NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
भारत
राजनीति
प्रयागराज सम्मेलन: ये लोग देश के ख़िलाफ़ हैं और संविधान के ख़ात्मे के लिए काम कर रहे हैं
जिस तरह से ये तमाम लोग खुलेआम देश के संविधान के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और कहीं से भी कोई कार्ऱवाई इनके खिलाफ नहीं हो रही, उससे इस बात की आशंका बलवती होती है कि देश को मुसलमानों के कत्लेआम, गृह युद्ध की ओर ढकेलने की तैयारी हो रही है।
भाषा सिंह
31 Jan 2022

यह महज़ इत्तेफाक तो नहीं हो सकता कि 26 जनवरी को देश के हुक्मरानों के संग-संग देश की जनता ने गणतंत्र दिवस यानी देश के संविधान के लागू होने, इसके गणतंत्र बनने का जश्न मनाया और इसके ठीक तीन दिन बाद 29 जनवरी 2022 को उत्तर प्रदेश में गंगा-जमनी तहज़ीब के शहर इलाहाबाद, जिसे अब प्रयागराज के नाम से पुकारने का हुक्म है, वहां खुलकर देश के संविधान को बदलने और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का ऐलान होता है। यह वही शहर है, जहां महज़ कुछ दिन पहले ही छात्रों ने रोजगार के सवाल पर जबर्दस्त प्रदर्शन किया था, जिसका पुलिसिया लाठीचार्ज से दमन किया गया।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों को सांप्रदायिक कार्ड पर खेलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कोई भी कसर नहीं छोड़ रखी है। ऐसे में इलाहाबाद उर्फ प्रयागराज में धर्म के नाम पर मुसलमानों का जनसंहार करने, देश को अल्पसंख्यक मुक्त बनाने वाले आयोजन चुनावी धुरी को खतरनाक मोड़ दे रहे हैं।

image

संत सम्मेलन के नाम से हुई इस बैठक में जिस क्रूर भाषा का इस्तेमाल किया गया और जिस तरह इस आयोजन को पूरी बेहियाई के साथ अंजाम दिया गया है उससे साफ है कि इस तरह की नफरत फैलाने की छूट उन्हें अपने राजनीतिक आकाओं से मिली हुई है। जिस तरह से ये तमाम लोग खुलेआम देश के संविधान के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और कहीं से भी कोई कार्ऱवाई इनके खिलाफ नहीं हो रही, उससे इस बात की आशंका बलवती होती है कि देश को मुसलमानों के कत्लेआम, गृह युद्ध की ओर ढकेलने की तैयारी हो रही है। इसी ओर जेनोसाइड वॉच के संस्थापक ग्रेगरी स्टेनटन ने साफ-साफ इशारा भी किया। बेहद चिंतनीय है इन पूरी तरह से असंवैधानिक, देशद्रोही बैठकों-जमावड़ों पर विपक्षी दलों की चुप्पी। कहीं कोई हंगामा नहीं, बयान नहीं कि देश की धरती पर ही देश के नागरिकों के ख़िलाफ इतने बड़े पैमाने पर नफ़रत कैसे उगली जा सकती है।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक चिंतक कुरबान अली का कहना बिल्कुल ठीक है, “ये लोग देश के खिलाफ, देश के संविधान के ख़ात्मे के लिए काम कर रहे हैं। ये देश की पहचान को मिटाने पर आतुर हैं, लेकिन इसे बचाने वाली ताकतों को भी आवाज उठानी ज़रूरी है।” 

हरिद्वार में हुई इस तरह की पहली बैठक के खिलाफ कुरबान अली ने ही बाकी लोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि इस तरह की गैर-कानूनी, भारतीय नागरिकों को मारने का आह्वान करने वालों पर कार्यवाही होनी चाहिए और इस तरह के जमावड़ों पर रोक लगनी चाहिए। इतना कुछ करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में हरकत हुई और बहुत मुश्किल से हरिद्वार के जमावड़े से जुड़े दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। इलाहाबाद में हुए जमावड़े ने जिस तरह से अपने निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिया और कहा कि यह बैठक उन्हें आदेश देती है कि वह भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करें, उससे लगता है कि ये नासूर बन रहे हैं और इन्हें पैदा करने वाली राजनीतिक धारा को भस्मासुरों का सामना करना पड़ेगा।   

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Uttar pradesh
Prayagraj Conference
communal card
communal politics
Communal Hate
BJP
Yogi Adityanath

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया

पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने


बाकी खबरें

  • women
    राज कुमार
    गोवा में घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम बीडीओ भरोसे
    22 Sep 2021
    संरक्षण अधिकारी ही वो धुरी है जिसके इर्द-गिर्द पीड़ित महिला की मदद और न्याय का पूरा मामला घूमता है। लेकिन गोवा में वर्ष 2007 से ये अत्यंत महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर बीडीओ संभाल रहे हैं…
  • Janpahal
    रौनक छाबड़ा
    ई-श्रम पोर्टल में ‘गड़बड़ियों’ से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के रजिस्ट्रेशन-प्रक्रिया पर असर
    22 Sep 2021
    ट्रेड यूनियनों का कहना है कि यह पोर्टल “बड़ी संख्या में ट्रैफिक को संभालने” की क्षमताओं से लैस नहीं है और इसमें कुछ पेशागत श्रेणियां-मसलन ‘घरेलू-आधारित’ और ‘गिग एवं प्लेटफार्म’ कामगारों का उल्लेख-भी…
  • MANDLA
    रूबी सरकार
    मध्य प्रदेश: 22% आबादी वाले आदिवासी बार-बार विस्थापित होने को क्यों हैं मजबूर
    22 Sep 2021
    मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या में से 22 फीसदी आबादी आदिवासियों की है, 230 विधानसभा सीटों में से 84 पर इनका प्रभाव है, बावजूद इसके वे बार-बार विस्थापित होने को अभिशप्त हैं। प्रदेश में 11 नए अभ्यारण्यों…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन के 300 दिन, सरकार किसानों की मांग पर चर्चा को भी तैयार नहीं
    22 Sep 2021
    किसान आंदोलन रोज नए आयाम गढ़ रहा है और अपने भविष्य के योजनाओ को और मज़बूती से रख रहा है। अब देश के अलग अलग राज्यों में किसानों के समर्थन में पंचायत/सभाएं और बैठकें हो रही हैं। और 27 सितंबर को भारत बंद…
  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License