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किसान आंदोलन के समर्थन में खड़ा हुआ पटना का नागरिक समाज
वामदलों के अतिरिक्त राजद, कांग्रेस भी इकट्ठा होकर तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी  मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।
अनीश अंकुर
29 Jan 2021
किसान आंदोलन

देश में चल रहे किसान प्रदर्शन  के समर्थन में बिहार के किसान संगठन   तो निरन्तर  आंदोलनरत हैं ही।  पटना ये नागरिक समाज में भी किसान आंदोलन को लेकर सक्रियता काफी बढ़ी है। विभिन्न नागरिक समूहों द्वारा पर्चे निकाले जा रहे हैं, पुस्तिका निकाली जा रही है तथा एकजुटता सभाओं का आयोजन किया जा रहा है।

अगले 30 जनवरी को  आयोजित मानव श्रृंखला को सफल बनाने के लिए किसान संगठनों,  नागरिक फोरम  के साथ-साथ राजनीतिक दल भी एक साथ आ रहे हैं। वामदलों के अतिरिक्त राजद, कांग्रेस भी इकट्ठा होकर तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी  मानव श्रृंखला का  आयोजन किया जाएगा। 

'जन अभियान' ने किया एकजुटता सभा का आयोजन

19 जनवरी  को जनतांत्रिक एवं क्रांतिकारी संगठनों के साझा मंच 'जन अभियान', बिहार के तत्वावधान एकजुटता सभा का आयोजन किया गया। एकजुटता सभा को जन अभियान, बिहार के घटक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावे अन्य जनवादी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सम्बोधित किया। सभा में तमाम वक्ताओं ने  लगभग 55 दिनों से दिल्ली के सरहद पर लाखों की तादाद में जुटे किसानों के न्यायपूर्ण आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। किसान आन्दोलन की प्रमुख मांगों-तीनों कारपोरेट पक्षीय कानूनों को रद्द करने, बिजली ( संशोधन) कानून, 2020 को वापस करने, पराली जलाने पर जुर्माना लगाने वाले कानून की वापसी सम्बन्धी किसान आन्दोलन की मांगों का लगभग सभी वक्ताओं ने समर्थन किया।

 एकजुटता सभा को सम्बोधित करने वाले प्रमुख लोगों में एमसीपीआई (यू ) के विजय कुमार चौधरी, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के मणिलाल, जनवादी लोक मंच के पुकार, जनप्रतिरोध संघर्ष मंच के रणजीत कुमार, सर्वहारा जन मोर्चा के अजय कुमार सिन्हा, सीपीआई (एमएल)-न्यू डेमोक्रेसी के रूदल राम, कम्युनिस्ट सेन्टर आफ इंडिया के सतीश कुमार तथा सीपीआई (एमएल) के अरविन्द कुमार सिन्हा शामिल थे।

इसके अलाववा सभा में वक्तव्य देने वालों में  वरिष्ठ राजनीतिकर्मी चक्रवर्ती अशोक प्रियदर्शी, शोषित समाज दल के अखिलेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन,  राजनीतिकर्मी सुमंत शरण, कम्युनिस्ट सेंटर फॉर साइंटिफिक सोशलिज्म के नरेन्द्र कुमार, भाकपा (माले)- लिबरेशन के नेता कृष्ण देव यादव आदि उल्लेखनीय रहे हैं।

