NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
युवा
भारत
पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज़्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
जगन्नाथ कुमार यादव
11 Mar 2022
पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'

बीते बुधवार यानी 9 मार्च को बिहार की राजधानी पटना में भारतीय नृत्यकला मंदिर, मुक्ताकाश मंच में 'रोजगार अधिकार महासम्मेलन' का आयोजन किया गया। यह महजुटान ऐसे छात्रों और अभ्यर्थियों का था, जो राज्य स्तरीय विभिन्न विभागों में अपने नौकरी की राह देख रहे हैं। इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े विभिन्न पदों जैसे विशेष सर्वेक्षण सहायक, बंदोबस्त पदाधिकारी, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो, लिपिक और अमीन, अनियोजित कार्यपालक सहायक, एसटीईटी-2019, सांख्यिकी स्वयंसेवक, सिपाही बहाली 2009, बिहार-SSC 2014, एस टीईटी-2011-12, पारा मेडिकल, फार्मासिस्ट, सीटीईटी, बीटीईटी और बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।

रोजगार आधारित इस महासम्मेलन का आयोजन रोजगार संघर्ष संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किया गया था। जिसका नेतृत्व ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) और रेवॉल्यूशनरी यूथ असोसिएशन (आरवाईए) संयुक्त रूप से कर रहे थे। इसके साथ ही, इस महासम्मेलन में भाकपा-माले के कई विधायक शामिल रहें। जिसमें मनोज मंज़िल, संदीप सौरभ, अमरजीत कुशवाहा, अजीत कुशवाहा, रामबली यादव, सत्यदेव राम आदि शामिल थें।

महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में अपनी नौकरी का राह देख रहे मुंगेर जिले के 40 वर्षीय मनोज कुमार से न्यूज़क्लिक ने बात की। वह उन अभ्यर्थियों में से एक हैं, जो विभाग में खाली पड़े पदों और मेरिट सूची लिस्टेड होने के बावजूद भी ज्वाइन नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 2019 में 5 पदों (विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो, विशेष सर्वेक्षण लिपिक, विशेष सर्वेक्षण अमीन, अमीन) के लिए 6875 रिक्त पड़े सीटों को भरने के लिए वेकैंसी आयी थी। जिसमें 6842 अभ्यर्थी चयनित हुए। लेकिन महज़ 4871 चयनित अभ्यर्थी ही ज्वाइन किया हैं। बाकी 1971 सीटें खाली रह गई।


मनोज ने हमें बताया कि चयनित अभ्यर्थियों की सूची के अलावा एक और सूची तैयार की गई थी, जिसे 'बिलो प्वाइंट सेलेक्टेड' नाम दिया गया। इस सूची में 1874 अभ्यर्थियों के नाम था। जब हमलोगों ने सरकार से संघर्ष किया तो इस सूची में शामिल सभी अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में कन्वर्ट कर दिया गया और कहा गया कि खाली पड़े पदों को इसी वेटिंग सूची से भरा जाएगा, लेकिन अब सरकार अपने बात से पलट रही है। विभाग के निदेशक जय सिंह ने हमलोगों से कहा है कि आप लोगों की समय सीमा समाप्त हो गई है। इसलिए रिक्त पदों को भरने के लिए अब नए सिरे से बहाली की जाएगी।

सरकार से सवाल पूछते हुए आगे उन्होंने कहा कि अब सरकार कह रही है कि वह नए सिरे से बहाली करेंगे, तो हम वेटिंग लिस्ट में शामिल लोगों का क्या! हममें से कई व्यक्ति विभाग के तयशुदा उम्र को पार करने वाले हैं। अगर नए सिरे से बहाली होती है तो मेरे जैसे कई व्यक्ति आवेदन करने लायक भी नहीं बचेंगे।

एक अन्य मामला है सांख्यिकी विभाग का। जिसके संदर्भ में इस विभाग से जुड़े अभ्यर्थी संदीप ने महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 2011 में इस विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर 72 हजार सांख्यिकी स्वयंसेवकों की बहाली की। बहाली के बाद एक प्रस्ताव के द्वारा यह कह दिया गया कि हम वॉलिंटियर्स के तौर पर काम करेंगे। जब-जब जरूरी होगी, हमें बुलाया जाएगा। हमने यह भी स्वीकार कर लिया। हमसे छठी आर्थिक गणना करवाया गया। जिसके कारण बिहार के मुख्यमंत्री को तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से अवार्ड भी मिला क्योंकि हमने पूरे भारत में सबसे कम समय में गणना करके दिया था। इसके बावजूद भी न सिर्फ हमारी नौकरी खा ली गई बल्कि हमारी पैनल को डिजॉल्व भी कर दिया गया।

आगे उन्होंने कहा कि 2015 विधानसभा चुनाव में जब हम मुख्यमंत्री के सामने अपनी अधिकार की मांग कर रहे थे तो नीतीश जी एक चुनावी सभा के दौरान हमें धमकी देते हुए कहा था कि विरोध करना बंद करो, वरना एक साइन करेंगे और रोड पर आ जाओगे। और अंततः उन्होंने ऐसा किया भी।

एक अन्य अभ्यार्थी ने बताया कि उन्हें मुख्य रूप से क्रॉप कटिंग का डाटा जुटाना, जनगणना करना, वोटर लिस्ट तैयार करना, आर्थिक गणना करना आदि कामों के लिए बहाल किया गया था लेकिन अब उनकी नौकरी छीन कर यही काम सरकार स्कूल शिक्षकों से करवा रही है। जिससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित होती है।

