NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नदी घाटियों में नियोजन : विकास या विनाश?
देश के विभिन्न नदी घाटी परियोजना क्षेत्रों में चल रहे आंदोलनों की अगुवाई कर रहे जन संगठनों एवं समर्थन दे रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नदी घाटी विचार मंच के बैनर तले भोपाल में राष्ट्रीय स्तर पर विचार मंथन किया। इन्होंने नदी घाटी को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया।
राजु कुमार
06 Mar 2020
Nadi Ghati Vichar Manch at Bhopa

जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, जल संकट और वन संपदा में कमी जैसे मुद्दों से जूझ रही दुनिया अभी भी नदी घाटी परियोजनाओं को लेकर पुनर्विचार नहीं कर रही है। खासतौर से, भारत में कई परियोजनाओं का नुकसान घाटी में रहने वाले समुदाय झेल रहे हैं और बताए गए लाभों की तुलना में हानि साफ दिख रही है, इसके बावजूद सरकारें लोगों को विस्थापित कर रही हैं और घाटियों में विकास के नाम पर नियोजना से विनाश को आमंत्रित कर रही हैं।

देश भर के नदी घाटियों के नियोजन पर एक ओर कई सारे सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही “सही जल नियोजन" का का भी सवाल है, जिसके बिना जल आपूर्ति भी असंभव है। नदी घाटी के प्राकृतिक संसाधन, पीढ़ियों से बसे हुए लोग और सही तकनीक जल नियोजन में विकास की अवधारणा के घटक हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में नर्मदा, गंगा, कोसी भागीरथी, गोदावरी, पेरियार सहित देश भर के 25 नदी घाटियों के आंदोलनों एवं नदियों के मुद्दों पर सक्रिय, संघर्ष और निर्माण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नदी घाटी विचार मंच के बैनर तले भोपाल में 1 और 2 मार्च को राष्ट्रीय स्तर पर विचार मंथन किया।

इस आयोजन में एक राष्ट्रीय प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसमें कहा गया कि जल जंगल जमीन संरक्षक उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए और नदी घाटी के पानी पर पलते उद्योगों को मनमानी करने से रोका जाए! विस्थापितों के संघर्ष और अध्ययनों के आधार पर ’समग्र नदी घाटी विकास’ के तहत सही विकल्प जल रक्षा और जल उपयोग की प्राथमिकता के सही निष्कर्ष और तंत्र को ही अपनाना होगा। नर्मदा घाटी की प्रस्तावित चुटका परियोजना की तरह जनसुनवाई में ग्राम सभा के विरुद्ध होते हुए भी मंजूरी देना गलत और नर्मदा के लिए खतरा है।

Nadi Ghati Vichar Manch at Bhopal (5).jpeg

बड़े बांध, जल परिवहन, अणु ऊर्जा, पर्यटन आदि हर परियोजना की बिना संपूर्ण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, पर्यावरणीय परिणामों का आकलन करते हुए; विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन तथा संविधान के 243वें अनुच्छेद, पेसा कानून जैसे अन्य जनवादी पर्यावरणीय कानूनों का आधार लेते हुए, मंजूर या नामंजूर किया जाए।

विकल्प सुनिश्चित किया जाए। इन विकल्पों में मिनी और माइक्रो जल ग्रहण क्षेत्र को प्रथम इकाई मानकर काम करना होगा। नदी घाटी का जल ग्रहण क्षेत्र अंतिम इकाई होनी होना चाहिए। अंतर नदी घाटी जल जोड़ योजना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नामंजूर हो चुकी तकनीक है। विकल्पों की सोच में नदी का केवल पानी ही नहीं बल्कि जल संचय का आधार रेत एवं उसके तट पर जंगलों की सुरक्षा भी जरूरी है। पर्यटन, जल परिवहन पर करोड़ों रुपए खर्च किये जा रही हैं। लेकिन उनके बारे में भी काफी प्रश्न उपस्थित होते हैं।

हिमालय के ऊपरी क्षेत्र में बड़े निर्माण जैसे चार धाम यात्रा मार्ग से जंगल का विनाश, नर्मदा घाटी में सरदार पटेल के स्मारक के बहाने पर्यटन को आगे बढ़ाकर 72 आदिवासी गांवों को उजाड़ना हो या जल परिवहन रेलवे से सस्ता होने का झूठा दावा हो, इन सभी पर पुनर्विचार जरूरी है, जिसमें जवाबदेहियां भी जरूरी हैं।

इसके साथ ही आगामी रणनीति के रूप में नदी घाटी विचार मंच ने यह तय किया है कि देश में जगह-जगह जल योजना में 'जल ऑडिट’ की संकल्पना पर अमल करवाया जाएगा और यदि इसे शासन नहीं करे तो नागरिक समाज के द्वारा शुरू किया जाएगा। जल नीति एवं बदलते कानूनों के परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण पर जोर दिया जाएगा। नर्मदा के डिंडोरी से नरसिंहपुर तक के क्षेत्र में एक सशक्त संगठन खड़ा किया जाएगा। इस मुद्दे पर नदी घाटियों की राष्ट्रीय यात्रा कुछ समय बाद आयोजित की जाएगी। घाटी के युवाओं एवं छात्रों को जोड़ा जाएगा।

