300 दिनों के बीच पहुंचा, अर्थात जब वह 9 महीने का हो गया तो इसके जीन की अभिव्यक्ति का ढंग, नवजात पैदा हुए इंसानी मस्तिष्क से ही मिलताजुलता पाया गया था। उन्होंने यह भी पाया कि कृत्रिम अंग का डीएनए मिथाइलेशन क्रम जैसे अन्य आनुवांशिक गुण भी किसी परिपक्व मानव मस्तिष्क के समान ही व्यवहार कर रहे हैं। डीएनए का मिथाइलेशन, वस्तुतः डीएनए की रासायनिक टैगिंग (मिथाइलेशन) के महत्व को प्रदर्शित करता है जो जीन की गतिविधियों को प्रभावित करता है।

इन चीजों के साथ-साथ शोधकर्ताओं ने अवलोकन किया कि इनके कृत्रिम अंग में कुछ अन्य लक्षण भी हैं जो विकसित होते मानव मस्तिष्क से मिलते जुलते हैं। एक विकसित हो रहे मस्तिष्क में जन्म के समय के आस-पास, मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं एक खास प्रोटीन को धीरे-धीरे अधिक मात्रा में उत्पादित करना शुरू कर देती हैं। इस प्रोटीन को एनएमडीए रिसेप्टर के नाम से जाना जाता है और यह तंत्रिका कोशिका से तंत्रिका कोशिका के बीच में संचार के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृत्रिम मष्तिष्क अंग ने भी एनएमडीए उत्पादन को प्रदर्शित किया है।

हालाँकि इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण चेतावनी संदेश भी है। सेर्गिऊ पास्का को उद्धृत करते हुए टिप्पणी की गई थी “कृत्रिम मस्तिष्क अंग ठीक मानव मस्तिष्क जैसा नहीं है। उदाहरण के लिए विकसित मस्तिष्क से इसकी विद्युतीय गतिविधि मेल नहीं खाती है, और कोशिकाओं के झुरमुट में रक्त प्रवाहिका, प्रतिरक्षा कोशिकाएं, और संवेदी इनपुट सहित कई प्रमुख विशेषताओं का अभाव है। इसके बावजूद जो तथ्य हैरान करने वाले हैं, वह यह कि प्रयोगशाला जैसे अप्राकृतिक स्थितियों में होने के बावजूद कोशिकाओं को पता है कि कैसे प्रगति करनी है.”

कृत्रिम अंग के क्षेत्र में अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य उन राहों का पता लगाना है जो एक वास्तविक मानव अंग के विकास और कार्यप्रणाली में शामिल हो सकते हैं। यह जानने के लिए इन शोधों पर काम किया जा रहा है जिससे कि कैंसर, अल्जाइमर जैसे रोगों पर चल रहे शोध कार्यों को मजबूती प्रदान की जा सके। ट्रांसलेशनल रिसर्च के क्षेत्र में भी यह संस्थापक सिद्धांतों में से एक है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Over 1-year-old Lab Grown Miniature Brain Mimics Real Life Situation

Brain Organoid
Organoid Research
Lab Grown Brain Mimic Real Brain
Translational Research
Sergiu Pasca
Daniel Geschwind
Brain Development

Related Stories


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License