महासम्मेलन में शामिल अनियोजित कार्यपालक सहायकों के मांगों को जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने सीतामढ़ी के 29 वर्षीय अभय कुमार से बात की। उन्होंने हमें बताया कि सरकार के द्वारा वर्ष 2018-19 में बिहार प्रशानिक सुधार मिशन के निर्देश से सभी जिला पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक सहायकों का परीक्षा लिया गया। परीक्षा में लिखित परीक्षा और हिंदी-इंग्लिश कंप्यूटर टाइपिंग का परीक्षा लिया गया। उसके बाद पैनल बनाया गया। उस पैनल की वैद्यता तीन साल की थी। उस पैनल के आधे लोगों का नियोजन किया गया। आधे का अब तक नहीं किया गया। अब सरकार कह रही है कि बेल्ट्रॉन (बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कोऑपरेशन लिमिटेड) के द्वारा बहाली नए सिरे से की जाएगी।

आगे उन्होंने बताया कि हमें अब बेल्ट्रॉन से दुबारा परीक्षा देने को कहा जा रहा है, जबकि हम सारे मापदंड को पूरा करते हैं। हमारा पैनल भी तैयार है। सिर्फ नियोजन करना बाकी है। हम चाहते हैं कि पूर्व की तरह शेष हमलोगों को भी नियोजित किया जाए। सीट की भी कमी नही है। पंचायतों में आरटीपीएस केंद्र खोले जाने को लेकर 8067 पद कार्यपालकों के लिए रिक्त हैं। पहले वाले पैनल से लगभग दो हजार अभ्यार्थी शेष हैं। इसीलिए हम चाहते हैं कि हमारा नियोजन हो। हम मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी अपनी मांग रख चुके हैं। मुख्यमंत्री महोदय ने मौखिक आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई।

मुजफ्फरपुर के एक अन्य अभ्यार्थी रामनाथ राम ने बताया कि मुजफ्फरपुर जिले में 1350 कार्यपालक सहायकों में सिर्फ 700 सहायकों की पोस्टिंग की गई हैं। बाकी 650 रिक्त पद हैं। इसके बावजूद भी हमारा नियोजन नहीं किया जा रहा है।

वहीं अगर बिहार में अलग-अलग विभागों में खाली पड़े पदों की बात की जाए तो वर्ष 2016 से राज्य के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और 2019 से हाई कोर्ट में कोई बहाली नहीं हुई है। बिहार विधानसभा में भाकपा-माले विधायक मनोज मंज़िल द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के अनुसार, स्टेनोग्राफर, कंप्यूटर ऑपरेटर-कम टाइपिस्ट, क्लर्क के लगभग 4000 से अधिक स्वीकृत पद खाली पडे हैं। इसी तरह राज्य के ITI कॉलेजों में तकनीकी अनुदेशकों (ITI Instructor) के 96% पद खाली पड़े हैं। राज्य में लाइब्रेरियन दस हज़ार से अधिक पद खाली है। इस पोस्ट पर 2008 के बाद कोई बहाली नहीं हुई।

जगन्नाथ कुमार यादव पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Bihar
PATNA
Rozgar Adhikar Mahasammelan
Nitish Kumar
Government Jobs

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन

बिहार आरआरबी-एनटीपीसी छात्र आंदोलनः महागठबंधन माले नेता ने कहा- ये सरकार लोकतंत्र विरोधी है


बाकी खबरें

  • nirmla sitaraman
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में अगले 25 साल के लिये अर्थव्यवस्था को गति देने का आधार: सीतारमण
    01 Feb 2022
    आमजन ख़ासकर युवा को नए आम बजट में न अपना वर्तमान दिख रहा है, न भविष्य, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि केंद्रीय बजट ने समग्र और भविष्य की प्राथमिकताओं के साथ अगले 25 साल के लिये…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बजट में मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात और युवाओं की जीविका पर प्रहार: विपक्ष 
    01 Feb 2022
    “सरकार ने देश के वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत नहीं देकर उनके साथ ‘विश्वासघात’ और युवाओं की जीविका पर ‘आपराधिक प्रहार’ किया है।”
  • kanpur
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: ' बर्बाद होता कानपुर का चमड़ा उद्योग'
    01 Feb 2022
    अपने चमड़े के कारोबार से कानपुर का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन आज चमड़ा फैक्ट्री अपने पतन की ओर है। चमड़ा व्यापारियों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण सरकार द्वारा गंगा नदी के प्रदूषण का हवाला…
  • varansi weavers
    दित्सा भट्टाचार्य
    यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 
    01 Feb 2022
    इस नए अध्ययन के अनुसार- केंद्र सरकार की बहुप्रचारित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी योजनाओं तक भी बुनकरों की पहुंच नहीं है।
  • up elections
    असद शेख़
    यूपी चुनाव: क्या हैं जनता के असली मुद्दे, जिन पर राजनीतिक पार्टियां हैं चुप! 
    01 Feb 2022
    सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस की जीत और हार के बीच की इस बहस में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब नहीं मिल पा रहा है। सवाल ये हैं कि जनता के मुद्दा क्या है? जनता की समस्या क्या है? पश्चिमी यूपी, अवध,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License