NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
प्रकाश पर्व : भारत-पाक के टूटे संबंधों को जोड़ती गुरुनानक देव जी की ज़िंदगी
अगर गुरुनानक देव जी के पूरे जीवन को देखें तो इसमें कुछ जगहों का खास महत्व नज़र आता है जो आज भारत-पाकिस्तान की सरहदों में बंट चुकी हैं।
सोनिया यादव
12 Nov 2019
kartarpur

राम और रहीम दोनों के ख़ास सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी की 550 वीं जयंती मंगलवार, 12 नवंबर 2019 को दुनियाभर में मनाई जा रही है। प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाले गुरुनानक देव जी के इस जयंती पर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच भी एक नई पहल हुई है। एक लंबे अरसे के बाद करतारपुर गलियारा और ऐतिहासिक दरबार साहिब गुरुद्वारा (करतारपुर साहिब गुरुद्वारा) भारतीय सिख समुदाय के लोगों के लिए खोल दिया गया है।

लंबे समय से भारत-पाकिस्तान समेत दुनिया भर के सिख संगठन पाकिस्तान सरकार से करतारपुर साहिब के पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे थे। बीते शनिवार 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। इसे दोनों तरफ के पंजाबी भारत और पाकिस्तान के बीच नए दौर के रिश्तों की शुरुआत मानते हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस कदम से दोनों देशों के संबंध सुधरेंगे और आपसी कड़वाहट दूर होगी।

इस संबंध में अगर गुरुनानक देव जी के पूरे जीवन को देखें तो इसमें कुछ जगहों का खास महत्व नज़र आता है जो आज भारत-पाकिस्तान की सरहदों में बंट चुकी हैं। गुरुनानक देव जी का जन्मस्थान ननकानासहिब अब पाकिस्तान में है, तो वहीं उनकी कर्मस्थली सुल्तानपुर लोधी भारत के पंजाब प्रांत में स्थित है। बाबा नानक ने अपना अंतिम समय करतारपुर में बिताया और वहीं अपने जीवन अंतिम सांस ली। यूं तो करतार साहिब अब पाकिस्तान में है मगर ये स्थान भारत के गुरदासपुर से केवल साढ़े चार घंटे की दूरी पर स्थित है।

प्रकाश पर्व के मौके पर हम आपको भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच एक पुल का काम करती गुरुनानक देव जी की कहानी उनके अनुयायियों के माध्यम से अवगत करवा रहे हैं...

कई साल ननकाना सहिब में गुजार चुके डेरा बाबा नानक के खुशहाल सिंह बताते हैं, 'ननकाना साहिब में गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। यह जगह आज पाकिस्तान में है और वहां हर साल प्रकाश पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन इस बार इसकी रंगत अलग ही है। करतारपुर कॉरिडोर के खुलने से निश्चित ही संगत की संख्या में इज़ाफा होगा'।

खुशहाल सिंह के मुताबिक लाहौर से लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित इस जगह पर कई गुरुद्वारे स्थित है। गुरुद्वारे गुरुनानक देव जी के बचपन की खास यादों और संदेशों को याद करते हुए बनाए गए हैं।

गुरुद्वारा श्री बेर साहिब के हरविंदर सिंह का कहना है, 'पंजाब के सुल्तानपुर लोधी में बाबा गुरुनानक देव जी ने अपने जीवन का एक लंबा समय बिताया था। यहीं उन्होंने 'ना हिंदू-ना मुस्लिम' का संदेश दिया था। बेबे नानकी उनकी बहन थी, जो ब्याह कर तिलवंडी से सुल्तानपुर आईं थी। बाबा नानक की शादी के बाद वे भी काम की तलाश में यहीं आ गए थे। गुरुनानक देव ने यहां नवाब दौलत लोधी के यहां काम भी किया था और उनके एक बेटे का जन्म भी यहीं हुआ था। बाबा जी की यादों से जुड़ी यहां कई ख़ास जगहें हैं'।

