NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीनियों ने 45 वां 'लैंड डे' मनाया, इज़रायल के क़ब्ज़े को लेकर विरोध जारी रखने का संकल्प लिया
1976 के बाद से हर साल 30 मार्च को फिलिस्तीनियों द्वारा लैंड डे (यौम अल-अर्ज) मनाया जाता है। इस दिन फ़िलिस्तीनी अपनी भूमि पर इज़रायल के कब्जे के ख़िलाफ़ लड़ाई और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के अपने वतन लौटने के अधिकार का संकल्प लेते हैं।
पीपल्स डिस्पैच
31 Mar 2021
V

फिलिस्तीनियों ने मंगलवार 30 मार्च को 45 वां 'लैंड डे' मनाया। इस अवसर पर कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में रैलियों और प्रदर्शनों सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएफए के अनुसार 30 मार्च की सुबह आयोजित कुछ रैलियों को इजरायल सुरक्षा बलों द्वारा जबरन रुकावट पैदा की गई थी।

अपनी मातृभूमि लौटने के फिलिस्तीनी शरणार्थी अधिकार और अपनी भूमि के प्रति अपने स्वामित्व और अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए हर साल 'लैंड डे' (यौम अल-अर्ज) मनाते हैं। इजरायली कब्जे के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध की कार्रवाई के रूप में फिलिस्तीनी जुलूस निकालते हैं और जैतून के पेड़ लगाते हैं।

21,000 ड्यूनम (2,100 हेक्टेयर) फिलिस्तीनी भूमि पर कब्जा करने की इजरायल प्लान के खिलाफ हुए प्रदर्शन पर गोलीबारी से इस दिन 1976 में इजरायल के सुरक्षा बलों ने छह फिलिस्तीनियों को मार डाला और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। ये रैली ऐतिहासिक फिलिस्तीन भर में निकाली गई। हर साल फिलिस्तीनी उन लोगों की कब्रों पर जाते हैं जो इस दिन कब्जे के खिलाफ लड़ते हुए इजरायली सैनिकों द्वारा मारे गए हैं।

'लैंड डे' के अवसर पर जारी एक बयान में फिलिस्तीनी केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (पीसीबीएस) ने इजरायल सेना द्वारा भूमि हड़पने के मामले को उजागर किया है। इस बयान के अनुसार इजरायल ने 1948 से पूर्व महज 6.2 प्रतिशत की तुलना में आज ऐतिहासिक फिलिस्तीन की 85 प्रतिशत से अधिक भूमि को जब्त कर लिया है। पीसीबीएस के अनुसार 13.7 मिलियन की कुल आबादी में से केवल 6.8 मिलियन लोग फिलिस्तीनी भूमि (कब्जे वाले क्षेत्र और इज़रायल) पर रहते हैं। शेष फिलिस्तीनी लोग शरणार्थी के रुप में अन्य अरब और विदेशी देशों में रहने के लिए मजबूर हैं क्योंकि इजरायल के कब्जा करने वालों ने उनके लौटने के अधिकार से इनकार कर दिया है।


बाकी खबरें

  • vikram
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपीः बीजेपी नेताओं का विरोध जारी, गांव से बैरंग लौटा रहे हैं किसान
    22 Jan 2022
    चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में कई मौकों पर विभिन्न मुद्दों के लेकर लोगों ने बीजेपी नेताओं का विरोध किया है। चाहे कृषि कानून का मामला या कोई दूसरा क्षेत्रीय या राष्ट्रीय मामला इन सबको लेकर इन नेताओं को…
  • cartoon
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: नये इंडिया का नया गणतंत्र ‘दिवस’!
    22 Jan 2022
    नेताजी का किया-धरा चाहे सब मिट्टी में मिलाएंगे, पर नेताजी की 25 फुट ऊंची मूर्ति तो मोदी जी ही लगाएंगे और वह भी परेड के रास्ते पर। इस गणतंत्र दिवस की तस्वीरें एक नयी कहानी सुनाएंगी-नये इंडिया के नये…
  • up hot seat
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: योगी और अखिलेश की सीटों के अलावा और कौन सी हैं हॉट सीट
    22 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की गोरखपुर शहर विधानसभा सीएम योगी और करहल विधानसभा अखिलेश यादव के कारण पहले ही चर्चा में हैं, इसके अलावा कौन-कौन सी सीटों पर रहेगी राजनीतिक दलों और आम लोगों की ख़ास नज़र..
  • clubhouse
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ‘क्लब हाउस चैट’ मामले में एक और गिरफ़्तारी, ‘बिस्मिल्ला’ के नाम से आईडी चला रहा था आरोपी राहुल कपूर  
    22 Jan 2022
    क्लब हाउस चैट मामले के तार देश के हर शहर से जुड़ते जा रहे हैं, हरियाणा के बाद अब लखनऊ से एक आरोपी को गिरफ़्तार किया गया है, जो अपना नाम बदलकर महिलाओं के बारे में अश्लील टिप्पणियां करता था।
  • online campaign
    रश्मि सहगल
    चुनावों के ‘ऑनलाइन प्रचार अभियान’ में कहीं पीछे न छूट जाएं छोटे दल! 
    22 Jan 2022
    डिजिटल की तरफ शिफ्ट की बातें करना इसे लागू करने की तुलना में काफी आसान है क्योंकि चुनावी राज्यों के कई हिस्सों में अभी भी इंटरनेट की पैठ कम है और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का रवैया भी काफी हद तक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License