NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है...": पाकिस्तान में छात्रों का ऐतिहासिक मार्च
पाकिस्तान के 40 से अधिक शहरों में छात्रों ने शिक्षा निजीकरण के ख़िलाफ़ और छात्र संघों पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की।
वी. अरुण कुमार
30 Nov 2019
pakistani march

"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर की कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।" शुक्रवार 29 नवंबर को पूरा पाकिस्तान इस क्रांतिकारी शेर से गूंज गया। इसे साल 1921 में बिस्मिल अज़ीमाबादी ने लिखा था। पूरे पाकिस्तान में छात्रों ने इस शेर को गुनगुनाते हुए अपने अधिकारों के लिए देश भर में मार्च किया।

वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा पिछले महीने छात्रों से एकजुटता मार्च का आह्वान किया गया था। इन संगठनों में प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स कलेक्टिव(पीएससी), प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फेडरेशन(पीआरएसएप) और रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स फ्रंट (आरएसएफ) शामिल थे। इन संगठनों ने विश्वविद्यालयों में छात्र संघों पर तीन दशक पुराने प्रतिबंध को हटाने और शिक्षा के निजीकरण को समाप्त करने की मांग की।

नेशनल स्टूडेंट्स फ़्रंट (एनएसएफ़) के अरसलाम भुट्टो ने पीपल्स डिस्पैच से बात करते हुए कहा, “हम पूरी तरह फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ हैं और छात्र संघों के गठन के अधिकार की मांग कर रहे हैं। छात्रों कीयूनियनें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता चाहती हैंजिससे सरकार डरती है।” भुट्टो ने कहा कि "सरकार झूठ फैला रही है कि यूनियनें हिंसा पैदा करती हैं।"

pakistan march

उनकी लामबंदी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया और कई और छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने छात्रों के इस मार्च के साथ अपनी एकजुटता बढ़ानी शुरू की।

कराची की एक छात्रा सहर ने पीपल्स डिस्पैच से बात करते हुए कहा कि वे इस मार्च में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि "निजी विश्वविद्यालय अपनी फीस बढ़ाते रहते हैं और सरकार इसके ख़िलाफ़ बोलने वाले छात्रों की आवाज़ को दबाने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।"

Jub laal laal lehraay ga#StudentsSolidarityMarch pic.twitter.com/7lLtX2LH5L

— Salman Sikandar ☭ (@salmansikanda12) November 29, 2019

शुक्रवार के मार्च में भारी संख्या में छात्र शामिल हुए जो अभूतपूर्व था। ये मार्च न केवल संख्या के मामले में बल्कि व्यापकता के मामले में भी काफी अहम था। पाकिस्तान के सबसे दूरदराज के इलाक़ों में विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस छात्र एकता मार्च में हिस्सा लिया। एक्टिविस्ट का कहना है कि 40 से अधिक शहरों में इस मार्च में छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।

दुनिया भर में छात्र नवउदारवाद और अधिकार के उदय के खिलाफ लामबंदी के मोर्चे पर रहे हैं। राजधानी इस्लामाबाद में मार्च के दौरान एक बैनर में लिखा था, "दुनिया के छात्र एकजुट हों,आपके पास क़र्ज, ऋण और निजीकरण के अलावा खोने के लिए कुछ भी नहीं है।"

छात्रों की आवाज़ दबाना

साल 1984 में पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक द्वारा तानाशाही के ख़िलाफ़ प्रतिरोध को दबाने के प्रयास में छात्र संघों पर प्रतिबंध लगाया गया था। छात्र और कार्यकर्ता ज़िया-उल-हक की इस क्रूर शासन व्यवस्था के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे आगे थे। इस प्रतिबंध को 1988 में प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो द्वारा हटाया गया था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने1993 में प्रतिबंध को फिर से लागू कर दिया। उत्तरवर्ती सरकारों ने इस प्रतिबंध का इस्तेमाल सभी के लिए शिक्षा की मांग करने वाले छात्रों की आवाज़ को दबाने के लिए किया है लेकिन आज छात्र खड़े हो रहे हैं।

pakistani march

शुक्रवार के मार्च में शामिल हुए एक प्रतिभागी ने कहा कि उनके लिए छात्र संघ नर्सरी की तरह हैं जो छात्रों को गंभीर रूप से सोचने और राय विकसित करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। परिसरों पर होने वाली हिंसा छात्रों द्वारा आयोजित राजनीतिक गतिविधियों के कारण नहीं होती है बल्कि क्रूर विचारधाराओं की प्रमुखता के कारण है जो आलोचनात्मक सोच को दबाने में विश्वास करती है।

