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बंगाल, असम,मेघालय में शांति, बिहार में बंद के कारण रेल-सड़क सेवाएं प्रभावित
बिहार में शनिवार को आहूत बंद के मद्देनजर कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई और सड़कें जाम की गई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Dec 2019
CAA protest
Image courtesy: Facebook

कोलकाता/गुवाहाटी/पटना/शिलॉन्ग: संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार में शनिवार को आहूत बंद के मद्देनजर कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई और सड़कें जाम की गई, जबकि पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में स्थिति शांतिपूर्ण रही।

बिहार में राजद के हजारों समर्थकों ने संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के तहत राज्यव्यापी बंद लागू करने की कोशिश की। इस दौरान राजधानी पटना में पार्टी के सैकड़ों समर्थक लाठियां और पार्टी के झंडे लेकर रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों में पहुंच गए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटा दिया। प्रदर्शन में बच्चे भी शामिल रहे।

नवादा में बंद समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर प्रदर्शन किया। उन्होंने वहां सड़क पर टायर जलाए जिससे वाहनों का आवागमन बाधित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फरपुर के जीरो माइल चौक पर भी प्रदर्शन किया।

इस बीच, असम और पश्चिम बंगाल में स्थिति शांतिपूर्ण रही और मेघालय में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं। मेघालय में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पिछले आठ दिन से ठप पड़ी इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है।

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मोबाइल इंटरनेट और व्यापक स्तर पर संदेश भेजने की सेवाओं पर 12 दिसम्बर को रोक लगाई गई थी, जिसे कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बेहतर होने के बाद शुक्रवार शाम सात बजे बहाल कर दिया गया।

मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने गृह विभाग के अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया और इसके बाद राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और एसएमएस सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए।

वहीं असम में पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था सुधरने के मद्देनजर डिब्रूगढ़ में शनिवार को कर्फ्यू में सुबह छह बजे से 16 घंटे की ढील दी गई। कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया था।

राज्य में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने दोपहर में गुवाहाटी में धरना देने का कार्यक्रम बनाया है। राज्य में नौ दिनों की रोक के बाद शुक्रवार को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल की गईं जबकि ब्रॉडबैंड सेवाएं 18 दिसंबर से फिर से शुरू कर दी गईं थी।

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध को लेकर पश्चिम बंगाल में किसी तरह की हिंसा की कोई खबर नहीं है और स्थिति अभी तक शांतिपूर्ण बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए राज्य में कई हिस्सों में सुरक्षा कड़ी कर दी है।

पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई संशोधित नागरिकता कानून 2019 के समर्थन में राज्य के कई हिस्सों में आज रैलियां और मार्च निकालेगी। वहीं माकपा-एसएफआई की छात्र शाखा कानून के खिलाफ भाजपा कार्यालय तक मार्च निकालेगी। राज्य में जारी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कथित संलिप्तता के मामले में अभी तक 600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

तमिलनाडु में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन जारी

तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन जारी रहने के बीच यहां रेलवे स्टेशन पर माकपा कार्यकर्ताओं ने ट्रेनें रोकने की कोशिश की जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। डेमोक्रेटिट यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) समेत माकपा से जुड़े संगठनों ने यहां एमजीआर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें रोकने की कोशिश की।

जब प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों को रोकने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश की, तब उनके और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो गया। हालांकि किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के कार्यकर्ताओं ने अपने वरिष्ठ नेता नेल्लाकन्नू की अगुवाई में ‘राजभवन का घेराव करो’ अभियान के तहत राजभवन की ओर कूच किया। इस अभियान में कांग्रेस तथा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन समेत भाकपा के विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया।

नेल्लाकन्नू ने लोगों और राजनीतिक दलों के विचारों को कथित रूप से सुने बगैर संसद से संशोधित नागरिकता कानून पारित कराने को लेकर केंद्र पर प्रहार किया। उन्होंने इस कानून को ‘निरंकुश’ करार दिया और कहा कि यह संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

तालुक ऑफिस रोड-लिटल माउंट प्वाइंट के समीप प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने राजभवन की ओर जाने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी वापस लेने की मांग की। कुंभकोणम और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में इस्लामिक संगठनों समेत विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए।

कांग्रेस ने केरल में विरोध प्रदर्शन तेज किए

‘भारत के संविधान की रक्षा’ करने का आह्वान करते हुए केरल में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ अपने अभियान को मजबूत करने के तौर पर शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। रमेश चेन्निथला, के सी वेणुगोपाल, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, शशि थरूर, बेन्नी बेहनान और एम एम हसन समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस अभियान में भाग लिया।

कई जिलों में पार्टी के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं समेत कई नेताओं ने गिरफ्तारियां दी। कोच्चि, वायनाड, कोझीकोड और तिरुवनंतपुरम समेत कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने और केंद्रीय सरकारी संस्थानों में घुसने की कोशिश की जिससे पुलिसकर्मियों के साथ मामूली झड़पें हुई।

उत्तर केरल के मलाप्पुरम जिले में प्रदर्शन की शुरुआत करते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता चेन्निथला ने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा और उसकी सरकार देश के लोगों को हिंदुओं और मुस्लिमों के तौर पर विभाजित करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया, ‘यह निरंकुशता और फासीवाद के खिलाफ लड़ाई है। सरकार धार्मिक आधार पर देश के लोगों को बांटने वाले कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों को चुप कराने के लिए कठोर बल का प्रयोग कर रही है।’

प्रदेश कांग्रेस प्रमुख मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कासरगोड जिले में प्रदर्शन की अगुवाई की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में विश्वविद्यालयों के छात्र और शिक्षाविद सीएए के खिलाफ आंदोलन की राह पर हैं।

केपीसीसी के उपाध्यक्ष और विधायक वी डी सतीशन ने कोच्चि में प्रदर्शन का आगाज किया। थरूर ने कोझीकोड में प्रदर्शन की अगुवाई की जबकि पूर्व पार्टी प्रदेश प्रमुख एम एम हासन ने तिरुवनंतपुरम में आंदोलन का आगाज किया। एआईसीसी महासचिव वेणुगोपाल ने शुक्रवार को अलाप्पुझा में सीएए विरोधी प्रदर्शन की अगुवाई की।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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