Nadi Ghati Vichar Manch at Bhopal (4).jpeg

श्रमजीवी वर्ग और बुद्धिजीवियों को साथ लिया जाएगा। महिलाओं को हर संघर्ष और निर्माण की अगुवाई में रखा जाएगा। शहरी नदियों की स्थिति और सुलझाव का भी आकलन किया जाएगा और उन्हें नदी घाटी विचार मंच में शामिल किया जाएगा। छोटी नदियों, उप नदियों और नदी घाटियों के मछुआरों का सशक्त संगठन बनाकर हर जलाशय पर हक जताया जाएगा। निरंतर न्यायपूर्ण एवं समतावादी विकास की अवधारणा पर नदी को जल, जंगल, जमीन, जानवर, खनिज, जल संपदा एवं समुदाय को जोड़कर एक पुस्तिका तैयार कर उसके माध्यम से जागरूकता लाने का प्रयास किया जाएगा।

नदी घाटी विचार मंच की बैठक में अर्थशास्त्री डॉ. भरत झुनझुनवाला ने बताया, ‘‘बांधों की लाभ-हानि सही नहीं आंकी जाती है। अमेरिका ने ‘सालमन’ मछली के लिए एक बांध हटाया और कुल 1000 बांध हटाए। तो हम क्यों नहीं सशक्त रूप से नदियों को अविरल बहने देने की बात कहे? मैं भी अलकनंदा के किनारे रहते हुए गंगा घाटी की स्थिति देखकर सीख चुका हूं।’’

डॉ. सौम्या दत्ता ने विकास, जल नियोजन और जलवायु परिवर्तन को जोड़ते हुए कहा कि भारत, बांग्ला देश, नेपाल, पाकिस्तान और भूटान तक की अंतरराज्यीय परियोजनाओं की हकीकत बहुत गहरी है। दक्षिण क्षेत्र के सारे देश हिमालय, तीन सागर, मानसून और संस्कृति से जुडे़ हुए हैं। आज की स्थिति को गंभीर समझकर हमें नदी घाटी को समझने के लिए बडे स्तर पर लोगों के जीवन के साथ इसे जोड़ना पडेगा।

मध्यप्रदेश में जनतांत्रिक विकास नियोजन पर सक्रिय रहे शरद चंद्र बेहार ने बताया कि बांधां की लड़ाई को अलग स्तर पर ले जाने की जरुरत है। भूतपूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा कि हम राजनीति में फंसकर कई बार सच्चाई का सामना नहीं भी कर सकते हैं, फिर भी वैकल्पिक विकासवादियों के साथ संवाद से हम हस्तक्षेप के काबिल होते हैं।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि निरंतर और न्यायपूर्ण विकास हासिल करने के लिए हमें एकजुट होकर लगातार संघर्ष एवं आंदोलन करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जल आपूर्ति का क़ानून ला रही है, लेकिन इसके साथ ही जल की सुरक्षा, प्रदुषण एवं विनाश से नदी को सुरक्षित रखने और भूजल के दोहन पर अंकुश जैसे मुद्दों पर भी सोचना होगा।

Nadi Ghati Vichar Manch at Bhopal (3)_0.jpeg

बरगी विस्थापितों के लिए कार्यरत राजकुमार सिन्हा ने कहा कि बरगी बांध से लेकर नर्मदा घाटी के विविध बांधों पर उठे सवाल, बिना पुनर्वास हो रहा विस्थापन और अवैध रेत खनन जैसे मुद्दे बहुत ही गंभीर हैं।

Bhopal
social workers
Mass Organizations
River
Valleys
climate change
Environment
development
Medha patkar
ganga
Narmada River
kosi river

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

नर्मदा के पानी से कैंसर का ख़तरा, लिवर और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव: रिपोर्ट

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

मध्य प्रदेश : खरगोन हिंसा के एक महीने बाद नीमच में दो समुदायों के बीच टकराव

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान


बाकी खबरें

  • Lakhimpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    वाम दलों ने की लखीमपुर घटना की कड़ी निंदा, सीपीआई-एम के राज्य सम्मेलन में शहीद किसानों को श्रद्धांजलि
    04 Oct 2021
    सीपीआई-एम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि हमारे वीर और दृढ़निश्चयी किसानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
  • afghanistan taliban
    विजय प्रसाद
    बेहिसाब दौलत के बीच जीते अफ़ग़ानिस्तान के ग़रीब लोग
    04 Oct 2021
    ख़ासकर महिलाओं के ख़िलाफ़ तालिबान की सख़्त सामाजिक नीति से कई सहायता समूह इस देश  में वापस आने से हिचकेगी।
  • Launch of NMP
    सुबोध वर्मा
    भारत के इतिहास की सबसे बड़ी 'सेल' की तैयारी
    04 Oct 2021
    मोदी सरकार की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन की नीति एक झटके में भारत के प्रमुख बुनियादी ढांचे को निजी संस्थाओं को सौंप देगी।
  • Lakhimpur Kheri Update
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर खीरी अपडेट: किसानों के साथ विपक्षी दलों ने खोला मोर्चा, हड़बड़ी में सरकार 
    04 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी की ओर जाने वाले विपक्षी नेताओं को ज़िले में पहुंचने से पहले ही हिरासत में लिया जा रहा है, भाजपा सरकार ने न केवल ज़िले का इंटरनेट बंद कर दिया है बल्कि पूरे ज़िले में धारा 144 भी लगा दी है।
  • no hate
    राम पुनियानी
    असम: नफ़रत की इंतिहा
    04 Oct 2021
    साम्प्रदायिक सोच वाली भाजपा, बांग्लाभाषी प्रवासी मुसलमानों को 'विदेशी' मानती है जबकि तथ्य यह है कि असम में बंगाली मुसलमानों के बसने का बहुत पुराना इतिहास है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License