देश भर में छात्र एकजुटता मार्च ने मशाल खान और अन्य छात्रों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने प्रगतिशील पाकिस्तान के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। 13 अप्रैल 2017 को23 वर्षीय वामपंथी छात्र मशाल पर खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय मर्दन के भीतर दक्षिणपंथी इस्लामवादियों की भीड़ द्वारा हमला किया गया था और बेरहमी से मार दिया गया था। उन पर छात्रावास में धर्म पर बहस के बाद ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था।

pakistani march

मशाल के पिता लाला इक़बाल ने भी छात्रों के साथ अपनी एकजुटता दिखाने और अपने बेटे के लिए लाहौर में आयोजित इस मार्च में शामिल हुए। उनके बेटे ने छात्रों के मुद्दे को लेकर अपनी जान गंवा दी थी। जैसे ही उनके पिता इस मार्च में शामिल हुए उनकी आंखों में आंसू भर गए और छात्रों ने नारा लगाना शुरू कर दिया। छात्रों ने “मशाल खान को ला सलाम। मशाल तेरा मिशन अधूरा, हम सब मिल के करेंगे पूरा” का नारा लगाया।

ये छात्र मशाल खान को श्रद्धांजलि देने के लिए13 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

कार्यकर्ता और छात्र एकजुट हुए

शिक्षा क्षेत्र, ट्रेड यूनियनों, पेशेवर संगठनों और नागरिक समाज के सैकड़ों लोग फीस वृद्धि और निजीकरण से आज़ादी की मांग करते हुए इस मार्च में शामिल हुए।

पीपल्स डिस्पैच से बात करते हुए मज़दूर किसान पार्टी (एमकेपी) के छात्र विंग के सदस्य वक़ार ने कहा, "हम जैसे छात्र और कार्यकर्ता निजीकरण की व्यवस्था के ख़िलाफ़ एकजुट हैं,और हम देखेंगे कि वे [कुलीन वर्ग] किस तरह हमारे विरोध को रोकेंगे।"

वकार कहते हैं, "एक दिन छात्रों और श्रमिकों की यह लहर अमीरों और कुलीनों को पटखनी देगी और मज़दूर वर्ग और ग़रीबों की सत्ता को स्थापित करेगी।"

pakistani march

ये छात्र शिक्षा के लिए कुल जीडीपी के कम से कम 5% आवंटन और परिसरों से सेनाओं को हटाने की भी मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां उन छात्रों और कार्यकर्ताओं के अपहरण के लिए कुख्यात हैं जो सरकार और सेना की नीतियों के ख़िलाफ़ अपना असंतोष व्यक्त करते हैं।

छात्रों ने बताया कि पाकिस्तान में शिक्षा हमेशा अमीरों के लिए रही है लेकिन इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की नई सरकार की नीतियों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है और उच्च शिक्षा ग़रीबों के लिए और भी दुर्गम हो गई है। 11 जून 2019 को घोषित बजट में सरकार ने उच्च शिक्षा विकास बजट में 37% की भारी कटौती की।

सभी तस्वीरें ख़ालिद महमूद द्वारा ली गई हैं।

सौजन्य: पीपल्स डिस्पैच

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

‘The Desire for Revolution is in Our Hearts’: Historic Students’ March in Pakistan

Attack on public education
Higher education
Imran Khan
Pakistan Mazdoor Kissan Party
pakistan students union
Progressive Students Collective
Progressive Students Federation
PTI
Public Education
Revolutionary Students Federation
Students' solidarity march pakistan

Related Stories

सुपवा: फीस को लेकर छात्रों का विरोध, कहा- प्रोजेक्ट्स-प्रैक्टिकल्स के बिना नहीं होती सिनेमा की पढ़ाई

परीक्षाओं के मसले पर छात्र और यूजीसी क्यों आमने-सामने हैं?

पाकिस्तान में अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे 300 छात्रों पर राजद्रोह का मुकदमा

आम छात्रों को शिक्षा के अधिकार से और अधिक वंचित करने का नाम है फीस में बढ़ोत्तरी

दिल्ली से उत्तराखंड तक : पढ़ने की जगह आंदोलन क्यों कर रहे छात्र?

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक एक बार फिर हड़ताल पर  

जन संघर्षों में साथ देने का संकल्प लिया युवाओं ने

ग्रीसः नए लाइसीयम बिल को लेकर माध्यमिक स्कूल के छात्रों का प्रदर्शन

डीयू के गणित विभाग के छात्रों के बाद अब भौतिकी विभाग के छात्र भी अंदोलन की राह पर


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License