हरविंदर सिंह का आगे कहना है कि यहां आज भी बेबे नानकी के घर की पहली मंजिल पर गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाशित है। यहां बाबा नानक से जुड़ी कई यादें हैं। कुआं, संग्रहालय और कई गुरुद्वारे हैं जो उनकी अलग-अलग महत्व है। जैसे सुल्तानपुर लोधी के जिस गुरुद्वारे में गुरु नानक देव जी को नियुक्त किया था उस स्थान पर आज गुरुद्वारा हट साहिब मौजूद है। इसी तरह जिस बेर के पेड़ के निचे बाबा नानक जी ध्यान लगाया करते थे, वहां गुरुद्वारा बेर साहिब स्थित है।

'गुरुनानक देव जी ने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल करतारपुर में गुज़ारे थे। जो आज पाकिस्तान के हिस्से में है। यहां जिस जगह बाबा गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था। अंदर बाबा जी का समाधी स्थल भी है और खास बात ये है कि यहां सेवा करने वालों में सिख और मुसलमान दोनों शामिल होते हैं'। ये शब्द हैं अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के सेवक हरप्रीत सिंह के।

हरप्रीत ने आगे प्रकाश पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि गुरुनानक देव जी ने उत्तम और सहज जीवन जीने की सीख दी और अंधकार से प्रकाश का मार्ग प्रशस्त किया। इसलिए उनका जन्मदिन प्रकाश पर्व के नाम से मनाया जाता है। बाबा नानक देव जी का कहना था कि ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको।’ इसका मतलब है की मेहनत करो, कर्म करो, परम शक्ति का नाम जपो और मिल-बांट कर भोजन ग्रहण करो। बाबा के सभी अनुयायी इसका पालन करते हैं।

संगत की सदस्य अर्शदीप कौर कहती हैं कि महिलाओं के साथ शोषण के सख्त खिलाफ थे बाबा नानक देव जी। उनका कहना था कि ‘सो क्यों मंदा आखिये जित जमहि राजान’। जिसका मतलब है कि उसे दुख क्यों देते हो, जिसने राजा-महाराजाओं तक को जन्म दिया। बाबा नानक जी महिलाओं अधिकारों के पुरजोर समर्थक थे।

Kartarpur Corridor
india-pakistan
प्रकाश पर्व
Prakash Parv
Sikhism
Guru gurunanak dev
Nankana Sahib
Kartarpur Sahib

Related Stories

चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए...


बाकी खबरें

  • Ayodhya
    रवि शंकर दुबे
    अयोध्या : 10 हज़ार से ज़्यादा मंदिर, मगर एक भी ढंग का अस्पताल नहीं
    24 Jan 2022
    दरअसल अयोध्या को जिस तरह से दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है वो सच नहीं है। यहां लोगों के पास ख़ुश होने के लिए मंदिर के अलावा कोई दूसरा ज़रिया नहीं है। अस्पताल से लेकर स्कूल तक सबकी हालत ख़राब है।
  • BHU
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: ‘भूत-विद्या’ के बाद अब ‘हिंदू-स्टडीज़’ कोर्स, फिर सवालों के घेरे में आया बीएचयू
    24 Jan 2022
    किसी भी राष्ट्र को आगे ले जाने के लिए धर्म की नहीं, विज्ञान और संविधान की जरूरत पड़ती है। बेहतर होता बीएचयू में आधुनिक पद्धति के नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाते। हमारा पड़ोसी देश चीन बिजली की मुश्किलों से…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: एक वीरता पुरस्कार तो ग़रीब जनता का भी बनता है
    24 Jan 2022
    बेरोज़गारी, महंगाई और कोविड आदि की मार सहने के बाद भी भारत की आम जनता ज़िंदा है और मुस्कुरा कर पांच राज्यों में फिर मतदान की लाइन में लगने जा रही है, तो एक वीरता पुरस्कार तो उसका भी बनता है...बनता है…
  • genocide
    पार्थ एस घोष
    घर वापसी से नरसंहार तक भारत का सफ़र
    24 Jan 2022
    भारत में अब मुस्लिम विरोधी उन्माद चरम पर है। 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हुई है।
  • bulli bai
    डॉ. राजू पाण्डेय
    नफ़रत का डिजिटलीकरण
    24 Jan 2022
    सुल्ली डील्स, बुल्ली बाई, क्लबहाउस और अब ट्रैड्स के ज़रिये अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम लगातार सोशल मीडिया पर हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License