एकजुटता सभा का संचालन जन अभियान, बिहार के संयोजक साथी संजय श्याम ने किया।               

'सिटीजन्स फोरम, पटना, ने संघर्षरत किसानों के पक्ष में बुलाई एकजुटता सभा

"पिछले वर्ष जब कोविड-19 महामारी का भय दिखाकर पूरे देश को घरों में कैद कर दिया गया था और संसद के सत्रों को निलंबित कर दिया गया था, उसी समय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में असंवैधानिक हस्तक्षेप करते हुए तीन कृषि कानून लाए गए, जिसे भारत के इतिहास में तीन काले कृषि कानून के नाम से जाना जाएगा। दशकों की करुण चुप्पी और आत्महत्याओं के लंबे दौर के बाद सदा शांत रहने वाले किसान आज तिलमिला उठे हैं। पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठी किसानों के विद्रोह की आंच आज मुल्क के तमाम हिस्सों में फैल चुकी है। यह विद्रोह देश को भूख और कुपोषण के नरक में धकेले जाने के विरुद्ध है। किसानों की यह लड़ाई लोकतंत्र को जनता का और जनता के लिए बनाने की लड़ाई है। "ये बातें” सिटीजन्स फोरम, पटना, द्वारा किसानों के समर्थन में आयोजित एकजुटता सभा में कही गई। 

नागरिक सरोकारों और जनतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ' सिटीजन्स फोरम, पटना, द्वारा किसानों के समर्थन में एकजुटता सभा का आयोजन बुद्ध स्मृति पार्क, फ्रेजर रोड पर किया गया। लगभग 4 घण्टे तक चली सभा में शहर के कई राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी एवं साहित्यकार शामिल हुए।

राजनीतिक कार्यकर्ता मणिकांत पाठक ने कहा "यह कानून खेती-किसानी को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा और किसानों को मजदूर बना देगा। यह जमीन छीनने वाला वाला कानून है। "बुद्विजीवी एवं राजनीति कर्मी अरविन्द सिन्हा ने कहा कि किसानों की यह लड़ाई अभूतपूर्व है। जिस एकजुटता से देश भर के लोग किसानों के साथ खड़े हैं , यह उन्हें जरूर जीत दिलाएगा। सरकार कृषि क्षेत्र को पूंजीपतियों को देना चाहती है। मजदूर-किसान के जीने मरने से इस सरकार को कोई मतलब नहीं। जमाखोरी, कालाबाजारी के लिए कानून लाया गया है। छात्र- नौजवान में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार कुछ भी करने के लिए तैयार नहीं है।"

'फिलहाल' पत्रिका की संपादक प्रीति सिन्हा ने एकजुटता सभा को संबोधित करते हुए कहा "सरकार जबरदस्ती इस कानून को थोपना चाहती है। यह कृषि कानून सिर्फ किसानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के हितों के भी खिलाफ है।" 

लोकल बॉडी के कर्मचारियों के लिए काम करने वाले जितेंद्र कुमार ने बताया  "यह कानून असंवैधानिक है। दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसान भगत सिंह के वंशज हैं , वो हारने वाले नहीं हैं।"

फोरम के वरिष्ठ साथी नंदकिशोर सिंह ने अपने संबोधन में इस कानून को जनविरोधी बताते हुए कहा "लगभग दो महीने से ठंड में बैठे किसान सरकार के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। आज पूरा देश इस काले कानून के खिलाफ किसानों के साथ है।" 

इंजीनियर सुनील सिंह के अनुसार "किसानों को एन.आई.ए. द्वारा फंसाया जा रहा है। विदेशी फंडिंग का नाम लेकर खालिस्तानी होने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। "

छात्र नेता आकांक्षा प्रिया ने कहा  "आज जरूरत है कि इस देश का आम नागरिक एकजुट होकर किसानों का समर्थन करे।  किसानों की यह लड़ाई सिर्फ खेती-किसानी बचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बेहतर समाज के निर्माण का भी रास्ता खोलेगा। जिस पूंजीवाद की गिरफ्त में देश डाल दिया गया है, वहाँ किसानों-मजदूरों और नागरिकों का हित सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए जरूरी है कि छात्र-नौजवान खुलकर इस लड़ाई में हिस्सा लें।"

सिंघु बॉर्डर से लौटकर आये  सुमन ने वहां के अनुभवों को साझा करते हुए बताया "किसानों की काफी लंबी कतारें हैं और उनका जज्बा और जोश देखने लायक है। भारत को समझने के लिए हम सब को सिंघु बॉर्डर की ओर जाना चाहिए ।"

कवि व संस्कृतिकर्मी आदित्य कमल और पर्यावरणविद मेहता नागेंद्र सिंह  ने इस अवसर पर कविताओं का पाठ किया।

