NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पीएम मोदी की 15 अगस्त पर सैनिक स्कूल की घोषणा महिला सशक्तिकरण के लिए काफ़ी है?
प्रधानमंत्री ने अपने एक घंटे और अट्ठाइस मिनट के लंबे भाषण में सैनिक स्कूल के अलावा आधी आबाधी के लिए कोई खास बात नहीं की। उन्होंने देश को नहीं बताया कि उनकी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ में महिलाएं बेख़ौफ़ घर से बाहर क्यों नहीं निकल पा रहीं?
सोनिया यादव
16 Aug 2021
पीएम मोदी

75वें स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल क़िले के प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए लड़कियों के लिए एक अहम और जरूरी घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि देश के सभी सैनिक स्कूलों में अब लड़कियां पढ़ सकेंगी। इससे पहले सैनिक स्कूलों में केवल लड़कों को ही प्रवेश दिया जाता था।

सैनिक स्कूल के दरवाज़े लड़कियों के लिए खोलकर पीएम मोदी ने निश्चित तौर पर एक अच्छी पहल की है। इससे लड़कियों की बेहतर और अच्छी शिक्षा तक पहुंच और आसान हो पाएगी और समाज में लैंगिक समानता को लेकर एक मैसेज भी कायम होगा।

हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने एक घंटे और अट्ठाइस मिनट के लंबे भाषण में सैनिक स्कूल के अलावा आधी आबाधी के लिए कोई खास बात नहीं की। उन्होंने देश को नहीं बताया कि उनकी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ में महिलाएं बेख़ौफ़ घर से बाहर क्यों नहीं निकल पा रहीं या उन पर नज़र क्यों रखी जा रही है? वे आज़ादी से अपनी ज़िन्दगी के फ़ैसले क्यों नहीं ले पा रहीं या उनके पहनावे, रिश्तों की पसंद और प्यार की अभिव्यक्ति पर नियंत्रण अभी भी क्यों जारी है? खुद उन्हीं की पार्टी जो कभी राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण बिल की समर्थक हुआ करती थी, वो आज पूर्ण बहुमत होने के बाद भी उसे पास क्यों नहीं करवा पा रही? पिछली सरकारों पर नाकामी का ठपा लगाने वाली मोदी सरकार आखिर अपने कार्यकाल में महिलाओं की जिंदगी क्यों नहीं बदल पा रही है।

निर्भया कांड के नौ साल बाद भी यौन हिंसा के मामले कम नहीं हुए

महिला सुरक्षा की बात करें तो, निर्भया कांड के नौ साल बीतने के बाद भी भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के मामले कम नहीं हुए हैं, महिलाएं अब भी असुरक्षित ही हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने खुद 5 अगस्त को राज्यसभा के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि देश में साल 2015 से 2019 के बीच बलात्कार के 1.71 लाख मामले दर्ज किए गए। इस जघन्य अपराध के सर्वाधिक मामले मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए हैं।

आपको बता दें कि आज भी देशभर में रेप क्राइसिस इंटरवेन्शन सेंटर की संख्या बहुत कम है। इसे बढ़ाने की बातें तो सरकार ने खूब की लेकिन जमीन पर कुछ खास काम नहीं हुआ। यहां तक की निर्भया फंड के पैसों के इस्तेमाल की भी कोई सही योजना अब तक सरकार के पास नहीं है। मीडिया खबरों में अक्सर इस फंड से जुड़ी नाकारात्मक खबरें सामने आती रहती हैं। ऊपर से सरकार की ओर से आने वाले भड़काऊ बयानों से माहौल और बिगड़ा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के सिद्धांत से उलट, खुद सत्ता पक्ष के कई नेताओं पर महिला उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं।

इसे भी पढ़ें: महिला-सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक चर्चा क्यों बनकर रह जाता है?

