NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
क़ब्ज़े वाले पूर्वी येरूशलेम से लोगों को जबरन बेदख़ल करने के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनियों का विरोध
इज़रायल की एक अदालत ने इलाक़े के कुल 28 फ़िलिस्तीनी परिवारों में से कम से कम उन 13 परिवारों को बेदखल करने का आदेश दिया है जिनमें वे पीढ़ियों से रह रहे हैं। ये आदेश अवैध यहूदी बस्ती के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।
पीपल्स डिस्पैच
03 May 2021
क़ब्ज़े वाले पूर्वी येरूशलेम से लोगों को जबरन बेदख़ल करने के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनियों का विरोध

इज़रायली सेना ने रविवार 2 मई को एक अदालत के आदेश के बाद शेख जर्राह इलाके से फिलिस्तीनी परिवारों को उनके घरों से विस्थापित करने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे फिलिस्तीनियों को खाली कराने के लिए बल का प्रयोग किया। यहूदियों से जुड़े जमीन का दावा करने को लेकर कुछ यहूदी संगठन द्वारा मामला दायर करने के बाद इलाके के कुल 28 परिवारों में से कम से कम छह फिलिस्तीनी परिवारों को घर खाली करने के लिए कहा गया था।

सात अन्य परिवारों को अगस्त तक इस इलाके से अपने घर खाली करने का समय दिया गया था। इस आदेश से 17 बच्चों सहित कुल 58 लोगों को विस्थापित किया जाना है। ये फिलिस्तीनी परिवार पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहे हैं।

1972 में शेख जर्राह इलाके की जमीन को यहूदी का दावा कर इजरायल की अदालत में कुछ कट्टरपंथी यहूदी समूह द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद से कई अन्य परिवारों को इस इलाके से विस्थापित कर दिया गया है। नाराजगी के बावजूद कम से कम 42 फिलिस्तीनियों को 2002 में और 2008 और 2017 में कई अन्य परिवारों को बेदखल किया गया था।

शेख जर्राह इलाके में बसे अधिकांश फिलिस्तीनी परिवार शरणार्थी हैं जिन्होंने 1948 में नकबा के दौरान इजरायली आतंकवादी समूहों द्वारा हिंसा से बचने के लिए अपने घरों को छोड़ दिया था। वे आखिरकार 1956 में शेख जर्राह इलाके में बस गए थे।

ये बेदखली 1968 केसेट के इस आदेश के बावजूद किया गया जिसने यूनाइटेड नेशन रिलीफ एंड वर्क एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के साथ शरणार्थियों के बसावट की प्रक्रिया को स्वीकार किया था जिसके तहत ये घर जॉर्डन द्वारा 1948 से 1967 के बीच इस क्षेत्र पर अपने नियंत्रण के दौरान बनाए गए थे।

इजरायल ने 1967 से पूर्वी येरुशेलम पर कब्जा कर रखा है और बाद में इसे मिला लिया। इसने इस शहर से कई फिलिस्तीनियों को बेदखल किया है और नियमित रूप से उनके घरों को नष्ट किया है और इस शहर में "जनसांख्यिकीय संतुलन" बनाए रखने के लिए अपनी नीति के अनुसार उन्हें शहर छोड़ने के लिए नए घर बनाने से रोका है। इसने इस शहर में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियों का निर्माण किया है जिसमें लगभग 200,000 अवैध यहूदी निवासी भारी सैन्य सुरक्षा के अधीन रह रहे हैं।

Israel
Palestine
Israeli army

Related Stories

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

इज़रायली सुरक्षाबलों ने अल-अक़्सा परिसर में प्रार्थना कर रहे लोगों पर किया हमला, 150 से ज़्यादा घायल

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    दोनों सदनों में कृषि क़ानून वापसी बिल पास, मुनव्वर फ़ारूक़ी के शोज़ फिर रद्द और अन्य ख़बरें
    29 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी दोनों सदनों में कृषि क़ानून वापसी बिल पास, मुनव्वर फ़ारूक़ी के शोज़ फिर रद्द और अन्य ख़बरों पर।
  • OMICRON
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना की तीसरी लहर OMICRON ?
    29 Nov 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं कोरोना के एक नए वैरिएंट 'Omicron' के बारे मेंI इस वैरिएंट ने फिर से कोविड के खतरे को बढ़ा दिया हैI
  • kisan
    प्रभात पटनायक
    साम्राज्यवाद पर किसानों की जीत
    29 Nov 2021
    किसानों की यह जीत, बुनियादी तौर पर साम्राज्यवाद के लिए एक धक्का है। इसलिए, इससे हमें रत्तीभर अचरज नहीं होना चाहिए कि पश्चिमी मीडिया, किसान आंदोलन के सामने झुकने के लिए मोदी सरकार की इतनी आलोचना कर…
  • dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला
    29 Nov 2021
    राजस्थान की राजधानी जयपुर में दलित दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने को लेकर कथित उच्च जाति के लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में हमला कर दिया। पुलिस ने दस लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। 
  • This Victory Gives Confidence for Future Struggles
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यह जीत भविष्य के संघर्षों के लिए विश्वास जगाती है
    29 Nov 2021
    "कई संघर्ष अभी बाक़ी हैं, जैसे कि सभी किसानों को उनकी फ़सलों के उत्पादन लागत के डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने के लिए क़ानून बनवाने की लड़ाई अभी बाक़ी है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License