सभा का संचालन  मोनाज झा ने  किया। सभा में काफी संख्या में नगरवासी मौजूद थे। सभा को फिल्मकार राकेश राज , पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. सतीश , शोषित समाज दल के अखिलेश, सी.आई.टी.यू के गणेश शंकर सिंह, किसान सभा के रामजीवन प्र. सिंह, नगर निगम कर्मचारियों के नेता मंगल पासवान, मजदूर नेता रामलखन, सीपीआई के नेता रामलीला सिंह, कर्मचारी नेता विश्वनाथ सिंह, लेखक व राजनीतिक कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार, जन प्रतिरोध संघर्ष मंच के संजय श्याम, शिक्षाविद  कुमार सर्वेश, महिला सांस्कृतिक संघ की साधना मिश्रा, जनवादी लोक मंच के पुकार,  मंटू, आदि ने भी संबोधित किया और किसानों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की। 

सभा में शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे जिनमें रूपेश, अजय कुमार  सिन्हा , जयप्रकाश ललन, मनोज कु. चन्द्रवंशी गजेंद्रकांत शर्मा, बिट्टू भारद्वाज, कंचन, निशांत, अमरनाथ,  इंद्रजीत,  कुशवाहा नंदन, भगवान सिंह,  कमल किशोर, अमरेंद्र कुमार प्रमुख हैं।

ए. आई.एस. एफ  और ए.आई.वाई. एफ ने निकाला चंपारन से  दिल्ली यात्रा

ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ( AISF) की  बिहार इकाई की ओर आए तीनों कृषि कानूनों को लेकर चंपारन के भितिहरवा आश्रम से दिल्ली यात्रा के लिए चली।  चम्पारन में गाँधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुरू हुई यात्रा।

महात्मा  गांधी के नाम से प्रख्यात  भितिहरवा आश्रम से उस शुरू हुए इस जत्थे को सी.पी.आई के बखरी के विधायक सूर्यकान्त पासवान खुद भी इस जत्थे में शामिल हैं।  लखनऊ होते हुए छात्र नौजवानों का यह जत्था 26 जनवरी की ऐतिहासिक  लाल किला परेड व ट्रैक्टर मार्च में शामिल हुआ। इस जत्थे में शामिल प्रमुख लोगों में हैं विश्वजीत कुमार, राकेश कुमार,  सुशील कुमार, वैभव शर्मा, रौशन कुमार सिन्हा, ईशु वत्स  आदि।

ए. आई.पी.एफ ने अभियान चलाया

ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम की ओर से भी पटना के अलग-अलग इलाकों में किसान आंदोलन के पक्ष में अभियान चलाया गया। 'किसानों के साथ हम पटना के लोग' नाम से चले इस कार्यक्रम को  दानापुर स्टेशन, फुलवारी, मीठापुर, दीघा घाट, कारगिल चौक, कंकड़बाग,  चौक शिकारपुरन आदि स्थानों पर आयोजित किया गया। इन आयोजनों में शहर के अलग-अलग हलकों के लोगों ने भागीदारी निभाई।

19  से 26 जनवरी तक चले इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ता ग़ालिब खान, अनिल अंशुमन, समता राय, किसान नेता उमेश सिंह, राजेश कमल, रणजीव, डी. एम दिवाकर, आसमा खान, इमरान खान,  विद्यार्थी विकास, आसफा जबीं  कृष्ण समृद्धि, प्रशांत विप्लवी,  शिवसागर शर्मा,  इश्तेयाक अहमद, डेज़ी नारायण , दीपू, सोनू   एक अलावा भाकपा-माले-लिबरेशन के फुलवारी विधायक गोपाल रविदास भी शामिल हुए। 

इन मौकों पर जनगीत, कविता पाठ, जोगीरा आदि का भी गायन किया गया।  पटना के नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने कृषि कानूनों के जनविरोधी पहलुओं से अवगत कराते हुए इसके खिलाफ़ आवाज उठाने का आह्वान किया।  

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