सत्ता में भारी बहुमत के बावजूद महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी की चुप्पी

महिला आरक्षण विधेयक को देखें तो, ये साल 2010 में राज्यसभा से पारित होने के बाद लोकसभा में सालों से लंबित पड़ा है। जब यूपीए सरकार ने इसे राज्यसभा से पास करवाया था, उस वक्त अरुण जेटली सदन में नेता प्रतिपक्ष थे और उन्होंने महिला आरक्षण बिल के पास होने को गर्व और सम्मान का ऐतिहासिक पल बताया था। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज उस समय लोकसभा में विपक्ष की नेता थीं, वे इस बिल की सबसे प्रमुख पैरोकारों में एक थीं। लेकिन आज 2021 में ये विडंबना ही है कि उनकी पार्टी बीजेपी दूसरी बार सत्ता में भारी बहुमत से काबिज़ है लेकिन प्रधानमंत्री महिला सशक्तिकरण के नाम पीएम मोदी चुप्पी साधे हुए हैं।

इसे भी पढ़ें: मोदी जी! ट्विटर एकाउंट नहीं चाहिए, महिला आरक्षण बिल पास करवाइए!

गौरतलब है कि मोदी सरकार में महिलाओँ के मान-सम्मान की बातें तो होती हैं लेकिन शाहीन बाग से लेकर किसान आंदोलन तक नारे लगाती औरतें सत्ता की आंखों में खटक रही हैं। पुलिस से भिड़ती कॉलेज की लड़कियाँ, हाड़ कंपाने वाली सर्दी में बैठी शाहीन बाग़ की दादियां, कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ गाँव-गाँव से राष्ट्रीय राजधानी का सफ़र तय करने वालीं महिलाएं पुलिस की लाठियां झेलती नजर आईं। तरह-तरह के फ़ेक फ़ोटो और झूठे दावों के साथ इन महिलाओं का चरित्र-हनन किया गया। कई मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं ने खुलेआम महिलाओं को अपशब्द कहे, बावजूद इसके खुद को देश का प्रधान सेवक कहने वाले प्रधानमंत्री मोदी शांत रहे, उनका खून नहीं खौला न लड़कियों के लिए और ना बूढ़ी दादियों के लिए।

Narendra modi
75th Independence day
women empowerment
Sainik School
beti bachao beti padhao
women security
women safety
crimes against women

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर एक हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 71 मरीज़ों की मौत
    06 Apr 2022
    देश में कोरोना के आज 1,086 नए मामले सामने आए हैं। वही देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 871 रह गयी है।
  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं, देश के ख़िलाफ़ है ये षडयंत्र
    05 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने दिल्ली की (अ)धर्म संसद से लेकर कर्नाटक-मध्य प्रदेश तक में नफ़रत के कारोबारियों-उनकी राजनीति को देश के ख़िलाफ़ किये जा रहे षडयंत्र की संज्ञा दी। साथ ही उनसे…
  • मुकुंद झा
    बुराड़ी हिन्दू महापंचायत: चार FIR दर्ज लेकिन कोई ग़िरफ़्तारी नहीं, पुलिस पर उठे सवाल
    05 Apr 2022
    सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि बिना अनुमति के इतना भव्य मंच लगाकर कई घंटो तक यह कार्यक्रम कैसे चला? दूसरा हेट स्पीच के कई पुराने आरोपी यहाँ आए और एकबार फिर यहां धार्मिक उन्माद की बात करके कैसे आसानी से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमपी : डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे 490 सरकारी अस्पताल
    05 Apr 2022
    फ़िलहाल भारत में प्रति 1404 लोगों पर 1 डॉक्टर है। जबकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मानक के मुताबिक प्रति 1100 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए।
  • एम. के. भद्रकुमार
    कीव में झूठी खबरों का अंबार
    05 Apr 2022
    प्रथमदृष्टया, रूस के द्वारा अपने सैनिकों के द्वारा कथित अत्याचारों पर यूएनएससी की बैठक की मांग करने की खबर फर्जी है, लेकिन जब तक इसका दुष्प्रचार के तौर पर खुलासा होता है, तब तक यह भ्रामक धारणाओं अपना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License